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Tag: झल्ली गल्लां

विकास और बहुमत के ऊंट पर सवार सोणी मन मोहनी सरकार को कोई न कोई काट ही लेता है

झल्ले दी झल्लियाँ गल्लां

एक सोश्लाईट

ओये झल्लेया ये कौन सी नई भसुडी पड़ गई है| ओये बलात्कारियों के लिए फांसी की मांग करना भी गुनाह हो गया|एक तो ये पोलिस और सरकार मिल कर भी कानून व्यवस्था को पटरी में नहीं ला पा रहे ऊपर से शांतिपूर्वक आन्दोलन क्या हुआ पोलिस और सरकार दोनों ही पटरी से उतर गए| पोलिस और दिल्ली की सरकार आपस में ही टकराने लग गए |इस अप्रिय घटना क्रम से बचने के लिए अब नया ष्ट्राग शुरू हो गया है | प्रदर्शन स्थलपर बेचारे एक पोलिस कांस्टेबिल सुभाष तोमर की दुखद मौत होने का नाजायज़ फायदा उठा कर हसाडीनई नई “आप” को ही कांस्टेबिल तोमर का कातिल ठहराया जाने लगा हैजबकि ऊपर वाले की कृपा से वहाँ एक प्रत्यक्ष दर्शी योगेन्द्र ने एन डी टी वी पर पोलिस की पोल खोल क़र रख दी है | योगेन्द्र का कहना है कि उसने[योगेन्द्र] ने स्वयम कांस्टेबिल को गिरते हुए देखा था और उन्होंने ही उसे अस्पताल पहुँचाया था |इस आई विटनेस के अनुसार सिपाही खुद भागते हुए गिरा और अस्पताल पहुँचाया गया |ऐसे में सुभाष की मौत को कत्ल बता कर कैसा इन्साफ किया जा रहा है| ओये वोह सिपाही तो बेचारा हार्ट पेशेंट था फिर भी उसको ऐसी कड़ी डयूटी पर लगाया गयाजिसके कारण वोह गिरा | उसकी मौत की तो निष्पक्ष जांच होनी जरूरी है|

झल्ला

पुरानी कहावत है +रिवायत है +सियासत है और उस पर गाना भी बना था कि वोह अफसाना जिसे अंजाम तक लाना न हो मुमकिन उसे एक खूबसूरत मौड़ देकर छोड़ना अच्छा| लेकिन दुर्भाग्य से जब भाग्य या किस्मत या लक ख़राब हो तो ऊंट पर बैठने पर भी कुत्ता काट ही लेता है|ये हसाडी सोणी मन मोहनी सरकार का भी भाग्य ख़राब चल रहा है|तभी सब कुछ अच्छा होने पर भी इस प्रकार की तोहमत लगती ही जा रही है| और अफसानों को मौड़ देते समय खुद ही भम्भड़ भूसे में पड़ जाते हैं|

विकास के ऊंट पर बैठी सोणी मन मोहनी सरकार को कोई न कोई काट ही लेता है

मार्कंडेय काटजू की बात सोलह आने, सौ प्रतिशत सही है मगर शब्दों के चयन में हमेशा की तरह खोट हो गई

झल्ले दी झल्लियाँ गल्लां

एक आम नागरिक

ओये झल्लेया ये क्या हो रहा है? रिटायर[न्यायाधीश] होने के बाद प्रेस कौंसिल के सुप्रीमो बने माननीय मार्कंडेय काटजू साहब को अब ९०%भारतीय बेवकूफ नज़र आने लग गए हैं|उनके मुताबिक़ तो केवल १०% भारतीय ही सयाने हैं+अक्लमंद हैं+बुद्धिमान हैं |इसका मतलब तो ये हुआ कि केवल १०% सयाने ही देश को चला रहे हैं|राजनीती कर रहे हैं|

Jhalle dii Gallaan


झल्ला

माननीय मार्कंडेय काटजू ने एक समान दो मुकद्दमों में अलग अलग विरोधी निर्णय देकर यह साबित कर दिया था कि देश में बहुसंख्यक वाकई बेवकूफ हैं देश की दो बड़ी अदालतों[अलग अलग]में न्यायाधीश थे तो जालंधर और मेरठ में छावनी परिषदों की रिहायशी कालोनियों के विषय में अलग अलग निर्णय देकर जालंधर को अभय दान और मेरठ की शिवाजी कालोनी के रिटायर्ड+ अल्पाय+असहाय नागरिकों को जीवन भर की परेशानियों से नवाज़ा था| अब तो उन्होंने केवल अपने पुराने विचारों को जुबान भर ही दी है लेकिन अब एक बात कहनी जरूरी है कि इस बार उन्होंने बात तो सही कही है मगर उसके लिए शब्दों के चयन करने में शायद उनसे चूक हो गई है|

उत्तर प्रदेश में भी अंग्रेजों का समाज वाद यानि चैरिटी बिगिन्स एट होम

झल्ले दी गल्ला

समाज वादी

ओये झल्लेया ये ह्साड़े मुल्क को किधर धकेला जा रहा है?पहले तो ओनली कांग्रेस पर ही वंशवाद + ब्राह्मण वाद+वोटों की राजनीती करने का आरोप लगता था अब ये आरोप लगाने वाले सपाई खुद ही अपनी पार्टी में परिवार वाद वंश वाद को बढावा दे रहे हैं |देखो लोक सभा के लिए २०१४ में होने वाले चुनावों में प्रदेश की ८० सीटों के लिए १०% उम्मीदवार तो अपने परिवार से ही चुन लिए हैं| यकीन नहीं आता तो लिस्ट हाज़िर है [1.] मैनपुरी-मुलायम सिंह यादव2. कैराना-नाहिद हसन3. मुजफ्फरनगर-गौरव स्वरूप4. नगीना-यशवीर सिंह5. मुरादाबाद-एसटी हसन6. अमरोहा-श्रीमती हुमेरा7. बागपत-विजय कुमार सिंह8. गाजियाबाद-सुधन रावत9. गौतमबुद्धनगर-नरेंद्र भाटी10. हाथरस-रामजी लाल सुमन 11. मथुरा-चंदन सिंह12. आगरा-महराज सिंह 13. फतेहपुर सीकरी-डा. राजेंद्र सिंह[१४]. फिरोजाबाद-अक्षय यादव[15.] एटा-देवेंद्र सिंह यादव[१६]. बदायूं-धर्मेद्र यादव17. आवला-कुवंर सर्वराज सिंह18. पीलीभीत-बुद्धसेन वर्मा19. शाहजहापुर-मिथलेश कुमार
20. खीरी-रविप्रकाश वर्मा21. धौरहरा-आनंद भदौरिया22. हरदोई-ऊषा वर्मा23. मिश्रिख-जयप्रकाश रावत24. उन्नाव-अरुण कुमार शुक्ला25. मोहनलाल गंज-सुशीला सरोज26. लखनऊ-अशोक वाजपेई27. सुलतानपुर-शकील अहमद28. प्रतापगढ़-सीएन सिंह[२९] . इटावा-प्रेमदास कठेरिया[३०]. कन्नौज-डिम्पल यादव31. अकबरपुर-लाल सिंह तोमर32. जालौन-घनश्याम अनुरागी[33.] झासी-चंद्रपाल सिंह यादव34. हमीरपुर-विशम्भर प्रसाद निषाद35. बादा-आरके पटेल36. फतेहपुर-आरके सचान37. कौशाम्बी-शैलेंद्र कुमार38. इलाहाबाद-रेवती रमण सिंह39. बाराबंकी-श्रीमती राजरानी रावत40. फैजाबाद-तिलकराम वर्मा41. बहराइच-शब्बीर अहमद बाल्मीकी42. कैसरगंज-बृजभूषण शरण सिंह
43. गोण्डा-कीर्तिवर्धन सिंह44. डुमरियागंज-माता प्रसाद पाण्डेय45. बस्ती-बृजकिशोर सिंह46. गोरखपुर-श्रीमती राजमती निषाद47. लालगंज-दूधनाथ सरोज48. घोसी-बाल किशन चौहान49. बलिया-नीरज शेखर[50.] जौनपुर-केपी यादव51. मछली शहर-तूफानी सरोज52. चंदौली-राम किशुन53. वाराणसी-सुरेंद्र सिंह पटेल54. भदोही-श्रीमती सीमा मिश्रा
55. राबर्टसगंज-पकौड़ी लाल

अंग्रेजों का समाज वाद यानि चैरिटी बिगिन्स एट होम


झल्ला

ओ भोले बाबू आप किस समाज वाद में खोये हुए हो अब तो अंग्रेजों का समाज वाद चल रहा है यानि चेरिटी बिगिन्स एट होम
इन चेरिटी वालों को भी कोई कम नहीं समझो माननीय मुलायम सिंह यादव की साईकिल पर एक सवार के साथ अनेको राजनीतिक दावँ लदे हुए हैं|
[१]कांग्रेस के साथ मोल भाव करने के लिए दरवाज़ा खोल दिया है[२] भाजपा पर अपने प्रत्याशियों को उजागर करने के लिए दबाब बना दिया है| भाजपा यदि अब अपने पत्ते खोल देती है तब कांग्रेस को अपने कार्ड्स खेलने में आसानी हो जायेगी|[३]अपने बाग़ी साथी ठाकुर अमर सिंह से दूरी बनाये रखने के लिए अमर सिंह की प्रिय ज्याप्रदा को भाव नहीं दिया[4] बागपत में चौधरी अजित सिंह के लिए जहां फील्ड समतल रखी हैं वहीं रालोद से निकली अनुराधा चौधरी को अभी तक कोई भाव नहीं दिया गया है ऐसे में अजित सिंह के एविएशन मिनिस्ट्री से प्राथमिकता ली जा सकती है| |

हर ऐरे गेरे नत्थू खेरे को लूट मचाने की खुली छूट मिली हुई है

झल्ले दी झल्लियाँ गल्लां

एक इन्वेस्टर

ओये झल्लेया ये क्या यार लगता है कि हसाड़े मुल्क में हर ऐरे गेरे नत्थू खेरे लूट मचाने की खुली छूट मिली हुई है | कोई अगर पकड़ा भी जाता है तो जनता का पैसा वापिस नहीं मिलता |
अब देखो [१]साउथ की गरुडा फायनेंस कम्पनी वाले सातवे दशक में पश्चिमी उत्तर प्रदेश में छोटे छोटे इन्वेस्टरों का लाखों रुपय्या ले कर भाग गए [२] मेरठ की कुबेर फायनेंस कम्पनी वाले नौवें दशक में अपने ही मेरठ के निवेशकों का करोड़ों रुपये ले कर भाग गए|इस के एक मालिक को पकड़ा गया उसका पैसा रिसर्व बैंक में जमा है फिर भी जनता को लौटाया नहीं जा सका है|[३]एम् एस शूज+उषा रेक्टिफायर+ मुरा ब्लैक +आदि अनेकों शेयर धारक रो रहे हैं|
अब करीब एक हजार करोड़ की ठगी कर चुके उल्हास खरे और रक्षा की कंपनी स्टॉक गुरु को लेकर अब सरकारी एजेंसी सेबी भी सवालों के घेरे में आ गई है। दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय तक से मदद मांगने की अभी सोच ही रही है। स्टॉक गुरु के जाल में अब तक 2 लाख लोगों के फंसने का अनुमान है। सेबी के नियमों के मुताबिक अगर 20 लोग या उससे ज्यादा लोग किसी कंपनी में निवेश करते हैं तो उसका सेबी में रजिस्ट्रेशन होना जरूरी है। पुलिस का कहना है कि करीब 14 हजार लोगों ने स्टॉक गुरु की धोखाधड़ी की शिकायत दर्ज कराई है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल ये है इतने सारे लोग एक कंपनी में निवेश कर रहे हैं तो क्या सेबी को इसके बारे में जानकारी नहीं मिली और अगर सेबी को जानकारी थी तो कंपनी रजिस्टर्ड क्यों नहीं हुई।

हर ऐरे गेरे नत्थू खेरे को लूट मचाने की खुली छूट मिली हुई है

झल्ला

सेठ जी हसाडी बेचारी सरकार पहले ही अरबों रुपयों के घोटालों का हिसाब लागने में व्यस्त है| ऐसे में आप के ये लाख+करोड़ के घोटाले की किसे फुर्सत है | भोले सेठ जी बड़े बड़े शहरों में छोटी छोटी बाते तो होती ही रहती हैं|