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Category: Jhalli Gallan

मुस्कुराते हैं शेर सुनाते हैं और प्लेन पकड़ कर उड़ जाते हैं|

झल्ले दी झल्लियाँ गल्लां

एक भाजपाई

ओये झल्लेया ये कांग्रेस की मति मारी गई है ओये पूरी दुनिया कह रही है कि सी डब्लू जी+२ जी+आदर्श+मंरेगा+ कोयले में कांग्रेस ने मोटा माल खाया है|और ये सबसे कमजोर प्रधान मंत्री डाक्टर मन मोहन सिंह जो कभी बात बात पर इस्तीफा दे दिया करते थे अब इतनी बड़ी बात पर भी मुस्कुराते हैं शेर सुनाते हैं और प्लेन पकड़ कर उड़ जाते हैं|

झल्ला

ज्ञानी जी दुर्बल को ना सताईये जाकी मोटी हाय मुई खाल कि सांस सोंऊ लोह भस्म हो जाए\ हसाड़े सोने ते मन मोहणे पी एम् को ज्यादा मत खींचो वरना टूटेगा तो आप जी के दोनों हाथों पर भी चोट आ जायेगी

मैथ्स में पास कराने को काली कमाई का हिसाब बच्चे से कराओ

२+२=5

झल्ले दी झल्लियाँ गल्लां

एक मोटे पेट वाला नेता

ओये झल्लेया ये मैं अपने बेटे का क्या इलाज़ करूँ\
अब देख सारे विषयों में डिस्टिंक्शन और मैथ्स में फ़ैल
इसका मैथ्स कैसे सुधारूं ??

झल्ला

नेता जी इसका इलाज़ तो आप के घर में ही है|
आप की जो टेबल के नीचे की मेरा मतलब है
दो नंबर की अरे भाई काली कमाई का हिसाब किताब
इस बच्चे से करवाना शुरू कर दो | गारंटी है
एक महीने में मैथ्स में तो फर्राटे भरने लगेगा

मीरा ने कान्हा प्रेम बेल को विरह आंसुओं से सींचा

अंसुवन जल सींच-सींच प्रेम बेलि बोई
अब तो बेल फ़ैल गई, आनंद फल होई.

संत मीराबाई ने प्रभु के प्रति अपनी विरह वेदना प्रकट करते हुए कहा है
कि मैंने अपने विरह आंसुओं से प्रेम की बेल को सींचकर विकसित किया है
वह बेल तन, मन और प्राणों पर छा गई है अब उसपर आनंद के फल लगने
लगे हैं . मेरे स्नेही प्रभु ने मुझे ह्रदय से लगा लिया है अर्थात मैंने प्रभु के प्रेम
का आनंद प्राप्त कर लिया है.
उल्लेखनीय है कि मीरा की विरह व्यथा कवि की मात्र कल्पना उड़ान के समान नहीं
है. संत मीराबाई के पद उनके अनुभवों की अभिव्यक्ति हैं. वास्तव में उनके पद उस प्रेम
दीवानी के सुख-दुखों का वृतांत है.
संत मीरा वाणी

आज़म साहब सन्डे में काम नहीं तो जुर्माना भी नहीं


झल्ले दी झल्लियाँ गल्लां

एक बुद्धिजीवी पथिक

ओये झल्लेया ये देख इन बिजली वालों को आज़म खान जैसे काबीना मंत्री का भी खौफ नहीं रहा|आज़म खान ने फरमान जारी किया था की दिन में अगर स्ट्रीट लाईट्स जलती हुई पाई गई तो जुर्माना लगेगा और आज देख गंगा नगर में सुबह सूरज के सामने स्ट्रीट लाईट्स जनता और जनता के नुमाईंदे मंत्री का मुह चिडाती जल रही हैं|ओये किसी को किसी का डर ही नहीं रहा

झल्ला

अरे सर जी आप भी पड़े लिखे अनपढ़ तो नहीं हो?भई आज रविवार है यानि इतिवार बोले तो सन्डे \अब सन्डे में भी कोई काम करता है भला |सन्डे में कोई काम नहीं तो जुर्माना भी नहीं|वैसे भी यहाँ के बिजली वाले बहुत रईस हैं हज़ार दो हज़ार के जुर्माने का कोई असर नहीं पड़ता किसी ना किसी जेब से निकालेंगे और मंत्री के मुह पर दे मारेंगे

इच्छा के बगैर किसी को सुधारा नहीं जा सकता

इच्छा के बगैर किसी को सुधारा नहीं जा सकता
अनकीन्हीं बातें करै, सोवत जागे जोय,
ताहि सिखाये जगायेबो, रहिमन उचित न होय.

संत कवि रहीम जी कहते हैं कि जो व्यक्ति अकथनीय वार्तालाप करे और जागा हुआ होने
पर भी सोता रहे, ऐसे मनुष्य को जाग्रत होने की शिक्षा देना उचित नहीं है.
भाव: भाव यह है कि जिस व्यक्क्ति ने अपने जीवन में कुछ न करने या न सुधरने
की कसम खाई हुई हो उसे कोई भी सुधार नहीं सकता. अर्थात सही मार्ग पर नहीं ला
सकता. ऐसे व्यक्ति को शिक्षा देना रेत में पानी कि कुछ बूँदें डालना अथवा चिकने घड़े
पर पानी डालने जैसा होता है.
संत कवि रहीम वाणी

बोल व्रत से जनता ने चाहा तो २०१४ तक मन वांछित लाभ प्राप्त होगा

झल्ले दी झल्लियाँ गलाँ

एक भाजपाई

ओये झाल्लेया ये क्या हो रहा है ? संवैधानिक संस्था कैग ने १.८५ लाख करोड़ रुपये के कोयला घोटाला निकाल कर संसद पटल पर रखवा दिया अब इस पर सकारात्मक कार्यवाही करने के बजाय सरकार कैग की ऐसे की तैसी करने पर तुली है |कैग को ही गलत बताया जा रहा है|आजकल संसद को तो राजीव शुक्ला सरीखे मंत्री स्थगित करवाए जा रहे हैं लेकिन मीडिया में ही चर्चा का बाज़ार गर्म किया जा रहा है|ओये हमें भी कोई उपाय बता कि हम कौन सा अनुष्ठान करें+हवन करे या फिर व्रत करें ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो जाए|

झल्ला

भापा जी आपजी की कुण्डलियाँ बता रहीं हैं कि आप की पोलिटिकल जड़ों में ऐसा कोई ढंग का वक्ता वर्तमान में नहीं है जो मीडिया में छाप छोड़ता हो इसीलिए आप जी के लिए

बोल व्रत धारण करना

ही उपाय कारगर होगा|मीडिया में बोलने वाले इस व्रत को धारण करके ही केमरा के सामने बैठे और एंकर या दूसरी पार्टी के सवालों का जवाब देते समय श्री लाल कृषण आडवानी के शुष्क आकंड़ों के साथ साथ श्री अटल बिहारी वाजपई के भाषाई लच्छों को भी याद करके जाएँ|और बीच बीच में इन्हें छोडते जाएँ जनता ने चाहा तो २०१४ तक मन वांछित लाभ प्राप्त हो ही जाएगा

बरसे-बरसे आनंद तेरा, मस्त मगन हो मनवा मेरा

बरसे-बरसे आनंद तेरा, मस्त मगन हो मनवा मेरा
श्री शक्तिधाम मंदिर, लाल कुर्ती में प्रवचनों की अमृतमयी वर्षा करते हुए पूज्य श्री भगत
नीरज मणि ऋषि जी ने कहा कि हम सब परमात्मा की कृपा को पाना तो चाहते हैं परन्तु
लाखों जन्मो की पाप कर्मों की धूल ने हमारी बुद्धि को आच्छादित किया हुआ है. हमारे
अंदर ईर्ष्या, द्वेष तथा अहंकार भरे हुए हैं. इसीलिए हम प्रभु की कृपा के पात्र नहीं बनते.
भक्तजन प्रभु से प्रार्थना करते हैं कि हे देव! हम पर अप्रनी कृपा रुपी बरसात कीजिये
जिससे हमारे अंतःकरण की लाखों जन्मों की धूल और ऊष्णता धुल जाए. हमारा मन
परमात्मा के भजन में लीनता लाभ करे.
” बरसे-बरसे आनंद तेरा, मस्त मगन हो मनवा मेरा”
भक्तजनों ने परमात्मा से माँगा कि हे प्रभु आपके आनंद के बादल उमड़ -उमड़ कर
हमारे अंतःकरण में बरसें जिससे हमारा मन निर्मल हो जाए, हमारे मन में किसी के
प्रति ईर्ष्या न रहे, हमारे अन्दर दूसरों को क्षमा करने की भावना पैदा हो जाये जिससे हम
परमात्मा की कृपा के पात्र बन सकें.|

उल्लेखनीय है कि पूज्य श्री भगत नीरज मणि ऋषि ने
छेत्र में धार्मिक और सामजिक सेवा की मान्यताओं को पुनः स्थापित करने में क्रान्ति कारी
पहल की है|

File Photo

कान्हा तुम्हारी राह निहारते नयन दुखने लगे

म्हारे घर आओ प्रीतम प्यारा,
तन मन धन सब भेंट धरुँगी, भजन करूंगी तुम्हारा,
तुम गुणवंत सुसाहिब कहिये, मोमें ओगुण सारा,
में निगुनी कछु गुण नहीं जानू, तुम हो बक्शणहारा
मीरा कहे प्रभु कब रे मिलोगे, तुम बिन नैन दुखारा.

संत मीराबाई जी प्रभु को विरह वेदना प्रकट करते हुए कहती हैं कि आप मेरे
घट मंदिर में विराजो. मैं अपना तन, मन, धन सबकुछ आपको भेंट करुँगी और
आपका गुणगान करुँगी. आप सर्वगुण संपन्न हैं मैं अवगुणों का भंडार हूँ. मुझमें कोई
गुण नहीं है. मैं पापी हूँ और आप बक्शणहारे हो.
आगे मीरा बाई जी कहती हैं हे प्रभु ! आप की राह निहारते-निहारते मेरे नयन दुखने लगे
हैं आप मेरे ह्रदय में कब पधारोगे?
मीरा वाणी

टी वी चेनलों पर आउट सोर्सिंग से बहस कराई जा रही है

झल्ले दी झल्लियाँ गल्लां

एक सोशलाईट
ओये झल्लेया मुल्क में ये क्या गंद मचा हुआ है कोयले की कालिख में पुते हुए ये सभी नेता संसद को आज तीसरे दिन भी ठप्प किये हुए हैं|पहले ये कहते हुए नहें अघाते थे कि संसद एक पवित्र मंदिर हैं और अब उसी
मंदिर पर खुद ही अलिगढ़िया ताला लगाने की फिराक में हैं|ओये अब तक तो लगभग ५०० करोड़ का नुक्सान तो यही संसद नहीं चलने से हो गया | और यही नेता गण जो संसद नहीं चलने दे रहे टी वी चेनलों पर गला फाड़ फाड़ कर बहस कर रहे हैं और चेनलों की टी आर पी बड़ा रहे हैं | ये भी घोटाला ही हुआ |क्यों ठीक हैं ना ठीक???
झल्ला
बाऊ साहब जी आज कल हर जगह+ हर विभाग में आउट सोर्सिंग से काम चलाने का रिवाज है +फेशन है इसीलिए अब संसद के बजाये टी वी चेनलों पर ही आउट सोर्सिंग से बहस कराई जा रही है| क्या करें मजबूरी है|

कमजोर पी एम् पर १.८६ लाख करोड़ का बोझ

झल्ले दी झल्लियाँ गल्लां

एक भाजपाई
ओये झल्लेया ये क्या हो रहा है ?अब तो सरकार की सी ऐ जी ने भी जी जी कहते हुए सरकारी खजाने को 1.85 लाख करोड़ रुपये के नुकसान के आरोप पर अपनी भी मोहर लगा दी है|
कोयला ब्लॉक आवंटन में घोटाले पर सीएजी की रपट संसद के पटल पर भी रख दी गई है| आप जी के प्रधान मंत्री उस समय कोयला मंत्री भी थे इसीलिए उन्हें[पी एम्] इस महा घोटाले की जिम्मेदारी ले लेनी चाहिए|
हमारे सोणे नेता अरुण जेटली ने कोयला खंड एलाटमेंट मामले में प्रधानमंत्री कोपूरा जिम्मेदार ठहरा दिया है| कह दिया है कि पी एम् को इस बारे में पूरी जानकारी थी। इसीलिए संसद में जारी गतिरोध को समाप्त
करने के लिए इस केंद्र सरकार के पास एक ही रास्ता है कि प्रधानमंत्री इस पूरे मामले की जिम्मेदारी स्वयं ले लें और उचित कदम लेने का प्रयास करें।
झल्ला
ओ मेरे भोले शाह जी एक तरफ तो आप यह कहते हुए नहीं थकते कि हसाड़े सोणे ते मन मोहने पी एम् बहुत कमजोर प्रधान मंत्री हैं अब १.८५ लाख करोड़ रुपयों के भारी भरकम घोटाले को उन कमजोर कन्धों पर डाल रहे हो
और यह भी कहते जा रहे हो कि ये कंधे जिम्मेदारी नहीं उठा रहे | ये तो सरासर नाइंसाफी है जी | ऐसे कैसे चलेगा ???