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Category: Crime

कांग्रेस सीजेआई पर कीचड उछाल कर भागने के फ़िराक में तो नहीं

[नई दिल्ली]कांग्रेस सीजेआई पर कीचड उछाल कर भागने के फ़िराक में तो नहीं
कांग्रेस आज कल आप पार्टी के सिद्धांत पर चलते हुए कीचड उछाल कर भाग रही है
अच्छा होता कांग्रेस आप के डाउन फाल के कारणों को समझ लेती और श्रीमती इंदिरा गाँधी
की सत्ता में वापिसी के इतिहास को भी पढ़ लेती |पुरानी कहावत हे के काठ की हांडी एक बार ही अंगीठी पर चढ़ती है
लेकिन सियासतदां आज कल एक ही टूटी फूटी हांडी कोबार बार प्रयोग कर रहे हैं|इससे कुछ समय के लिए शोर तो मच जाता है मगर
थाली खाली ही रह जाती है | कांग्रेस कीचड उछालने के दुष्परिणामों को आत्मसात करने के बजाय जस्टिस लोया केस में मुंह की खाये खिसियानी बिल्ली की तरह सी जे आई को ही नौंचने के लिए महाभियोग लेकर आ गई है | संसद में बहुमत नहीं है +आरोपों में दम नहीं है +जनता सहयोग नहीं है फिर भी यह महाभियोग का कीचड उछाला जा रहा है | मालूम हो के कांग्रेस की इस मायने में गुरु “आप” पार्टीने महाभियोग प्रस्ताव से किनारा कर लिया है |
देश के प्रधान न्यायाधीश को पद से हटाने के लिये उनके खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव का यह भले ही पहला मामला हो, लेकिन इसके पहले उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों के खिलाफ इस तरह की कार्यवाही चलायी जा चुकी है। सभी मामलों में महाभियोग को अंतिम चरण तक पहुँचाने में असफलता ही हाथ लगी है |
प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा के खिलाफ दुर्व्यवहार और पद के दुरुपयोग के आरोप में कांग्रेस सहित अन्य विपक्षी दलों की ओर से आज राज्यसभा के सभापति एम वेंकैया नायडू को महाभियोग प्रस्ताव का नोटिस सौंपा है।
आजाद भारत में पहली बार किसी न्यायाधीश को पद से हटाने की कार्यवाही
मई 1993 में प्रधानमंत्री पी वी नरसिंह राव के कार्यकाल में हुयी थी। उस समय उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश वी रामास्वामी के खिलाफ लोकसभा में महाभियोग प्रस्ताव पेश किया गया था। उनके खिलाफ 1990 में पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के पद पर रहते हुये भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों के आधार पर पद से हटाने के लिये महाभियोग प्रस्ताव पेश किया गया था। हालांकि यह प्रस्ताव लोकसभा में ही पारित नहीं हो सका था।
साल 2011 में कलकत्ता उच्च न्यायालय के न्यायाधीश सौमित्र सेन के खिलाफ ऐसा ही प्रस्ताव राज्यसभा सदस्यों ने पेश किया था। इस मामले में उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति बी सुधाकर रेड्डी की अध्यक्षता वाली जांच समिति ने उन्हें अमानत में खयानत का दोषी पाया था। जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर ही उन्हें कदाचार के आरोप में पद से हटाने के लिये पेश प्रस्ताव को राज्यसभा ने 18 अगस्त, 2011 को पारित कर किया। इस प्रस्ताव पर लोकसभा में बहस शुरू होने से पहले ही न्यायमूर्ति सेन ने एक सितंबर, 2011 को अपने पद इस्तीफा दे दिया। हालांकि उन्होंने राष्ट्रपति को भेजे त्यागपत्र में कहा था, ‘‘मैं किसी भी तरह के भ्रष्टाचार का दोषी नहीं हूं।’’
कर्नाटक उच्च न्यायालय के मुख्य न्यााधीश पी डी दिनाकरण पर भी पद का दुरूपयोग करके जमीन हथियाने और बेशुमार संपत्ति अर्जित करने जैसे कदाचार के आरोप लगे थे। इस मामले में भी राज्यसभा के ही सदस्यों ने उन्हें पद से हटाने के लिये कार्यवाही हेतु याचिका दी थी। इस मामले में काफी दांव पेंच अपनाये गये।
न्यायमूर्ति दिनाकरण ने जनवरी, 2010 में गठित जांच समिति के एक आदेश को उच्चतम न्यायालय में चुनौती भी दी। बाद में अगस्त 2010 में सिक्किम उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किये गये न्यायमूर्ति दिनाकरण ने इसमें सफलता नहीं मिलने पर 29 जुलाई, 2011 को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। इस तरह उन्हें महाभियोग की प्रक्रिया के जरिये पद से हटाने का मामला वहीं खत्म हो गया।
तेलंगाना और आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय के न्यायाधीश सी वी नागार्जुन रेड्डी और गुजरात उच्च न्यायालय के न्यायाधीश जे बी पार्दीवाला के खिलाफ भी महाभियोग की कार्यवाही के लिये राज्यसभा में प्रतिवेदन दिये गये। न्यायमूर्ति पार्दीवाला के खिलाफ तो उनके 18 दिसंबर, 2015 के एक फैसले में आरक्षण के संदर्भ में की गयी टिप्पणियों को लेकर यह प्रस्ताव दिया गया था। लेकिन मामले के तूल पकड़ते ही न्यायमूर्ति पार्दीवाला ने 19 दिसंबर को इन टिप्पणियों को फैसले से निकाल दिया था।
मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के न्यायाधीश एस के गंगले के खिलाफ वर्ष 2015 में एक महिला न्यायाधीश के यौन उत्पीडन के आरोप में राज्यसभा के सदस्यों ने महाभियोग प्रस्ताव का नोटिस सभापति को दिया था। इस प्रतिवेदन के आधार पर न्यायाधीश जांच कानून के प्रावधान के अनुरूप समिति गठित होने के बावजूद न्यायमूर्ति गंगले ने इस्तीफा देने की बजाय जांच का सामना करना उचित समझा। दो साल तक चली जांच में यौन उत्पीडन का एक भी आरोप साबित नहीं हो सकने के कारण महाभियोग प्रस्ताव सदन में पेश नहीं हो सका

सिद्धू साहिब पहले सो रहे थे क्या ?

सिद्धू साहिब पहले सो रहे थे क्या”?
पंजाब के जीरकपुर के पीरमुछल्ला में एक अवैध बिल्डिंग के खिलाफ
अनेकों शिकायतें दर्ज करने के बावजूद जब कार्यवाही नहीं हुई तो
रिहाईशी बिल्डिंग भर गई और फिर भरभरा कर गिर गई ,इससे सत्तारूढ़ कांग्रेस की साख को भी झटका लगा|
इस पर लोकभलाई का वास्ता देते हुए लोकल बॉडी मिनिस्टर नवजोत सिंह सिद्धू ने १९ अप्रैल की रात को पूरी बिल्डिंग ही सील करवा दी
अब उस बिल्डिंग में रहने वाले बेघर हो रहे लगभग ५० परिवारों ने पूछ ही लिया “सिद्धू साहिब पहले सो रहे थे क्या?
प्राप्त जानकारी के अनुसार बिल्डिंग बनाने वाला पुष्प एम्पायर अकाली दल से वाबस्ता है जबकि शिकायत करता स्थानीय कांग्रेसी नेता है |जिसकी पुकार पर सिद्धू दौड़े चले आये लेकिन पीड़ितों के दर्द सुलझाने के बजाय बिल्डिंग ही सील करा गए

Sidhu Gets Case Regd Against “Pushp Empire”

[Chd,Pb] Sidhu Had to Come Himself To Get Case Registered Against Builder
The Local Government Minister, Punjab, Navjot Singh Sidhu paid a visit to the zirakpur police station and got the case registered against the builders responsible for construction of an illegal building. The minister handed over all the documents pertaining to the building to SSP Mohali Kuldeep Chahal.
The minister interacting with the mediapersons on the spot said that out of the 6 collapsed buildings (No. 139 to 144) the licence of 5 buildings had expired in October 2017 while that of the remaining building expired on 31st March 2018 He asked the SSP to register a case against the builder Pushp Empire who constructed these buildings.
4 member committee has been formed headed by the Director of the department which has been directed to submit its report in 7 days. The committee also includes Chief Engineer, Town Planner and Executive Officer of the Municipal Council Zirakpur.
Sidhu was accompanied by the Director Local Government Mr. Karnesh Sharma, SSP Kuldeep Chahal, SDM Derabassi Paramjit Singh, senior congress leader Deepinder Singh Dhillon and Executive Officer of the Municipal Council Manbir Singh.

कैप्टेन+राजनाथ में मुलाकात के बाद राहुल ने केबिनेट विस्तार लिस्ट रिजेक्ट की

झल्ले दी झल्लियाँ गल्लां

पंजाबी कांग्रेस चेयर लीडर

औए झल्लेया ये क्या हो रहा है? यारा ये राहुल गाँधी ने तो हसाड़े मंसूबों पर पानी फेर कर रख दिया | हसाड़े जुझारू कैप्टेन साहब ने केबिनेट विस्तार के लिए लिस्ट सौंपी लेकिन राहुल ने उसे सिरे से ही नकार दिया |अब हसाड़े जैसे कार्यकर्ताओं का क्या होगा?

कैप्टेन+राजनाथ में मुलाकात बाद राहुल ने के. विस्तार लिस्ट रिजेक्ट की

कैप्टेन+राजनाथ में मुलाकात बाद राहुल ने के. विस्तार लिस्ट रिजेक्ट की


झल्ला

भापा जी १ आपजी की चिंता जायज है |लेकिन इस यक्ष प्रश्न का उत्तर प्राथनीय है के सी एम कैप्टेन अमरिंदर सिंह की लिस्ट के रिजेक्ट होंने के बाद कैप्टेन केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह से मिले? या
फिर उनकी इस बैठक के पश्चात् राहुल ने लिस्ट रिजेक्ट की??

योगी जी! नॉएडा में बिल्डरों ने अभी भी ढेरों किन्तु परन्तु लगा रखे हैं

झल्ले दी झल्लियाँ गल्लां

भाजपाई चीयर लीडर

औए झल्लेया मुबारकां ! अब तो नॉएडा के एक लाख निवेशकों को उनके लंबित मकान मिल जाने हैं |हसाड़े होनहार मुख्य मंत्री योगी आदित्य नाथ के भरसक प्रयासों से क्रेडाई वाले ५० हजार के बजाय एक लाख मकान देने को तैयार हो गए हैं |अब तो नॉएडा का स्थापना दिवस बन जाना है यादगार दिवस |

झल्ला

औ मेरे चतुर सेठ जी !पांच हजार फ्लैटों से बात अब एक लाख तक पहुँच चुकी है लेकिन इन बिल्डरों ने भी अनेकों किन्तु परन्तु लगा रखे हैं |वैसे बुजुर्गों का कहना है,
मन विच दूने ,
मन विच तीने,
मन विच रह गए अद्धे ,
अक्लमंद वोही कहलाया
जिस वेच पल्ले नाल बधें

फ्लाइट केंसिल करने पर रु २० हजार मुआवजा ,एयरलाइन्स की आनाकानी

[नई दिल्ली] फ्लाइट केंसिल करने पर एयर लाइन्स द्वारा यात्री को रु २० हजार मुआवजा देना होगा लेकिन दोषी एयरलाइन्स कर रही हैं आनाकानी| गौरतलब हे के अपने फायदे के लिए इंडिगो +जेट एयर+ स्पाईस जेट आदि एयर लाइन्स द्वारा आये दिन फ्लाइट्स में देरी की जाती है|कनेक्टिंग फ्लाइट्स केंसिल कर दी जाती है और यात्रियों को कोई मुआवजा भी नहीं दिया जाता |इसी के फलस्वरूप डी जी सी ऐ ने यात्रियों के कष्ट देने वाली एयरलाइन्स पर नकेल डालने के लिए मसौदा तैयार किया है |अब कनेक्टिंग फ्लाइट केंसिल होने पर २० हजार रु के मुआवजे का प्रावधान होगा |इसके जवाब में एयरलाइन्स ने किराया बढ़ाने की धमकी दी है

Maneka Gives a Call For Retraining Against Sexual Offences

[New Delhi] Maneka Gives a Call For Retraining Against Sexual Offences
In a letter addressed to Chief Ministers of all the States/UTs, Smt. Maneka Sanjay Gandhi, Union Minister for Women and Child Development has outlined various steps to be taken by the States/UTs in preventing and curbing the crimes against women and children. Some of the steps mentioned in the letter are:
All police officers should be re-trained on various aspects of sexual offences particularly those related to collection and preservation of evidence.
Instructions may be issued to all police officers that utmost priority is to be given to complete the investigation of cases of sexual offences against children strictly as per the timelines of Law.
State Governments must take strict action against those police officers who are found to be obstructing the investigation or colluding with the perpetrators of such cases.
A quick and timely professional investigation is the only method in which a potential offender can be deterred but this can be done only by the states as the police department is the state subject.
Forming a special cell only for sexual offences or specially for sexual offences on children, would be a significant step in this regard.
The Women and Child Development Minister offered help to State Governments in establishing Forensic Laboratories in states which can be used for forensic analysis of evidence in the investigation of sexual offences.
The WCD Minister has requested the states to generate awareness among the children in using the e-box set up under POCSO with child-help line number 1098. The Minister also highlighted that till date 175 One stop centres for women affected by violence have been set up by the Ministry of Women and Child Development. One Stop Centres are to help those women who have no access to either police or medical facilities or are not able to visit a police station in times of distress.
File photo

Constable & HG Trapped with Bribe @Rs 10K

[Chd,Pb]Constable & HG Trapped with Bribe @Rs 10K
Punjab Vigilance Bureau nabbed two police officials red handed while accepting bribe of Rs 10,000.
Constable Amritpal Singh and home guard Sukhvir Singh posted at Police Station Phul, Bathinda were nabbed red handed on the complaint of Jagsir Singh of village Dhingar in Bathinda district. As per complainant accused police officials were demanding Rs 12,000 to furnish report for his passport verification.
Munshi Baldev Singh constable was also included as an accused.

Patwari’s Asstt Trapped With Bribe @Rs 8K

[Chd,Pb]Patwari’s Asstt Trapped With Bribe @Rs 8 K
Punjab Vigilance Bureau enriched its score board by trapping asstt of revenue patwari in Patiala district with bribe of Rs. 8000.
Kirpal Singh alias Kala, assistant of Patwari Rajinder Kumar of Patiala district was nabbed on a complaint from Ramneek Gupta of Kartar Colony in Patiala city.
Patwari, Kanugo and a private person working as assistant of Patwari were demanding Rs. 8,000 for mutation of his land.
Patwari Rajinder Kumar and Kanugo Mangat Ram were also booked as an accused in this case.

सिद्धू के खिलाफ पार्किंग ठेकेदार को मारने के केस में एससी का फैंसला सुरक्षित

[चंडीगढ़,दिल्ली] सिद्धू के खिलाफ पार्किंग ठेकेदार को मारने के केस में एससी का फैंसला सुरक्षित |सुप्रीम कोर्ट ने नवजोत सिंह सिद्धू के खिलाफ एक पार्किंग ठेकेदार को मारने के केस में अपना फैंसला सुरक्षित रख लिया है|३० साल पुराने इस अपराध में निचली अदालत ने सिद्धू को आरोपमुक्त कर दिया था लेकिन हाई कोर्ट ने आरोपी को गैरइरादतन हत्या का दोषी करार दे दिया और ३ वर्ष की सजा सुनाई थी |सिद्धू ने अब सुप्रीम कोर्ट में हाई कोर्ट के फैंसले को चुनौती दी है|
२७ दिसंबर १९८८ को पटिआला में ६५ वर्षीय गुरनाम सिंह को कार पार्किंग विवाद में आवेश में आकर सिद्धू ने मुक्का मार कर गिरा दिया था जिसके पश्चात् उसकी मृत्यु हो गई थी |सिद्धू वर्तमान में पंजाब में कांग्रेस की सरकार के लोकल बॉडी मिनिस्टर हैं