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Category: Politics

सुन्दर नगरी के उपवास स्थल पर ५ अप्रैल को “आप” की सर्व धर्म प्रार्थना सभा:New Card Of AAP

आम आदमी पार्टी[आप] ने एक नए कार्ड का ऐलान किया है|इसके अनुसार कल ५ अप्रैलको उपवास के १४वे दिन सुन्दर नगरी में प्रात दस बजे से सर्व धर्म प्रार्थना सभा का आयोजन किया जाएगा|
पार्टी प्रवक्ता अस्वति मुरलीधरन के अनुसार सिविल डिसओबेडियंस मूवमेंट के १३ वे दिन आज बिजली पानी के बिलों में भ्रष्टाचार के विरोध में हस्ताक्षर करने वाले असहयोगियों की संख्या ९६०६०३ हो गई है| और आज रात दस बजे तक १० लाख के आंकडे को पार कर लिया जाएगा|

सुन्दर नगरी के उपवास स्थल पर ५ अप्रैल को प्रात दस बजे से "आप" की सर्व धर्म प्रार्थना सभा

सुन्दर नगरी के उपवास स्थल पर ५ अप्रैल को प्रात दस बजे से “आप” की सर्व धर्म प्रार्थना सभा

आप पार्टी प्रवक्ता ने बताया कि सुन्दर नगरी स्थित उपवास स्थल पर कल ५ अप्रैल ,शुक्रवारको सर्व धर्म प्रार्थना सभा का आयोजन किया जाएगा जिसमे भाग लेने के लिए दिल्ली के सभी वार्डों से लोग आयेंगे|

आन्दोलन के अगले चरण

के लिए ६ अप्रैल को चुना गया है| १९३० कि ६ अप्रैल को महात्मा मोहन दास करम चंद गांधी ने नमक क़ानून को तोड़ने के लिए दांडी मार्च निकाला था |जिस प्रकार उस समय नमक आम आदमी कि पहुँच से दूर कर दिया गया था ठीक उसी प्रकार अब बिजली पानी जैसी आवश्यकता को आम आदमी से दूर करके कुछ लोगों कि जेबें भरने का साधन बना दिया है|इसीलिए महात्मा गाँधी के पद चिन्हों पर चलते हुए २०१३ की ६ अप्रैल को बिजली पानी के काटे गए कनेक्शनों को जोड़ने का अभियान चलाया जाएगा|और आम आदमी को राहत प्रदान की जायेगी|

हेल्थ बुलेटिन

आज सुबह उपवासी नेता के स्वास्थ्य रिपोर्ट इस प्रकार रही:
[१]ब्लड प्रेशर=====१११/७३
[२]पल्स==========६४
[३]शुगर==========१३१
[४]केटोन्स[Ketones]३+
[५] वजन =========५६.५ किलो ग्राम

मेडिकल कालेज में नर्सो की हड़ताल से निबटने के लिए नर्सिंग डिप्लोमा छात्रों को भी लगाया गया

मेडिकल कालेज में चल रही नर्सों की हड़ताल समाप्त करने के लिए अस्पताल प्रशासन और नर्सों की एसोसिएशन में हुई सुबह की वार्ता बेनतीजा रही |मेडिकल कालेज के सर्वोच्च अधिकारी डा. विनय अग्रवाल ने आज नर्स एसोसियेशन के सदस्ययों को मरीजो की परेशानियों का हवाला दिया और हड़ताल समाप्त करने के लिए प्रयास किया लेकिन नर्सों ने छेड़ छाड़ के आरोपी कर्मचारी नेता विपिन त्यागी की गिरफ्तारी हुए बगैर हड़ताल समाप्त करने से इनकार कर दिया|गौरतलब है के मेडिकल कालेज प्रशासन ने विपिन त्यागी को निलंबित करके आजम गढ़ एटैच कर दिया गया है| इसके बावजूद भी अभी तक नर्सिंग स्टाफ एसोसिएशन की हड़ताल जारी है अब एसोसिएशन द्वारा विपिन त्यागी की गिरफ्तारी की मांग की जा रही है|इस मांग को पूरी कराने के लिए स्थानीय पोलिस प्रशासन पर दबाब बनाने के लिए हडताल जारी है|

 मेडिकल कालेज में नर्सो की हड़ताल से निबटने के लिए नर्सिंग डिप्लोमा छात्रों को भी लगाया गया

मेडिकल कालेज में नर्सो की हड़ताल से निबटने के लिए नर्सिंग डिप्लोमा छात्रों को भी लगाया गया


इस हड़ताल से निबटने के लिए महा निदेशक स्वास्थ्य से बात की गई तो उन्होंने बताया के उनके कार्यालय से तत्काल कार्यवाही करके आरोपी कर्मी को निलंबित कर दिया गया है अब आगे की कार्यवाही स्थानीय मेडिकल प्रशासन द्वारा की जानी है|इस पर हामी भरते हुए मेडिकल कालेज के सर्वोच्च अधिकारी डा. विनय अग्रवाल ने बाते के हड़ताल समाप्त करने के लिए नर्स स्टाफ एसोसिएशन से निरंतर वार्ता की जा रही है |रोगियों की सहूलियत के लिए नर्स डिप्लोमा छात्रों को भी तैनात कर दिया गया है| बीते दिन इन्टरन को लगाया जा चुका है|

आम आदमी पार्टी के साथ जुड़े असहयोगियों के १० लाख प्रोटेस्ट लेटर्स का क्या होगा?

आम आदमी पार्टी [आप]के उपवासी नेता अरविन्द केजरीवाल द्वारा दिल्ली में बिजली पानी के बिलों में भ्रष्टाचार के विरुद्ध जुड़ने वालों की संख्या में निरंतर वृद्धि हो रही है| आप पार्टी ने दिल्ली की सरकार पर दबाब बनाने के लिए अपने जांचे परखे कदम उठाने शुरू कर दिए हैं जहां आन्दोलन को 6 अप्रैल से महात्मा गाँधी के दांडी मार्च का स्वरुप देते हुए बिजली बनी के काटे जा चुके कनेक्शनों को जोड़ने का एलान किया गया है तो वहीं आन्दोलन में समर्थकों को जोड़ने के लिए मोबाईल पर एस एम् एस भेजने शुरू कर दिए गए हैं सविनय अवज्ञा आन्दोलन[ असहयोग] के समर्थन में १० लाख असहयोगी जुड़ चुके हैं लेकिन दिल्ली की सरकार अभी भी झुकती दिखाई नहीं दे रही|
८ लाख प्रोटेस्ट लेटर्स लेकर निकले औटो [२७२]रिक्शा पर पार्टी के २७२ प्रतिनिधिओं से दिल्ली की मुख्य मंत्री शीला दीक्षित ने ना केवल मिलने से इंकार किया वरन पोलिस का उपयोग किया और दिल्ली वासिओं की व्यथा ब्यान करते प्रोटेस्ट लेटर्स तक लेने में कोई रूचि नहीं दिखाई| अब उपवास के १३ वें दिन इन प्रोटेस्ट लेटर्स की संख्या १० लाख तक पहुँचने का दावा किया जा रहा है| पार्टी ने अब आन्दोलन को अगले चरणों में ले जाने का एलान कर दिया है|
6 अप्रैल से बिल न भरने के कारण काटे गए बिजली कनेक्शन जोड़ने की घोषणा की गई है| उपवासी नेता अरविन्द केजरीवाल ने कहा है के कार्यकर्ता राजधानी की एक-एक गली में जाकर इस काम को अंजाम देंगे।उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी के दांडी मार्च नमक सत्याग्रह की तरह दिल्ली में आप का यह बिजली पानी सत्याग्रह राजधानी में निरंकुश कुशासन की जड़ों पर सीधा प्रहार करेगा।
इस अवसर पर यह स्वाभाविक प्रश्न उठता है के जब अगला चरण घोषित किया जा चूका है तब पुराने चरण का क्या होगा|अर्थार्त १० लाख [अभी तक]प्रोटेस्ट लेटर्स का उपयोग कैसे किया जा सकेगा|मुख्य मंत्री ने इन्हें लेने से इंकार कर दिया है|आप पार्टी को इसके लिए डी ई आर सी का रास्ता दिखाया जा रहा है| दिल्ली सरकार के एक प्रवक्ता मुकेश टी वी चेनलों पर इन प्रोटेस्ट लेटर्स की प्रमाणिकता को चुनौती देने में व्यस्त दिखाई दे रहे हैं|बेशक आप के नेता गण इस चुनौती को स्वीकार करके जांच करवाने की बात कह रहे हैं मगर यक्ष प्रश्न अभी भी ज़िंदा है के दिनों दिन विशाल होते जा रहे प्रोटेस्ट लेटर्स के बंडलों का क्या होगा|क्या इन्हें दोबारा मुख्य मंत्री के द्वार तक लेजाया जाएगा या फिर कोई और रण निति अपनी जायेगी|इस विषय में आप पार्टी भी अभी अपने पत्ते खोलती नज़र नहीं आ रही|पार्टी प्रवक्ता ने बातचीत के दौरान यह जरुर कहा के इन पत्रों को डिलीवर करने दोबारा मुख्य मंत्री के कार्यालय जायेंगे लेकिन इसके लिए कोई निश्चित तारीख बताने में गुरेज ही किया गया

एल के अडवाणी के ब्लाग से :अगले ईस्टर पर भाजपा का पुनः जन्म Reincarnation of B J P On Easter

एन डी ऐ के पी एम् इन वेटिंग और वरिष्ठ पत्रकार एल के आडवाणी ने ईसाईयों के प्रभु यीशु के पुर्नजन्म से जुड़े पवित्र त्यौहार ईस्टर संडे से अपनी पार्टी भाजपा को जोड़ते हुए आगामी चुनावों में अपनी पार्टी के पंर जन्म के संकेत दिए हैं|उन्होंने अपने ब्लॉग में भाजपा के इतिहास का उल्लेख करते हुए बताया है कि प्रभु यीशु को गुड फ्राइडे को सलीब पर चडा कर मानवता का अपमान किया गयाथा उसके ठीक दो दिन बाद के सन्डे [ईस्टर]को प्रभु का पुनः जन्म हुआ और पीड़ित जनता की खुशियाँ लौटी| जैसे पवित्र ईस्टर का त्यौहार एक निश्चित तिथि पर नहीं मनाया जाता ठीक उसी प्रकार देश में एलेक्शन भी अलग अलग तिथियों में कराये जाते हैं| इमरजेंसी के काले युग को समाप्त करने के लिए ६ अप्रैल १९८० को भाजपा का पुनर जन्म हुआ और अब आगामी वर्ष में भी Easter के आस पास ही चुनाव होने के संभावना जताई जा रही है|[Reincarnation of B J P ]
प्रस्तुत है एल के अडवाणी के ब्लॉग से :
गत् रविवार 31 मार्च, 2013 ईस्टर सण्डे (रविवार) था- एक अत्यन्त महत्वपूर्ण ईसाई त्योहार। जार्जियन कैलेण्डर के मुताबिक जबकि अन्य सभी ईसाई त्योहार प्रत्येक वर्ष एक निश्चित दिन पर पड़ते हैं परन्तु ईस्टर एक ऐसा त्योहार है जो प्रत्येक वर्ष विभिन्न तिथियों पर पड़ता है।
उदाहरण के लिए अगले वर्ष ईस्टर 20 अप्रैल, 2014 को मनाया जाएगा।
सन् 1980 में गठित भारतीय जनता पार्टी में हम लोगों के लिए ईस्टर सण्डे का विशेष महत्व है। 1980 में ईस्टर 6 अप्रैल के रविवार को पड़ा था जिस दिन नई दिल्ली में श्री अटल बिहारी वाजपेयी ने इसकी नींव रखी थी।
जून 1975 में इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने समाजवादी पार्टी नेता श्री राजनारायण की याचिका पर निर्णय देते हुए श्रीमती गांधी के लोकसभाई निर्वाचन को रद्द कर दिया था। प्रधानमंत्री श्रीमती गांधी चुनावी कदाचार की दोषी पाई गई थीं और उन्हें अगले 6 वर्षों तक कोई भी चुनाव लड़ने के अयोग्य कर दिया गया था।
इस गंभीर घटनाक्रम के बाद कांग्रेस सरकार ने आंतरिक गड़बड़ियों की आड़ में देश पर आपातकाल थोप दिया था। संविधान प्रदत्त सभी मूलभूत अधिकारों को निलम्बित कर दिया गया, विपक्षी दलों के एक लाख से ज्यादा कार्यकर्ता जेलों में डाल दिए गए और मीडिया का ऐसा दमन किया गया जो ब्रिटिश शासन में भी नहीं हुआ था। आपातकाल लगभग 20 महीने तक रहा।
मार्च, 1977 में जब अगले लोकसभाई चुनाव हुए तो भारतीय मतदाताओं ने स्वतंत्रता के पश्चात् पहली बार कांग्रेस पार्टी को नई दिल्ली की सत्ता से उखाड़ फेंका। उस समय के कांग्रेस (ओ) के अध्यक्ष श्री मोरारजी भाई देसाई के नेतृत्व में जनता पार्टी की सरकार बनी।
यद्यपि सन् 1952 के बाद से हुए सभी संसदीय चुनावों में एक प्रचारक या फिर एक प्रत्याशी के रूप में मैंने भाग लिया है परन्तु निस्संकोच मैं कह सकता हूं कि 1977 के चुनाव देश के राजनीतिक इतिहास में सर्वाधिक महत्वपूर्ण रहे हैं। किसी अन्य अवसर पर चुनावों के नतीजों पर भारतीय लोकतंत्र इतना दांव पर नहीं लगा था जितना इन चुनावों में था। यदि कांग्रेस पार्टी यह चुनाव जीत जाती तो भारत के बहुदलीय लोकतंत्र को समाप्त करने के घृण्श्निात षड़यंत्र-आपातकाल- को जनता की वैधता मिल जाती! इसी प्रकार, किसी और अन्य चुनाव में भी भारतीय मतदाताओं के लोकतांत्रिक विवेक की यह बानगी नहीं मिलती। मतदाताओं ने कांग्रेस पार्टी को बुरी तरह से दण्डित किया। पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, दिल्ली, उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे अनेक प्रदेशों में कांग्रेस को एक सीट भी नहीं मिली।
मोरारजी भाई सरकार ज्यादा नहीं चल पाई। अंदरूनी उठापठक के चलते 1979 में यह गिर गई। अगले लोकसभाई चुनाव 1980 में सम्पन्न हुए। जनता पार्टी के हम लोगों को साफ लगता था कि हम बुरी तरह हारेंगे। परन्तु इस उठापठक ने वास्तव में जनता पार्टी की शोचनीय हालत कर दी। सन् 1977 में 298 सीटें जीतने वाली जनता पार्टी 1980 में मात्र 31 सीटों पर सिमट कर रह गई। इन 31 सांसदों में से जनसंघ की संख्या सन् 1977 में 93 की तुलना में 16 रह गई।
1980 के चुनावों के शीघ्र पश्चात् जनता पार्टी की कार्यकारिणी की बैठक बुलाई गई जिसमें यह तय हुआ कि पार्टी की संगठनात्मक वृध्दि पर ज्यादा ध्यान दिया जाए। पार्टी कार्यकारिणी ने जनता पार्टी का सदस्यता अभियान चलाने का भी फैसला किया ताकि निर्धारित कार्यक्रम के मुताबिक पार्टी के चुनाव कराए जा सकें। मैं मानता हूं कि इसी निर्णय ने पार्टी के कुछ वर्गों को आशंकित कर दिया जिसे बाद में दोहरी सदस्यता विरोधी अभियान के रूप में जाना गया। यह अभियान जनसंघ के पूर्व सदस्यों के विरूध्द था जिनके बारे में आरोप लगाया गया कि वे केवल जनता पार्टी के सदस्य नहीं हैं अपितु राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के भी सदस्य हैं। यह सभी को विदित था कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ एक राजनीतिक दल नहीं है। यह ऐसा था कि किसी कांग्रेसी जो आर्यसमाजी भी है, पर दोहरी सदस्यता का आरोप लगाया जाए! शीघ्र ही यह कानाफूसी अभियान शुरू हो गया कि यदि पूर्व जनसंघियों को राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ से सम्बन्ध रखने दिया गया तो मुस्लिम मतदाता पार्टी से विलग हो जाएंगे।
दोहरी सदस्यता के मुद्दे पर हुए तीखे विवाद पर एक सही परामर्श प्रख्यात गांधीवादी और स्वतंत्रता-सेनानी अच्युत पटवर्धन ने दिया। उन्होंने 9 जून, 1979 को ‘इंडियन एक्सप्रेस‘ में ‘जनता, आर.एस.एस. ऐंड द नेशन‘ शीर्षक वाले लेख में लिखा-‘आपाताकल के विरूध्द जन-संघर्ष में महान् योगदान की क्षमता के कारण भारतीय जनसंघ को जनता पार्टी के प्रमुख घटक के रूप में शामिल किया गया था। आपातकाल की समाप्ति के बाद से अब तक जनसंघ और या संघ ने ऐसा क्या क्या किया, जिसने श्री मधु लिमये और श्री राजनारायण तथा उनके समर्थकों को इन्हें बदनाम करने का एक उग्र अभियान छेड़ने के लिए प्रेरित किया?
श्री वाजपेयी, श्री नानाजी देशमुख और मैंने इस दोहरी सदस्याता के अभियान का प्रखर विरोध किया। पार्टी की बैठकों में, मैंने कहा कि हमारे साथ पार्टी में ऐसा व्यवहार किया जा रहा है, जैसे मानों हम अस्पृश्य हों। मेंने आगे कहा:
‘जनता पार्टी के पांच घटक थे- कांग्रेस (ओ), भारतीय लोकदल, सोशलिस्ट पार्टी, सी.एफ.डी. और जनसंघ। राजनीतिक दृष्टि से कहें तो इनमें से पहले चार द्विज थे, जबकि जनसंघ की स्थिति हरिजन जैसी थी, जिसे परिवार में शामिल किया गया हो।
वर्ष 1977 में इसे पार्टी में स्वीकार करते समय काफी हर्षोल्लास था। पर समय बीतने के साथ परिवार में एक ‘हरिजन‘ की उपस्थिति ने समस्याएं शुरू कर दीं। ऐसा सोचने वाला मैं अकेला नहीं था बल्कि देश भर में पूर्ववर्ती जनसंघ के लाखों कार्यकर्ताओं और समर्थकों की गूंज इसमें शामिल थी। फरवरी-मार्च 1980 में जनसंघ के एक वरिष्ठ पदाधिकारी सुंदर सिंह भंडारी और मैंने देश भर का दौरा कर जमीनी स्तर पर जनता पार्टी के बारे में लोगों के विचार जानने के प्रयास किए। जहां भी हम गए, हमने पाया कि पूर्ववर्ती जनसंघ के कार्यकर्ताओं में इस बात को लेकर घोर आपत्ति थी कि पार्टी के भीतर उनके साथ दोयम दर्जे का व्यवहार क्यों किया जा रहा है।
जनता पार्टी के नेतृत्व ने दोहरी सदस्यता के मुद्दे पर अंतिम निर्णय करने के उद्देश्य से पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की 4 अप्रैल को बैठक बुलाई। इस बैठक से निकलने वाले नतीजों को भांप पर श्री वाजपेयी और नानाजी सहित हमने जनसंघ के पूर्व सदस्यों का एक सम्मेलन 5 और 6 अप्रैल, 1980 को बुलाया।
जैसाकि अपेक्षित था कि 4 अप्रैल को जनता पार्टी की कार्यकारिणी ने पूर्व जनसंघ के सभी सदस्यों को निष्कासित करने का फैसला लिया। अपनी आत्मकथा में मैंने उल्लेख किया है:
”जनसंघ के हम सभी सदस्यों को जनता पार्टी से निष्कासन का फैसला बड़ी राहत लेकर आया। 5 और 6 अप्रैल, 1980 के दो दिवसीय सम्मेलन ने स्फूर्तिदायक भावना और दृढ़ विश्वास जोड़ा।
दिल्ली के फिरोजशाह कोटला मैदान में 3,500 से अधिक प्रतिनिधि एकत्र हुए और 6 अप्रैल को एक नए राजनीतिक दल ‘भारतीय जनता पार्टी‘ (भाजपा) के गठन की घोषणा की गई। अटल बिहारी वाजपेयी को इसका पहला अध्यक्ष चुना गया। सिकंदर बख्त और सूरजभान के साथ मुझे महासचिव की जिम्मेदारी सौंपी गई।”
इस ब्लॉग की शुरूआत में मैंने ‘ईस्टर सण्डे‘ का संदर्भ दिया जिसे ईसाई दो दिन बाद पड़ने वाले गुडफ्राइडे को त्यौहार के रूप में मनाते हैं, माना जाता है कि इसी दिन यीशु पुनर्जीवित हुए थे। ईस्टर सण्डे को ईसा मसीह के पुनर्जीवित होने का दिन जाना जाता है।
हमारी पार्टी के सम्बन्ध में भी 1980 में गुड फ्राइडे के दिन जनता पार्टी के प्रस्ताव से हमें सूली पर चढ़ाया गया और ईस्टर सण्डे के दिन हम पुनर्जीवित हुए।

६ अप्रैल से दिल्ली में कटे हुए बिजली पानी के कनेक्शनों को जोड़ा जाएगा:अरविन्द केजरीवाल

आम आदमी पार्टी[आप] के उपवासी नेता अरविन्द केजरीवाल ने अपने सविनय अवज्ञा आन्दोलन के १२ वे दिन आज यह ऐलान किया है कि ६ अप्रैल से दिल्ली में कटे हुए बिजली पानी के कनेक्शनों को जोड़ने के लिए अभियान चलाया जाएगा| सुन्दर नगरी में चल रहे उपवास स्थल से अपने नए कार्यक्रम को घोषित करते हुए बताया गया कि बिजली पानी के बिलों में भ्रष्टाचार के विरुद्ध २७२ वार्डों में हस्ताक्षर करने वालों की संख्या १० लाख पहुँच गई है|
इस अवसर पर अरविन्द केजरीवाल ने बताया किअभी तक केवल हस्ताक्षर ही करवाए जा रहे थे लेकिन अब उससे एक कदम और आगे रखने का फैसला किया गया है जिस प्रकार १९३० की ६ अप्रैल को महात्मा मोहन दास करमचंद गाँधी ने आम आदमीके लिए दांडी यात्रा शुरू करके नमक कानून तोडा था
उसी प्रकार महात्मा गांधी के कदमो पर चलते हुए २०१३ की ६ अप्रैल को आम आदमी पार्टी के सवयम सेवक घर घर जायेंगे और गरीबों के घरों में बिजली पानी के कटे हुए कनेक्शनो को जोड़ेंगे|इस अवसर पर उन्होंने दिल्ली कि सरकार को भी चुनौती देते हुए कहा कि शीला दीक्षित के पास जितनी भी फ़ोर्स है तैनात कर लें अब जनता अब बिजली जोड़ेगी||उन्होंने कहा कि लोगों के दिलों में दिल्ली सरकार का भय अभी भी बैठा हुआ है इसे दूर करने केलिए डिस्कोम द्वारा काटे गए कनेक्शनों की लिस्ट बनाई जायेगी उन्हें दुबारा जोड़े जाने से जनता को मोरल सपोर्ट मिलेगी |
मनीष शिशोदिया ने दांडी मार्च का महत्त्व बताते हुए कहा कि १९३० तक जीवन के लिए आवश्यक नमक केवल सरकार और अमीर घरानों की ही संपत्ति था ठेक इसी प्रकार आज दिल्ली में जन जीवन के लिए आवश्यक बन चुकी बिजली और पानी पर रिलाएंस जैसी कंपनियों का प्रभुत्व स्थापित है और सरकार कमीशन के दबाब में मौन है|

एल के आडवाणी के ब्लॉग से टेलपीस (पश्च्यलेख):प्रचार अभियान में फंसते वोटर्स

 एल के आडवाणी के ब्लॉग से टेलपीस (पश्च्यलेख):प्रचार अभियान में फंसते वोटर्स

एल के आडवाणी के ब्लॉग से टेलपीस (पश्च्यलेख):प्रचार अभियान में फंसते वोटर्स

एन डी ऐ के पी एम् इन वेटिंग एल के आडवाणी ने अपने ब्लॉग में एक बेहद पुराने चुटकले के माध्यम से वर्तमान राजनीतिक पार्टियों के चरित्र पर कटाक्ष किया है|प्रस्तुत है ब्लाग से उद्धत टेलपीस (पश्च्यलेख
एक व्यक्ति स्वर्ग पहुंचा और पर्ली गेट्स पर सेंट पीटर से मिला। सेंट पीटर ने कहा आज अलग बात है, तुम्हारे सम्मुख स्वर्ग या नरक का विकल्प खुला है; हम तुम्हें दोनों में एक-एक दिन देंगे और तुम अपनी पसंद बताओगे। अत: व्यक्ति ने कहा ठीक है और उसे नरक भेज दिया।
वह नरक पहुंचा और जहां तक उसकी नजरें जा सकती थीं वहां तक हरियाली थी। उसने बीयर का एक बड़ा पीपा, एक गोल्फ कोर्स और अपने पुराने जिगरी दोस्त देखे। उसने गोल्फ का एक राऊण्ड खेला, पीना-पिलाना हुआ और अपने जिगरी दोस्तों के साथ मौज मस्ती की। उसे लगा यह ठीक है।
बाद में वह स्वर्ग गया। उसने पाया कि वहां शांति है, आप बादलों से दूसरे बादलों पर कूद सकते हो और बीन बजा सकते हो।
दिन बीतते ही सेंट पीटर उसके पास पहुंचे और उससे उसकी पसंद के बारे में पूछा: बगैर रूके उसने कहा: ”मैं नरक जाना पसंद करूंगा।”
वह तुरंत नरक गया लेकिन वहां उसे गंदगी और लावा के सिवाय कुछ नहीं मिला। बीयर का पीपा नदारद था, और उसके जिगरी दोस्त भी कहीं नहीं थे।
वह शैतान पर चिल्लाया कि क्या हुआ? कल यह स्थान अद्भुत था। शैतान ने जवाब दिया, ”कल हम प्रचार अभियान चला रहे थे, आज आप ने वोट डाल दिया है।”

एक्टिविस्ट लोकायुक्त की लटकती तलवार से बचाव के लिए गुजरात में ढाल के रूप में बिल पास कराया तो सबको गुस्सा आया

झल्ले दी झल्लियाँ गल्लां

एक बेचारा दुखी भाजपाई

ओये झल्लेया हसाड़े सोणे नरेन्द्र मोदी के खिलाफ ये क्या षड्यंत्र रचा जा रहा है?जो कुछ भी करने लगते हैं कांग्रेस और मीडिया वाले अपना खाना पीना सब छोड़ छाड़ कर बेचारे मोदी के पीछे ही पड जाते हैं| मोदी को हमने अपनी पार्टी के केंद्र में लिया तो इनके पेट में मरोड़ उठने लगे |अब देखो सुप्रीम कोर्ट और गवर्नर के आदेशों का पालन करते हुए गुजरात में लोकायुक्त को शक्तिशाली और प्रभावी बनाने के लिए लोकायुक्त बिल पास कराया तो इसे लोक तंत्र पर ही खतरा बता दिया गया|ओये छान तो बोले सो बोले लेकिन छन्नी भी बोली जिसमे सैंकड़ो छेद |इस कांग्रेस ने केंद्र में जन लोकपाल बिल का जिस तरह मजाक बनाया उसे देश अभी तक भूला नहीं है |अब ये लोग हमें ही निशाना बना रहे हैं|कहा जा रहा है कि गुजरात में लोकायुक्त की नियुक्ति में अब राज्यपाल की कोई भूमिका नहीं रह गई है।
भाई हमने गुजरात में अब लोकायुक्त के अलावा चार उप−लोकायुक्त भी बना दिए हैं|इनका अनुमोदन सुप्रीम कोर्ट द्वारा किया जाएगा|
जो प्रक्रिया केन्द्र सरकार लोकपाल की नियुक्ति के लिए अपना रही है वही प्रक्रिया गुजरात सरकार लोकायुक्त की नियुक्ति के लिए अपना रही है इस पर भी इन्हें ऐतराज है| ओये पहले कहा जाता था कि समरथ को नहीं दोष गुसाईं लेकिन अब तो समरथ राजनीतिक मोदी में ही सारे अवगुण तलाशे जा रहे हैं |ओये ये लोग गोस्वामी तुलसी दास जी से भी बड़े हो गए

एक्टिविस्ट लोकायुक्त की लटकती तलवार से बचाव के लिए गुजरात में ढाल के रूप में बिल पास कराया तो सबको गुस्सा आया

एक्टिविस्ट लोकायुक्त की लटकती तलवार से बचाव के लिए गुजरात में ढाल के रूप में बिल पास कराया तो सबको गुस्सा आया


झल्ला

ओ मेरे सेठ जी जो आप दिखाना चाह रहे हो वैसा सब कुछ नहीं है| दरअसल राज्यपाल कमला बेनीवाल ने न्यायाधीश आर ऐ मेहता को लोकायुक्त बना कर मुख्य मंत्री को चुनौती दी है|ये न्यायाधीश महोदय गुजरात में मोदी के खिलाफ काम कर रहे एक्टिविस्ट के सहयोगी रहे हैं|इसीलिए अपने ऊपर लटक रहे इस एक पक्षीय तलवार से बचने के लिए मोदी ने ढाल के रूप में लोकायुक्त बिल पास करा लिया है| अब तलवार और ढाल का तो पुराना रिश्ता रहा है|जहां तलवार होगे वहां ढाल भी जरुरी है|

उपवासी नेता केजरीवाल शारीरिक कमजोरी के चलते समर्थकों को ११वे दिन संबोधित नहीं कर पाए

उपवास के ११वे दिन आज उपवासी नेता अरविन्द केजरीवाल शारीरिक कमजोरी के चलते सुन्दर नगरी स्थित उपवास स्थल से समर्थकों को रोजाना की भांति संबोधित नहीं कर पाए|
आम आदमी पार्टी [आप] प्रवक्ता अस्वति मुरलीधरन के अनुसार आज ११वे दिन की समाप्ति पर केजरीवाल का स्वास्थ्य बुलेटिन इस प्रकार है
[१] ब्लड प्रेशर == ११०/६९
[२]पल्स=========७४
[३]शुगर=========११३
[४]केटों[Ketone]====३+
[५] वजन ========५७.५ क. ग.
आम आदमी पार्टी ने दिल्ली सरकार पर तीनो डिस्कोम कंपनियों के साथ मिली भगत का आरोप लगाया और कहा के जान बूझ कर डिस्कोम को फायदा पहुँचाने के लिए कैग से इनके एकाउंट्स का आडिट नहीं कराया जा रहा|सरकार का यह कहना है के केस अभी हाई कोर्ट में लंबित है और ही कोर्ट में सरकार ने एफिडेविट दे कर आडिट करवाने को सहमति दे दी है लेकिन क्यूंकि मामला कोर्ट में लंबित है इसीलिए इस विषय में कार्यवाही नही की जा रही| दिल्ली सरकार की सहायता के लिए ये डिस्कोम कम्पनियाँ आगे आ गई है|इन कंपनियों ने कहा है के आप के आन्दोलन से उनकी आमदनी पर कोई फर्क नहीं पड़ा है|इससे साफ़ साबित होता है के सरकार और डिस्कोम में कोई न कोई गुप्त समझौता हुआ है|दिल्ली की सरकार की इस दलील पर आप का कहना है के हाई कोर्ट ने कहीं भी कैग से आडिट करवाने पर स्टे नहीं दिया है|इसके बावजूद केवल बहाने बाजी ही की जा रही है|
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उपवासी अरविन्द केजरीवाल का स्वास्थ्य११ वे दिन स्थिर और असहयोगियों की संख्या साड़े ८ लाख पहुंची

आम आदमी पार्टी[आप] ने आज दिल्ली की सरकार के समक्ष कुछ प्रश्न उठाये हैं[१]यदि आप द्वारा बिजली पानी के लिए चलाये जा रहे सविनय अवज्ञा आन्दोलन से देश में अराजकता का खतरा है तो ८ लाख दिल्ली वासियों की आवाज को दिल्ली की मुख्य मंत्री द्वारा अनसुना कर देना क्या कुशासन नहीं है
[२] दिल्ली वासिओं की व्यथा का वर्णन करने वाले ८ लाख पत्रों को रोकने के लिए १००० पोलिस वालों की शक्ति वेस्ट की गई| ट्राफिक व्यवस्था को जाम कराया गया| दिल्ली की सरकार का एक दो कर्मचारी इन पत्रों को क्या स्वीकार नही कर सकता था|[३].दिल्ली की सडकों पर रोजाना इतना हेवी ट्राफिक रहता है हज़ारों वेहिकल्स चलते रहते हैं ऐसे में मात्र २७२ आटो रिक्शा से क्या खतरा हो सकता था |[४]इन के लिए कोई विशेष व्यवस्था या मार्ग की मांग नहीं की गई फिर इन्हें भैरों मंदिर के समीप क्यूं रोक दिया गया| [५]दिल्ली के पावर मिनिस्टर हारुन युसूफ ने इस आन्दोलन को कानून व्यवस्था को बिगाड़ने वाला बताया हैऐसे में बिजली पानी के बिलों में भ्रष्टाचार करके बेतहाशा बढोत्तरी करने से क्या कानून का पालन हो रहा है|

आन्दोलन को समर्थन

पार्टी प्रवक्ता के अनुसार बिजली पानी के बिलों को नहीं देने की शपथ लेने वालों की संख्या ८३३४६४ पहुँच गई है| अनेकों सोशल आर्गेनाईसेशन्स इस आन्दोलन को समर्थन देने आ रहे है|अरुणा रॉय के एम् के एस एस और मेध पाटेकर की संस्था एन ऐ पी एम् ने आप के इस सिविल डिसोबेडिएंस मूवमेंट को समर्थन दे दिया है|

डिस्कोम पर हमला

आप के नेताओं ने दिल्ली में डिस्कोम्स के नवीनतम स्टेटमेंट को आड़े हाथों लेते हुए कहा है के यदि इस आन्दोलन से तीनो डिस्कोम कंपनियों को कोई हानि नहीं है तो उन्हें अभी तक के अपने कलेक्शन को पारदर्शी बनाना चाहिए| यदि उनके एकाउन्स में कोई हेरा फेरी नहीं है तो इन्हें अपने एकाउन्स कैग से आडिट करलेने में परहेज क्यूं है?

हेल्थ बुलेटीन

प्रवक्ता के अनुसार उपवास कर रहे अरविन्द केजरीवाल का स्वास्थ्य आज ११ वे दिन स्टेबल है| स्थिर है|
[१] ब्लड प्रेशर ===१०८/७१
[२]पल्स========६७
[३]शुगर =======१२३
[४]केटों [Ketone] =३+

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नो प्रॉफिट नो लास के आधार पर कालोनियों में पैंठ लगवा कर आम आदमी को राहत दी जासकती है

[मेरठ]फोटो कोलाज में दिखाया गया स्थल एतिहासिक मेला नौचंदी स्थल नहीं है क्योंकि मेला नौचंदी लगभग तीन सप्ताह बाद सजेगी |कोलाज में दिखाया गया स्थल पॉश गंगानगर में लगाने वाली साप्ताहिक पैठ का है|यहाँ रौजाना की जरुरत का हर सामान[विशेषकर रसोई] उपलब्ध है|बाज़ार से सस्ता और ताज़ा है|सप्ताह के प्रत्येक सोमवार को यह पैंठ सजाई जाती है|इसके माध्यम से सैंकड़ों छोटे कारोबारी अपना रोज़गार पाते हैं और हज़ारों छेत्र वासी शापिंग का लाभ प्राप्त करते हैं|
इस कोलाज में तीन तथ्यों को कैद किया गया है[१] दिन में भी सरकारी लाईट जल रही है[२]शाम के समय पैंठ में छोटी छोटी लगभग सौ लाईटें जल रही है[३]दिन में कारोबारी बेटरी की लाईट का इन्तेजाम कर रहा है|

नो प्रॉफिट नो लास के आधार पर कालोनियों में पैंठ लगवा कर आम आदमी को राहत दी जासकती है

नो प्रॉफिट नो लास के आधार पर कालोनियों में पैंठ लगवा कर आम आदमी को राहत दी जासकती है

भारत में पैंठ का चलन पौराणिक काल से चला आ रहा है सो मेरठ में पैंठ लगाना कोई अजूबा नहीं है यह आम जन की सुविधा है +जरुरत है |दुर्भाग्य से वर्तमान कर्णधार इस तरफ से आँखें मूंदे हैं और बड़े बड़े माळ+शोरूम बनाने में ही व्यस्त हैं|इस मानसिकता के चलते आम जन प्रति दिन पिसने के लिए अभिशिप्त है|इस बात के समर्थन में इस पैंठ में एक उद्हारण देना जरुरी है|यहाँ दिन से ज्यादा शाम को खरीदरी ज्यादा होती है ग्राहक कहीं अन्धेरा देख कर वापिस न लौट जाये ठेले और फड़ वाले छोटे छोटे कारोबारी भी किराए की लाईट लेने को मजबूर हो जाते हैं|इस छोटी सी एक लाईट को मात्र दो तीन घंटे के लिए किराए पर लेने के लिए २५ से ३० रुपये देने पड़ते हैं|अब मीलों दूर पैदल चल कर यहाँ रोज़गार करने वाले महज १०० या १२५ रुपये ही कम पाते हैं ऐसे में अपनी कमी का एक चौथाई उन्हें लाईट का किराया देना पड़ जाता है|
दूसरी तरफ स्ट्रीट लाईट्स दिन में भी जलती रहती है| अर्थार्त गवर्नेंस का भाव है|अब यह कहना तो अनुचित नहीं होगा के कमोबेश सारी राजनीतिक पार्टियां +सरकारें +निगम और परिषद् आम आदमी के हित की बात करती रहती हैं लेकिन आम आदमी से कितनी दूर रहती हैं यह इस चित्र में साफ दीखता है|अगर हर नई कालोनी में एक पैंठ के लिए जगह एलोट कर दी जाये वहां स्ट्रीट लईतें लगवा दी जाये तो आम आदमी को कुछ राहत मिल सकेगी|यहाँ यह अभिप्राय कतई नही है के इन्हें फ्री में लाईट या जगह दी जाये | आवश्यक नो प्रॉफिट नो लास के आधार पर व्यवस्था की जा सकती है |
आज कल माळ कल्चर के चलते बेशक एअरपोर्ट के निर्माण के लिए प्रदेश और केंद्र सरकारें आमने सामने आगई हैऔर विकास के झंडे गाड़ने को तत्पर दिख रही हैं इसीलिए बेशक शहरों में विकास के नाम पर शोरूम बनाओ बड़े बड़ेमाल बनाओ लेकिन उसके साथ ही आम आदमी के लिए पैंठ कल्चर को भी आगे बढाओ इससे अतिक्रमण +अपराध और यातायात आदि अनेकों शहरी समस्याएं स्वत दूर हो जायेंगी |