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वीरप्पा जी मोगली बन कर पब्लिक ट्रांसपोर्ट पर दफ्तर तक का सफ़र केवल बुधवार को ही क्यूं करेंगे?

झल्ले दी झल्लियाँ गल्ला

एक उत्साही कांग्रेसी

ओये झाल्लेया यारा ये तो कमाल ही हो गया ओये हसाड़े पेट्रोलियम मंत्री वीरप्पा मोइली ने बुधवार को सरकारी गाडी के बजाय सार्वजनिक ट्रांसपोर्ट से सफ़र करने की घोषणा कर दी है इनके देखा देखी उनके मंत्रालय के सभी छोटे बड़े भी सरकारी वाहन का मोह त्यागने को बाध्य हो जायेंगे ओये अगर इस चेन में जनता की भी कड़ियाँ जुड़ने लग गई तो तेल खर्च में ५ अरब डॉलर्स की बचत हो जायेगी के नहीं ?

झल्ला

ओ मेरे चतुर सुजाण जी आप जी के वीरप्पा जी मोगली बन कर केवल बुधवार को ही पब्लिक ट्रांसपोर्ट पर दफ्तर तक का सफ़र करेंगे यहाँ तक तो बात समझ में आती है लेकिन उनका यह कदम उनके मंत्रालय+सरकार+ समाज के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बनेगा इसमें थोड़ा सा डाउट है+ संशय है+ संदेह है +बोले तो शक है |
क्या कहा कैसे तो सुनो हसाड़े मुल्क में दो नेता ऐसे हुए हैं जिन्होंने समाज की दिशा को सही मार्ग देने में अहम भूमिका निभाई है|एक थे लाल बहादुर शास्त्री और दूसरे थे राजीव गाँधी|अभी भी नहीं समझे तो सुनो लाल बहादुर शास्त्री के एक आवाज पर पूरे देश में सोमवार को एक समय का खाना छोड़ दिया गया और शादी व्याहों में भी केवल आलू का प्रयोग होने लग गया था दूसरे राजीव गाँधी ने सरकारी दफ्तरों में शनिवार की छुट्टी करवा कर पांच दिन के सप्ताह की शुरुआत करवाई थी इन दोनों प्रधान मंत्रियों का मकसद बचत,बचत और केवल बचत ही था|ये डॉन अभियान सफल भी हुए इस लिए नहीं के ये दोनों कांग्रेसी प्रधान मंत्री थे बल्कि इस लिए कि इन दोनों के सार्वजानिक जीवन प्रेरणा के वास्तविक स्रोत थे |