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Tag: राजस्थान पंचायती राज (संशोधन) विधेयक २०१९

राजस्थानी कांग्रेस ने चुनावों में शैक्षणिक योग्यता को समाप्त किया

[जयपुर]राजस्थान असेंबली नेचुनावों में शैक्षणिक योग्यता की शर्त समाप्त की
आज विधान सभा में नगरपालिका (संशोधन) विधेयक, 2019 और राजस्थान पंचायती राज (संशोधन) विधेयक, २०१९ ध्वनिमत से पारित किये गए |
स्वायत्त शासन मंत्री शान्ती कुमार धारीवाल ने नगरपालिका (संशोधन) विधेयक पर कहा कि जन घोषणा पत्र में वायदे को पूरा करने के लिए चुनावों में शैक्षणिक योग्यता की बाध्यता को खत्म किया जा रहा है|
उन्होंने कहा कि ऎसे कई मामले सामने आए हैं, जहां झूठे सर्टिफिकेट के आधार पर चुनाव लड़ लिया गया। चुनावों में शैक्षणिक योग्यता की बाध्यता के कारण शिक्षित और अशिक्षित दो वर्ग बन गए। अशिक्षित लोग खुद को हीन समझते हैं, जबकि कॉमन सेंस ज्यादा महत्वपूर्ण होता है। कई लोग अपने कॉमन सेंस के कारण बड़े प्रशासक साबित हुए।
उन्होंने कहा कि हरिदेव जोशी, भैंरो सिंह शेखावत, ज्ञानी जैल सिंह, राबड़ी देवी और उमा भारती जैसे महत्वपूर्ण लोग भी मैट्रिक पास न होने पर भी अच्छे प्रशासक साबित हुए। उन्होंने कहा कि अशिक्षित व्यक्ति भी अच्छे से अच्छा प्रशासक हो सकता है।
इससे पहले सदन ने विधेयक को जनमत जानने के लिए परिचालित करने का संशोधन प्रस्ताव ध्वनिमत से अस्वीकार कर दिया
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री सचिन पायलट द्वारा लाये गए राजस्थान पंचायती राज (संशोधन) विधेयक, 2019 पर
हुई बहस का जवाब देते हुए पायलट ने कहा कि पंचायती राज अधिनियम में पूर्व में किए गए प्रावधान ऎसे थे, जिनसे राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति द्वारा सम्मानित किए गए सरपंच भी चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य घोषित हो गये थे। उन्होंने कहा कि शिक्षा के आधार पर समाज को दो श्रेणियों में नहीं बांटा जा सकता, इसलिए अधिनियम के प्रावधान संविधान की मूल भावना के विपरीत थे।
श्री पायलट ने बताया कि संवैधानिक संस्थाओं में शैक्षिक योग्यता की शुरूआत पहले ऊपर के स्तर से संसद और विधानसभा से होनी चाहिए। उन्होंने बताया कि समावेशी विकास के लिए सरकार की यह कोशिश है कि वंचित लोगो को भी समान रूप से अवसर मिल सके।
इससे पहले सदन ने विधेयक को जनमत जानने के लिए परिचालित करने के संशोधन प्रस्ताव को ध्वनिमत से अस्वीकार कर दिया