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Category: Glamour

फिल्मो से जुड़े विवाद जब तक है जान + सन ऑफ सरदार और ‘खिलाड़ी ७८६ के लिए लक्की होंगें ?

कहा जता है कि विवाद फिल्मों के लिए लकी साबित हो रहे हैं इसीलिए तीन बड़ी फिल्मों से विवाद जुड़ने से इन फिल्मों के रिलीज होने से पहले ही हिट होने की भविष्य वाणी होने लगी है| जब तक है जान’ और ‘सन ऑफ सरदार’ के साथ खिलाड़ी ७८६ को लेकर विवाद जुड़ गए हैं|जब तक है जान’ और ‘सन ऑफ सरदार’ के रिलीज किये जाने के मामले में शह और मात के खेल में अजय देवगन को पहली मात मिल गयी है। अजय देवगन जिस बात को आधार बनाकर कोर्ट गए थे कोर्ट ने उसे खारिज कर दिया है। देवगन ने अपनी याचिका में यशराज फिल्म्स पर हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में अपनी मजबूत स्थिति का फायदा उठाने का आरोप लगाया था। लेकिन इसके साथ ही उन्होंने इस फिल्म के हीरो शाहरुख़ खान पर कोई टिप्पणी करने से मना कर दिया|कॉम्पिटिशन कमिशन ऑफ इंडिया (सीसीआई) ने यशराज फिल्म्स के खिलाफ ऐक्टर अजय देवगन की इस याचिका को खारिज कर दिया है।
वर्तमान में अजय देवगन को सरवाईवल के लिए जल्द ही एक अदद हिट फिल्म चाहिए और उधर यश चोपड़ा की मृत्यु के पश्चात शाहरुख़ खान की भावनाएं भी फिल्म से जुड़ी है|इसीलिए ये दोनों ही अपनी फिल्म पहले और ज्यादा से जयादा स्क्रीन पर रिलीज चाहते हैं| लेकिन इस छेत्र में यश बैनर आगे निकल गया है|
सीसीआई ने याचिका को खारिज करते हुए कहा कि इसका कोई आधार नहीं है। यश जौहर प्रोडक्‍श्‍ान ने अपनी स्थिति का अनुचित लाभ नहीं उठाया है। उन्होंने उतने ही प्रयास किए हैं जितने की कोई भी ग्रुप अपनी फिल्म को प्रमोट करने के लिए करता है। अजय देवगन फिल्म्स प्राइवेट लिमिटेड ने सीसीआई में अपील दायर कर कहा था कि यशराज फिल्म्स ने अपनी मजबूत स्थिति का फायदा उठाते हुए एक्जिबिटर्स से कहा है कि वे शाहरुख खान की ‘जब तक है जान’ के लिए ज्यादा स्क्रीन उपलब्ध कराएं। ये दोनों फिल्मे पंजाबी कल्चर बेस्ड है इसीलिए इनमे दर्शकों के बाँट जाने का खतरा माना जा रहा है| सम्भवत इसीलिए जब तक है जान के वितरक+निर्माता और प्रोमोटर्स कोई रिस्क न लेकर ज्यादा से जयादा स्क्रीन बुक करा रहे है|जाहिर है ऐसे में सन आफ सरदार के लिए स्क्रीन कम पड़ रही हैं|

फिल्मो से जुड़े विवाद जब तक है जान + सन ऑफ सरदार और ‘खिलाड़ी ७८६ के लिए लक्की होंगें ?


यह दोनों ही फिल्में दीवाली के दिन रिलीज हो रही हैं। सन आफ सरदार और जब तक है जान की इस लड़ाई में अब सलमान खान भी कूद पड़े हैं। सलमान और शाहरुख में पुराना छत्तीस का आंकड़ा है|ऐसे में यश राज फिल्म और अजय देवगन फिल्म में खींचतान के चलते सलमान ने भी अजय से अपनी दोस्ती निभाते हुए अजय के कंधे पर बंदूक रख सीधा निशाना शाहरुख पर साधा है।इस पूरी लड़ाई के चलते अजय देवगन ने कहा कि मैं विलन नहीं हूं।अजय देवगन का कहना है कि मुझे मालूम है कि कानूनी नोटिस के बाद मुझे विलन का रोल निभाना पडे़गा। सन आफ सरदार और जब तक है जान के बीच यह निष्पक्ष लड़ाई है। मैं चाहता हूं दोनों फिल्में अच्छा काम करें और ज्यादा से ज्यादा लोग इसे देखें।अक्षय कुमार की बहुप्रतीक्षित फिल्म
‘खिलाड़ी 786’ पर मनसे का विरोध

के एक सीन को फिर से शूट किया जाना था। इसके लिए मुंबई के कॉलेज में फिल्म का सेट लगाया गया। इस सीन में अक्षय कुमार की भूमिका नहीं थे। सूत्रों के अनुसार जिस समय फिल्म की शूटिंग चल रही थी उस समय महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के कार्यकर्ताओं ने आकर शूटिंग रोकने की बात कही। उन्हें इस फिल्म के नाम पर आप‌त्ति है। टाईटल में ७८६ के अंकों को इस्लाम में पाक माना जाता है| शूटिंग में मौजूद लोगों ने विवाद को आगे न बढ़ाते हुए शूटिंग रोक दी। अब यह देखना है कि अक्षय कुमार इस मामले को किस तरह से ‌निपटाते हैं। मनसे के कार्यकर्ता पहले भी अलग-अलग वजहों से कई फिल्मों की शूटिंग रोकते रहे हैं। अक्षय कुमार की यह फिल्म सात दिसंबर को रिलीज हो रही है। इस फिल्‍म के नाम की वजह से अक्षय कुमार को पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने फिल्म के प्रमोशन के लिए आमंत्रित कर रखा है। उनका कहना है कि यह नाम इस्लाम के लिए पाक है।

करवा चौथ के चुम्बक से सुहागनों ने अपने वैवाहिक जीवन को सात जन्मो के लिए सुदढ़ किया

प्रेम+श्रद्धा,+ विश्वास और त्याग का पावपावन पर्व

करवा चौथ के चुम्बक से सुहागनों ने अपने वैवाहिक जीवन को सात जन्मो के लिए सुदढ़ किया

का त्यौहार हर्षोल्लास से मनाया गया |सुबह चार बजे सरगी का प्रसाद ग्रहण करके पूरे दिन भूखी-प्यासी रहकर पत्नियों ने सोलह श्रंगार धारण किये और अपने पति की लंबी उम्र की कामना की
और शाम को विधि विधान से पूजा के चुम्बक से अपने वैवाहिक जीवन को सात जन्मो के लिए सुदढ़ किया| सुहागिनों ने धन धान्य की प्रतीक थालिया घुमा घुमा कर पूजी और रात चन्द्रमा के दर्शन करके जल ग्रहण किया जाता है|
लोक कथाओं के अनुसार शाकप्रस्थपुर वेदधर्मा ब्राह्मण की विवाहिता पुत्री वीरवती ने करवा चौथ का व्रत किया था। नियमानुसार उसे चंद्रोदय के बाद भोजन करना था,परंतु उससे भूख नहीं सही गई और वह व्याकुल हो उठी।
उसके भाइयों से अपनी बहन की व्याकुलता देखी नहीं गई और उन्होंने पीपल की आड़ में आतिशबाजी का सुंदर प्रकाश फैलाकर चंद्रोदय दिखा दिया और वीरवती को भोजन करा दिया।
परिणाम यह हुआ कि उसका पति तत्काल अदृश्य हो गया। अधीर वीरवती ने बारह महीने तक प्रत्येक चतुर्थी को व्रत रखा और करवा चौथ के दिन तपस्या से वीरवती को माँ पार्वती का आशीर्वाद मिला और उसका सुहाग पुनः प्राप्त हो गया। इसके अतिरिक्त एक और लोक कथा है जिसमे यही वीरवती भाइयों के प्रेम के कारण ही रानी से नौकरानी बनती है और फिर इसी व्रत की महिमा से माँ पार्वती को प्रसन्न करती है और गाती है रोली की गोली हो गई गोली की रोली हो गई”अपने गौरव को प्राप्त करती है|
|इस व्रत का नियम इस काव्य में वर्णित है
वीरो कुड़िये कर्वरा सर्व सुहागन कर्वरा
कत्ती न अटेरी न
घूम चरखा फेरी ना
गवांड फेर पाईं ना
सुई च धागा पाईं ना
रुठरा मनाईं ना
सुतडा जगाईं ना
भैन प्यारी वीराँ
चन चड ते पानी पीवां
वे वीरो कुरिए कर्वरा वे सर्व सुहागन कर्वरा

जसपाल भट्टी मेरे द्रोणाचार्य थे

सटीक+ मर्यादित व्यंगों के माध्यम से विसंगतियों के विरुद्ध आवाज़ उठाने वाले जसपाल भट्टी के आकस्मिक निधन से हास्य और व्यंग की दुनिया से जुड़े लोगों को गहरा आघात लगा है|में भी उनमे से एक हूँ|में उन्हें द्रोणाचार्य मानकर एकलव्य बन कर उनसे दूर रह कर उनके स्टाईल में लिखने का प्रयास करता रहा हूँ|

जसपाल भट्टी मेरठ में एक फेशन शो में मुख्य अथिति के रूप में व्यंगों की बौछार करते हुए

जालंधर में पोस्टिंग के दौरान आठवें दशक के मध्य में मुझे दूरदर्शन पर भट्टी जी का उल्टा पुल्टा कार्यक्रम देखने का अवसर मिला |जिसे देख कर और लोगों की तरह में भी प्रभावित हुए बिना नहीं रह पाया | उस समय जालंधर दूरदर्शन पर कोई विशेष कार्यक्रम नहीं आते थे इसीलिए यह उलटा पुल्टा कार्यक्रम आभाव के रेगिस्तान में मनोरंजन का एक झरना लगता था| शायद इसीलिए इसे एक बार देखा तो हमेशा इस कार्यक्रम की इंतेज़ार रहने लगी| विषय की गहरी सोच+उसमे विसंगती तलाश कर +उसे व्यंग के माध्यम से प्रस्तुत करके विषय में हास्य पैदा करने के उनकी अनूठी कला थी इसका में आज भी कायल हूँ| मेरठ आ कर मैंने लिखना जारी रखा मगर मैंने भी भट्टी जी की तरह विसंगतियों को विषय बनाया और उनमे व्यंग का पुट देना शुरू कर दिया|मेरे व्यंग को नाम दिया गया| हिंदी में लिखे इस व्यंग में पंजाबी तड़का लग ही जाता था इस कालम को नाम दिया गया झल्ले दी गल्लां \यह लोक प्रिय हुआ | लगभग २० साल पहले भट्टी जी एक फेशन शो में मुख्य अथिति के रूप में मेरठ आये \उस समय में यह सोच कर हैरान था कि भट्टी जी जैसी शख्सियत का फेशन शो में क्या काम मगर यहाँ भी उन्होंने अपना स्टाईल दिखा कर सबका भरपूर मनोरंजन किया|यूं तो उन्होंने अपने मुख्य अथिति के भाषण में अपने तमाम सीरियलों के नामो को जोड़ा मगर आदतन एक डायलाग भी बोल गए ” लगता है कि अब गली मोहल्लों और गावों में भी फेशन शो हुआ करेंगे” दरअसल उस समय फेशन शो बड़े शहरों में ही हुआ करते थे मेरठ जैसा[ उस समय] छोटा शहर फेशन शो के आयोजकों को आकर्षित करने में सक्षम नहीं था|ऐसे में भट्टी जी को भी आश्चर्य हुआ होगा कि मेरठ में फेशन टेक्नालोजी का स्कूल चलाने वाली श्रीमती मालिक ने इतना बड़ा फेशन शो कैसे आयोजित कर डाला सो उन्होंने फेशन शो की बड़ती लोक प्रियता को निशाना बना ही दिया|

शूद्र फिल्म की रिलीज को लेकर विरोध हुआ , अब फिल्म को नहीं दिखाने पर बवाल हुआ

शुरू शरू में शूद्र फिल्म की रिलीज को लेकर विरोध हुआ था तो अब फिल्म को नहीं दिखाए जाने को लेकर बवाल हो गया | शूद्र दी राइजिंग फिल्म को मेरठ के पी वी एस माल की स्क्रीन २ से यकायक उतार कर बुधवार को चक्रव्यूह प्रदर्शित करने पर माल में हंगामा हो गया| फिल्म के टिकट बेचने के बावजूद फिल्म को बिना किसी घोषणा के उतार लिया गया|

शूद्र फिल्म नहीं दिखाने पर बवाल हुआ


इससे दर्शकों का एक वर्ग ख़ासा नाराज हुआ और वहां हंगामे की स्थिति उत्पन्न हो गई|यह शो सुबह साडे ग्यारह बजे दिखाया जाना था|सिनेमा हाल वालों का कहना था कि बेशक शूद्र फिल्म को केवल मॉल में ही दिखाया जा रहा है मगर बुधवार को अचानक चक्रव्यूह फिल्म रिलीज कर दी गई जिसके कारण यह बदलाव करना पड गया| बिके टिकटों को वापिस लेकर पैसे लौटा दिए गए|

कामेडियन जसपाल भट्टी की अकाल पुरुख ने पावर कर दी कट : सड़क दुर्घटना में निधन

मशहूर कामेडियन जसपाल भट्टी की अकाल पुरुख ने पावर कट कर दी है|एक सड़क दुर्घटना में इनका निधन हो गया है|: हास्य व्यंग के माध्यम से समाज में फ़ैली विसंगतियों को हाई लाईट करने में निपुर्ण मशहूर कॉमेडियन जसपाल भट्टी की एक सड़क हादसे में मौत हो गई है.| हादसा जालंधर के पास शाहकोट में हुआ जहां उनकी कार दुर्घटनाग्रस्त हो गई. भट्टी 57 वर्ष के थे. हादसा गुरुवार तड़के करीब तीन बजे हुआ। भट्टी अपनी पंजाबी फिल्म ‘पावर कट’ के प्रमोशन से लौट रहे थे, तभी उनकी कार दुर्घटनाग्रस्त हो गई। इस पोकर+व्हिसल ब्लोअर की अकाल मृत्यु से देश और समाज को भारी हानि हुई है|जमोस न्यूज परिवार उन्हें श्रधान्जली अर्पित करता है| इस हादसे में जसपाल भट्टी के बेटे जसराज, फिल्म की हिरोइन और पीआरओ नवीन जोशी घायल हो गए। भट्टी का पार्थिव शरीर पास के ही एक अस्पताल में रखा गया है, जबकि उनके बेटे और ऐक्ट्रेस का इलाज चल रहा है।

परिचय

अमृतसर में 3 मार्च 1955 को हुआ था। आठवें दशक में दूरदर्शन पर आने वाले टीवी धारावाहिक ‘उल्टा पुल्टा’ से इनकी पहचान बनी थी। इसके अलावा ‘फ्लॉप शो’ में शानदार अभिनय के बाद बॉलीवुड में उनकी अच्छी खासी पहचान बनी थी। उन्होंने कुल 24 फिल्मों में अभिनय के जादू बिखेरा | इसमें एक फिल्म ‘पावर कट’ 26 अक्टूबर को ही रिलीज होनी है। वे इसी फिल्म के प्रमोशन के लिए जालंधर जा रहे थे।’कुछ ना कहो’,+ ‘तुझे मेरी कसम’+, ‘जानी दुश्मन’,+ ‘कोई मेरे दिल से पूछे’,+ ‘शक्ति : द पावर’,+ ‘ये है जलवा’, +’ इकबाल+हमारा दिल आपके पास है’,+ ‘कारतूस’,+ ‘आ अब लौट चलें’+, ‘जानम समझा करो’+ ‘फ़ना’,+ ‘कुछ मीठा हो जाए+खौफ +काला साम्राज्य ‘में भी उनके अभिनय की काफी तारीफ हुई थी\नोंसेंस क्लब और उसके तत्वधान में नुक्कड़ नाटकों से बेहद प्रसिद्धि मिली|मर्यादित व्यंगों के वोह लोग भी कायल थे जिन पर व्यंग किया गया|

मशहूर कामेडियन जसपाल भट्टी की पावर कट : सड़क दुर्घटना में निधन


नई फिल्म पावर कट

बिजली संकट जैसे अहम मुद्दे को लेकर बनाई फिल्म ‘पावर कट’ 26 अक्टूबर को देश-विदेश में रिलीज होनीथी अमग्र अब इस दुर्घटना के कारण इसमें कुछ विलम्भ हो सकता है|
, इस रोमांटिक कॉमेडी फिल्म में हीरो का नाम करंट है, जबकि हीरोइन का नाम बिजली रखा गया है। फिल्म में बिजली विभाग की उपभोक्ताओं के प्रति रवैया दिखाया गया है, जैसे कि गांव का सरपंच बिजली के कनेक्शन के लिए मारामारा फिरता दिखाया गया है। फिल्म से पावरकॉम को उल्टे झटके लगेंगे, ताकि वह लोगों के मर्म को समझें। श्री भट्टी के पिता चीफ इंजीनियर रहे, वहीं खुद भी उन्होंने बिजली बोर्ड में काम किया, इसलिए वह विभाग की कार्यप्रणाली से पूरी तरह वाकिफ थे । श्री भट्टी ने एक बार कहा कि चार-पांच सालों से हर साल बिजली सरप्लस होने का भरोसा ही मिला है। ऐसे बदतर हालात पंजाब ही नहीं, हरियाणा, यूपी व बिहार में भी हैं। इससे ज्यादा बिजली विभाग की किरकिरी और क्या होगी कि विगत दिवस पूरे भारत में दुनिया का पहला पावर कट लगा। इससे ही फिल्म के तेवर समझे जा सकते हैं|
फिल्म की कहानी लिखने के अलावा इसका निर्देशन भी जसपाल भट्टी ने किया है। संगीत निर्देशक गुरमीत सिंह ने तैयार किया है, जबकि मीका, सुनिधि चौहान, मास्टर सलीम व हुसैनपुरी ने गीतों को आवाज दी है। फिल्म के सिनमैटोग्राफर राजू हैं, जोकि दिल वाले दुलहनिया ले जाएंगे, डर, लम्हे, मां तुझे सलाम जैसी फिल्मों में काम कर चुके हैं।
हास्य कलाकार जसविंदर भट्टी फिल्म में भंडों के रूप में दिखाई देंगे, जबकि उनका बेटा जसराज भट्टी फिल्म के मुख्य कलाकार हैं, उनके साथ सुरीली गौतम बिजली के रूप में दिखेंगी। .

यश चोपड़ा की मौत ने डेंगू की नई कहानी लिख दी है

यश राज चोपड़ा में जब तक जान रही उन्होंने अपनी प्यार मोहब्बत पर आधारित फिल्मो के माध्यम से समाज को दिशा प्रदान करने का काम किया| यह सिलसिला उनके पञ्च तत्व में विलीन

यश चोपड़ा की मौत ने डेंगू की नई कहानी लिख दी है

होने के बाद भी नहीं रुका है| मरने के बाद भी उन्होंने बहस की एक ऐसी चांदनी बिखेरी है जिसकी रौशनी में आदमी और इंसान के जीवन में लगे डेंगू के दाग पर बहस का नया दौर शुरू हो गया है| पिछले कई वर्षों से डेंगू के मच्छर से लोग बीमार होते आ रहे हैं कुछ मौते भी हो रही हैं| इस मामले में देश के साउथ और नार्थ में कोई भेद भाव नहीं रह गया है|पहले तो बड़े बड़े अखबारों में डेंगू से सम्बन्धित दुर्घटना को लेकर छोटा सा स्पेस पर्याप्त समझा जाता था सरकारें भी जन जागृति के नाम पर विज्ञापन पब्लिश करवा कर पल्ला झाड लेती थी |प्रति वर्ष हज़ारों की संख्या में बीमार और सैंकड़ों मौतें दर्ज़ की जाती हैं| सीजन बदलना भी कुदरत का नियम है सीजन के बदलने के बाद सब कुछ सामान्य चलने लगता है| इस सीजन में भी लोग बीमार पड़ रहे हैं मौतें भी हो रही है लेकिन अबकी बार दिल्ली से हेदराबाद तक के अख़बार डेंगू के प्रकोप से भरे पड़े हैं| टी वी चैनल भी प्रमुखता से [निशुल्क]जन जागृती फैला रहे हैं| इससे राजनीतिकों को भी अपना राजनीतिक जहर निकालने का मौका मिल रहा है|
वैसे तो हर साल इस सीजन में डेंगू को लेकर प्लेटलेट्स की कमी डिटेक्ट की जाती रही है और मरीजों में आम पैनिक देखा जाता रहा है \इस वर्ष भी देश में अब तक 17 हजार से अधिक डेंगू के मरीज सामने आ चुके हैं।मगर अब इस दिशा में थोड़ी गंभीरता दिखाई देने लग गई है| इस साल अब तक अकेले मुंबई में 650 + और दिल्ली में ७००+ डेंगू के मामले सामने आ चुके हैं। सोमवार को ही दिल्ली में डेंगू के 33 नए मरीज सामने आ चुके हैं|स्थिति की भयावता इससे आंकी जा सकती है की स्वास्थ्य की रक्षक एम्स में कई डाक्टर भी इसी डेंगू की चपेट में आ चुके हैं |इससे ज्यादा गंभीर यह है की इसके उप निदेशक विनीत चौधरी भी डेंगू की लपेट में आ चुके हैं| इस साल अब तक 100 से अधिक मौते रिकार्ड की जा चुकी हैं| कहने का तात्पर्य है की इन दिनों भी डेंगू बड़ी तेजी से फैल रहा है और इसकी चपेट में लोग आ रहे हैं और व्यवस्था पर प्रश्न चिन्ह लगा रहे हैं|इससे पहले की डेंगू से देश में पैनिक फैले या किसी महामारी की विजय हो हमेशा की तरह मीडिया ने जागरूकता अभियान छेड़ दिया है| कुछ अधिकारी भी इस दिशा में कदम बढ़ाते दिख रहे हैं | मुम्बई में बीएमसी के आला अधिकारी यश चोपड़ा की मौत की समीक्षा करने में जुट गए हैं|लीला वती अस्पताल से चौपडा की मौत के कारण सम्बन्धी रिपोर्ट तलब कर ली गई है| इससे मौत के असल कारण का पता लगाकर नतीजे से स्वास्थ्य मंत्रालय को अवगत कराया जाना है|
अक्तूबर में डेंगू का प्रभाव सबसे अधिक होने के कारण स्वास्थ्य मंत्रालय ने सभी राज्यों को एक बार फिर परामर्श जारी कर कहा है कि वे डेंगू के फैलाव को रोकें और इससे होने वाली हर मौत से केंद्र को अवगत कराएं। राज्यों के साथ-साथ अस्पतालों से भी कहा गया है कि वे डेंगू के मामलों की जानकारी दें ताकि इस समस्या से निपटने के प्रयासों को और तेज किए जाने में मदद मिले।
डेंगू के बारे में एक गलतफहमी यह है कि यह गंदगी भरे इलाकों में ज्यादा होता है लेकिन जारी आंकड़ों के मुताबिक यह पॉश इलाकों में ज्यादा फैल रहा है। मुंबई और दिल्ली में 60 फीसदी से अधिक डेंगू के मामले पॉश कॉलोनियों में सामने आए हैं। इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि डेंगू का मच्छर साफ पानी में ही जन्म लेता है। घर के अंदर लगे मनी प्लांट, फव्वारों, कूलर आदि में भरा पानी इसके पैदा होने के लिए आदर्श जगह होता है। डेंगू का मच्छर 50 मीटर से 200 मीटर तक ही उड़ान भर पाता है इसलिए ज्यादातर मच्छर मरीजों के घर में ही पनपते हैं और पड़ोसियों पर हमला करने की उनकी संभावना बेहद कम होती है।यह कह कर सरकारें बेशक फ़ैल रहे गन्दगी की जिम्मेदारी से पल्ला झाड़
ले मगर बीमारी के लिए दोषी डेंगू अभी भी कायम है और इसकी रोकथाम के लिए आवश्यक अभियान की शुरुआत दूर दूर तक कहीं दिखाई नहीं दे रही|
यश चोपड़ा की मौत के बाद डेंगू का हव्वा खड़ा होना तय है लेकिन

यश चोपड़ा की मौत ने डेंगू की नई कहानी लिख दी है

चिकित्सा विशेषज्ञों की राय के अनुसार इससे आम लोगों को ज्यादा डरने की जरूरत नहीं है क्योंकि जरा सी सावधानियों से डेंगू से पूरी तरह से बचाव संभव है| डेंगू हो भी गया है तो सही वक्त पर सही इलाज से पूरी तरह ठीक भी हुआ जा सकता है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार भारत में डेंगू के एक प्रतिशत से भी कम मामलों में मरीजों की मौत होती है। लेकिन माना जा रहा है कि यश की मौत की जांच की जाएगी। पता चला है कि अब मुम्बई नगर निगम (बीएमसी) इसकी जाच करेगा।
डेंगू के प्रकोप से तिलमिलाई सरकारें एक दूसरे पर दोषारोपण में व्यस्त हो गई हैं|दिल्ली में पिछले वर्ष के मुकाबिले इस वर्ष डेंगू के केस दोगुने दर्ज़ किये जा चुके हैं|डाक्टर ऐ के वालिया ने इसे आउट आफ कन्द्रोल प्रकोप कह कर दाईत्व पूरा कर लिया है| मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल के बिजली आन्दोलन से घिरी हुई शीला दीक्षित डेंगू के लिए मुस्कुराते हुए भाजपा शासित एम् सी डी पर सारा ब्लेम डाल रही हैं|उत्तर प्रदेश के मुख्य मंत्री अखिलेश यादव ने चेतावनी जारी करवा दी है|देश के स्वास्थ्य मंत्री चेन्नई में मीटिंग ले रहे हैं| एक बैठक में स्वास्थ्य मंत्री गुलाम नबी आजाद ने यह कहा कि डेंगू से होने वाली हर एक मौत की जांच की जानी चाहिए। अक्तूबर में डेंगू का प्रभाव सबसे अधिक होने के कारण स्वास्थ्य मंत्रालय ने सभी राज्यों को एक बार फिर परामर्श जारी कर कहा है कि वे डेंगू के फैलाव को रोकें और इससे होने वाली हर मौत से केंद्र को अवगत कराएं। राज्यों के साथ-साथ अस्पतालों से भी कहा गया है कि वे डेंगू के मामलों की जानकारी दें ताकि इस समस्या से निपटने के प्रयासों को और तेज किए जाने में मदद मिले।
फिल्म निदेशक यश चोपड़ा की मौत के बाद अब देश में स्वास्थ्य की रक्षक एजेंसियों को विशेष रूप से डेंगू के प्रकोप के लिए अपना मुह छुपाने के लिए एक दूसरे पर दोष मड़ने के बजाये एक अभियान छेड़ना होगा और पोलियो के तरह घरों में घुस कर डेंगू को मारना होगा |

डेंगू मच्छर ने रोमांस फिल्मो के बादशाह यश राज चोपड़ा को छीन लिया

रोमांस फिल्मो के बेताज बादशाह कहे जाने वाले प्रड्यूसर +डायरेक्टर यश राज चोपड़ा का आज रविवार शाम को मुंबई के लीलावती हॉस्पिटल में निधन हो गया। वह 80 साल के थे। उन्हें डेंगू से पीड़ित होने के चलते १३ अक्टूबर को लीला वती हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। २२ फिल्मो का निर्देशन करके ‘दादा साहब फालके’ पुरस्कार + आठ फिल्मफेयर और एक नेशनल अवार्ड जीतने वाले पद्मश्री यश चोपड़ा के चले जाने से पूरा बॉलीवुड दुखी और हतप्रभ है। इनके परिवार में पत्नी पामेला चोपड़ा, पुत्र आदित्य और उदय हैं। जमोस न्यूज डाट काम परिवार की तरफ से उन्हें भाव भीनी श्रधान्जली|अभी २७ सितम्बर को उन्होंने अपना ८० वां जन्म दिन मनाया था और जब तक है जान फिल्म के बाद निर्देशन के छेत्र से संन्यास लेने की घोषणा भी की थी |ये भी इत्तेफाक ही है कि फिल्म में केवल एक गाने की ही दीवार रह गई थी उसे पार करने के लिए विजय की चांदनी मशाल लेकर उन्हें हर लम्हे एक नए दौर में लेकर जा रहे थी लेकिन ये वक्त बड़ा शक्ति शाली है यह वक्त कभी कभी सभी सिल सिले धूल में ही मिला देता है|

अच्छा तो शाहरुख़ बेटा हम चलते हैं


यश राज चोपड़ा ने सहायक निर्देशक के तौर बॉलीवुड में कैरियर की शुरुआत की थी अपने बड़े भाई बी आर चोपड़ा द्वारा प्रोडियूस फिल्म धूल का फूल (१९५९] से निर्देशन के छेत्र में कदम रखा | इसके बाद उन्होंने हिट फिल्मों की लाइन लगा दी..| यश चोपड़ा ने कुछ दिन पहले ही निर्माणाधीन शाहरुख खान स्टारर ‘जब तक है जान’ के बाद रिटायर होने का ऐलान किया था। 1973 में यश राज फिल्म्स नाम से अपनी प्रॉडक्शन कंपनी खोलने के बाद उन्होंने इंडस्ट्री को न सिर्फ कई हिट फिल्में दीं, बल्कि कई स्टार भी दिए। 1975 में आई उनकी फिल्म दीवार ही थी, जिसने अमिताभ बच्चन को ऐंग्री यंग मैन के तौर पर स्थापित किया था। उन्होंने एक के बाद एक कई हिट फिल्में दीं। 1993 में आई उनकी फिल्म डर से ही शाहरुख खान ने कामयाबी की नई ऊंचाइयों का छुआ।।यश चोपड़ा ने कुछ दिन पहले अपना 80वां जन्म दिन मनाते हुए अपनी रिटायरमेंट अनाउंस कर सभी को हैरान कर दिया था। शाहरुख़ खान को एन दी टी वी पर दिए एक लम्बे इंटरव्यू में उन्होंने कहा था कि ‘जब तक है जान’ उनकी बतौर डायरेक्टर आखिरी फिल्म होगी। लेकिन इस फिल्म के रिलीज होने के पहले ही वह इस दुनिया को छोड़कर चले गए। यह फिल्म 13 नवंबर को रिलीज होने जा रही है।
यश चोपड़ा का जन्म 27 सितंबर 1932 में पार्टीशन से पहले लाहौर में हुआ था.| आठ भाई बहनों में सबसे छौटे थे| परिवार चाहता था कि वे[यश] इंजीनियर बने और लंदन जाने के लिए उनका पासपोर्ट भी तैयार हो चुका था, लेकिन तकदीर को कुछ और ही मंजूर था और वे फिल्म इं‍डस्ट्री से जुड़ गए।यह स्वयम उन्होंने शाहरुख़ खान को दिए इंटरव्यू में स्वीकार की है|
निर्देशक के रूप में यश चोपड़ा की पहली फिल्म थी ‘धूल का फूल'[१९५९ ] इसके बाद उन्होंने ‘वक्त'[१९६५] बनाई जो सुपर हिट गई। यह बॉलीवुड की पहली मल्टी स्टार फिल्म थी।
1973 में यशराज फिल्म प्रोडक्शन शुरू हुआ था और तब उसके बैनर तले बनी पहली फिल्म थी ‘दाग’ [त्रिकोणप्रेम] इसके बाद दीवार[अपराध] (1975), कभी कभी (1976), त्रिशूल (1978), सिलसिला[पुनः त्रिकोण] (1981), मशाल (1984), विजय (1988), चांदनी (1989), लम्हे (1991), डर (1993), दिल तो पागल है (1997), वीरजारा (२००४]और निर्माणाधीन , जब तक है जान | इस फिल्म का एक गाना हिट भी हो गया है|

सैफ और करीना कानूनी और सामाजिक तौर पर सैफीना बने करीना बन गई ट्रिपल के

सैफ और करीना कानूनी और सामाजिक तौर पर सैफीना बने करीना बन गई ट्रिपल के

सैफ अली खान[४२] और करीना कपूर[३२] आज मंगल वार को कानूनी और सामाजिक तौर पर सैफीना बने | करीना कपूर बन गई के के के यानि ट्रिपल के | करीना के पूर्व ब्वॉयफ्रेंड शाहिद कपूर ने करीना और सैफ की शादी के मौके पर दोनों को बधाई दी है। शाहिद ने मीडिया से बात करते हुए यह आशा भी व्यक्त की है कि करीना शादी के बाद भी काम करती रहेंगी क्योंकि वे[करीना] बहुत अच्छी कलाकार हैं। गौरतलब है कि शाहिद कपूर से करीना फिल्म जब वी मेट के दौरान अलग हुई थीं, जिसके बाद वे सैफ अली खान के नजदीक आई थीं।
निकाह के बाद मुंबई के उपनगर बांद्रा के मैरिज रजिस्ट्रार की मौजूदगी में सैफ के घर पर दोनों की कोर्ट मैरिज हुई। शादी के बाद सैफ, करीना और अन्‍य संबंधियों ने घर के बाहर जमा प्रशंसकों का हाथ हिलाकर अभिवादन किया।

अमिताभ बच्चन के जन्म दिन पर नए आए तो बहुत मगर कुछ पुराने अनुपस्थित भी रहे

एक साथ तीन पिडिओं के चहेते अमिताभ बच्चन ने अपना ७० वाँ जन्म दिन मनाया धूम धाम से मनाया सो हमारी तरफ से भी ढेरों बधाईयाँ | ४० साल के फ़िल्मी सफ़र में अमिताभ ने अनेकों बदलावों का सामना किया है| सफलता की अनेक उठती गिरती लहरों में अपना वजूद बनाया है |इस सफ़र में अनेक रिश्ते बने +दोस्त बने तो कई रिश्ते या दोस्त बिगड़ भी गए |जो कभी अमिताभ से खफा थे आज अमिताभ की पार्टी में सपरिवार उपस्थित थे लेकिन जिन लोगों ने कभी अमिताभ को सहयोग दिया सहारा दिया सफलता के लिए सीडी प्रदान की ऐसे लोग पार्टी से नदारद थे अनुपस्थित थे या फिर बुलाये ही नहीं गए थे|
सबसे पहले अमिताभ और गांधी परिवार के रिश्तों की बात की जाये |यह जग जाहिर है कि फिल्मो में करियर शुरू करने और अमिताभ को ऊपर उठाने में कांग्रेस का बहुत बड़ा हाथ रहा है|इमरजेंसी के दौर में तो इनके कहने पर फिल्मो को बैन करके इनकी फिल्मो को रिलीज करवाया जाता था|शोले इसका एक उदहारण हो सकता है|विद्याचरण शुक्ल और संजय गाँधी ने सभी रुकावटों को दर किनार करते हुए अपराध प्रधान मार धाड़ वाली शोले रिलीज करवाई | बाद में यह फिल्म सफलता का इतिहास लिख गई| इसके बाद देश में अपराध प्रधान फिल्मो की लाईन ही लग गई| इनके कांग्रेस से रिश्तों के सम्मोहन में उस समय के सहयोगी कलाकार धर्मेन्द्र+राजेश खन्ना +विनोद खन्ना+शशि कपूर+शत्रुघन सिन्हा+आदि के मुकाबिले इनके रोल्स में जान डाली जाने लगी बड़े बड़े निर्देशक और निर्माता इन पर दावं लगाने लग गए |मल्टी स्टारर फिल्मो की सफलता से लगातार बुलंदियों को छूते चले गए| कांग्रेस के टिकट पर सांसद बनने का अवसर भी मिला |इलाहाबाद से एच एन बहुगुणा को हरा कर कर राजीव गांधी के हाथ भी मजबूत किये|
लेकिन आश्चर्यजनक रूप से जब राजीव और बाद में उनकी विधवा को सहायता की जरुरत थी तब अमिताभ का कंधा शायद कहीं दिखाई नहीं दिया|बोफोर्स के समय तो अमिताभ स्वयम ही पोलिटिक्स छोड़ कर अलग जा खड़े हुए |राजीव की शहादत के बाद उनकी अंत्येष्टि पर दिखाई जरुर दिए मगर प्रियंका गांधी की शादी के बाद दूरी बड़ती गई आज गांधी परिवार का कोई सदस्य [यदि में गलत नहीं हूँ तो]जन्म दिन के जश्न में शामिल नहीं था|

अमिताभ बच्चन के जन्म दिन पर नए आए तो बहुत मगर कुछ पुराने अनुपस्थित भी रहे


दूसरे नंबर पर ठाकुर अमर सिंह की अनुपस्थिति भी खलने वाली है|विशेष तौर पर जब मुह बौले छोटे भाई अमर सिंह अपने बड़े भाई को उनके जन्म दिन पर उपेक्षित करने का तंज़ मीडिया के माध्यम से उपहारमें दें तब यह चौंकाने वाला बन जाता है|सर्व विदित है कि अमिताभ के जीवन में एक दौर ऐसा आया जब उनकी कम्पनी ऐ बी सी फ्लाप हो गई बुरी तरह से कर्ज़ में डूब गए तब अमर सिंह उनकी डूबती नैय्या के खेवन हार बने और उसे पार लगाया |यह स्वयम अमिताभ ने स्वीकार भी किया है कि यदि अमर सिंह नहीं होते तब महानायक मुम्बई में टैक्सी चला रहा होता|
कल तक शत्रुघन सिन्हा जो पानी पी पी कर अमिताभ के प्रति अपनी भडास निकाला करते थे आज इस जन्म दिन के जश्न में शामिल थे|संभवत अमर सिंह के कारण नज़दीक आये मुलायम सिंह यादव भी परिवार के साथ दिखाई दिए|
वैसे तो युवा पीड़ी के र्हितिक रोशन+सलमान खान+आमिर खान+विवेक ओबेरॉय+बिपाशा आदि भी दिखाई नहीं दिए लेकिन इनके लिए अमिताभ से ज्यादा उनके बच्चो के रिश्ते के विषय में चर्चा की जाने चाहिए|गांधी परिवार तो अमिताभ के लिए राजा था सो रिश्ते बनाने के लिए इन्होने स्वयम को रंक कहा था मगर अमर सिंह के केस में तो ये स्वयम राजा है सो रिश्ते या सम्बन्ध बनाने में इनकी पहल ही देखी जायेगी|

श्रीदेवी के कमबेक के लिए अपरम्परागत इंग्लिश विन्ग्लिश रुम्बा टेस्टी

नायिका प्रधान फिल्म ‘इंग्लिश विंग्लिश’ देख कर जब हाल से बाहर निकलने लगा तो देख कर बेहद सुखद आश्चर्य हुआ कि एक विशेष आयु और वर्ग के दर्शक फिल्म के टाईटल धुन पर थिरकते हुए + सर हिलाते हुए बाहर निकल रहे थे लेकिन इसके साथ ही महिलायें विशेष तौर पर नायिका की उम्र की महिलाये अंग्रेज़ी में नायिका के डायलाग्स को दोहरा रही थी और अपने बच्चों को अपनी अंग्रेज़ी प्रतिभा दिखा रही थी|
मेरी खुद की श्रीमती जी ,जिसने अभी अभी अमेरिका के वीजा के लिए इंटरवियु क्वालीफाई किया है, कहने लगी कि मुझे भी इंग्लिश क्लासेस ज्वाईन कर लेनी चाहियें|शायद ये सब किसी फिल्म की सफलता की गारंटी हो सकती हैं| दक्षिण एशियाई प्रवासियों से जुड़े पारिवारिक मसलों से पैक करके प्रस्तुत की गई मध्यम वर्गीय गृहिणी शशी की इस कहानी में श्री देवी के अतिरिक्त सभी कलाकारों ने पात्रों के साथ न्याय किया है| यहाँ तक कि फिल्म में लम्बे लम्बे अंग्रेज़ी और फ्रेंच भाषा के डायलाग बोलते समय कलाकारों ने शब्दों से ज्यादा अपने हाव भाव से भावनाओं का सजीव प्रदर्शन किया है| शायद इसीलिए डायलाग समझने के झंझट में फंसने के बजाये दर्शक अभिनय से ही मन्त्र मुग्ध रहता है लगातार स्पीड बना कर हलकी फुलकी भाषा में कसी हुई [टाईट ] स्क्रीन प्ले के माध्यम से दक्षिण एशियाई प्रवासियों से जुड़े, गंभीर मुद्दों को सराहनीय ढंग में उठाया गया है| जिसके परिवार वाले उसका ढंग से अंग्रेज़ी नहीं बोलने के कारण मज़ाक उड़ाते हैं। शशी गड़बड़ करती है, शब्दों का गलत उच्चारण करती है और अपने नज़दीकी लोगों (पति और बच्चों) द्वारा उपहास का विषय बनती है। जब भांजी की शादी तय करने के लिए न्यूयॉर्क जाने पर वो खुद को वहां के हलचल भरे माहौल में पाती है, तो आत्मविश्वास और अपने परिवार का सम्मान हासिल करने के लिए अंग्रेज़ी भाषा में पारंगत होती है और सबको चकित करती है | शशी को अक्षम महसूस कराने वाले किरदारों को विलेन कहना अतिश्योक्ति होगा क्योंकि उन्होंने बेशक अंग्रेज़ी बोलने में गलतियां करने वाली नायिका को लगातार ताने मार मार कर रुलाया है मगर इन्ही तानो से नायिका का चरित्र और सशक्त हुआ है| और शायद यही फिल्म की जान भी है|
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श्रीदेवी के कमबेक के लिए अपरम्परागत इंग्लिश विन्ग्लिश रुम्बा टेस्टी


इसलिए इंग्लिश विंग्लिश मात्र अंग्रेज़ी के सबक या विदेशी लोकेशन के मोह से कहीं बढ़कर है| |४९ वर्षीय श्रीदेवी को पुनः सिल्वर स्क्रीन से जोड़ने के लिए पुराने जमाने की आफ बीट टाईप अपरंपरागत विषय चुन कर जो जोखिम उठाया गया था वह कारगर साबित हुआ है| मार्केट रिपोर्ट के अनुसार ओपनिंग वीक पर ही इस फिल्म की कमाई करीब 13 करोड़ रुपये बताई जा रही है|बेशक यह अभी १०० करोड़ के क्लब से दूर है मगर मार धाड़ और हाट फिल्मो के दौर में श्रीदेवी की इस जिंदादिल परफॉर्मेंस और गौरी शिंदे के डायरेक्शन ने दर्शकों पर जादू कर दिया है । बेशक श्री देवी के पति बौनी कपूर इस फिल्म को रोजाना देखना चाहते हैं मगर वास्तव में वेलपैकेड +अपरम्परागत इंग्लिश विन्ग्लिश दिल को छु गई है