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Category: Pakistan

पाकिस्तान में निर्वाचित संसद और न्यायपालिका फिर आमने सामने

पाकिस्तान की निर्वाचित संसद और न्यायपालिका में सुपरमेसी के लिए टकराव थमने का नाम नहीं ले रहा है|अदालत की अवमानना से बचाव सम्बन्धी संसद के संशोधन को पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट ने बीते दिन गैर कानूनी करार दे दिया है|
चीफ जस्टिस इफ्तिकार मोहम्मद चौधरी की अध्यक्षता वाली पांच जजों की बेंच ने कंटेम्प्ट आफ कोर्ट एक्ट २०१२ के अंतर्गत कार्यवाही नहीं किये जाने पर आलोचना करते हुए इस संशोधन को कोर्ट की अवमानना करने वालों को प्रेरित[एनकरेजिंग] करने वाला संशोधन बताया है
गौरतलब है की पूर्व पी एम् जिलानी द्वारा कोर्ट के आदेशों के बावजूद स्विस बैंकों से राष्ट्रपति आसिफ अली ज़रदारी की जामा पूँजी के विषय में कोई खतोकिताबत नहीं की थी इसीलिए उन्हें बाहर का रास्ता दिखाया गया अब नए पी एम् भी जिलानी की राह पर हैं और उनका टकराव भी सुप्रीम कोर्ट से हो गया है \
स्विस बैंक को पत्र लिखने की तिथि अब ८/८-२०१२ कर दी गई है|

पाकिस्तान द्वारा भारत में बैंकिंग की इच्छा जताई गई

भारत और पाकिस्तान में आर्थिक और व्यापारिक सम्बन्ध सुधारने की दिशा में पाकिस्तान द्वारा भारत में बैंकिंग छेत्र में परिचालन की इच्छा जताई गई है |
पाकिस्तान बैंक गवर्नर यासीन अनवर द्वारा नॅशनल बैंक आफ पकिस्तान और यूनाईटेड बैंक लिमिटेड को भारत में परिचालन की इजाज़त दे दी गई है
भारत में पाकिस्तानी निवेश को इज्ज़ज़त दिए जाने के बाद यह सकारत्मक जवाब पाकिस्तान से आया है|
अभी हाल ही में अमेरिकी बैंक एच एस बी सी के प्रकरण से सीख लेते हुए आर बी आई द्वारा विदेशी बैंको पर वाच डॉग का कार्य करना लाज़मी होगा

पकिस्तान में बर्खास्त प्रधान मंत्री के बेटे ने जीती पिता की संसदीय सीट

भारत और पाकिस्तान में बहुत समानताएं हैं इसका उदहारण पाकिस्तान के मुल्तान में हुए एक उप चुनाव में देखने को मिला | यूं तो भुट्टो वंशवाद ही पर्याप्त है उदहारण के लिए मगर अब मुल्तान में भी पिता युसूफ रजा गिलानी की रिक्त सीट पर उनके पुत्र अब्दुल कादिर गिलानी ने जीत दर्ज़ की है|अदालत ने पीपीपी के युसूफ रजा गिलानी को ना केवल प्रधान मत्री पद से हटाया बल्कि उनकी संसदीय सीट को भी खाली करा दिया |इसके फलस्वरूप वहां उपचुनाव हुए और जनता ने गिलानी के पुत्र अब्दुल कादिर गिलानी के सर पर जीत का सेहरा सजा दिया| गिलानी ने अपने प्रतिद्वंदी पी एम् एन एल +तहरीके इन्साफ समर्थित शौकत बोसान को ४००० वोटों से पराजित किया
बेशक चार हज़ार वोटो से जीत कोई बड़ी जीत नहीं कही जा सकती मगर इस चुनाव में वहां की न्यायपालिका को निशाना बनाया गया था और इस जीत को न्यायपालिका के विरुद्ध जनता का फैसला बताया जा रहा है|

क्रिकेट मैचों का पाकिस्तान में भी स्वागत

पकिस्तान और भारत में क्रिकेट मैचों के समझौते का पकिस्तान में भी स्वागत किया गया है|
प्रेसिडेंट आसिफ अली जरदारी ने कहा है की क्रिकेट से दोनों देशों में विशवास कायम होगा और मेन टू
मेन कान्टेक्ट से संबधों में सुधार भी होगा |गौरतलब है की मुम्बई में २६/११ की आतंकवादी घटना के बाद से
दोषियों को पकड़ने में पाकिस्तान के असहयोग पूर्ण व्यवहार से दोनों देशों में क्रिकेट नहीं खेली
गई है अब यह निर्णय दोनों देशों के संबंधों में आई खटास को कम करने में सहायक होगा |
भारत में यद्यपि शिव सेना +भाजपा+और महारष्ट्र कांग्रेस इसकी खिलाफत में है मगर दोनों देशों की सरकारे और क्रिकेट बोर्ड
इसकी फेवोर में है |

पाक अदालत ने २६/११ पर अपने कमीशन की रिपोर्ट को बताया गैरकानूनी

26/11 मामले में जांच करके गए पकिस्तान के सभी जुडिशियल कमीशन की रिपोर्ट को गैर कानूनी घोषित करते हुए उन्हें दोषिओं के विरुद्ध एविडेंस स्वीकार करने से मना कर दिया गया है|रावलपिंडी में एंटी टेरोरिस्म अदालत १ के जज हबीब उर रहमान ने यह आदेश पारित किये हैं\
२६/११/२००८ में मुम्बई अटैक की जांच के लिए मार्च में पाकिस्तानी जुडिशियल कमीशन भारत आया था उन्होंने सात दोषिओं की संलिप्तता की जाँच की इन सात में से एक लश्करे तईबा के कमांडर जाकिर रहमान लाखवी भी हैं|
अदालत ने यह कहते हुए अपने देश की जुडिशियल कमीशन की रिपोर्ट को गैर कानूनी घोषित कर दिया किकमीशन को भारत में गवाहों से काउंटर एक्सामिन कि इजाजत नहीं दी गई |गौर तलब है कि २००९ से पञ्च बार जज बदल चुके हैं अब इस नकारत्मक रुख से दोनों देशों के संबधों पर असर पड़ना लाजमी है\इस रुख के मध्य्नाज़र अब पाकिस्तान में भारत के किसी भी कमीशन का जाना किसी भी द्रष्टि से लाभकारी या उपयोगी नहीं हो सकेगा
क्या ऐसे में क्रिकेट डिप्लोमेसी का कोई ओचित्य रह जाता है

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पाकिस्तान से क्रिकेट के नाम पर देश के क्रिकेटर्स बंटते नज़र आ रहे हैं

पाकिस्तान से क्रिकेट के नाम पर देश के क्रिकेटर्स बंटते नज़र आ रहे हैं |सुनील गवास्कार ने जहां २६/११ के आतंकी हमले के आरोपियों को शाह देने वाले पकिस्तान के साथ क्रिकेट डिप्लोमेसी की मुखालफत करते हुए कहा है की अभी तो क्रिकेट का पूरा केलेंडर व्यस्त है ऐसे में पाकिस्तान के लिए बीच में टाईम निकालने की बी सी सी आई को क्या जल्दी है|अभी तक पकिस्तान के साथ २६/११ का मामला भी लंबित ही है मुम्बईकर होने के कारण उन्हें इस निर्णय से पीड़ा हुई है|
दूसरी तरफ एक अन्य वरिष्ठ क्रिकेटर बिशन सिंह बेदी ने पकिस्तान के साथ क्रिकेट खेले जाने की वकालत करते हुए इसे सही दिशा में लिया गया सही कदम बताया है|जहीर अब्बास ने भी क्रिकेट को जरुरी बताया है|
भाजपा+कांग्रेस+शिव सेना और अनेक क्रिकेटर्स इस खेल के विरुद्ध हो रहे है तब बी सी सी आई पर खेल को लेकर ऐसा कौन सा दबाब आ पडा है की सबके विरोध के बावजूद पाकिस्तान और भारत में क्रिकेट खिलाने को उतावला है|

पाकिस्तान के साथ क्रिकेट स्वीकार नहीं

भारत और पकिस्तान में जब से क्रिकेट खेले जाने की बात आउट हुई है तभी से भारतीय खेल जगत और राजनीति में भुन्चाल सा आ गया है |शिव सेना के बाद अब भाजपा और क्रिकेट के वरिष्ठ खिलाडिओं ने भी इसकी मुखालफत शुरू कर दी है|सुनील गवास्कार ने खुले आम भारत और पकिस्तान में क्रिकेट मैच खेले जाने का विरोध किया है
२००८ में मुम्बई पर आतंकी हमले के बाद से पाकिस्तान से कोई भी क्रिकेट मैच नहीं खिला जा सका है |अब बी सी सी आई ने पी सी बी से पेक्ट करके दिसंबर में तीन एक दिवसीय खेलने का करार किया है|२०-२० भी खेले जाने हैं| भाजपा के अनुसार मुम्बई हमले के दोषिओं को अभी तक पाकिस्तान भारत को सौपने को तैयार नहीं है ऐसे में उसके साथ क्रिकेट के सम्बन्ध स्वाकार्य नहीं हो सकते

आसिफ अली ज़रदारी ने अपने पी एम् को अदालती अवमानना से बचाया

पाकिस्तान की सर्वोच्च अदालत से प्रधानमंत्री को अवमानना से बचाने के लिए राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने एक बिल पर हस्ताक्षर कर दिए हैं|इसके अनुसार अब राष्ट्रपति और प्रधान मंत्री पर अदालत की अवमानना का मुकद्दमा नहीं चलाया जा सकेगा \
गौरतलब हे की सर्वोच्च नयायालय द्वारा लगातार प्रधान मंत्री पर दबाब बनाया जा रहा था की स्विस बैंकों में जमा जरदारी की जर[धन]की जांच कराये |इसी सिलसिले में पूर्व प्रधान मंत्री जिलानी को बर्खास्त भी कर दिया गया था अब फिर से सर्वोच्च अदालत ने नए प्रधान मंत्री को हिदायत दी है की स्विस बैंकों में जरदारी के धन का पता लगाया जाए |अब पुनः प्रधान मंत्री कहीं अदालती अवमानना का शिकार ना बना दिए जाएँ पार्लियामेंट में यह नया क़ानून बना दिया गया है |इससे अदालत पर संसद की सर्वोच्चता भी स्थापित कर दी गई है|