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कार्टूनिस्ट असीम रिहा हुए और कांग्रेस के विरोधी बने

कार्टूनिस्ट असीम त्रिवेदी बुधवार को मुंबई की आर्थर रोड जेल से रिहा हो गए। रिहा होते ही उन्होंने कहा कि देशद्रोह कानून की धारा 124-ए को खत्म करने की लड़ाई जारी रहेगी उधर महाराष्ट्रा सरकार ने भी देश द्रोह के मुकदमे को अभी तक वापिस नहीं लिया है| गौरतलब है की राष्ट्रीय प्रतीक चिन्हों पर कार्टून बना कर असीम ने भ्रष्टाचार पर प्रहार किये हैं| इसीलिए उन्हें देशद्रोह के आरोप में गिरफ्तार गिरफ्तार किया गया था|
जेल से ५०००/= के निजी मुचलके पर रिहा होने के बाद 25 वर्षीय असीम सीधे बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा को सिर नवाने गए। बाद में पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा कि अंग्रेजों के शासनकाल से लागू देशद्रोह के इस कानून का विरोध महात्मा गांधी और पंडित जवाहरलाल नेहरू ने भी किया था। क्योंकि इसका उपयोग उनके विरुद्ध भी किया गया था। क्या वह देशभक्त नहीं थे? इस कानून का उपयोग कम, दुरुपयोग ही ज्यादा होता रहा है। इसे अक्सर लेखकों, पत्रकारों, कवियों और कलाकारों की आवाज दबाने के लिए किया जाता रहा है।उन्होंने एक चैनल पर एक प्रश्न का उत्तर देते हुए कहा कि उन्हें बाबा आम्बेडकर ला विरोधी बताया जा रहा है जबकि बाबा आम्बेडकर स्वयम अभिव्यक्ति की स्वतन्त्रता के लिए लड़ते रहे |
असीम ने कहा कि मैं कानून का सम्मान करता हूं। लेकिन जो कानून यह अहसास कराए कि हम आज भी स्वंतत्र देश में नहीं रह रहे हैं, उसे हम नहीं मानते। इसलिए राजशाही का अहसास कराने वाला यह कानून खत्म किया जाना चाहिए।
मूलत: कानपुर के निवासी असीम त्रिवेदी को मंगलवार को ही बांबे हाई कोर्ट ने ५०००/= के निजी मुचलके पर जमानत देने का आदेश दे दिया था। शुरुआत में असीम जमानत पर बाहर आने को तैयार नहीं थे। लेकिन देर रात उन्होंने कोर्ट के आदेश का सम्मान करते हुए जमानत राशि जमाकर रिहा होने की सहमति दी। असीम को जमानत तो मिल गई है। लेकिन महाराष्ट्र सरकार अभी भी कानूनी सलाह ले रही है कि उन पर लगे आरोपों को हटाना संभव है या नहीं। हाई कोर्ट भी असीम पर लगे विवादास्पद आरोप हटाए जाने के बारे में 14 सितंबर को अपना फैसला देगा।
कार्टूनिस्ट असीम त्रिवेदी के समर्थन में अनेकों लोगों ने अपनी आवाज़ उठाई है| यूं पी बिहारियों के खिलाफ लड़ने वाले राज ठाकरे+ बाल ठाकरे भी कानपुर के मूल निवासी असीम के समर्थन में उतर आये हैं|अन्ना हजारे के मुंबई आंदोलन के दौरान कुछ कार्टून बनाने के कारण असीम पर देशद्रोह का केस दर्ज किया गया था। जेल के बाहर उनके स्वागत में सैन+गाँधी और इंडिया अगेंस्ट करप्शन के सदस्यों सहित काफी संख्या में लोग मौजूद थे।
शिवसेना के मुखपत्र ‘सामना’ के संपादकीय में बाल ठाकरे ने कहा है कि अपने कार्टूनों के जरिये त्रिवेदी ने संसद में गिरते स्तर को दर्शाने की कोशिश की और सरकार ने उसपर देशद्रोह का आरोप लगा दिया। त्रिवेदी ने राष्ट्रीय प्रतीक का अपमान किया है लेकिन इसके आधार पर उसे एक देशद्रोही का तमगा लगाकर गिरफ्तार कर लेना न्यायोचित नहीं था। गौरतलब है कि बल ठाकरे स्वयम भी कार्टूनिस्ट रहे हैं|
इसके अलावा भाजपा और एन डी ऐ के वरिष्ठ नेता लाल कृषण आडवाणी ने अपने ब्लॉग में लिखा है कि १९७५ कि इमरजेंसी से भी खतरनाक स्थिति उत्पन्न हो गई है|इमरजेंसी में भी अबू जैसे कार्टूनिस्टों को गिरफ्तार नहीं किया गया था आज स्थिति इतने बिगड़ चुकी है कि कार्टूनिस्टों को देश द्रोही बता कर जेल में डाला जा रहा है|

संवैधानिक संस्था कैग के समर्थन में भाजपा नेता राष्ट्रपति से मिले

कोयला घोटाले को उजागर करके सरकार को संकट में डालने वाली संवैधानिक संस्था कैग [कम्प्त्रोलर & आडिटर जनरल] के समर्थन में आज भाजपा ने मौर्चा खोल दिया है|
भाजपा के शीर्ष न्रेतत्व ने आज विरोध की संवैधानिक प्रक्रिया अपनाते हुए राष्ट्रपति को एक ज्ञापन सौंपा|इस ज्ञापन में बताया गया है कि कांग्रेस के वरिष्ठ मंत्री और स्वयम प्रधान मंत्री डाक्टर मनमोहन सिंह भी खुल कर कैग का विरोध कर रहे हैं|
कैग कि रिपोर्ट्स का पहले भी मूल्याङ्कन होता रहा है मगर अब अपने राजनितिक स्वार्थों के चलते संस्था के द्वारा लगाये भ्रष्टाचार के आरोपों को संसद और संसद के बाहर पूर्णतया विवादस्पद बनाया जा रहा है और यह स्वयम पी एम् द्वारा किया जा रहा है|बिना जांच कराये ही रिपोर्ट को झूटा बताने कि कौशिश कि जा रही है|कैग पर आरोप लगाये जा रहे हैं कि राजनितिक स्वार्थों के कारण ऐसी सरकार विरोधी रिपोर्ट दी जा रही है|ऐसे आरोपों से संविधान की मर्यादा को चुनौती दी जा रही है|यह लोक तंत्र के लिए ठीक नहीं है|
जबकि राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद +उपराष्ट्रपति डाक्टर सर्वपल्ली राधा कृष्णन और स्वयम प्रधान मंत्री जवाहर लाल नेहरु ने कैग कि स्वायतता पर प्रश्न चिन्ह लगाने वालों की ही आलोचना की थी|
राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक [सीएजी] पर सरकार द्वारा बार-बार किए जा रहे हमले को रोकने के लिए हस्तक्षेप करने का आग्रह किया गया ।
भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी ने राष्ट्रपति से मुलाकात के बाद संवाददाताओं से कहा, ‘हमने राष्ट्रपति से मुलाक़ात की और कहा कि यह आपके लिए जरूरी है कि इसमें हस्तक्षेप करे और सरकार को सलाह दें कि सीएजी पर हमला उचित नहीं है’। राष्ट्रपति द्वारा यह आश्वासन दिया गया है कि वह इस मामले को देखेंगे और उचित कार्रवाई करेगे।
भाजपा नेता ने कहा कि भ्रष्टाचार के खिलाफ हमारी लड़ाई जारी रहेगी, लेकिन एक संवैधानिक संस्था पर जिस तरह से हमला किया जा रहा है, हमें आशंका है कि संवैधानिक प्राधिकरणों को कमजोर किया जा रहा है। प्रतिनिधिमंडल में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष सुषमा स्वराज, राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष अरुण जेटली और वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी शामिल थे।
मालूम हो कि सीएजी ने हाल में अपनी रिपोर्ट में कोयला ब्लॉक आवंटन में अनियमितता के कारण सरकारी खजाने को 1.86 लाख करोड़ रुपये नुकसान का अनुमान लगाया है। जिस अवधि के दौरान कोयला ब्लॉक आवंटित किए गए थे, उस दौरान [2004-2009] केंद्रीय कोयला मंत्रालय का प्रभार प्रधानमंत्री के पास था। प्रधानमंत्री ने एक बयान में सीएजी के निष्कर्षो को कई मामलों में दोषपूर्ण बताते हुए निष्कर्ष को विवादित बताया है

राहुल गाँधी को पी एम् के प्रोमोशन लिए राजनीतिक रिजर्वेशन सपा को मंजूर नहीं

सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव बेशक यूं पी ऐ सरकार के कई बार संकट मौचक बन कर उभरे हैं मगर अब उन्होंने कांग्रेस की नीतियों पर हमले तेज कर दिए हैं|यह तीसरे मौर्चे के मुखिया बनने की लालसा है+१६वी लोक सभा में अपने दम पर सरकार बनाने की इच्छा है + डाक्टर मन मोहन सिंह पर लटक रहे कोयला घोटालों की तलवार की धार को दूसरी तरफ मौडने या फिर यूं पी में किसी लाभ के लिए कांग्रेस को दबाब में रखने का कोई राजनितिक दावं है यह तो समय ही बतायेगा मगर सपा ने फिलहाल कांग्रेस की नीतियों +मंत्रियों का खुल कर विरोध करना शुरू कर दिया है|
संसद के इस सत्र में सरकारी नौकरियों में प्रोमोशन में रिजर्वेशन का जोर दार विरोध करके सपा ने जहाँ अपने राजनितिक शत्रु बसपा को पटखनी दी वहीं केंद्र सरकार की रिजर्वेशन कार्ड खेलने की मंशा को भी धराशाई कर दिया| लेकिन अगर गौर से देखा जाए तो मुलायम सिंह यादव ने एक तरह से राहुल गांधी की २०१४ में ताजपोशी पर भी विरोध दर्ज़ करा दिया था|श्री मुलायम सिंह यादव के भाषण में एक बात गौर करने लायक है| उन्होंने कहा था कि जूनियर के सीनियर के सर पर बैठाने कि किसी भी साजिश का विरोध किया जायेगा| कांग्रेस के कई धड़े आये दिन डाक्टर मन मोहन सिंह के स्थान पर राहुल गांधी को पी एम् बनाने की वकालत करते आ रहे हैं| अर्थार्त यहाँ भी आरक्षण और ये आरक्षण कई राजनीतज्ञों के गले उतरने वाला नहीं है ख़ास तौर पर जो लोग बरसों से पी एम् कि कुर्सी का ख्वाब देख रहे हैं उनके तो सारे ख़्वाब ही धरे के धरे रह जायेंगे|इसीलिए जूनियर को सीनियर बनाये जाने का विरोध सपा ने किया और इस के माध्यम से राहुल के रिजर्वेशन पर भी एतराज दर्ज़ करा दिया|इसी कड़ी में मुलायम ने कोयला घोटालों पर कडा रुख अपनाया और सपा महासचिव प्रोफ़ेसर राम गोपाल यादव ने कोयला मंत्री श्री प्रकाश पर अपने नजदीकियों को कोयला खंड आवंटित करने का आरोप लगाया है|
अगली लोकसभा के लिए चुनाव में भले ही अभी डेढ़ साल बाकी हो, पर समाजवादी पार्टी ने राष्ट्रीय क्षितिज पर मजबूत होकर उभरने की अपनी कोशिश तेज कर दी है। कोलकाता में आज से शुरू होने वाली सपा की दो दिनी राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक इस बात पर खास तौर से केंद्रित रहेगी कि आने वाले चुनाव में किस तरह से केंद्र में सत्ता की चाबी सपा के हाथ में हो। यूं भी मुलायम सिंह यादव ने केंद्र सरकार को दिशाहीन करार देते हुए एलान किया है कि उनकी पार्टी अब विपक्ष में है। इसके लिए न केवल वह कांग्रेस से अपने रिश्तों को पुनर्परिभाषित करने का प्रयास करेगी, बल्कि समान विचारधारा वाले दलों से अपने संबंधों को प्रगाढ़ बनाने की भी रूपरेखा तय करेगी।
उत्तर प्रदेश में धमक के साथ सत्ता हासिल करने वाली सपा को इस बार लोकसभा चुनाव में अपने लिए उम्मीद की किरणें कुछ ज्यादा ही चमकती नजर आ रही हैं। राष्ट्रीय पार्टियों में कांग्रेस की केंद्र सरकार के खिलाफ घोटालों की लंबी फेहरिश्त हो या भाजपा में नेतृत्व को लेकर छिड़ी जंग, सपा को इससे ऊर्जा ही मिली है। यही वजह हैं कि पार्टी प्रमुख मुलायम सिंह यादव ने हाल ही में तीसरे मोर्चे की संभावनाओं का बयान देकर भविष्य की राजनीति का संकेत देने का काम किया है। राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक के लिए कोलकाता का चयन भी इसी नजरिए से देखा जा रहा है। सपा का इरादा इस बार उत्तर प्रदेश के अलावा बिहार, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात और पश्चिम बंगाल में भी अपने उम्मीदवार उतारने की है। कोलकाता में बैठक बुलाने के पीछे सपा की कोशिश पश्चिम बंगाल में जगह तलाशने की मानी जा रही है। पार्टी ने हाल ही में वरिष्ठ नेता के नंदा को उप्र से राज्यसभा का सदस्य भी बनाया है। नंदा पश्चिम बंगाल सरकार में मंत्री रह चुके हैं।
मौजूदा राजनीतिक रुख भांपते हुए समाजवादी पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह यादव ने केंद्र सरकार को दिशाहीन करार देते हुए एलान किया है कि उनकी पार्टी सरकार और पी एम् के खिलाफ नहीं है मगर उनकी नीतियों के कारन अब विपक्ष में है। बुधवार से शुरू होने वाली पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक की पूर्व संध्या पर किए गए इस एलान के अपने राजनीतिक अर्थ हैं।
गौरतलब है कि सपा केंद्र की मनमोहन सरकार का बाहर से समर्थन कर रही है और वह ऐसा करने वाली सबसे बड़ी पार्टी है।
मुलायम ने साफ कर दिया कि पार्टी अब सशक्त विपक्ष की भूमिका निभाएगी। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार में इतने घोटाले हो रहे हैं और इतना भ्रष्टाचार बढ़ गया है कि हम सोच भी नहीं सकते। हम व्यक्तिगत तौर पर किसी के खिलाफ नहीं हैं लेकिन घोटालों का साथ नहीं दे सकते। हम सिद्धांतों के साथ हैं। इससे पहले मुलायम ने पार्टीजनों से कहा कि कोयले का घोटाला कहां जाकर रुकेगा, देखिए। बहुत भ्रष्टाचार है। केंद्र की कोई स्पष्ट नीति नहीं है, हम समझ नहीं पा रहे कि वे देश को कहां ले जाना चाह रहे हैं। कोई कुछ नहीं कह रहा, हम सुन रहे हैं, हम सरकार के संपर्क में हैं, उसकी कोई दिशा नहीं है।
कोयला ब्लॉक आवंटन में गड़बड़ी को लेकर छिड़ी जंग को नई धार देते हुए समाजवादी पार्टी ने कोयला मंत्री श्रीप्रकाश जायसवाल पर हमला बोला है। पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव रामगोपाल यादव ने कहा कि जायसवाल ने संप्रग-2 में मंत्री पद का कार्यभार ग्रहण करते ही पहले एक घंटे में तीन कोयला ब्लॉकों का आवंटन कर दिया। इससे पता चलता है कि सब कुछ पूर्व नियोजित था और जायसवाल ने सब जानते-समझते हुए दस्तखत किए। जबकि कोयला मंत्री जायसवाल ने इस तरह के किसी आवंटन से इन्कार किया है। उन्होंने कहा है कि उन्होंने एक भी कोयला ब्लॉक का आवंटन नहीं किया। लेकिन समाजवादी पार्टी ने उनकी यह सफाई स्वीकार नहीं की है।

पायलेट ने असाम में राहुल गाँधी को नहीं उड़ाया

रक्षा मंत्री के आदेशों का पालन नहीं करते हुए एयर फ़ोर्स के पायलेट ने असाम के सलाकाटी हेलीपैड पर हेलीकाप्टर उतारने से मना कर दिया| खराब मौसम के कारण पायलेट ने हेलीकाप्टर वहां उतारने से मना किया|
कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी असम के दंगा प्रभावित इलाके में ले गए थे | मंगल वार को वहां से वापिसी पर मौसम ख़राब हो गया| खराब मौसम के चलते उन्हें वापस लाने से पायलेट ने साफ इनकार कर दिया।
प्लेन में असम के सीएम तरुण गोगोई भी सवार थे।खास बात यह है कि रक्षा मंत्री ए.के. एंटनी के दखल के बाद भी पायलट अपनी बात पर अड़ा रहा। आखिरकार राहुल गांधी को सड़क के रास्ते गुवाहाटी आना पड़ा। उधर, खबर है कि एयरफोर्स ने अपने पायलट के फैसले का समर्थन किया है। राहुल गांधी सोमवार को एयरफोर्स के प्लेन से असम के दंगा प्रभावित इलाके का दौरा करने गए थे। एयरफोर्स ने कोकराझार में सलाकाटी हेलिपैड पर हेलिकॉप्टर की लैंडिंग से इनकार कर दिया था। एयरफोर्स का तर्क था कि यह खतरनाक हो सकता है। इसके बाद वी आई पी की यात्रा को सुलभ बनाने के लिए रातोंरात बोंगाइगन स्टेडियम के पास एक नया हेलिपैड तैयार किया गया। आईएएफ पायलट ने फिर से बोंगाइगन पर हेलिकॉप्टर उतारने से मना कर दिया और उसे कोकराझार ले गया। कोकराझार में मौसम साफ था, लेकिन गुवाहाटी पर खराब मौसम की जानकारी थी। रक्षा मंत्री के दखल के बाद भी पायलट राहुल को वापस लाने के लिए तैयार नहीं हुआ|गौरतलब है की खराब मौसम के चलते पहले भी वी आई पी की जिद पर उड़ने भरी जाती रही है मगर दुर्घटनाएं भी होती रही है| हाल ही में एक चीफ मिनिस्टर [ऐ पी]की भी ऐसे ही हादसे में मौत हो चुकी है|इसीलिए सुरक्षा कारणों से पायलेट का यह इंकार [बेशक यह इनकार सत्ता रूड़ दल के महासचिव को ही क्यूँ नहीं था] सराहा ही जाना चाहिए| इसके अलावा यह कहना भी उचित ही होगा की स्वयम राहुल गाँधी के पिता श्री राजीव गांधी और चाचा श्री संजय गांधी भी पायलेट थे इसीलिए मौसम की अनदेखी करना कम से कम राहुल गांधी को तो शोभा नहीं देता |

सरकार असीम दाड़ी में उलझ कर रह गई है|

झल्ले दी झल्लियाँ गल्लां

एक कार्टूनिस्ट

देखा सच्चाई का कमाल |सरकार की नाक में हो गया है बवाल |हसाड़े कार्टूनिस्ट असीम त्रिवेदी को जेल से रिहा करने को हो रहे हैं बेहाल|इस सरकार ने अभिव्यक्ति की स्वतन्त्रता पर नकेल डालने का किया कुप्रयास लगाया झूटा देश द्रोह का आरोप जिससे तड़प कर असीम ने जमानत लेने से कर दिया है इनकार| इसीलिए सरकार का आगे होगा अभी इससे भी बुरा हाल|पोलिस ने रिमांड छोडी |हाई कोर्ट ने जेल छोड़ी अब सरकार अब दमन कारी सरकार का कौन होगा हवाल ?

झल्ला

कार्टून जी गल तो आप जी की ठीक ही लगती है सरकार ने तिनका निकालने के लिए असीम त्रिवेदी की लम्बी काली दाड़ी में घुसपैठ की अब तिनका तो सामने आया नहीं हाँ बेचारी सरकार जरुर असीम दाड़ी में उलझ कर रह गई है|वैसे इसे दूसरी राजनीति की भाषा में कह सकते है कि सांप[सरकार]के मुह में चचुंदर[कार्टूनिस्ट] फंस गया है क्यों ठीक है न ठीक ???

सुभाष घई हरियाणा की २० एकड़ जमीन का मुकदमा भी हारे

फिल्म निर्माता सुभाष घई की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं \ सुपर १०० करोडी केम्प वाले सलमान खान को लेकर बनाई पिक्चर फ्लाप हो गई| शेयर धारकों के पैसे से खरीदी गई जमीन भी लौटानी पड़
रहे है|जनता को शेयर बेच कर कंपनी बनाईथी उससे व्हिसलिंग वूड्स बनाया[एक्टिंग यूनिवर्सिटी] + यहाँ वहां जमीन में शेयर धारकों का पैसा व्हाईट में इन्वेस्ट किया मगर महाराष्ट्र +आन्ध्राप्रदेश के बाद अब हरियाणा की भूमि की खरीद में भी कोर्ट ने ब्लैक निकाल दिया है| अब हरियाणा की २० एकड़ जमीन ग्राम पंचायत को लौटानी होगी|
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने बहादुरगढ़ के गांव बाडसा में 20 एकड़ जमीन की डील को कैंसल कर दिया है।
हाईकोर्ट के एक्टिंग चीफ जस्टिस जसबीर सिंह + जस्टिस राकेश कुमार जैन की बैंच ने यह फैसला मंगलवार यह निर्णय दिया है| श्री घई को इस जमीन की कुल कीमत का भुगतान 20 किस्तों में करना था, इसमें से 7 किस्तें दी भी जा चुकी हैं। बैंच ने ग्राम पंचायत को ब्याज सहित रकम को लौटाने और जमीन का कब्जा वापस लेने का निर्देश दिया है।
यह भी सवाल उठाया गया है कि आखिर एक प्राइवेट इंस्टिट्यूशन को शामलात जमीन बेचने की मंजूरी हरियाणा सरकार ने कैसे दे दी?
बाडसा के रहने वाले नफे सिंह ने इस मामले में एक पीआईएल दायर की थी। इसमें कहा गया था कि हरियाणा सरकार ने नियमों को ताक पर रख कर पंचायत की शामलात जमीन सुभाष घई की प्राइवेट कंपनी को देने की अनुमति दे दी। याचिका के जरिये इस मामले की उच्च स्तरीय जांच करवाए जाने की मांग की गई थी।
गौरतलब है कि गांव के सरपंच ने 6 जनवरी 2010 को एक प्रस्ताव पारित कर गांव की 20 एकड़ शामलात जमीन श्री घई को देने का फैसला लिया था।
याचिकादाता ने अदालत में कहा कि इससे पहले कंपनी को महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश में भी इसी तरह जमीन दी गई थी।
बॉम्बे हाईकोर्ट और आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने कंपनी को दी गई जमीन की अलॉटमेंट खारिज कर दी है|
जाहिर है ऐसे फैसले आम शेयर धारकों की गाडी कमाई पर भी प्रभाव डालते हैं|

इन्द्रियों का प्रकाशक मन है

श्रीमदभागवद गीता के अनंत ज्ञान के सागर की कुछ बूँदें

परमात्मा सम्पूर्ण ज्योतियों की ज्योति तथा अज्ञान से अत्यंत परे हैं. परमात्मा ज्ञान स्वरुप एवं ज्ञान से प्राप्त
करने योग्य हैं. प्रभु सब के ह्रदय में विराजमान हैं.
शब्द का प्रकाशक कान है. स्पर्श का प्रकाशक त्वचा है. रूप का प्रकाशक नेत्र है. रस का प्रकाशक जिव्ह्या है.
गंध का प्रकाशक नासिका है. इन मन का प्रकाशक बुद्धि है. बुद्धि का प्रकाशक
आत्मा है एवं आत्मा का प्रकाशक परमात्मा है. परम पिता परमात्मा का प्रकाशक कोई नहीं है.
जैसे सूर्य मैं अन्धकार कभी नहीं आ सकता इसी प्रकार परम प्रकाशक परमात्मा में अज्ञान कभी नहीं आ सकता

कार्टूनिस्ट असीम को जमानत कल रिहाई संभव

कार्टूनिस्ट असीम त्रिवेदी को मुम्बई ही कोर्ट ने ५०००/के निजी मुचलकों पर जमानत दे दी है|जनहित याचिका के उत्तर में यह अदालती राहत दी गई है|
असीम के पिता का कहना है कि जब तक देश द्रोह का मुकदमा वापिस नहीं लिया जाता तब तक असीम जेल में ही रहेगा|जमानत के कागजात कल सुबह जेल में पहुंचेंगें तभी स्थिति साफ हो पायेगी |
चिहों के कार्टूनों की सोशल साईट्स पर आ गई बाड़
प्रतीक चिन्हों का कार्टून बनाने वाले असीम त्रिवेदी को देश द्रोही करार देकर सरकार ने लगता है कि बैठे बिठाए आफत मौल ले ली है| असीम को गिरफ्तार करके विरोध का एक नया रास्ता दिखा दिया है लोगों को पता चल गया है कि अब प्रतीक चिन्हों के माध्यम से भी सरकार का विरोध किया जा सकता है सरकार को परेशानी में डाला जा सकता है|क्योंकि अब सोशल साईट्स पर रोजाना प्रतीक चिन्हों के माध्यम से नेताओं के कार्टून डाउन लोड किये जा रहे हैं| फेस बुक पर ही रोज़ाना अशोक स्तम्भ के तीन शेरो के स्थान पर कोई न कोई नई नेताओं की तिकड़ी आ रही है| बेशक सूचना एवं प्रसारण मंत्री अम्बिका सोनी +कांग्रेस प्रवक्ता मनीष तिवारी और महाराष्ट्रा के गृह मंत्री एन सी पी कोटे के आर आर पाटिल ने भी अपने तरीके से असीम की गिरफ्तारी के सवाल पर अपना पल्ला झाड लिया है| लेकिन आज ईन्डिया अगेंस्ट करप्शन के अरविन्द केजरीवाल ने इस ज्वलंत मुद्दे को भुनाते हुए महाराष्ट्र सरकार को चुनौती दे दी है की अगर इस सपाट के अंत तक असीम के ऊपर लगाये आरोप वापिस नहीं लिए गए तो मुम्बई जेल के बाहर धरना होगा |
अगर ऐसा हो गया तो ये कार्टूनिस्ट भी कहने लग जायेंगे में असीम में असीम में असीम

प्रतीक चिहों के कार्टूनों की सोशल साईट्स पर आ गई बाड़

प्रतीक चिहों के कार्टूनों की सोशल साईट्स पर आ गई बाड़
प्रतीक चिन्हों का कार्टून बनाने वाले असीम त्रिवेदी को देश द्रोही करार देकर सरकार ने लगता है कि बैठे बिठाए आफत मौल ले ली है| असीम को गिरफ्तार करके विरोध का एक नया रास्ता दिखा दिया है लोगों को पता चल गया है कि अब प्रतीक चिन्हों के माध्यम से भी सरकार का विरोध किया जा सकता है सरकार को परेशानी में डाला जा सकता है|क्योंकि अब सोशल साईट्स पर रोजाना प्रतीक चिन्हों के माध्यम से नेताओं के कार्टून डाउन लोड किये जा रहे हैं| फेस बुक पर ही रोज़ाना अशोक स्तम्भ के तीन शेरो के स्थान पर कोई न कोई नई नेताओं की तिकड़ी आ रही है| बेशक सूचना एवं प्रसारण मंत्री अम्बिका सोनी +कांग्रेस प्रवक्ता मनीष तिवारी और महाराष्ट्रा के गृह मंत्री एन सी पी कोटे के आर आर पाटिल ने भी अपने तरीके से असीम की गिरफ्तारी के सवाल पर अपना पल्ला झाड लिया है| लेकिन आज ईन्डिया अगेंस्ट करप्शन के अरविन्द केजरीवाल ने इस ज्वलंत मुद्दे को भुनाते हुए महाराष्ट्र सरकार को चुनौती दे दी है की अगर इस सपाट के अंत तक असीम के ऊपर लगाये आरोप वापिस नहीं लिए गए तो मुम्बई जेल के बाहर धरना होगा |
अगर ऐसा हो गया तो ये कार्टूनिस्ट भी कहने लग जायेंगे में असीम में असीम में असीम Permalink: http://jamosnews.com/?p=3407

सुप्रीम कोर्ट का मीडिया के लिए गाईड लाईन देने से इंकार सांसदों का शुरू दुर्व्यवहार

सुप्रीम कोर्ट ने मीडिया के लिए गाईड लाईन मना की सांसदों का व्यवहार किसी नई सेंसरशिप की तरफ इशारा है
बेशक सुप्रीम कोर्ट ने मीडिया के लिए गाईड लाईन जारी करने से मना कर दिया है मगर नेताओं ने विशेषकर भ्रष्टाचार के आरोप झेल रहे मंत्रियों ने अपने तरीके से मीडिया को अपने सीमा में रहने को बाध्य करना शुरू कर दिया है|
केंद्र सरकार के एक मंत्री ने टी वी चेनल के कर्मियों पर हाथ उठा कर यह साबित भी कर दिया है|
अदालत की रिपोर्टिंग पर सुप्रीम कोर्ट ने अहम फैसले में कहा है कि कोर्ट रिपोर्टिंग पर उसकी ओर से कोई रोक नहीं है और न ही कोई गाइडलाइन जारी करने की जरूरत है.
कोर्ट ने कहा है कि अगर केस से जुड़े किसी पक्ष को कोई आपत्ति है तो वो सुप्रीम कोर्ट या हाईकोर्ट से रिपोर्टिंग पर रोक की मांग कर सकता है लेकिन ऐसी कोई रोक स्थाई नहीं होगी. रोक लगवाने के लिए तथ्य भी देने होंगे.
लेकिन इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने पत्रकारों को शिक्षा देते हुए कहा कि पत्रकरों को लक्षमण रेखा का ज्ञान होना चाहिए ताकि वे अवमानना की रेखा पार न करें.
जाहिर है कि सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में मीडिया पर किसी भी तरह कोई पाबंदी नहीं लगाई है और न ही उसके लिए कोई दिशानिर्देश तय किए हैं.
कोर्ट के इस फैसले से साफ है कि किसी खास केस में ही मीडिया को किसी विशेष तथ्य की रिपोर्टिंग करने से रोका जा सकता है.| उसके लिए भी पीड़ित पक्ष को कम से कम हाईकोर्ट या फिर सुप्रीम कोर्ट में इस बात को साबित करना होगा कि इस रोक क्यों जरूरी है|अब वर्चुअल मीडिया+कार्टूनिस्टों +सोशल साईट्स पर पाबन्दी लगाने की सरकारी सोच को धक्का लगना स्वाभाविक ही है|सम्भवत इसी से तिलमिलाए मंत्रियों ने मीडिया पर हाथ उठाना या उनका अपमान करना शुरू कर दिया है|
[१]कोयले के घोटालों का आरोप झेल रहे कांग्रेस के सांसद और उद्दमी नवीन जिंदल से जब एक टी वी चैनल के पत्रकार ने कोयले में संलिप्तता के विषय में बाईट माँगी तो उन्हों एकहा कि आपका चैनल ही इसे उठा रहा है तब पत्रकार बोल उठा कि ये मामला तो पूरी मीडिया में छाया हुआ है इस पर तिलमिलाए जिंदल ने कैमरा पर्सन को थप्पड़ मार कर अलग कर दिया
[२]कोयला मंत्री श्रीप्रकाश जायसवाल से आज कोयला कम्पनिओं में उनके पारिवारिक सम्बन्ध पूछे गये और बताया गया कि श्री प्रकाश ने स्वयम आर्बिट्रेटर कि भूमिका निभाई थी तब मंत्री महोदय ने पत्रकार से कहा बस जाओ और उठ कर चले गए|
[३]इससे पूर्व धार्मिक प्रवचक आसा राम बापू पर भी टी वी कैमरा पर्सन पर थप्पड़ मारने के आरोप लग चुके है|
[४] कार्टूनिस्ट असीम त्रिवेदी पर उनके एक कार्टून के लिए जिस तरह देश द्रोह का आरोप लगा कर उन्हें जेल में डाला गया है यह सर्वविदित है|
[५]इससे थोड़ा और पहले देखें तो मात्र एक कार्टून को फारवर्ड करने पर ही यूं पी ऐ की एक घटक दल की नेत्री ममता बेनर्जी ने एक समाज सेवी को जेल में डलवा रखा है|
[६] अब और पहले जाएँ तो एन डी टी वी वाले नरेन्द्र मोदी का इंटरव्यू लेने उनके साथ हवाई जहाज में सफ़र कर रहे थे तब अपनी मनमर्जी के खिलाफ पूछे गए सवाल पर मुख्य मंत्री ने कैमरा पर्सन को शूटिंग करने से मना कर दिया
[७]ऐसा ही एक बार नजमा हेप्तुलाह भी कर चुकी हैं\
अब सवाल यह उठाता है कि क्या जनप्रतिनिधियों का यह व्यवहार किसी नई प्रकार की सेंसरशिप या इमरजेंसी की तरफ इशारा कर रहा है???