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चौधरी अजित सिंह अरबों रुपयों की लेनदारी तो वसूल नहीं पा रहे अब एयर इंडिया के निजी करण के लिए बयानों के लट्ठ घुमा रहे हैं

झल्ले दी झाल्लियाँ गल्लां

वाम पंथी चिंतित नेता

ओये झल्लेया ये चौधरी अजित सिंह को कौन सा कीड़ा काट गया ओये अच्छे खासे चलते चलते अब सरकारी करियर एयर इंडियाका निजीकरण करने पर तुल गए हैं|ओये[१] निजी एयर लाइन्स से दो हज़ार करोड़ की लेन दारी इनसे वसूली नही जा रही[२] ड्रीम लाइनर की एवज में बोइंग कंपनी से हर्जाना माँगा नहीं जा रहा[३] इनसे विदेशी निवेश लाया नहीं जा रहा[४] अपने गृह प्रदेश के साथ मंडल में भी छोटे एयर पोर्ट के निर्माण के लिएइनकी दाल नहीं गल रही ऐसे में अब ये महाशय एयर इंडिया के ही निजी करण के लिए लट्ठ घुमाने लग गए हैं|सिविल एविएशन मंत्री की हेसियत से चौधरी अजित सिंह ने चुनावों से मात्र छह महीने पहले मीडिया के समक्ष फरमाया है कि यदि राजनितिक इच्छा शक्ति जागृत हो जाये तो एयर इंडिया को ज़िंदा रखने के लिए इसका निजी करण किया जाना चाहिए|ओये ये लोग अपने खर्चे तो कम नहीं कर रहे उलटे बड़े जहाज भर कर लोगों को फ्री में लन्दन तक की सैर करा रहे हैं और अपनी पार्टी के लिए निशुल्क पब्लिसिटी लेने में लगे हैं और दूसरी तरफ ऐसे कर्मचारी विरोधी ब्यान देने में लगे हैं|

झल्ला

ओ मेरे भोले कामरेड ये तो आप जी ने भी मान लिया कि चुनाव आ रहे हैं ऐसे में चौधरी अजित सिंह की सारी उड़ानों पर पाबन्दी लगनी शुरू हो गई है| बेशक इनकी एयर इंडिया बेल आउट की मोहताज है लेकिन इसके बावजूद कंपनी ने बीते दिनों साडे छह हज़ार करोड़ रुपयों के बेल आउट की मांग कर दी इसमें से जितनी राशि इस वर्ष दी जानी थी उस पर भी वित्त मंत्रालय ने वीटो लगा दिया | चुनावों में इनकी पार्टी तीन सांसदों को तेरह करने में जुटी है मगर उत्तर प्रदेश में सपा की साइकिल से बार बार धकेला जा रहा हैअब ये तो आप भी मानोगे कि २००९ में दस सीटों पर चुनाव लड़ा पांच पर जीते इनमे से भी दो भाग गए अब बचे तीन इन्हें तेरह करके ही अगली संसद में दाएँ तरफ अच्छी सीट मिल सकेगी इसीलिए लगता है कि चौधरी अजित सिंह जिस तरह बयानों के लट्ठ घुमा रहे हैं उन्हें यूं पी ऐ से पर्याप्त सीटें नहीं मिल रही |कांग्रेस का बाहर से समर्थन कर रही सपा के चलते जाट और मुस्लिम समीकरण भी बिगड़ गया है ऐसे में कामरेड नए विकल्प तलाशना तो जायज है और उसके लिए इस प्रकार से भूमिका बाँधना तो बनता ही हैक्यों ठीक है न ठीक ?