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Category: Economy

आर्थिक नीतिओं को कांग्रेस ने वरदहस्त प्रदान किया

कांग्रेस वर्किंग कमेटी की बैठक


:कांग्रेस कार्य समिति (सीडब्ल्यूसी) ने आज मंगलवार को केंद्र सरकार आर्थिक नीतिओं का समर्थन करते हुए कहा कि डगमगाती अर्थव्ययवस्था को पटरी पर लाने और रुपये के गिरते मूल्य को देखते हुए ऐसा करना आवश्यक था। सीडब्ल्यूसी ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की नकारात्मक भूमिका के लिए उसकी खिंचाई भी की। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने मंगलवार को सीडब्ल्यूसी की बैठक में उनकी पार्टी के नेतृत्व वाले संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) से टी एम् सी के निकल जाने पर कहा कि इससे उनकी सरकार के लिए कोई संकट पैदा नहीं हुआ है।
बैठक के बाद कांग्रेस महासचिव जनार्दन द्विवेदी ने संवाददाताओं को बैठक की छनी हुई गतिविधों से अवगत कराया|,उन्होंने बताया कि कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि अर्थव्यवस्था में सुधार के लिए यह जरूरी था मंत्री पद की लाईन में लगे श्री द्विवेदी ने पूरे मामले में , विपक्ष की भूमिका को नकारात्मक भूमिका बताया श्रीमति सोनिया के आवास दस जनपथ पर आहत इस कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक के दौरान कांग्रेस अध्‍यक्ष सोनिया गांधी ने भाजपा को ‘नकारात्मक राजनीति’ करने को लेकर आड़े हाथ लिया और विपक्षी पार्टी से जिम्मेदार भूमिका निभाने को कहा। सोनिया ने सरकार को किसी तरह के खतरे की आशंका को सिरे से खारिज कर दिया। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के आवास पर करीब पौने दो घंटे चली सीडब्ल्यूसी की बैठक में आर्थिक सुधारों और वर्तमान राजनीतिक स्थिति पर चर्चा की गई। सोनिया गांधी ने शुरूआती संबोधन में कहा कि आर्थिक सुधार जरूरी कदम है और सरकार ने उस दिशा में पहल की है। कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि मुख्य विपक्षी दल भाजपा की भूमिका नकारात्मक है और उन्हें जिम्मेदार विपक्ष की भूमिका निभानी चाहिए जैसा पूर्व में कांग्रेस ने निभाया था। आर्थिक सुधारों के मसले पर सोनिया ने खुलकर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का समर्थन किया। श्रीमति गाँधी की अध्यक्षता में हुई सीडब्ल्यूसी की बैठक में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह व केंद्रीय वित्त मंत्री पी. चिदम्बरम सहित ३० सदस्य शामिल हुए और २१ ने सक्रिय भागेदारी निभाई । वित्त मंत्री पी चिदम्बरम ने सीडब्ल्यूसी को आर्थिक सुधारों की आवश्यकता के सम्बंध में बताया। उन्होंने भारतीय अर्थव्यवस्था को वैश्विक आर्थिक संकट से उबारने के लिए आवश्यक तीन प्रमुख कदमों की जानकारी दी। द्विवेदी के मुताबिक चिदम्बरम ने कहा कि

[१] रुपये का मूल्य घटने से रोकने व अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए [अ] अधिक विदेशी निवेश,[आ] घरेलू उत्पादन बढ़ाने व[ई] सब्सिडी में कमी किए जाने की आवश्यकता है।उन्होंने बताया कि सरकार रुपये के घटते मूल्य व बढ़ती मुद्रास्फीति से चिंतित है। वैश्विक आर्थिक संकट भारतीय अर्थव्यवस्था को प्रभावित न करे इसलिए आर्थिक सुधारों की आवश्यकता थी।

श्रीमति सोनिया ने देश में जुलाई में हुई साम्प्रदायिक हिंसा पर भी चिंता जतायी।लेकिन इसके साथ ही वहां सब कुछ सामान्य हो जाने पर संतोष भी व्यक्त किया| असाम से फ़ैली हिंसा में 97 लोग मारे गए थे जबकि 4.8 लाख राहत शिविरों में रहने को मजबूर हैं। बैठक में दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित को विशेष तौर पर बुलाया गया था। बैठक के बाद कोई प्रस्ताव पारित नहीं हुआ लेकिन सोनिया गांधी के संबोधन से यह पूरी तरह से स्पष्ट हो गया था कि पार्टी सरकार के आर्थिक सुधार कार्यक्रम के साथ है| सीडब्ल्यूसी की बैठक में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, वित्त मंत्री पी चिदंबरम, रक्षा मंत्री एके एंटनी, कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी समेत 30 सदस्य मौजूद थे। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने सीडब्ल्यूसी से कहा कि सरकार के किसी कार्य में कोई कमी नहीं आएगी तथा गरीबों एवं समाज के कमजोर वर्ग के लोगों के कल्याण के लिए कार्य जारी रहेंगे। आम आदमी और विकास के बारे में कांग्रेस की नीति जारी रहेगी।

उधर बी जे पी ने भी कांग्रेस द्वारा लगाये गए नकारत्मक भूमिका वाले आरोप का उतर देने में देर नहीं लगाई| प्रवक्ता प्रकाश जावडेकर ने कहा कि महंगाई बढाने वाले सुधारों के प्रति उनकी पार्टी की भूमिका नकारत्मक ही रहेगी|

केन्द्रीय कर्मिओं को एक जुलाई से ७% महंगाई भत्ता

केंद्र सरकार के कर्मियों और पेंशनरों को राहत देते हुए सरकार ने ७% डी ऐ [महंगी भत्ता] एनाउंस कर दिया है| सात फीसदी की इस बढ़ोतरी के बाद अब केंद्रीय कर्मचारियों का डीए बढ़कर मूल वेतन का ६५% से बढ कर 72 % हो गया है। 50 लाख से ज्यादा कर्मचारियों और लगभग 30 लाख पेंशन धारकों को कैबिनेट के इस फैसले का लाभ मिलेगा। बढ़ा हुआ महंगाई भत्ता इस साल एक एक जुलाई से होगा जिसका एरियर भुगतान त्योहारों से पहले हो जाएगा | इसके पूर्व मार्च 2012 में भी डीए में इतनी ही बढ़ोतरी की गई थी। एक जनवरी 2012 से लागू इस फैसले के बाद से केंद्रीय कर्मियों को मूल वेतन का 65 फीसदी डीए मिल रहा था।पिछले दिनों डी ऐ की घोषणा की गई थी मगर किन्ही कारणों

Govt has announced 7% D A w e f 1/7/2012

Govt has announced 7% D A w e f 1/7/2012

से उसे टाल दिया गया था|

डीजल पर बदनामी केंद्र की और फायदा राज्य सरकारों का

झल्ले दी झल्लियाँ गल्लां

एक आम उपभोक्ता

ओये झल्लेया माननीय मुलायम सिंह यादव जी ने ये क्या खटराग मचा रखा है|एक तरफ तो महंगाई+ऍफ़ डी आई का विरोध करने को सडकों पर उतर रहे हैं और दूसरी तरफ केंद्र सरकार से सपोर्ट विड्रा भी नहीं कर रहे |कहते हैं की विरोध करेंगे थोड़ी देर के बाद कहते हैं कि सपोर्ट विड्रा नहीं करेंगें| इनकी इस कभी हाँ और कभी ना में हसाडी उम्र ही ना बीत जाए| ओये जब तक खुल के सामने नहीं आएंगे तब तक कैसे पी एम् की रेस में शामिल होंगें|

झल्ला

ओये भोले नादाँ जी ये सारा पैसे का खेल है|बिना चश्मे के ही दिख रहा है|आप जरा सा दिमाग पर बोझ डाल कर फ्लेशबेक में जाओ और देखो कि माननीय मुलायम सिंह यादव जी की पार्टी ने चुनावों के दौरान अपनी सायकिल चलाई थी तब उस सायकिल के करियर पर लादे चुनावी घोषणा पत्र में उन्होंने पेट्रो पदार्थों पर लिए जा रहे वेट की दरों को देश के दूसरे राज्यों के बराबर करने का भी आश्वासन डेकोरेट किया हुआ था|अब सरकार को छह महीने से ज्यादा हो गए मगर उस बराबरी के आश्वासन के ऊपर जम रही उपेक्षा की धूल को हँटाने के विषय में कोई डस्टर[पोंछा] उठाने की बात ही नहीं कर रहा|
अब आप ही बताओ कि उत्तर प्रदेश में डीजल पर केवल १७.२३%वेट है|जबकि [१] पंजाब ९.०७% [२] हरियाणा में ९.२४%[3]पड़ोसी दिल्ली में १२.५% और सबसे महंगे बिहार में भी केवल १६% ही है|
अब डीजल की कीमतें बढाने से प्रदेश को ८६ पैसे लीटर प्रतिदिन की अतिरिक्त आय हो रही है|यानि सात लाख+किलोलीटर की बिक्री वाले हसाड़े प्रदेश को हर महीने २ करोड़ रुपयों का फायदा हो रहा है|
अब केंद्र को बदनाम करके भी खुद को फायदा मिले तो कौन सरकार को गिरा कर कुल्हाड़ी पर अपने पावँ मारेगा|इसीलिए सबसे बढिया है कि केंद्र को बदनाम करो और खुद का फायदा करते चलो क्यों ठीक है न ठीक

रक्षा छेत्र में निवेश को आने दो :अरुण शौरी

पूर्व केन्द्रीय मंत्री+ वरिष्ठ पत्रकार और भाजपा लीडर अरुण शौरी ने आज आर्थिक स्थिति को सुद्र्ड करने के लिए डिफेंस में प्रोडक्शन को बढावा देने के लिए निजी पूंजी निवेश को इजाज़त देने का सुझाव दिया|एक निजी चेनल पर एक वरिष्ठ एंकर के प्रश्नों का जवाब देते हुए श्री शौरी ने सुझाव दिया किया कि डी आर डी ओ फ़िलहाल भारतीय रक्षा सेवाओं के लिए आवश्यक सामान को मुहैय्या करवाने में सक्षम नहीं है |जी डी १२% से २% रह गई है|इससे डिफेंस पर भी असर पड़ता है|ऐसे में डिफेंस सेक्टर में प्रोडक्शन के लिए निजी पूंजी को आने देना चाहिए|इससे आर्थिक स्थिति सुधरेगी| प्रोडक्शन बढेगा+पूंजी बढेगी और नौकरियां भी बढेंगी|उन्होंने बताया कि उनके मंत्रीमंडल के रक्षा मंत्री जार्ज फर्नांडीज से लेकर वर्तमान ऐ के एंटोनी तक कहते आ रहे हैं कि इस छेत्र में पूँजी निवेश को देखेंगे मगर अभी तक कुछ नहीं हुआ|उन्होंने तत्काल रक्षा छेत्र में प्रोडक्शन के लिए पूंजी निवेश को ऐलाओ किये जाने पर जोर दिया

ऍफ़ डी आई के एन डी ऐ में विरोधी रहे शौरी ने मन मोहन की नीतिओं का समर्थन किया

senior Journo+ex minister =B J P Leader Arun Shourie

अपनी एन डी ऐ की सरकार में ऍफ़ डी आई के कांग्रेसी विरोध में सरेंडर करने वाले पूर्व कामर्स & इडस्ट्रीज मिनिस्टर अरुण शौरी ने अब प्रधान मंत्री डाक्टर मन मोहन सिंह के सुधारों का खुल कर समर्थन किया है| इसके लिए भाजपा की पार्टी लाइन से बाहर आकर भाजपा की बंद और बहिष्कार की नीति की भी आलोचना की है|
डीजल कीमतों में वृद्धि के मुद्दे पर श्री शौरी ने अपनी ही पार्टी बीजेपी से अलग रुख इख्तियार कर लिया है| पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा कि खुदरा किराना में विदेशी निवेश आने से किसी को न कोई लाभ होगा और नाही किसी को हानि ही होगी|एविएशन में एफडीआई से गिनती की तीन या चार एयर लाइंस को ही असर पडेगा|। लोगों को इससे ना तो बहुत नुकसान होगा और न ही कंपनियों को बहुत फायदा होगा लेकिन बीजेपी नेता श्री शौरी ने डीजल की बढ़ी कीमतों को जायज ठहराया है। और इसे विलंबित एक्शन बताया|
एक निजी टी वी चेनल पर उन्होंने कहा कि७५% तेल बाहर से आयत किया जाता है और यह खत्म होता जा रहा है ऐसे में ऐसे प्रोडक्ट पर निर्भरता भी उचित नहीं है|ऐसे में अगर तेल की कीमतें नहीं बढ़ेंगी तो हालात और खराब हो जाएंगे। उन्होंने कहा कि ऍफ़ डी आई और डीजल की बढ़ी कीमतों के नाम पर संसद न चलने देना गलत है।
श्री शौरी ने निजी तौर पर खुद को डीजल की बढ़ी कीमतों का पक्षधर बताया| उनके अनुसार , घाटा नियंत्रण से बाहर जा चुका था। पेट्रोलियम क्षेत्र से घाटा कम करने की जरूरत बताते हुए शौरी ने सरकार से सुधारों की दिशा में काम करने के लिए अब देर नहीं करने को कहा। शौरी ने कहा कि अच्छी व्यवस्था को टालना देश के लिए खतरनाक हो सकता है।उन्होंने इसके लिए आम राय को भी गैर जरुरी बताया |
बीजेपी से अलग राय रखने वाले और आज कल पार्टी में हाशिये पर आये श्री शौरी ने पूर्व वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा के साथ किसी भी तरह के मतभेद होने से इनकार किया है। शौरी ने कहा कि प्रधानमंत्री के पास असीमित शक्तियां हैं। 8 साल तक पीएम ने कोई कदम नहीं उठाए लेकिन अब जो भी हुआ उसके लिए वो बधाई के पात्र हैं। स्थिति को सुधारने के लिए वरिष्ठ पत्रकार श्री शौरी ने रक्षा उत्पादन में निजी निवेश को जरुरी बताते हुए लोक लुभावन यौज्नाओं पर धन लुटाने का विरोध किया उन्होंने कहा कि तमिल नाडू में मुफ्त टी वी तक दिए गए मगर अगली बार टी वी देने वाली डी एम् के सत्ता से बाहर हो गई
शौरी ने सरकार को कानूनी दांवपेच से बाहर जाकर काम करने की जरूरत बताई। बिजली सेक्टर का उदाहरण देते हुए शौरी ने कहा कि इसमें नरेन्द्र मोदी के गुजरात मॉडल को क्यों नहीं अपनाया जा सकता? गुजरात में बिजली की अधिक कीमत है लेकिन इसकी सेवा भी सबसे बेहतर है।
गौर तलब है कि भाजपा के वरिष्ठ नेता एल के अडवानी ने अपने ब्लॉग में लिखा है कि उनकी सरकार में जब शौरी मंत्री थे तब कांग्रेस के सांसद प्रिय रंजन दास मुंशी ने रिटेल में ऍफ़ डी आई का विरोध किया था तब श्री शौरी ने ही संसद में खड़े होकर यह आश्वासन दिया था कि सरकार स्वयम रिटेल में विदेशी निवेश के खिलाफ है|

भारतीय रुपया मज़बूत हुआ

कारोबारी सप्ताह के पहले ही दिन आज सोमवार को घरेलू बाजारों ने सुस्ती के साथ शुरुआत की है। ।पावर सेक्टर के शेयरों में मामूली वृद्धि दर्ज की गई है |चार माह में रुपये में आज सबसे अधिक मजबूती देखने को मिली है। रुपया आज डालर के मुकाबले 35 पैसे मजबूत हो चुका है | प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स सुबह लगभग 9.30 बजे 57.65 अंकों की गिरावट के साथ 18695.18 पर और निफ्टी भी लगभग इसी समय पर 14.40 अंकों की गिरावट के साथ 5,676.75 पर कारोबार करते देखे गए।
बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) का 30 शेयरों पर आधारित संवेदी सूचकांक सेंसेक्स 3.48 अंकों की तेजी के साथ पर 18,756.31 और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का 50 शेयरों पर आधारित संवेदी सूचकांक निफ्टी 0.8 अंकों की तेजी के साथ 5,691.95 पर दिखाई दिए

अरविन्द केजरीवाल ने दिल्ली में बिजली के बिल फाड़े और जलवाए

टीम अन्ना से अलग हुए अरविन्द केजरीवाल ने आज अपनी राजनीतिक उडान दिखाते हुए अपने लिए लक्की जंतर मंतर पर रविवार को पहला प्रदर्शन किया | राजधानी दिल्ली में बिजली के बढ़े हुए बिलों का मुद्दा उठाते हुए केजरीवाल ने लोगों से अपील की कि वे न तो बिजली बिल भरें और न किसी को अपनी बिजली सप्लाई काटने दें। उन्होंने यहां तक कह दिया कि यह भी एक तरह का सविनय अवज्ञा आंदोलन है। गौरतलब है कि सविनय अवज्ञा आंदोलन आजादी से पहले महात्मा गांधी की अगुवाई में हुआ था जिसमें देशवासियों ने अंग्रेजी सरकार का बनाया हुआ नमक कानून तोड़ा था। इस अवसर पर अनेकों लोगोने अपने बिजली के बिल फाड़े और उनकी होली जलाई |इस नए आह्वान से सभी सकते में दिखाई दे रहे हैं|
रविवार को जंतर मंतर पर टीम केजरीवाल के आह्वान पर लोग जुटे थे इनमे से अधिकतर बढ़े हुए बिजली बिलों से परेशान हैं। वहां मौजूद कई लोगों ने माईक पर केमेरा के सामने बताया कि पांच-पांच, दस-दस गुना ज्यादा बिल आ रहे हैं। केजरीवाल ने कहा कि दिल्ली में बिजली कंपनी मुनाफे में चल रही है। ऐसे में बिजली की दर कम की जानी चाहिए थी। मगर, कांग्रेस सरकार को लोगों की नहीं बल्कि कंपनियों की चिंता है। इसलिए बिजली सस्ती करने के बदले और महंगी कर दी गई। एक तरफ तो सरकार गरीबों की मदद के नाम पर रोजाना सब्सिडी का नारा लगाती है मगर रिक्शे और छोटे मोटे खोके वालों पर चार पांच गुना बिल ठोका गया है|ये सभी आज जंतर मंतर पर बिल लेकर आये थे|

सविनय अवज्ञा आंदोलन

केजरीवाल ने लोगों से अपील की कि इस बार कोई बिजली का बिल न भरे। उन्होंने कहा कि ‘डर यह दिखाया जाता है कि बिजली काट दी जाएगी। लेकिन, अगर बिजली विभाग के लोग किसी की भी बिजली काटने आएं तो पूरा मोहल्ला या पूरी बस्ती मिलकर उनका विरोध करे। अगर पूरे इलाके के लोग एकजुट होकर विरोध करेंगे तो किसी की हिम्मत नहीं है कि आपकी बिजली काट सके।’
अपने इस आह्वान को केजरीवाल ने आजाद भारत का सविनय अवज्ञा आंदोलन करार दिया। उन्होंने कहा कि जब इन बिजली बिलों पर कहीं कोई सुनवाई नहीं हो रही है तो लोगों के पास इसके अलावा कोई चारा नहीं है कि वे बिजली बिलों का भुगतान करने से इनकार कर दें।
टीम अरविन्द के प्रशांत भूषण ने बिजली का घोटाला उजागर करते हुए इसके कानूनी पहलुओं को उजागर किया|कुमार बिश्वास के संचालन में मनीष सिशोदिया ने सरकार पर आरोप लगाया कि अरबों रुपयों की

महंगी सरकारी जमीन का सस्ता आवंटन

सरकारी जमीन इन बिजली कम्पनिओं को मात्र एक रुपया महीना किराये पर दे दी गई गई|इसके अलावा बिजली उत्पादन सस्ता होने के उपरांत भी बिजली की दरें बडाई जा रही है |इसके लिए सरकार+बिजली विभाग और निजी कंपनियों की मिली भगत है|

भाजपा सकते में

अरविन्द केजरीवाल के इस सविनय अवज्ञा आंदोलन से सकते में आये कांग्रेस और भाजपा ने अरविन्द के इस आन्दोलन की आलोचना की है|भाजपा के प्रवक्ता मुख़्तार अब्बास नकवी ने इस आन्दोलन को आपसी फूट से ग्रसित पार्टी का भटकाने वाला आन्दोलन बताया

दिल्ली सरकार की ओपचारिकता

इससे पूर्व बिजली के अनापशनाप बढ़े बिलों का मामला दिल्ली सरकार की कैबिनेट में उठ चुका है| इस माह के पहले सप्ताह में मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने बिजली के बिलों के विषय में आ रही शिकायतों की ऊर्जा मंत्री को जांच के आदेश भी दिए थे कंपनियों को भी बिलों की समीक्षा करने को कहा गया था|

सरकार की उदासीनता

गौरतलब है कि दिल्ली में इंडिया अगेंस्ट करप्शन [आईएसी ] ने बिजली कंपनियों के घाटे के रोने को , सरासर गलत बताया है |.आई ऐ सी का आरोप है कि दिल्ली में बिजली सप्लाई करने वाली कंपनियों रिलायंस और टाटा ने अपने बही-खाते में हेर-फेर करके मुनाफे को घाटे के रूप में दिखा दिया और उसके आधार पर सरकार से बिजली के रेट बढ़ाने की मंजूरी ले ली|.हैरानी की बात यह है कि शीला दीक्षित की सरकार को बिजली कंपनियों के इस खेल की पूरी जानकारी थी. फिर भी सरकार धोखाधड़ी करने वाली कंपनियों पर कार्रवाई करने की बजाए उन्हें शह दे रही है| बिजली सप्लाई की व्यवस्था देखने वाली सरकारी संस्था दिल्ली विद्युत नियामक आयोग (डीईआरसी) के अध्यक्ष बरजिंदर सिंह ने अपनी जांच में कंपनियों की चोरी भी पकड़ी थी. जांच के बाद डीईआरसी इस नतीजे पर पहुंची थी कि बिजली के दाम बढ़ाने की जगह इसमें 18 % की कमी करनी चाहिए| इस आदेश के बाद रिलायंस और टाटा के अधिकारियों ने शीला सरकार से इस आदेश को रोकने की गुहार लगाई थी. शीला दीक्षित ने इन कंपनियों का साथ दिया और बरजिंदर सिंह के रिटायर होते ही ऐसे नए अधिकारी की नियुक्ति की जिसने बिजली के दाम बढ़ाने का आदेश पारित कर दिया.
.निजी कम्पनिओं को बिजली सप्लाई और बिल वसूली का ठेका दिया गया है| इन्हें बेशकीमती सरकारी जमीन कोडिओं के मूल दी गई है | आये दिन बिजली उत्पादन में खर्चा ज्यादा होने की दुहाई देते हुए बिजली की दरें बड़ा दी जाती है| केबिनेट में मुद्दा उठाने और चीफ मिनिस्टर द्वारा दखल देने के बावजूद उपभोक्ता को राहत के बजाये परेशानी ही मिल रही है| अभी भी दिल्ली में कंपनियां अनापशनाप बिजली के बिल भेज रही हैं| इन कम्पनिओं के दावों का आडिट तक नहीं कराया जा रहा |बेशक ये निजी कम्पनियाँ हैं मगर चीफ मिनिस्टर चाहें तो इनका आडिट कैग से कराया जा सकता है और उसके आधार पर बिजली की दरें तय की जा सकती हैं|लेकिन आरोप है कि ऐसा कुछ भी नहीं किया जा रहा |इससे लोगों को खासी परेशानी का सामना करना पड़ा रहा है। बिजली कंपनियों के दफ्तरों में लोगों की कोई सुनवाई नहीं हो रही है और बिल जमा न करने पर उनकी बिजली काटने की धमकी दी जा रही है| मुख्यमंत्री द्वारा दिए गए जांच के आदेश भी बेमानी साबित हो रहे हैं| इससे गरीब उपभोक्ताओं में स्वाभाविक असंतोष व्याप्त हो रहा है जिसे आज अरविन्द केजरीवाल ने सफलता पूर्वक भुना लिया

डाक्टर मन मोहन सिंह ने आज खुल कर विकास की बांसुरी बजाई

प्रधान मंत्री डाक्टर मन मोहन सिंह ने आज खुल कर विकास की बांसुरी बजाई और देश वासिओं को मोहने का प्रयास किया|आज टी वी चेनलों पर सीधे प्रसारण में डाक्टर मन मोहन सिंह ने राष्ट्र के नाम सन्देश दिया| अर्थ शास्त्री होने के बावजूद उन्होंने एक कुशल राजनीतिक की भांति जहां देश के लिए वित्तीय सुधारों को जरुरी बताया वहीं विपक्ष को भी निशाने पर रखा |
पी एम् ने राष्ट्र के नाम हिंदी और अंगरेजी में सन्देश दिया संभवत पहली बार उन्होंने हिंदी में संबोधन किया |चूंकि हिंदी बेल्ट में ज्यादा असर दार तरीके से कल के भारत बंद को सफल बनाया गया है इसीलिए हिंदी में सन्देश देते हुए उन्होंने बंद को अनावश्यक और बहकाने वाला बताया|उन्होंने डीजल+गैस की कीमतों में बढोत्तरी और ऍफ़ डी आई को देश के लिए जरुरी बताते हुए कहा कि
[१] देश में जरुरत का ८०%तेल को विदेशों से आयात किया जाता है| वहां तेल के दामो में बढोत्तरी होने से हमारे देश में उसका असर पड़ना लाजमी है अभी तक सरकार ने कीमतें बड़ा कर आम जनता पर कोई बोझ नहीं पड़ने दिया मगर अब १७/=प्रति लीटर दाम बदने पर केवल ५/= हे बढाये गए है| शेष राशि को सरकार द्वारा व्यय किया जा रहा है|अभी तक देश में डीजल का प्रयोग उद्योगों के अलावा महंगी गाडिओं में भी प्रयोग किया जाता है और महंगी गाड़ियों के लिए डीजल पर सब्सिडी देना उचित नहीं है|
[२]केरोसीन आयल गरीब आदमी द्वारा यूज किया जाता है इसीलिए उस पर कोई दाम नहीं बढाये गए हैं|पेट्रोल पर भी बोझ का किया गया है|
|[३]५०% जनता द्वारा साल में ६ से कम सिलेंडर ही यूज किये जाते हैं इसीलिए हमने ६ सिलेंडरों पर सब्सिडी को जारी रखा है|
[४ ]विदेशी निवेश को खुदरा व्यापार में जरुरी बताते हुए उन्होंने कहा कि ऍफ़ डी आई से किसी को कोई नुक्सान नहीं होगा|इस विषय में लोगों को गुमराह किया जा रहा है| पैसा पेड़ों पर नहीं लगता | विदेशी निवेश जरुरी है जिससे नवजवानों को नौकरियां मिलेंगी|पूरे विश्व में आर्थिक मंदी का दौर चल रहा है|यहाँ तक कि चीन भी इससे अछूता नहीं रहा है|१.४० लाख हज़ार करोड़ का वित्तीय घाटा २ लाख करोड़ तक पहुँचने के कगार पर पहुँच गया इससे विदेशों में साख गिरने का खतरा भी उत्पन्न हो गया |ऐसे में विदेशों से कर्ज़ लेने के लिए अपने खर्चे स्वयम उठाने जरुरी हैं |उन्होंने विदेशों का उदहारण देते हुए बताया कि अनेक देशों में मंदी के असर से जूझने के लिए वहां तनख्वाहें और पेंशन कम की जारही है |ऐसी स्थिति को में देश में नहीं आने दे सकता|
इस अवसर पर उत्साह से भरे पी एम् ने विपक्ष पर भी प्रहार किये उन्होंने कहा कि विरोधिओं द्वारा देश को गुमराह किया जा रहा है|१९९१ में भी यही किया गया था मगर ये झूठे साबित हुए अभी भी ये गलत ही साबित होंगें|उन्होंने कहा कि उनकी सरकार आम आदमी की सरकार है और आम आदमी के विकास और कल्याण के लिए काम करती रहेगी|इसके लिए उन्होंने विशवास+सहयोग और समर्थन का आग्रह किया |
डाक्टर मन मोहन सिंह को बीते दिनों विदेशी और देशी मीडिया द्वारा सायलेंट मोड़+ लेम डक+दब्बू और फिसड्डी कहा जा रहा था लेकिन आज पी एम् ने इन सारे अलंकरणों को अनावश्यक गैर जिम्मेदाराना आरोप और छवि को खराब करने वाले साबित करते हुए पूरे आत्मविशवास से अपने चुनावी घोषणा पत्र को समय सीमा में पूरा करने का वायदा दोहराया

सरकार की मजबूती से शेयर बाज़ार भी उत्साहित

भारत बंद के बावजूद भी ऍफ़ डी आई के लिए अधिसूचना जारी किये जाने से निवेशकों का हौंसला लौटने लगा है| आज सुबह घरेलू बाजारों ने मजबूती के साथ शुरुआत की है।
सेंसेक्स ६२ अंक के साथ १८४११ और निफ्टी 23 अंक लेकर 5577 पर खुले हैं।
आईटी अभी गति नहीं पकड़ पाई है|
केंद्र सरकार ने सभी किन्तु परंतुओं को दरकिनार करते हुए एविएशन, मल्टीब्रैंड में एफडीआई पर नोटिफिकेशन जारी कर दिया है।
इसी के फलस्वरूप लगातार घाटा झेल रही किंगफिशर एयरलाइंस+ स्पाइसजेट और जेट एयरवेज के शेयर्स भी चडते दिखाई दिए हैं।

भारत बंद की सफलता या असफलता का आंकलन शुरू हो गया है

कल के भारत बंद से हुए लाभ या हानि बंद सफल या असफल का आंकलन शुरू हो गया है|भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) से लेकर वामपंथी पार्टियों द्वारा आहूत और व्यापार संघों द्वारा समर्थित इस एक दिवसीय देश व्यापि हड़ताल से सामान्य जनजीवन प्रभावित हुआ और सड़क परिवहन+ रेलवे, फैक्टरी+ खनन, छोटे और बड़े दुकान दार+ शिक्षण संस्थान और अस्पतालों का काम काज अवरुद्ध हुआ।
आर्थिक सामाजिक और राजनीतिक पंडित द्वारा अपने अपने नज़रिए से इसका आंकलन किया जा रहा है | डीजल+रसोई गैस और ऍफ़ डी आई को भी बाँट कर ही देखा जा रहा है| जहां तक आर्थिक हानि का सवाल है

आर्थिक हानि

भारतीय उद्योग परिसंघ [सी आई आई]ने इस देश व्यापि हड़ताल से सवा दो अरब डालर अर्थार्त साड़े बारह हज़ार करोड़ भारतीय रुपयों की हानि का अनुमान लगाया है| जबकि एक अन्य संस्था एसोसिएटेड चैम्बर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (एसोचैम) ने 10 हजार करोड़ के नुकसान का अनुमान व्यक्त किया है|शेयर मार्केट भी सहमा सा ही रहा जोकि शाम तक उभर नहीं पाया |सेंसेक्स १४६ अंक और निफ्टी ४५ अंक लुडक कर बंद हुए| |कनफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (सीएआईटी) के राष्ट्रीय महासचिव प्रवीण खंडेलवाल के अनुसार देश भर के लगभग पांच करोड़ कारोबारी प्रतिष्ठानों में काम काज बंद रहा| श्री खंडेलवाल ने दावा किया है कि देश भर के 25 हजार से अधिक व्यापार संघ हड़ताल में शामिल हुए। |
सूचना एवं प्रसारण मंत्री अम्बिका सोनी ने भी हड़ताल से छोटे व्यापारिओं के पेट पर लात मारे जाने पर चिंता व्यक्त की है| स्वयम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बेनर्जी ने इसे अर्थ नाश की संज्ञा दी है|अब यह कहना अनुचित नहीं होगा कि भारत बंद हुआ और उससे आर्थिक हानि भी हुई \

सरकार पर असर

केंद्रिय वित्त मंत्री पी. चिदम्बरम ने कहा कि हड़ताल से अर्थव्यवस्था प्रभावित हुई है, लेकिन उन्होंने दोहराया कि सरकार सुधार का फैसला वापस लेने पर विचार नहीं कर रही है।
श्री चिदम्बरम ने कहा कि लोकतंत्र में सरकारी नीति का विरोध करने का सबको अधिकार है। लेकिन जिस प्रकार का यह विरोध हैं वह दुखद है| इससे देश को भारी नुकसान होगा।
सम्ब्व्थ इसी नुक्सान की भरपाई के लिए सरकार ने ऍफ़ डी आई के लिए अधिसूचना[नोटिफिकेशन]जारी कर दिया है|

औद्योगिक संगठनों पर असर

इनका कहना है कि सरकार को राजनीकि दबाव में सुधार के फैसले से पीछे नहीं हटना चाहिए।
सीआईआई के अध्यक्ष आदि गोदरेज ने उम्मीद जताई है कि विभिन्न पार्टियां देश में प्रतीक्षित आर्थिक सुधारों के लिए काम करेंगी।
सीआईआई का मानना है कि , सुधार के सरकार के फैसले के सकारात्मक पहलुओं के बारे में आम आदमी को बताया जाना जरूरी है।

राजनीतिक असर

केंद्र सरकार ने इस बंद का मजाक उड़ाया है| कानून मंत्री सलमान खुर्शीद और पी एम् ओ मंत्री नारायण सामी ने अपने पीछे भाग रही मीडिया की भीड़ से व्यंगात्मक शैली में पूछा कहाँ बंद है?आप लोग मौजूद है हम काम कर रहे हैं| गाड़ियां चल रही है फिर बंद कहाँ है?
वित्त मंत्री पी चिदम्बरम ने एक कदम आगे जाते हुए बताया कि सरकार को कोई खतरा नहीं है सरकार के पास पहले भी दोस्त थे अभी भी सरकार को नीतियों पर सहयोग करने वाले नए दोस्त मिल गए हैं।

बंद से बाहर

यदपि कंग्रेस शासित प्रदेशों में भी बंद का असर देखा गया मगर ऍफ़ डी आई के मुद्दे पर केंद्र सरकार को तलाक से पहले सेपरेशन देने वाली टी एम् सी ने बंद से स्वयम को अलग रखा है| सी एम् सुश्री ममता बेनर्जी की दलील हैकी उनका प्रदेश पहले ही कर्जे में डूबा है ऐसे में बंद से और हानि होगी | उन्होंने बंद से बंगाल का नाश होना बताया है|
एन डी ऐ की सहयोगी शिव सेना ने बंद से महाराष्ट्रा को अलग रखने की अपील की थी |इसके लिए गणेश चतुर्थी के उत्सव को कारण बताया गया है|
इस बंद से बेशक यूं पी ऐ को नए दोस्त मिल गए हों मगर दूसरी तरफ भारतीय राजनीति में अलग अलग राग अलापने वाले धुर्र विरोधी धड़े एक ही सुर में सुर मिलाने लग गए हैं|एक अनुमान के अनुसार छोटी बड़ी लगभग ४० पार्टियाँ एक जुट हो गई हैं| सपा और वाम पन्थियो ने बेशक भाजपा से दूरी बनाए रखने का प्रयास किया मगर अपने दल की शासित प्रदेश यूं पी में भाजपा के साथ मिल कर बंद को सफल बना दिया|