Ad

Tag: अन्ना हजारे

कैबिनेट ने लोक पाल के संशोधनों को ओ के किया मगर विपक्ष और जन लोक पाल के पुरोधाओं ने कहा “नो “

कैबिनेट ने लोक पाल को ओ के किया

कैबिनेट की बैठक में आज संशोधित लोकपाल बिल को मंजूरी दे दी गई है |अब इसे राज्य सभा में पेश किया जाएगा|विपक्ष और स्वयम सेवी संस्थाओं के साथ ‘आप ‘ने भी इसे नकार दिया है|
इस संशोधित लोकपाल बिल में कई तब्दीलियां हुई हैं| बिल के लिए बनी सेलेक्ट कमिटी ने 16 सुझाव दिए थे इनमें से 14 सुझावों को कैबिनेट ने स्वीकृति दे दी.
सूचना एवं प्रसारण राज्य मंत्री मनीष तिवारी और प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री वी नारायणसामी

ने दिल्ली में प्रेस कांफ्रेंस में जानकारी दी कि कैबिनेट ने लोकपाल बिल में 16 में से 14 संशोधनों को मंजूरी दे दी है| लोकपाल में किसी पार्टी के सदस्य नहीं होंगे|सरकारी अनुदान से चलने वाले एनजीओ लोकपाल के दायरे में आएंगे| अब केन्द्र सरकार लोकपाल बनाएगी जबकि राज्य सरकार को लोकायुक्त संशोधित लोकपाल बिल में लोकपाल को खुद संज्ञान लेने का अधिकार होगा.कुछ शर्तों के साथ

प्रधानमंत्री को लोकपाल के दायरे में रखा गया है.

सीबीआई को लोकपाल के दायरे में रखने को लेकर सहमति नहीं बन पाई.

लोकपाल की नियुक्ति प्रधानमंत्री, स्पीकर, नेता प्रतिपक्ष और देश के मुख्य न्यायाधीश मिलकर करेंगे. लोकपाल की नियुक्ति पर

राष्ट्रपति अंतिम मंजूरी देंगे.

राजनीतिक पार्टियां लोकपाल के दायरे में नहीं होंगी. धार्मिक संस्थान भी लोकपाल के दायरे से बाहर रखे गए हैं. सरकारी मदद लेने वाले एनजीओ भी लोकपाल के दायरे में नहीं रहेंगे.बिल पास होने के 1 साल बाद सभी राज्यों में लोकायुक्तों की नियुक्ति की जाएंगी। इन संसोधनों के बाद से सभी धार्मिक संस्थाएं और राजनीतिक दल भी लोकपाल से बाहर होगे मगर श्री सामी ने जोर देकर कहा है कि

बाबा राम देव का ट्रस्ट धार्मिक नहीं है इसलिए वह लोक पल के दायरे में जरूर होगा |इस लोक पाल के स्वरुप का विरोध भी शुरू हो गया है|
रिटायर्ड जनरल वी के सिंह

पहले ही कह चुके हैं कि अगर अन्ना हजारे वाला जन लोक पाल नहीं आया तो देश में एतिहासिक क्रान्ति होगी|

बीजेपी

एक ऐसा लोकपाल चाहती है जो सरकार के प्रभाव से पूरी तरह मुक्त हो। सीबीआई को लोकपाल के दायरे से अलग रखने के फैसले पर बीजेपी ने ऐतराज जताते हुए कहा है कि सीबीआई को एक निष्पक्ष संस्था के तौर पर काम करना चाहिए, उसे लोकपाल के दायरे में लाना चाहिए। जबकि मजबूत लोकपाल बिल के लिए आंदोलन कर रहे

अन्ना बाबू राव हजारे

ने लोकपाल बिल में बदलावों को खारिज करते हुए पटना में कहा कि जनलोकपाल को लेकर सरकार नाटक कर रही है। उन्होंने केन्द्रीय जांच ब्यूरो को स्वयत्ता देने की मांग करते हुए कहा कि वे अपनी जनलोकपाल की लड़ाई तब तक जारी रखेंगे जब तक कि सरकार एक सशक्त जनलोकपाल विधेयक नहीं लाती।

आम आदमी पार्टी (आप) के नेता अरविंद केजरीवाल

ने मजबूत लोकपाल विधेयक नहीं लाने के लिए केंद्र सरकार की आलोचना की और जोर देते हुए कहा कि इस प्रस्तावित कानून से भ्रष्टाचार नहीं रुकेगा। उन्होंने दिल्ली में संवाददाताओं से कहा कि आपको ऐसा लोकपाल क्यों चाहिए? जो एजेंसी भ्रष्टाचार को रोकेगी नहीं, बल्कि बढ़ाएगी और मंत्रियों को बचाएगी, उस पर क्या बात की जाए। सिर्फ लोकपाल शब्द का इस्तेमाल कर देने में हमारी कोई रुचि नहीं है। इस विधेयक के माध्यम से सरकार ने देश के लोगों की राय का समर्थन नहीं किया है। भ्रष्टाचार मुक्त शासन देना सरकार का संवैधानिक दायित्व है।यह कहते हुए कि देश के लोग भ्रष्टाचार और मूल्य वृद्धि से परेशान हैं, उन्होंने कहा कि कुछ लोग कहते हैं कि इस मुद्दे पर जो पहल की गई है उससे वे खुश हैं, लेकिन सरकार ने क्या हमारे विचारों का समर्थन किया है?

अन्ना हजारे ने पटना में रैली की और सत्ता परिवर्तन को मोर्चे का ऐलान करके महात्मा गांधी को श्रधांजलि दी

जनलोकपाल पर केंद्र सरकार की टालमटोल की नीति से आजिज समाजसेवी अन्ना हजारे ने आज बुधवार ३० जनवरी को पटना में संगठित रूप से व्यवस्था परिवर्तन का अभियान चलाने के लिए एक मोर्चे का गठन करने का ऐलान किया.महात्मा गांधी की पुण्यतिथि पर आयोजित जनतंत्र रैली में अन्ना हजारे ने कहा, ‘हम बीते दो साल से लड़ रहे हैं. लेकिन केंद्र की सरकार की नीयत साफ नहीं है. देश की जनता सरकार से कह रही है कि ‘जनलोकपाल लाओ, नहीं तो जाओ’. हम युवाओं और देश के लोगों को संगठित कर रहे हैं.इसके लिए एक नया मोर्चा गठित करेंगे.’
उन्होंने कहा कि देश में आजादी की दूसरी लड़ाई की शुरुआत हो गयी है. फरवरी माह में देश के चार राज्यों में सभाओं के आयोजन के बाद मार्च में देश भर में अभियान चलाया जायेगा. मुख्य तौर पर युवाओं को संबोधित करते हुए गांधीवादी नेता अन्ना ने कहा, ‘देश भर में डेढ़ साल तक वह घूमेंगे. 120 करोड़ की जनता में से कम से कम छह करोड़ लोग तो जग जायेंगे. ये छह करोड़ लोग जग गये तो सरकार की नाक में दमकर देंगे.’
अन्ना ने लोक पाल की जरुरत बताते हुए कहा कि लोकपाल इसलिए जरूरी है, क्योंकि इसके आने से देश में व्याप्त 50 से 60 फीसदी भ्रष्टाचार पर अंकुश लगेगा. इसके बाद चुनाव में योग्य उम्मीदवार नहीं मिलने पर खारिज करने के अधिकार[ राईट टू रिकाल] , जनप्रतिनिधियों को वापस बुलाने के अधिकार, ग्रामसभाओं को मजबूत करने के अधिकार और सरकारी अधिकारियों द्वारा एक सप्ताह के भीतर फाइल निपटाने की जवाबेदही तय करने जैसे उपायों से भ्रष्टाचार मिटाना संभव होगा.

Anna Babu Rao Hazare In Patna


अन्ना ने व्यवस्था परिवर्तन के लिए लोगों को एकजुट करने के लिए सूचना का अधिकार कानून की लड़ाई लड़ने वाले अरविंद केजरीवाल की तरह सूचना प्रौद्योगिकी साधनों को अपनाने का आह्वाहन किया. उन्होंने कहा, ‘लोग वेबसाइट अन्ना हजारे डॉट ओआरजी पर हमसे संपर्क कर सकते हैं. इसके अलावा अपनी एकजुटता व्यक्त करने के लिए दो मोबाइल नंबर पर एसएमएस कर सकते हैं.’
रैली में थल सेना के पूर्व अध्यक्ष वीके सिंह, पूर्व आईपीएस अधिकारी किरण बेदी, एकता परिषद के अध्यक्ष पीवी राजगोपाल, विश्व सूफी परिषद के अध्यक्ष सैयद गिलानी, कर्नाटक के स्वामी वासव विजय महामृत्युंजय महास्वामी भी उपस्थिति थे.
रैली को संबोधित करते हुए जनरल वी.के. सिंह ने देश की हालात की व्यापक चर्चा करते हुए व्यवस्था परिवर्तन की दरकार बताई। उन्होंने जनतंत्र मोर्चा के घोषणा पत्र को भी पढ़ा।
किरण बेदी का कहना था कि यह अन्ना के आंदोलन की कामयाबी है कि अब केंद्र सरकार जन लोकपाल की व्यवस्था वाली बात करने लगी है। सभी मिलकर सरकार पर ऐसा दबाव बनाएं, ताकि बजट सत्र में जन लोकपाल आकार पा जाए। राजेंद्र सिंह के अनुसार अब देश में व्यवस्था परिवर्तन के बूते ही बेहतरी की आस है। इसमें सबको लगना होगा, देश के प्रत्येक नागरिक को इसे अपनी जिम्मेदारी माननी होगी।

पाकिस्तान की जम्हूरियत को गधिगेड में डालने को हर कोई उबला जा रहा है

झल्ले दी झल्लियाँ गल्लां

एक पाकिस्तानी चिन्तक

ओये झल्लेया ये क्या हो रहा हैओये हसाड़े पाकिस्तान में जब भी जम्हूरियत आती है तभी कोई ना कोई घरेड पे जाती है अब देखो न दशकों के बाद जम्हूरियत आई थी लेकिन ये कादरी औरकाले कोट वाले फौज को आगे लाने को आतुर हो रहे हैं| कनाडा की फिजाओं को छोड़ छाड़ कर मौलाना ताहिर उल कादरी अपने मार्च को लाहौर से लेकर इस्लामाबाद पहुंच गए हैं |इस मौलाना ने फौज और सुप्रीम कोर्ट की तारीफों के पुल बाँध दिए और जनता की चुनी हुई सरकार को अल्टीमेटम दे दिया है|उधर सुप्रेम कोर्ट ने भी हसाड़े प्रधानमंत्री राजा परवेज अशरफ को एक पुराने रेंटल पावर प्रोजेक्ट घोटाले के मामले में एरेस्ट किये जाने के आदेश दे दिए हैं|ओये ऐसे में जब हमारी जम्हूरियत की कब्र खोदने की कवायद चल रही है ऐसे वक्त में यार ये भारत वाले भी हमारे पीछे पड़ गए हैं|ओये हमारी डेमोक्रेसी का क्याहोगा ?

पाकिस्तान की जम्हूरियत को हर कोई गधिगेड में डालने को उबला जा रहा है


झल्ला

हाँ जी बात तो वाकई चिंताजनक है लेकिन यह भी सत्य है कि चुनी हुई सरकार के सामने कई तरह की घरेड डाली जाती रहती हैं|अब देखो हसाड़े सोणे इंडिया में लोक तंत्र भी आये दिन किसी न किसी गधिगेड में फंस ही जाता है| लेकिन ये खातिर जमीत रखो कि जब फक्कड साधू रूपी अन्ना बाबू राव हजारे जैसे ज्यादा चल नहीं पाए तो उनका अनुसरण करते हुए ये आपके कनाडाई मौलाना कब तक आन्दोलन को खैंच पाएंगे?और अगर खैंच पाए तो प्रेजिडेंट / पी एम् किसे बनायेंगे ? जनरल कयानी या फिर परवेज मुशर्रफ ?

वाल मार्ट ने १२५ करोड़ की लाबिंग कराई यह सच्च है मगर भारत में इसका प्रभाव साबित हो पायेगा यह वहम है

झल्ले दी झल्लियाँ गल्लां

झल्ली

में क्या सुणो जी!ये आज कल जिसे देखो वहम और हकीकत वहम और हकीकत चिल्लाता जा रहा है|इनमे अंतर क्या होता है ज़रा उदहारण देकर समझा देयो जी

झल्ला

ओ भली लोके दरअसल हकीकत वो होती है जो होती या होता है और वहम वोह होता है जिसके होने की संभावना होती है उदहारण के तौर पर देखो
[१] अन्ना बाबू राव हजारे ने आज तक अजेंडा में कहा था कि वोह अपने प्रिय शिष्य अरविन्द केजरीवाल को सपोर्ट नहीं करेंगे यह तो हो गया हकीकत मगर चुनावों में अन्ना अरविन्द के खिलाफ जायेंगे यह वहम साबित हो सकता है
[२]वाल मार्ट ने भारत में खुदरा व्यापार पर कब्जे के लिए अमेरिकी कानून के मुताबिक़ अपने सांसदों द्वारा लाबिंग कराई और १२५ करोड़ रुपये खर्च कर दिए यह हकीकत है|मगर भारत में ऐसा कोई कानून नहीं है फिर भी अमेरिकी लाबिंग के प्रभाव का भारत में हुआ कोई असर प्रूव साबित हो पायेगा यह वहम हो सकता है
[३] भारतीय क्रिकेट तेम की इंग्लैण्ड के हाथो शर्मनाक हार हुई और उसके बाद कप्तान तक को बदला जाना चाहिए यह हकीकत है मगर कप्तान धोनी बदला जाएगा यह वहम है

केजरीवाल ने शरद पवार को साफ़ बचाया और नितिन गडकरी को हल्का फंसाया : वाई पी सिंह

अब तक अरविन्द केजरीवाल भ्रष्टाचार के नित नए खुलासे करते हुए लगातर प्रसिद्धि की सीडियां चडते जा रहे थे मगर आज उनके ही एक साथी रहे पूर्व आईपीएस ऑफिसर और सीनियर ऐडवोकेट वाई पी सिंह ने केंद्रीय मंत्री शरद पवार को बचाने का आरोप लगाते हुए केजरीवाल से ही कई गंभीर प्रश्न पूछ लिए हैं|
आज गुरुवार को मुंबई में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में वाईपी सिंह ने कहा कि उन्होंने शरद पवार से सम्बंधित महत्वपूर्ण जानकारी अरविन्द केजरीवाल और अन्ना हजारे को दी थी मगर उन्होंने उसका उपयोग नहीं किया उलटे उससे कम महत्वपूर्ण गडकरी के मामले को और अधिक कमतर करके पेश किया इससे उन्हें तकलीफ हुई है|उन्होंने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश का उल्लंघन करते हुए महाराष्ट्र सरकार में मंत्री रहे अजित पवार ने बिना सार्वजनिक नीलामी के लवासा की 348 एकड़ जमीन लेक सिटी कॉरपोरेशन को 23 हजार रुपये प्रति माह किराए पर 30 साल के लिए लीज पर दे दी। यह अवधि बडाई भी जा सकती है| इस कंपनी में शरद पवार के बेटी सुप्रिया सुले और उनके पति सदानंद सुले के शेयर थे। उन्होंने सुप्रिया सुले पर संसद में संपत्ति का गलत विवरण देने का भी आरोप लगाया।
केजरीवाल की तरह वी पी सिंह भी आई ऐ एस की एलाईड सर्विस छोड़ कर आये हैं उन्होंने अपने साथी रहे केजरीवाल पर वार करते हुए कहा कि केजरीवाल को सिंचाई घोटाले से जुड़े बड़े घोटाले की खबर थी। शरद पवार के इसमें शामिल होने के सबूत भी उनके पास थे। इसके बावजूद उन्होंने इस मामले को छिपा लिया और इसके बदले बीजेपी अध्यक्ष नितिन गडकरी का मामला उठाया जो इसके सामने बहुत छोटा मामला है। उन्होंने कहा कि ऐसा लगता है जैसे केजरीवाल ने अपने राजनीतिक समीकरणों को करप्शन के खिलाफ लड़ाई से ज्यादा अहमियत दी। दिल्ली में होने वाले चुनावों के मद्दे नज़र उन्होंने मुम्बई बेस्ड एन सी पी के बजाय दिल्ली बेस्ड बी जे पी पर निशाना साधा ।

केजरीवाल ने शरद पवार को साफ़ बचाया और नितिन गडकरी को हल्का फंसाया : वाई पी सिंह


लवासा

.वाईपी सिंह ने लवासा के मुद्दे पर खुलासा करते हुए कहा कि लवासा एक टाउनशिप है। ये एक निजी कंपनी है। सिंह ने शरद पवार के भतीजे अजित पवार पर आरोप लगाते हुए कहा कि अजित पवार ने साल 2002 में 348 एकड़ जमीन लेक सिटी को दे दी। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि 23 हजार रुपये प्रति महीने की दर से 348 एकड़ जमीन लवासा को 30 साल की लीज पर दे दी। जिसे आगे भी बढ़ाया जा सकता है।
उन्होंने आरोप लगाया कि वन टू वन निगोशिएशन में अजित पवार ने वो जमीन दे दी। आगे वाई पी सिंह ने खुलासा किया कि लेक सिटी कॉरपोरेशन में 20.81 फीसदी ज्वाइंट शेयर शरद पवार की बेटी सुप्रिया सुले और दामाद सदानंद सुले का है। सुप्रिया, अजित पवार की चचेरी बहन हैं। वाई पी सिंह के मुताबिक 10.4 फीसदी सुप्रिया और 10.4 फीसदी शेयर उनके पति सदानंद के हैं। सिंह के मुताबिक साल 2006 में सुप्रिया ने अपनी शेयर होल्डिंग बेच दी। हालांकि उस समय के रिवेन्यू डिपार्टमेंट के प्रिंसिपल सेक्रेटरी रमेश कुमार ने साफ कहा था कि ये जमीन कृष्णा वैली कृषि प्रोजेक्ट के लिए है। इसके बाद भी वो जमीन सुप्रिया को दे दी गई। नारायण राणे उस वक्त मंत्री थे।
शरद पवार पर आरोप लगाते हुए सिंह ने कहा कि शरद पवार केंद्रीय कृषि मंत्री हैं। उनका महाराष्ट्र के जमीन, टाउन, रोड के मामले में कोई लेना देना नहीं है। उन्होंने इसमें भी हस्तक्षेप किया। सिंह ने आरोप लगाया कि लवासा में ‘एकांत’ नामका एक गेस्ट हाउस है। यहां शरद पवार ने अपने पावर का इस्तेमाल करते हुए राज्य के अमले को बुलाया और बैठक की। इस बैठक में फैसला लिया गया कि लावासा को जो मदद चाहिए वो दी जाए। सिंह ने कहा कि इस घोटाले को उजागर करने के लिए रमेश कुमार को विक्टिमाइज किया गया।
वाई पी सिंह ने आरोप लगाते हुए कहा कि जो कुछ आज मैं प्रेसवार्ता में बता रहा हूं ये अरविंद केजरीवाल को कल अपनी प्रेस वार्ता में बताना चाहिए था। वाई पी सिंह ने कहा कि वो सुप्रिया और उनके पति सदानंद, नारायण राणे, शरद पवार और अन्य लोग जो इस कृषि घोटाले में शामिल हैं उनके खिलाफ केस करेंगे। वाई पी सिंह ने कहा कि उन्होंने इस मामले की जानकारी अन्ना हजारे को भी दी थी लेकिन शरद पवार के लिए अन्ना के दिल में सॉफ्ट कॉर्नर है।

नीलामी नहीं हुई

वाईपी सिंह ने प्रेस कॉन्‍फ्रेंस में आरोप लगाया कि अजीत पवार ने बहुत ही सस्‍ती दर पर लवासा को 348 एकड़ जमीन दी. लीज की दर 23 हजार रुपये महीने रखी गई. उन्‍होंने कहा कि जमीन 30 साल के लिए लीज पर दी गई और इसमें नीलामी प्रक्रिया की भारी अनदेखी की गई.

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश

श्री सिंह ने कहा कि पूरे मामले में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों को खुल्‍लम-खुल्‍ला उल्‍लंघन किया गया. बहरहाल, इस ताजा खुलासे पर देश की निगाहें टिकी हुई हैं.
लवासा टाउनशिप को लेकर वाईपी सिंह ने महाराष्ट्र के पूर्व उप मुख्यमंत्री अजित पवार पर बड़ा घोटाला करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि एक तरह से मुफ्त में अजित पवार ने लवासा को 348 एकड़ भूमि दे दी। इसके लिए उन्होंने पूरा सबूत पेश करने का दावा किया।

पवार के परिवार पर आरोप

वाईपी सिंह ने कहा कि लोग मेरी बातों पर नहीं बल्कि सबूतों पर भरोसा करें। सिंह ने कहा कि शरद पवार का पूरा परिवार इस घोटाले में शामिल है। उन्होंने कहा कि शरद पवार की बेटी सुप्रिया सुले और उनके पति सदानंद सुले के शेयर लेक सिटी कॉरपोरेशन में हैं। गौरतलब है कि वाईपी सिंह अरविंद केजरीवाल के सहयोगी रह चुके हैं। उन्होंने कहा कि अरविंद केजरीवाल ने बड़े घोटाले के तथ्यों को जानबूझ कर छिपाया और शरद पवार का नाम नहीं लिया।
वाईपी सिंह ने कहा, ‘मेधा पाटकर के नेतृत्व में एक समिति बनी थी, जिसके सामने महाराष्ट्र के कई मामले थे। उस समिति में मैं और अरविंद दोनों सदस्य थे। इस समिति के सामने भी शरद पवार का भ्रष्टाचार का मामला था। मुझे उम्मीद थी कि अरविंद केजरीवाल बुधवार को यही खुलासा करेंगे, लेकिन उन्होंने इसे छोड़कर बहुत हल्का मामला उठाया।’

ऍफ़ आई आर

उन्होंने कहा कि वह इस मामले को आगे बढ़ाएंगे ताकि इसमें प्राथमिकी दर्ज हो और कानूनी जांच की प्रक्रिया आगे बढ़े।

एनसीपी की सफाई

एनसीपी चीफ और केंद्रीय कृषि मंत्री शरद पवार ने कहा कि लवासा का मामला कोर्ट में है इसलिए ज्यादा बोलना ठीक नहीं। हिल स्टेशन पॉलिसी के मुताबिक लवासा प्रॉजेक्ट बन रहा है। जमीन देने का अधिकार राज्य सरकार को है। चूंकि प्रॉजेक्ट मेरे गृह जिले में है इसलिए मैं सीएम के साथ बैठक में शामिल था। इसमें कुछ गलत नहीं है। मैंने कुछ गलत नहीं किया।
वहीं, एनसीपी प्रवक्ता नवाब मलिक ने वाईपी सिंह के आरोपों पर सफाई दी और कहा सुप्रिया सुले ने कोई जानकारी नहीं छुपाई। सुप्रिया सुले और उनके पति ने कानून के दायरे में रह कर ही शेयर बेचा। केवल सनसनी फैलाने के लिए आरोप लगाए गए हैं। आजकल हजारों करोड़ के घोटाले का आरोप लगाने का फैशन हो गया है। वाईपी सिंह अच्छे वकील हैं उन्हें कोर्ट में वकालत करना चाहिए।
जिस प्रकार से ये खुलासा हुआ है उसमे एक बात खुल कर सामने आ रही है कि वाई पी सिंह कहीं ना कहीं स्वयम को अरविन्द केजरीवाल के हाथों नेगलेक्ट फील कर रहे हैं तभी उन्होंने आज इतने पुराने मामले को ,जो अदालत में भी विचाराधीन है , को प्रेस में उठा कर केजरीवाल के भ्रष्टाचार आन्दोलन के समान्तर स्वयम को खड़ा करने का प्रयास किया है| इन्होने भी केजरीवाल की शैली अपनाते हुए आरोप लगाये और आगे की कार्यवाही मीडिया के लिए छोड़ दिया|जिस प्रकार कई बार कांपती आवाज़ में श्री सिंह ने गडकरी के मुकाबिले पवार को निशाना बनाया | ये बात उन्होंने कई बार दोहराई इससे ऐसा आभास हो रहा है कि श्री सिंह कहीं ना कहीं गडकरी के खुलासे से परेशां थे और शरद पवार के खिलाफ भ्रष्टाचार की ऍफ़ आई आर दर्ज़ करवाने के बजाये पवार और उनकी बेटी सुले पर ही ज्यादा बोलते रहे बेशक उन्होंने कई दस्तावेजों की बात भी की मगर ज्यादातर केजरीवाल के प्रति कुछ कुंठा भी दिखाई दी | देश हित में अच्छा होगा कि ये खुलासा बड़ा खुलासा साबित हो और खजाने में अधिक धन जाये बड़े से बड़े अपराधी बुक किये जाये मगर अच्छा यही होता कि यह मामला पोलिस थाणे से शुरू किया जाता

अन्ना और केजरीवाल चले थे संग संग मगर लोग मिले और कारवाँ बिछुड़ गया

एक बेहद पुराने शेर को अगर आज के हालात में पडा जाए तो बनेगा हम तो चले थे संग संग जानिबे मंजिल मगर लोग मिलते गए और कारवां बिछुड़ता रहा|जी हाँ कमोबेश यही हालत आज कल टीम अन्ना माफ़ कीजिये भूत पूर्व अन्ना टीम का है|आज से लगभग दो साल पहले अन्ना बाबू राव हजारे और अरविन्द केजरीवाल ने मिल कर एक टीम बनाई थी और उसका नाम रखा अन्ना टीम इन्होने बामुश्किल एक साल में तीन बार अनशन किया और अपनी पहचान दुनिया भर में बना ली|सराकर की सरदर्दी बने और जनता में कुछ उम्मीद भी जगी|लेकिन इतिहास गवाह है कि इस प्रकार के आन्दोलनों की उम्र लम्बी नहीं होती सो जन लोक पाल के लिए चलाया गया यह आन्दोलन भी आपसी विरोधाभासों की भेंट चढ़ गया|जहां पहले संग संग मंजिल की तरफ बड़ा जा रहा था अब गाया जा रहा है कि रस्ते अलग अलग हैं ठिकाना तो एक है|यानि अन्ना और अरविन्द दोनों जन लोक पल के लिए लड़ाई लड़ेंगें मगर उनका रास्ता अलग अलग हो रहा है|अन्ना ने पिछले अनशन [जंतर मंतर] की दुर्दशा देख कर अब अनशन नहीं करने का फैसला करलिया है अन्ना ने कहा है कि वोह अब अनशन नहीं वरन आन्दोलन करेंगें |उधर अरविन्द का कहा है कि अनशन से सरकार पर कोई असर नहीं हो रहा इसीलिए अब राजनीति में विकल्प देने के लिए चुनाव लड़ना होगा इसके लिए उन्होंने पार्टी बनाने की घोषणा कर दी है| शक्ति प्रदर्शन करने के लिए अरविन्द ने दिल्ली में बिजली के बिलों को जलाया और सरकार को रुलाया| बेशक इस आन्दोलन के साथ कुछ हज़ार लोग ही जुड़े मगर इस आन्दोलन की गूँज बहुत दूर तक गूंजी और सरकार ने बिजली के बिलों की स्क्रूटिनी के आदेश दे दिए हैं| अन्ना ने आन्दोलन के लिए फिर से टीम जुटाने की मुहीम अलग से शुरू कर दी है|
अरविंद केजरीवाल से अलग होने के बाद पहली बार आज रविवार को अन्ना हजारे दिल्ली पहुंचे। उन्‍होंने अपने पुरानी मान्यता को दोहराते हुए कहा कि राजनीति में बहुत गंदगी है और राजनीतिक हाथों में देश सुरक्षित नहीं है। श्री हजारे ने यह भी कहा कि देश में एक बड़े आंदोलन की जरूरत है। यानी वो नई टीम बना सकते हैं। अन्ना दो दिन दिल्ली में सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटेकर, रिटायर्ड आईएएस, आईपीएस और सेना के अधिकारियों से मुलाकात करेंगे। वह यहां अपने समर्थकों से मिलेंगे और आगे की रणनीति पर चर्चा करेंगे |कहा जा रहा ही कि अन्ना की पींगें आज कल बाबा राम देव से बढ रही हैं मगर अन्ना इस मामले में चप्पी साधे हुए हैं|
पुणे से दिल्ली रवाना होने से पहले अन्ना ने कहा था कि वो[अन्ना] लोकपाल के लिए अपनी लड़ाई जारी रखेंगे।अन्‍ना हजारे ने भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन का नेतृत्व करने के लिए नई टीम बनाने का संकेत दिया है। उन्होंने भ्रष्टाचार के खिलाफ जंग के लिए अपनी रणनीति बदलने का भी ऐलान किया है। उन्होंने कहा है कि देश में परिवर्तन लाने के लिए राजनीति का रास्ता सही नहीं है, इसके लिए देश भर में आंदोलन करना होगा। भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई लड़ने वालेइस वयोव्रद्ध समाज सेवी ने कहा कि वह संसद में साफ सुथरी छवि वाले लोगों को भेजने के लिए कार्य जारी रखेंगे।
उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारियों ने भ्रष्टाचार मुक्त भारत के लिए उनके आंदोलन में शामिल होने की इच्छा जतायी है। उन्होंने देश के युवाओं में पूरा भरोसा जताते हुए उनसे कहा कि वे देश के भविष्य को लेकर निराशावादी नहीं हों। उन्होंने संकेत दिया कि पांच डी जी पी रैंक के अधिकारिओं ने भी उनके आन्दोलन को ज्वाईन करने की इच्छा जताई है|
हजारे ने यहां पिंपरी-चिंचवाड में एक गणोश मंडल कार्यक्रम में कहा कि वे अब भी संसद में साफ छवि वाले लोगों को भेजने का काम जारी रखेंगे। उन्होंने कहा, ‘बड़ी संख्या में सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारियों ने इस आंदोलन में शामिल होने की इच्छा जताई है।’ अन्ना रविवार को दिल्ली पहुंच रहे हैं। यहां वे आंदोलनकारियों से मिलेंगे।
अपने नए ब्लॉग पर उन्होंने लिखा, ‘लोकपाल के पहले ही दुर्भाग्यवश हमारी टीम दो हिस्सों में बंट गई। एक हिस्सा आंदोलन का सहारा लेना चाहता है तो दूसरा राजनीति में जाना चाहता है। शुरुआत में सरकार ने हमें अलग करने की बहुत कोशिश की। लेकिन इस बार उनके बिना कुछ किए ही हम अलग हो गए। ऐसा इसलिए

अन्ना और केजरीवाल चले थे संग संग मगर लोग मिले और कारवाँ बिछुड़ गया


हजारे ने अपने साथियों के साथ टकराव पर पहली बार चुप्पी तोड़ी। उन्होंने इसके लिए टीम में मौजूद एक ‘वर्ग’ को जिम्मेदार ठहराया। साथ ही उन्होंने वोटरों को भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन के नाम पर वोट मांगने वालों से भी सचेत रहने को कहा।लेकिन दिल्ली आते ही उन्होंने कहा कि अरविन्द से उनका कोई भेद भाव नहीं है दोनों की मंजिल तो एक ही है|
अरविंद केजरीवाल और अन्ना की राहें बेशक अलग अलग हो गई हैं दोनों एक दूसरे पर टीम तोड़ने का आरोप लगाने लग गए हैं मगर कहते फिर रहे हैं कि हम एक दूसरे की बहुत इज्ज़त करते हैं|

अदभुत अरविन्द करिश्माई केजरीवाल की पोलिटिकल पार्टी का क्या होगा?

झल्ले दी झल्लियाँ गल्ला

एक सोश्लाईट

ओये झल्लेया ये अन्ना हजारे को कौन से कीड़े ने काट लिया है?पहले अपनी ही संस्था इंडिया अगेंस्ट करप्शन की ऐसे की तैसी कर दी+फिर बाबा राम देव से गुप्त पींगें बढाने लग गए और अब हसाड़े बोल्ड अरविन्द केजरीवाल के पीछे ही पड़ गए हैं|अन्ना ने अब वोटरों को चेतावनी दी है कि इलेक्शन में अन्ना की फोटो और नाम के आधार पर वोटें माँगी जा सकती है| अन्ना के इस ब्लॉग का उत्तर तक देने से अरविन्द ने मना कर दिया है| हुन हसाड़े अदभुत अरविन्द करिश्माई केजरीवाल की पोलिटिकल पार्टी का क्या होगा?

झल्ला

श्रीमान जी आप जी कि बातों से तो लगता है कि आप जी के अन्ना बाबु राव हजारे ने अपने नाम और फोटो के इस्तेमाल के कापी राईट [सर्वाधिकार]अरविन्द से वापिस लेकर किसी और के नाम कर दिए हैं|अब तो आप जी के अदभुत जी को अपने ही करिश्मे से चुनावी समर में उतरना होगा|

अन्ना बाबु राव हजारे ने अपने नाम और फोटो के इस्तेमाल के कापी राईट [सर्वाधिकार]अरविन्द से वापिस लेकर किसी और के नाम कर दिए हैं|