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आर बी आई ने खजाना खोला: रेपो रेट ,सीआरआर में चौथाई फीसदी कटौती:18 हजार करोड़ रुपये फ्लोट होंगें

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने आखिर कर खजाने का मुह खोल कर मंगलवार को रेपो रेट और सीआरआर में चौथाई फीसदी की कटौती के साथ बाज़ार में 18 हजार करोड़ रुपये डालने की घोषणा कर दी है|
आरबीआई के गवर्नर डी. सुब्बाराव ने आज मौद्रिक नीति की तीसरी तिमाही समीक्षा पेश करते हुए लघु अवधि की ऋण दर (रेपो दर) में चौथाई फीसदी की कटौती की घोषणा की है| बताया जा रहा है कि मौजूदा दशक में सबसे धीमी वृद्धि का सामना कर रही अर्थव्यवस्था को सहारा देने के लिए यह फैसला किया है|.बैंकों को अपनी जमा का एक निश्चित अनुपात केंद्रीय बैंक के पास रखना होता है, जिससे सीआरआर कहा जाता है और बैंक अपनी लघु अवधि की जरूरत के लिए केंद्रीय बैंक से जिस दर पर उधारी लेते हैं, वह रेपो दर है|
रिजर्व बैंक के इस फैसले के बाद लघु अवधि की ब्याज दर 0.25 % घटाकर 7.75 % हो गई है. वहीं नकद आरक्षित अनुपात (सीआरआर) में चौथाईफीसदी की कटौती के बाद 4 % हो गया है.इस कटौती से 18 हजार करोड़ रुपये आएंगे। आरबीआई के फैसले के बाद कर्ज के सस्ता होने के अनुमान लगाये जा रहे हैं आर बी आई ने समय समय पर सीआरआर में कटौती कर थोड़ी राहत देने की कोशिश जरूर की है मगर अप्रैल 2012 से लेकर अबतक आरबीआई ने रेपो रेट में कोई राहत नहीं दी थी। इससे पहले रिजर्व बैंक ने अप्रैल 2012 में रेपो और रिवर्स रेपो दर में 50 आधार अंकों की कटौती की थी.

रेपो रेटक्या है?

Governor of R B I D. Subba rao


आर बी आई जिस दर पर कम वक्त के लिए बैंकों को कर्ज देता है, उसे रेपो रेट कहते हैं. जिस दर पर रिजर्व बैंक को बैंकों से कर्ज मिलता है, उसे रिवर्स रेपो रेट कहते हैं. रेपो रेट घटने से बैंको को रिजर्व बैंक से छोटी अवधि के फंड पर घटी दरों पर कर्ज मिलेगा. इससे बैंक ब्याज दरें घटाकर सकते हैं, जो उनके कस्टमर्स के लिए फायदेमंद साबित होगा.

सीआरआर में कटौती के लाभ

बैंक रेट वह रेट है, जिस पर आरबीआई लंबी अवधि के लिए बैंको को उधार देता है. कैश रिजर्व रेशो के रेट के हिसाब से बैंक अपनी कुल जमा और देनदारियों का कुछ फीसदी हिस्सा रिजर्व बैंक के पास रखते हैं.

ट्रैफिक बीमार हो गया है: महामहिमजी इसके उद्धार के लिए भी एक अदद क्रान्ति बिगुल बजवा ही दीजिये

आज मुझे मेरठ ऐसा बीमार शहर लगा जिसकाइलाज अगर जल्द नही ढूंडा गया तो यह लाईलाज हो जाएगा| अब ढाई किलोमीटर का सफ़र २५ मिनट्स में करना पड़े तो इसे बीमारी ही कहा जाएगा|और अगर इस समय माननीय गवर्नर महोदय का आगमन हो तो इसे अति गंभीर कहा जाएगा|गवर्नर बी एल जोशी ने मेरठ में आयोजित दीक्षांत समारोह मेंएक और कृषि क्रांति की जरूरत पर बल दिया है कृषि विश्वविध्यालय के दीक्षांत समारोह में कृषि क्रान्ति की जरुरत पर बल दिया जाना ही चाहिए लेकिन अगर महामहिम राज्यपाल शहर के बीच में एक नज़र ट्रैफिक पर डाल लेते तो यहाँ के बीमार ट्रैफिक के उद्धार के लिए भी क्रान्ति को जरूरी बताते | आजएस एस डी चौराहा + बेगमपुल +बच्चा पार्क+हापुड़ चौराहा पर ट्रैफिक जाम से रूबरू होना पड़ा |यहाँ तक की जाम में एम्बुलेंस भी अपने सायरन बजाती रही मगर ट्रैफिक पोलिस महज अपनी वी आई पी ड्यूटी ही निभाने में लगी रही|हापुड़ अड्डा चौराहे पर दो पोलिस वाले आम यात्रियों से गाली गफ़्तोर करते देखे गए लेकिन ये लोग मात्र अपनी विभागीय जीप निकलवाने में ही मशगूल रहे | दरअसल शहर के बीचों बीच अनेको रुकावटें खड़ी हैं और दिनी दिन ये रुकावटें नासूर बनती जा रही हैं| भीड़ भाड़वाले चौराहों पर [१]अनाधिकृत वाहन स्टैंड [२]अतिक्रमण[३] ऑटो दोपहिये और तिपहिये छोड़ भी दें तो भी बस और ट्रक जाम की स्थिति पैदा करते दिखाई देते हैं पहले सेना के वाहन छावनी से बाहर कम ही दीखते थे मगर आज कल सेना के ३ टन ट्रक भी कचहरी+ बेगम पुल आदि में दिखाई दे जायेंगे| [४] आये दिन असंतोष व्यक्त करते जुलूस निकलना शहर का नसीब बन गया है |कमिशनरी पार्क तो एक तरह से कोप पार्क बन गया है आये दिन यहाँ कोई न कोई नाराज़ दल या समूह या गुट डेरा डाले रहता है |तिपहिया वाहनों की एक एतिहासिक मानसिकता है जिसके अनुसार अगला पहिया घुसा दो रास्ता अपने आप मिल जाएगा और ये द्रुत गति के दोपहिया वाले तो न जाने कहाँ से निकल कर सामने आ जाते हैं और दिल को धडका कर फुर्र से न जाने कहाँ निकल जाते हैं|वैसे यहाँ ट्रैफिक का मिजाज दुरुस्त करने के लिए इचा शक्ति का भी अभाव नज़र आता है क्योंकि खूनी पुल के किनारे रोज़गार तलाश कर रहे झुग्गी वालों को उजाड़ कर सड़क को चौड़ी करने का काम चल रहा है मगर शहर के दूसरे हिस्सों में शायद भीड़ तंत्र या फिर निज़ी स्वार्थ आड़े जाता है |आये दिन स्टाफ की कमी का रोना भी रोया जाता ही है| माफ़ कीजिये में मेरठ के ट्रैफिक का रोना रो रहा हूँ और उधर टी वी की खबरों में डी एन डी[नोयडा] पर जाम का रौना रोया जा रहा है
इसीलिए महामहिमजी ट्रैफिक की बीमारी को दूर करने के लिए एक अदद क्रान्ति के लिए बिगुल बजवा दीजिये

मोह,माया,ममता,अहम, फरेब को त्यागे बगैर अगर कहूं परमात्मा नहीं मिलता तो झल्ली ही कह्लाउंगी

तांघ माहि दी जली आं
नित काग उडावां खली आन
नै चन्दन दे शोर किनारे
घुम्मन घेरा ते ठाठा मारे
डुब डुब मोहे तारु सारे
शोर करा ते मैं झल्ली आं ।

Rakesh khurana

भाव: आत्मा की सबसे बड़ी इच्छा सद्गुरु परमात्मा को पाने की चाह होती है । सद्गुरु परमात्मा को पाने के लिए खुद को खोना भी पड़ता है तभी परमात्मा की समीपता प्राप्त हो सकती है । जीवन की सबसे बड़ी सार्थकता यही है ।
बुल्ले शाह फरमाते हैं कि हे प्रियतम मैं तेरी चाह में विरह की आग में जल रही हूँ , कागों[क्रो] के रूप में सांसारिक वासनाओं को अपने समीप नहीं आने देती,
संसार के तमाम रिश्ते नाते, कामनाएँ , वासनाएं प्रेम नदी के किनारे इतना शोर मचा रही हैं जिसके कारण आत्मा नदी में उतर ही नहीं पा रही है । तथा नदी भी इतनी भयानक है कि मोह , माया एवं ममता की भँवरे इतनी तेज पड़ती हैं कि तैरने वाला तो तैरने वाला कभी कभी दूसरों को पार पहुँचाने वाली लकड़ी की नाव भी इस में डूब जाती हैं । कितने ज्ञानी विज्ञानी इस नदी में डूब कर मर गए ऐसे में मेरा क्या होगा ? एक तरफ तो मैं तो इन मोह , माया, ममता, अहम्, फरेब, का त्याग नहीं कर पा रही , तथा दूसरी तरफ मैं शोर मचा रही हूँ की मुझे सद्गुरु परमात्मा की समीपता नहीं मिल पा रही, तो लोग तो मुझे झल्ली ही कहेंगे नां ।
सूफी संत बुल्ले शाह का कलाम
प्रस्तुति राकेश खुराना

चीन में अभी तक आदमी और सबसे छोटे अंडे ही बनते थे अब यकायक सबसे बड़े सैनिक एयर ट्रांसपोर्ट प्लेन कैसे बना ?

झल्ले दी झल्लियाँ गल्लां

एक चीनी सैनिक

ओये झाल्लेया देखा हमारी फौज का कमाल| हमारी शिन्हुआ ने बताया है की हमारी फौज ने अपने सबसे बड़े सैनिक एयर ट्रांसपोर्ट प्लेन का टेस्ट सफलता पूर्वक कर लिया है। द यन-20 /ट्रांसपोर्ट-20 नाम का यह प्लेन पूरी तरह से स्वदेशी है | एक बार में 66 टन वजन का सामान ढो सकता है।
यात्री और सामान के ट्रांसपोर्टेशन के अलावा जरुरत पड़ने पर ऐड टू सिविल पावर [राहत और बचाव संबंधी ]कई कामों में मदद दे सकता है|अब तो विश्व में खलबली मच जायेगी|

चीन में अभी तक आदमी और सबसे छोटे अंडे ही बनते थे अब यकायक सबसे बड़े सैनिक एयर ट्रांसपोर्ट प्लेन कैसे बना ?


झल्ला

वाकई भाई इस यां से आपजी की फौज की ताकत कई गुना बढ जायेगी इसके लिए मुबारक|लेकिन एक बात सच्ची सच्ची बताना की अभी तक आपके मुल्क में आदमी छोटे घर छोटे खेत छोटे होते थे और तो और मुर्गी ने अगर सबसे छोटा अंडा [ दो सेंटीमीटर ऊंचा और 2.58 ग्राम वजनी] दिया भी तो वह भी आपके मुल्क शपिंग्बा जिले में दायु नाई के यहाँ दिया था अब ये भीमकाय+ विशाल काय+काल का्य जहाज़ देश में ही कैसे बनने लग गए|

असली ५ रत्न वोह हैं जो हमें हमारे मानव जीवन की वास्तविक मंजिल की तरफ ले जाते हैं

तुलसी या संसार में पांच रत्न हैं सार
साध संगत , सतगुरु शरण , दया , दीन , उपकार ।

Rakesh Khurana

भाव: संत तुलसी साहिब कहते हैं यूँ तो इस संसार में बड़े रत्न हैं , परन्तु वो रत्न जो हमें हमारे मानव जीवन की मंजिल की तरफ ले जाते हैं – वो केवल पांच हैं । पहला रत्न है – किसी साधु अर्थात किसी प्रभु रूप हस्ती की संगत। पहला रत्न जो मरने के बाद भी हमारे साथ जाता है , वो हमारा सतगुरु है ।दूसरा रत्न सतगुरु की शरण है । तीसरा रत्न सब पर दया करना है ।चौथा रत्न हमारी दीनता , हमारी विनम्रता है और पांचवा रत्न सब पर उपकार करना है । संत तुलसी साहिब कहते हैं ये पांच रत्न ऐसे हैं जो इस संसार में भी हमारा साथ देते हैं और उसके बाद भी हमारा साथ देते हैं । यदि हम किसी प्रभु रूप हस्ती के चरणों में बैठकर इन रत्नों को हासिल कर लें तो हमारी जिंदगी का जो ध्येय है – अपने आप को जानना और प्रभु को पाना – वो पूरा हो जायेगा । हमारी ये जिंदगी संवर सकती है और अगली जिंदगी भी ।
संत तुलसी साहिब हाथरस वाले
प्रस्तुति राकेश खुराना

आशीष नंदी का समाजशाष्त्र कुछ ठीक कुछ गलत

झल्ले दी झल्लियाँ गल्लां

एक दलित नेता

ओये झल्लेया ये समाज शास्त्री आशीष नंदी को कौन सा कीड़ा काट खा गया |ओये महाराजों के शहर जयपुर में आते ही इस बंगाली बाबू ने एस सी/ओ बी सी /एस टी सभी को एक लाईन से ही भ्रष्ट बता दिया | ये कैसा समाज शास्त्र हुआ?ये तो सरासर नाइंसाफी है|इस समाज शाष्त्री को तत्काल गिरफ्तार करके इसे असली समाज शाष्त्र सिखाना चाहिए|

आशीष नंदी का समाजशाष्त्र कुछ ठीक कुछ गलत


झल्ला

वाकई भाई जी आपका गुस्सा जायज है |लेकिन इसके साथ आशीष ने यह भी कहा है कि स्वर्ण या बड़े लोग अपराध करके बच निकलते हैं |वाकई सम्मान देकर व्यापार लेना+ नौसिखियों को राजनीति में लाकर अपनी राजनीतिक ताकत बढाना +मीडिया में पब्लिसिटी दिलवा कर अपने प्रोडक्ट,संस्थान को बढावा देना आज कल फैशन बन चुका है और इसकी जांच भी नहीं होती |क्यों ठीक है न ठीक?

इंग्लैंड ने टास जीता,मैच जीता, आई सी सी की रैंकिंग में पहला स्थान भी कब्जाया

इंग्लैंड ने टास जीता |मैच अपने नाम किया और १२० अंक हासिल करके आई सी सी की रैंकिंग में पहला स्थान कब्जाया| 3० मिनट देरी से 9.3० बजे शुरू हुए इस मैच में मैन आफ मैच का खिताब सेञ्चुअरी मेकर इयान बेल को दिया गया जबकि मैन आफ दी सीरीज के लिए सुरेश रैना को चुना गया| हिमाचल प्रदेश क्रिकेट संघ (एचपीसीए) स्टेडियम में पहली बार [अन्तराष्ट्रीय] खेले गए पांचवें और अंतिम एकदिवसीय मुकाबले में इयान बेल की शानदार नाबाद शतकीय पारी (113) की बदौलत भारत को सात विकेट से पराजित हुआ| यह मैच हारने के बाद भी भारत ने यह शृंखला 3-2 से अपने नाम की लेकिन ई सी सी रैंकिंग में पिछड़ गया|

इंग्लैंड ने टास जीता,मैच जीता, आई सी सी की रैंकिंग में पहला स्थान कब्जाया

टॉस हारने के बाद पहले बल्लेबाजी करने उतरी भारतीय टीम ने खराब शुरुआत से उबरते हुए 49.4 ओवरों में सभी विकेट गंवाकर 226 रन बनाए। सुरेश रैना (83) की शानदार अर्धशतकीय पारी रही | रोहित शर्मा चार रन के कुल योग पर टिम ब्रेस्नन की गेंद पर दूसरे स्लिप में जेम्स ट्रेडवेल के हाथों लपके गए, जबकि विराट कोहली का कैच शून्य पर ट्रेडवेल ने लपका।
रोहित का विकेट 13 रन के कुल योग पर गिरा, जबकि कोहली भी इसी योग पर आउट हुए। युवराज सिंह 24 रन पर आउट हुए | उनका विकेट स्टुअर्ट फिन ने लिया। गम्भीर का विकेट 49 रनों के कुल योग पर गिरा।
युवराज खाता तक नहीं खोल सके,
इसके बाद कप्तान महेंद्र सिंह धौनी (14) और रैना ने पांचवें विकेट के लिए 3० रनों की साझेदारी की। धौनी ने 23 गेंदों पर दो चौके लगाए। उनका विकेट 79 रनों के कुल योग पर गिरा।इसके जवाब में बल्लेबाजी करने उतरी इंग्लैंड की टीम ने 47.2 ओवर में तीन विकेट के नुकसान पर 227 रन बना लिए।
इंग्लैंड की ओर से इयान बेल ने नाबाद 113 रनों की शतकीय पारी खेली। उन्होंने अपनी पारी में 13 चौके और एक छक्का लगाया। उनका साथ निभा रहे इयोन मोर्गन ने नाबाद 4० रनों की पारी खेली। मोर्गन ने 4० गेंदों में तीन छक्के लगाए। दोनों बल्लेबाजों के बीच चौथे विकेट के लिए नाबाद 84 रनों की साझेदारी हुई।

विकास प्राधिकरण के ट्रक में दहेज़ का सामान ?

विकास प्राधिकरण के ट्रक में दहेज़ का सामान ? मेरठ विकास प्राधिकरण के कर्मचारी और मशीनरी आज कल शादी ब्याहों में दहेज़ ढोने में मंडा है| हमारे वरिष्ठ फोटो ग्राफर को मेरठ के सुभाष बाज़ार में ऐसा ही एक द्रश्य दिखा जिसे उन्होंने केमरे में कैद कर लिया |इस चित्र में दिखाए गए ट्रक पर इसके विभाग का नाम साफ लिखा है |मेरठ विकास प्राधिकरण और ट्रक में रखा सामान किसी भी सूरत में सरकारी नहीं दिख रहा | फोटो ग्राफर द्वारा पूछने पर बताया गया कि यह दहेज़ का सामान है|इसकी पुष्ठी के लिए एम् डी ऐ में सम्पर्क करने पर फोन कल अनुत्तरित ही रही|

आशीष नंदी के एस सी /ओ.बी सी/एस टी/पर ब्यान से सियासी आतिश बाज़ी शुरू

समाजशास्त्री और लेखक आशीष नंदी ने समाज में व्याप्त भ्रष्टाचार के लिए समाज के वर्ग एस सी /ओ.बी सी/एस टी/ को जिम्मेदार ठहराने वाला जयपुर में असमाजी ब्यान दिया |इसके विरुद्ध ऍफ़ आई आर दर्ज़ करा दी गई है |नंदी ने अपने बयाँ पर माफी मांग ली है लेकिन इस सबके बावजूद सियासी हल्के में बयानों की आतिश बाजी शुरू हो गई है |गण तंत्र दिवस पर आयोजित जयपुर साहित्य सम्मेलन में समाजशास्त्री और लेखक आशीष नंदी ने विवादास्पद बयान देते हुए कहा था कि इस दौर में भ्रष्टाचार के लिए पिछड़े और दलित जिम्मेदार हैं।
साहित्य सम्मेलन में नंदी ने कहा कि भ्रष्टाचार के लिए ओबीसी और एससी/एसटी जिम्मेदार हैं। अपनी दलील के समर्थन में उन्होंने उदाहरण भी दिया। मंच पर ही मौजूद एक और साहित्यकार ने आशीष नंदी के बयान का ताली बजाकर स्वागत किया। लेकिन आईबीएन न्यूज चैनल के आशुतोष ने इस बयान का कड़ा प्रतिवाद किया। जैसे ही ये बयान आया वहां मंच पर मौजूद आशुतोष ने बीच में ही टोक कर इसका कड़ा विरोध किया | बाद में आशुतोष ने अपनी बारी आने पर नंदी के बयान पर कड़ी आपत्ति जताई।

आशीष नंदी के एस सी /ओ.बी सी/एस टी/पर ब्यान से सियासी आतिश बाज़ी शुरू

कांग्रेस के राशिद अल्वी भाजपा की लेखी ने इसे दुर्भाग्य पूर्ण बताया
बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की प्रमुख मायावती ने मांग की है कि नंदी को तत्काल जेल भेज देना चाहिए।मायावती का यह भी कहना था कि ऐसा लगता है कि नंदी की टिप्पणी इन वर्गों को बदनाम करने की सोची समझी योजना के तहत आयी है। उन्होंने जयपुर साहित्य महोत्सव के आयोजकों से मांग की कि वह नंदी को इस महोत्सव से निष्कासित करें।
आशीष नंदी का ब्यान था ‘विचारों का गणराज्य’ विषय पर आयोजित सत्र में कहा, “यह अभद्र और असंस्कृत बयान होगा। लेकिन यह सच है कि सबसे भ्रष्ट व्यक्ति ओबीसी, एससी और अब बड़े पैमाने पर एसटी से आ रहे हैं। और जब तक ऐसा होता रहेगा, भारतीय गणराज्य जिंदा रहेगा।” उन्होंने कहा, “मैं एक उदाहरण देना चाहूंगा। सबसे कम भ्रष्ट राज्य पश्चिम बंगाल है। पिछले 100 वर्ष में ओबीसी, एससी, एसटी वर्ग के लोग सत्ता के नजदीक भी नहीं पहुंचे। यह पूरी तरह से स्वच्छ राज्य है।”इस बीच ओबीसी, एससी, और एसटी समुदाय के लोगों ने पुलिस में शिकायत दर्ज करा दी और मांग की कि नंदी को जयपुर साहित्योत्सव से बाहर का रास्ता दिखाएं।नंदी ने विवाद बढ़ता देख कर कहा है कि उनका भाव किसी कि भावनाएं आहत करना नहीं था|उनका कहने का अर्थ है कि एस सी एस टी ओ बी सी अपराध करके सामने आ जाते हैं जबकि स्वर्ण लोग अपराध करके बच निकलते हैं |इसके समर्थन में उन्हने उदहारण भी दिए

एल के अडवाणी के ब्लॉग से :विदेशी लेखकों की कलम से भारतीय धार्मिक पर्यटन का महत्व

एन डी ऐ और भाजपा के सर्वोच्च नेता और वरिष्ठ पत्रकार एल के अडवाणी ने अपने नवीनतम ब्लॉग में विदेशी लेखकों की कलम से भारतीय धार्मिक स्थलोंऔर कुम्भ मेले का महत्व बताया है|उन्होंने बताया है कि आधुनिक प्रौद्योगिकी के प्रवाह से धार्मिक पर्यटकों की संख्या में क्रांतिकारी बढोत्तरी हो रही है यात्रियों की संख्या के सही आंकलन के लिए |केन्द्र सरकार के इसरो नेशनल रिमोट सैंसिंग सेन्टर और राज्य सरकार के उत्तराखण्ड स्पेस एप्लीकेशन सेंटर को मिलकरअधिक विश्वसनीय आकलन संख्या देने पर भी बल दिया । दोनों संगठन हाई रिसोल्यूशन इंडियन सेटेलाइट द्वारा और ग्राऊण्ड बेस्ड इन्फोरमेशन का उपयोग करके कुम्भ के प्रमुख शाही स्नान का नकलन कर सकने में सक्षम हैं | हमारे इंग्लिश के पत्रकार इस उपलब्धि को कम करके आंक रहे हैं|प्रस्तुत है एल के अडवाणी के ब्लाग से

कुम्भ मेला : अन्यत्र दुर्लभ एक नजारा

चालीस वर्षों से अधिक समय से मैं संसद में हूं। एक समय था जब मिलने आने वाले लोग कोई न कोई काम कराने के लिए आते थे। उनमें से अधिकांश ऐसे थे जो टेलीफोन कनेक्शन चाहते थे। उनमें से अधिकतर का कहना रहता था कि उनका नाम प्रतीक्षा सूची में वर्षों से दर्ज है, फिर भी निकट भविष्य में उन्हें टेलीफोन कनेक्शन मिलने की संभावना नहीं दिखती।

एल के अडवाणी के ब्लॉग


मोबाइल फोन के आने के बाद स्थिति आमूलचूल बदल चुकी है। आज शायद ही कोई इस काम के लिए आता होगा। भारत में मोबाइल फोन उपभोक्ताओं की संख्या विश्व के किसी भी हिस्से की तुलना में तीव्रता से बढ़ रही है। ऐसा अनुमान प्रकट किया गया था कि सन् 2010 तक देश में मोबाइल फोन उपभोक्ताओं की संख्या 60 करोड़ से ज्यादा थी और इसके अलावा 15 मिलियन नए उपभोक्ताओं की संख्या हर महीने इसमें जुड़ती जा रही है। इंटरनेट उपयोग करने वालों की संख्या में भी भारी वृध्दि हुई है। सन् 1998 में यह संख्या 1.4 मिलियन थी। आज यह 75 मिलियन से भी ज्यादा है। हार्वर्ड की विद्वान डायना एल एक्क की पुस्तक
‘सेक्रिड जियोग्राफी‘,

जिसे पिछले पखवाड़े मैंने उध्दृत किया था, ने

भारत को ”कैपिटेल ऑफ दि टेक्नालॉजी रिवोल्यूशन” (प्रौद्योगिकी क्रांति की राजधानी)

के रूप में वर्णित किया है।
डायना एक्क की पुस्तक के अंतिम अध्याय का शीर्षक ”

ए पिलग्रिम्स इण्डिया टूडे

” (एक तीर्थयात्री का वर्तमान भारत) है। इसमें वह लिखती हैं:
इससे हमें आश्चर्यचकित नहीं होना चाहिए कि यातायात और संचार क्षेत्र में क्रांति ने तीर्थयात्रियों की संख्या को बढ़ावा दिया है। आधुनिक प्रौद्योगिकी के प्रवाह के चलते कम होना दूर उल्टे तीर्थयात्रा ने नई उर्जा ग्रहण की है।

इंटरनेट, तिरूपति या वैष्णोदेवी की वेबसाइट के

माध्यम से कोई पूजा और विशेष दर्शनों हेतु बुकिंग कर सकता है तथा धर्मशाला में अपना आरक्षण भी करा सकता हैं। यदि कोई किसी कारण से यात्रा पर नहीं जा पाए, तो भी वह तिरूपति मंदिर से प्रात: सुप्रभातम् सुन सकता है और ऑनलाइन दर्शन तथा दान हेतु भी सम्पर्क उपलब्ध है। तीर्थयात्री इंटरनेट के माध्यम से हिमालय स्थित चारधाम यात्रा या अनगिनत अन्य तीर्थस्थलों, पहाड़ों पर स्थित बदरीनाथ से लेकर दक्षिण में तमिलनाडू के रामेश्वरम तक के बारे में अच्छा पैकेज पा सकते हैं।”
इस अध्याय में वैष्णो देवी (जम्मू एवं कश्मीर) जाने वाले यात्रियों की संख्या में हुई बढ़ोत्तरी को भी दर्ज किया गया है। डायना कहती

1986 में वैष्णो देवी जाने वाले यात्रियों की संख्या 14 लाख थी

जबकि

सन् 2009 में यह 82 लाख से ऊपर हो गई

। गत् तीन वर्षों में, वार्षिक संख्या निश्चित रूप से

एक करोड़ पार कर गई

होगी!
गत् सप्ताह

प्रयाग, जहां गंगा, यमुना और विलुप्त सरस्वती नदियों की त्रिवेणी है,

पर दुनियाभर में सबसे बड़े धार्मिक उत्सव कुम्भ की शुरूआत हुई। प्रयाग ही एकमात्र स्थल नहीं है जहां यह विशाल कुंभ मेला लगता हो। कुम्भ का शाब्दिक अर्थ है कलश, और पवित्र कुम्भ मेले का आशय है अमृत से भरे कलश से। यहमेला तीन अन्य स्थानों पर विभिन्न समयों पर आयोजित होता है- हरिद्वार, उज्जैन और नाशिक।
बारह वर्ष पूर्व मैं प्रयागराज कुम्भ गया था। पिछली बार मैं हरिद्वार के कुम्भ मेले में गया था। यह सन् 2010 की बात है जब भाजपा के डा0 रमेश पोखरियाल ‘निशंक‘ मुख्यमंत्री थे। इस मेले में, परमपूज्य दलाई लामा अधिकांश कार्यक्रमों में मेरे साथ थे।
हरिद्वार जाने से पूर्व मैं स्वामी चिदानंदजी के परमार्थ निकेतन, जहां सामान्यतया मैं रूकता हूं, गया था, वहां मुझे

मार्क टुली द्वारा कुम्भ मेलों पर लिखित एक उत्कृष्ट लेख पढ़ने को मिला।

मार्क टुली अनेक वर्षों तक नई दिल्ली में बी.बी.सी. के ब्यूरो चीफ रहे हैं और आपातकाल के दौरान कांग्रेस सरकार ने उन्हें भारत से बाहर भेज दिया था क्योंकि उन्होंने आपातकाल का सशक्त विरोध किया था। यह उल्लेखनीय है कि सेवानिवृत्ति के बाद मार्क टुली भारत में ही बस गए हैं।अपने लेख में मार्क टुली ने इस पर खेद प्रकट किया था कि जबकि मीडिया अक्सर कुम्भ के अवसर पर पवित्र गंगा में स्नान करने वाले लाखों की अनुमानित संख्या की बात तो करता है परन्तु वास्तविक संख्या के सही आकलन के लिए सेटेलाइट फोटोग्राफर्स, कम्प्यूटर्स और आधुनिक तकनीक के अन्य उपकरणों का सहारा नहीं लेता।
जब 2010 में, मैं कुम्भ हेतु गया तब मैंने हमारे मुख्यमंत्री डॉ0 पोखरियाल को यह करने के लिए कहा। श्री पोखरियाल ने केन्द्र सरकार के इसरो नेशनल रिमोट सैंसिंग सेन्टर और राज्य सरकार के उत्तराखण्ड स्पेस एप्लीकेशन सेंटर को मिलकर आने वाले तीर्थ यात्रियों की और अधिक विश्वसनीय आकलन संख्या देने को कहा।उपरोक्त वर्णित दोनों संगठनों ने हाई रिसोल्यूशन इंडियन सेटेलाइट द्वारा और ग्राऊण्ड बेस्ड इन्फोरमेशन का उपयोग करके कुम्भ के प्रमुख शाही स्नान दिवस (14 अप्रैल, 2010) पर स्नान करने वाले तीर्थयात्रियों की अनुमानित संख्या दी जोकि 1 करोड़ 63 लाख 77 हजार और 5 सौ थी! मैं आशा करता हूं कि ये संगठन प्रयागराज के कुम्भ मेले में इस वर्ष भाग लेने वाले लोगों की संख्या का स्वयं ही आकलन करेंगे।
कुम्भ पर

मार्क टुली का लेख उनकी पुस्तक ”नो फुल स्टाप््स इन इण्डिया”

में से लिया गया था जो कहता है:
”दुनिया में कोई अन्य देश कुंभ मेले जैसा दृश्य नहीं प्रस्तुत कर सकता। यह सर्वाधिक बदनाम भारतीय प्रशासकों की विजय है लेकिन उससे ज्यादा यह भारत के लोगों की विजय है। और अंग्रेजी प्रेस इस विजय पर कैसे प्रतिक्रिया व्यक्त करती है? अपरिहार्य रूप से, तिरस्कार के साथ। देश के सर्वाधिक प्रभावशाली दैनिक द टाइम्स ऑफ इण्डिया ने एक लम्बा लेख प्रकाशित किया जिसमें ये वाक्य कई बार दोहराए गए थे ‘अबस्क्युअरिज्म रूल्ड दि रूट्स इन कुम्भ’ (कुम्भ में रूढ़िवाद ने बसेरा डाला), ‘रिलीजियस डॉगमा ओवरब्हेल्म्ड रीज़न एट दी कुम्भ |कुंभ में धार्मिक कर्मकाण्ड ने तर्क को पीछे धकेला |और ‘दि कुंभ आफ्टर ऑल रिमेन्ड ए मेअर स्पेक्टेकल विद इट्स मिलियन ह्यूज बट लिटिल सबस्टेन्स’|कुंभ में लाखों की भीड़ उमड़ी मगर ठोस कुछ नहीं निकला