Ad

रालोद सांसद जयन्त चौधरी ने हिंसाग्रस्त मुजफ्फरनगर में तीन पीढ़ियों से चले आ रहे अपने वोट बैंक के साथ मिलने में दोबारा सफलता हासिल की

सांसद जयन्त चौधरी ने मुजफ्फर नगर में तीन पीढ़ियों से चले आ रहे अपने वोट बैंक के साथ मिलने में दोबारा सफलता हासिल की सांसद जयन्त चौधरी ने यूं पी के दंगों की सीबीआई जांच की मांग करते हुए न्याय न मिलने तक लड़ने का संकल्प दोहराया| गौरतलब है कि रालोद के राष्ट्रीय अध्यक्ष और केन्द्रीय सिविल एविएशन मिनिस्टर चौ.अजित सिंह को मुजफ्फर नगर में गिरफ्तार करके लौटाया जा चुका है|| मुख्य मंत्री और प्रधान मंत्री के दौरों का एलान हो चूका है ऐसे में स्थानीय नेता की अपने ही छेत्र में अनुपस्थिति से रालोद की प्रतिष्ठा पर स्वाभाविक प्रश्न लग रहा था| जिसके उत्तर में स्थानीय नेता का अपने लोगों से मिलना जरुरी था|
उत्तर प्रदेश प्रशासन के साथ लुका छुप्पी के खेल में राष्ट्रीय लोकदल महासचिव +लोकसभा सांसद जयन्त चौधरी आज दूसरी बार प्रशासन को धत्ता बताते हुए चुपके से मुजफ्फरनगर पहुंचे और तीन पीढ़ियों से चले आ रहे अपने वोट बैंक के साथ मिलने में सफलता हासिल की | उन्होंने हिंसा में मारे गए लोगों के परिवार वालों से बातचीत कर अपनी संवेदना व्यक्त की और लोगों से आग्रह किया कि वे मिलजुलकर रहें क्योंकि यही इस क्षेत्र की परंपरा रही है।
दंगों की सीबीआई जांच की मांग करते हुए जयन्त चौधरी ने राज्य सरकार से न्याय न मिलने तक लड़ने तथा अयोग्य, भ्रष्ट और निर्दयी सपा सरकार को राज्य की सत्ता से उखाड़ फेंकने का संकल्प लिया। उन्होंने कहा कि 7 सितम्बर तथा उसके बाद की घटनाओं में प्रशासन की भूमिका की जांच होनी चाहिए।
जयन्त चौधरी ने तड़के सुबह 5 बजे बिना किसी पार्टी पदाधिकारी को सूचित किए तथा बिना सुरक्षा के राज्य में प्रवेश किया तथा मुजफ्फरनगर में तीन गांवों रहमतपुर, बसेड़ा और बोखलहेड़ी का दौरा किया। वह सबसे पहले बसेड़ा गांव पहुंचे और बृजपाल सिंह राणा के परिवारीजनों से मिले एवं अपनी संवेदना व्यक्त की। बृजपाल सिंह महापंचायत से लौटते समय 7 सितम्बर 2013 को मारे गए थे। उनकी चार लड़कियां तथा एक लड़का है, तीन लड़कियों की शादी हो चुकी है तथा लड़का 12वीं में पढ़ रहा है। उसके बाद वह रहमतपुर पहुंचे और अजय के परिवारीजनों से मिले। अजय की 7 सितम्बर 2013 को जॉली गांव में हिंसा के दौरान मौत हुई थी।
उसके बाद जयन्त चौधरी बोखलहेड़ी गांव पहुंचे तथा मृतक सोहनवीर और शौकत के परिवारीजनों से मिले। बाद में मुजफ्फरनगर में पार्टी के सांसद संजय सिंह चौहान के निवास पर जयन्त चौधरी ने दोनों समुदायों के बुजुर्ग लोगों के साथ बैठक कर पार्टी अध्यक्ष चौ. अजित सिंह का संदेश सुनाया जिसमें उन्होंने कहा, “मैं तीन पीढ़ियों के इस रिश्ते को नफरत के माहौल से टूटने नहीं दूंगा।” बैठक में दोनों समुदाय के लोगों में शाही इमाम मौलाना जाकिर, मौलाना फुरकान, मौलाना जमालुद्दीन, कारी जकी, मौलाना जैलुद्दीन, कृष्णपाल राठी, सुधीर भारती, ठा. अरुण सिंह तथा अन्य लोग उपस्थित थे।
रालोद राष्ट्रीय महा सचिव जयन्त चौधरी ने कहा, “मैंने दूसरी बार प्रभावित क्षेत्र का दौरा किया है। मैंने दोनों समुदायों के नेताओं तथा परिवारों से मुलाकात की है। लोग प्रशासन से दुखी तथा नाराज हैं। उत्तर प्रदेश सरकार लोगों के जीवन से खिलवाड़ करने के लिए पूरी तरह से जिम्मेदार है। मैं सीबीआई जांच तथा जान-माल की हानि का उचित मुआवजा देने की मांग करता हूं।”
जयन्त ने शांति तथा सुलह के लिए अपने-अपने समुदायों को मजबूत संदेश देने के लिए गांव के बुजुर्गों की भूमिका पर जोर दिया। जयन्त चौधरी ने पार्टी के लोगों को शांति बहाल करने तथा सक्रिय रूप से गांवों का दौरा करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा, “जो लोग असुरक्षित महसूस कर रहे हैं, मैं उनसे शांति बनाए रखने का आग्रह करता हूं तथा जो लोग अपने घर छोड़कर चले गए हैं, मैं उनको वापस लाने के लिए उनके गांवों में अनुकूल माहौल तैयार करने का कार्य करूंगा।”
रालोद ने दावा किया है कि उनके नेता का यह साधारण दौरा उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के दौरे से अलग है जिन्होंने 27 अगस्त 2013 को कवाल में पहली घटना के बाद लगभग 20 दिन बाद प्रभावित जिले का दौरा किया है। मुजफ्फरनगर तथा शामली में कानून-व्यवस्था को बनाए रखने के बजाए प्रशासन मुख्यमंत्री के इस दौरे की सुरक्षा व्यवस्था में पूरा जोर दे रहा है।
दूसरी बार जयन्त क्षेत्र में घुसने में कामयाब रहे। इससे पहले 13 सितम्बर 2013 को उत्तर प्रदेश पुलिस के रोकने से पहले ही उन्होंने मेरठ जनपद के तीन गांवों मोर खुर्द, मोहम्मदपुर शिखस्त तथा निलोखा का दौरा किया था। गाजियाबाद में प्रवेश करने के प्रयास में सांसद जयन्त चौधरी को 9 सितम्बर 2013 को गिरफ्तार किया गया था। रालोद अध्यक्ष तथा केन्द्रीय नागर विमानन मंत्री चौ. अजित सिंह को 9 सितम्बर 2013 को उत्तर प्रदेश में नहीं जाने दिया उसके बावजूद भी 12 सितम्बर को उन्हें गिरफ्तार करके छोड़ा गया था|