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Tag: सोनिया गाँधी

कांग्रेस के चिंतन शिविर में से निकले वैमनस्य के गरल से कांग्रेस और भाजपा ने होली खेली

कांग्रेस के चिंतन शिविर में हुए मंथन में अमृत के साथ कई प्रकार का जहर भी निकला हैं| पावर या सत्ता का गरल तो राहुल गाँधी ने सहर्ष स्वीकार किया और बेहद भावुक होकर सबको साथ लेकर चलने का आश्वासन दिया |वैमनस्य के जहर को सुशील कुमार शिंदे ,दिग्विजय सिंह और मणि शंकर अय्यर सरीखे नेताओं ने ग्रहण करके तत्काल अपने विरोधी बीजेपी और आर एस एस पर उडेल दिया | प्रधान मंत्री डाक्टर मन मोहन सिंह और यूं पी ऐ अध्यक्ष श्रीमति सोनिया गाँधी ने बड़े नपे सभ्य तुले शब्दों में विपक्ष की आलोचना की | बेशक वह विपक्ष द्वारा शासित राज्यों में केंद्र सरकार की यौजनाओं को अपने नाम देने सम्बन्धी हीक्यों न हो|वरिष्ठ नेताओं के बाद राहुल गाँधी ने भी सुलझे नेता की भांति न केवल अपनी सरकार की आलोचना की वरन अपने पिता स्वर्गीय राजीव गांधी के शब्दों में १०० पैसे में ९९ पैसे जनता तक पहुँचाने का वायदा भी दोहराया |उन्होंने कहा कि उन्होंने अपनी दादी श्री मति इंदिरा गाँधी और पिता राजीव गांधीकी शहादत को देखा है उनके परिवार ने इस दुःख को सहा है \ अपनी माता श्री मति सोनिया गांधी को उद्दत करते हुए कहा कि सत्ता जहर के समान है क्योंकि कांग्रेस उनका परिवार है इसीलिए जहर को देश की सेवा के लिए ग्रहण किया है अब पैसा और सत्ता जनता तक पहुँचाना उनका उद्देश्य रहेगा|
केन्द्रीय गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ [आर एस एस]और प्रमुख विपक्षी दल भाजपा पर अपने शिविरों में आतंकवादी प्रशिक्षण देने के आरोप लगाने में कोई देर नहीं लगाई दिग्विजय सिंह ने भी तत्काल शिंदे के आरोप का समर्थन कर दिया |
उधर बीजेपी प्रवक्ता मुख्तार अब्बास नकवी ने इस जहर का जवाब जहर से देते हुए संवाददाताओं से कहा, ‘गृहमंत्री के बयान में उनकी (कांग्रेस) विध्वंसकारी मानसिकता झलकती है. चिंतन शिविर में उन्होंने जो बयान दिया है वह बेहद आपत्तिजनक है. यह न केवल अस्वीकार्य है, बल्कि खतरनाक भी.’ उन्होंने कहा कि शिंदे के बयान का मकसद देश में शांति और समरसता को बाधित करना है.
संघ को एक ‘राष्ट्रवादी संगठन’ बताते हुए बीजेपी नेता ने कहा, ‘सोनिया गांधी को माफी मांगनी चाहिए. राहुल गांधी और गृहमंत्री को भी माफी मांगनी चाहिए, अन्यथा इसके गंभीर परिणाम होंगे. यह स्वीकार्य नहीं है. गृहमंत्री द्वारा इस प्रकार की बेबुनियादी बातें करना असली आतंकवादियों को क्लीन चिट देने जैसा है.’
बीजेपी प्रवक्ता ने यह भी कहा कि शिंदे के बयान से पाकिस्तान समर्थित आतंकवाद को ‘आक्सीजन’ मिल गयी है. उन्होंने कहा, ‘आपने भारत विरोधी आतंकवादी समूहों को भी मजबूती प्रदान की है.’
नकवी ने कहा, ‘कई बार मैं महसूस करता हूं कि कांग्रेस कायरों की जमात बन गयी है. मैं ऐसा इसलिए कह रहा हूं क्योंकि देश में बार-बार आतंकवादी हमले हो रहे हैं, आतंकवादी यहां पनप रहे हैं.’ उन्होंने कहा, ‘पाकिस्तानी सैनिक हमारे जवानों के सर काट देते हैं और हमारे प्रधानमंत्री इस पर प्रतिक्रिया जाहिर करने में इतना लंबा समय लेते हैं. हमारी सरकार इस प्रकार की घटनाओं पर कोई प्रतिक्रिया देने से पहले बार-बार सोचती है.
भाजपा के राज्यसभा में वरिष्ठ नेता अरुण जेटली ने राहुल गांधी की पदोन्नति को विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्रको वंशवाद में बदलने का आरोप लगाया
अरुण जेटली ने यह भी कहा कि उनकी अपनी पार्टी के नेता का फैसला ‘जांचे-परखे’ आधार पर होगा. राहुल का नाम लिए बगैर राज्यसभा में विपक्ष के नेता ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने अपनी जयपुर चिंतन बैठक में महंगाई, कुशासन, भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों का जवाब नहीं दिया जबकि इन समस्याओं को लेकर लोगों में गहरा असंतोष है.
शिंदे ने कहा था, ‘जांच के दौरान यह रिपोर्ट आई है कि बीजेपी और संघ आतंकवाद फैलाने के लिए आतंकवादी प्रशिक्षण शिविर चला रहे हैं. समझौता एक्सप्रेस, मक्का मस्जिद में बम लगाए जाते हैं और मालेगांव में भी बम विस्फोट होता है.’ बाद में संवादाताओं द्वारा घेरे जाने पर श्री शिंदे ने कहा, ‘यह भगवा आतंकवाद है जिसकी मैं बात करता हूं. यह वही चीज है और कुछ नया नहीं है. यह कई बार मीडिया में आ चुका है.’

एल के अडवाणी के नज़रिए से तवलीन सिंह की १० जनपथी “दरबार”

पत्रकार तवलीन सिंह द्वारा गांधी परिवार पर लिखित पुस्तक ‘दरबार‘ पर एल के अडवाणी ने अपने ब्लॉग में प्रतिक्रिया देते हुए पुस्तक को अत्यन्त ही रोचक पठनीय बताया है|इस पुस्तक में पूर्व प्रधान मंत्री स्वर्गे राजिव गाँधी के उत्थान और फिर पतनके माध्यम से 10 जनपथ[कांग्रेस अध्यक्ष] की रहस्यात्मकता या गुप्तता” को उजागर करने का प्रयास किया गया है|

एल के अडवाणी के नज़रिए से तवलीन सिंह की १० जनपथी “दरबार”

प्रस्तुत है अडवानी के ब्लाग से उद्दत दरबार पर उनकी यह प्रतिक्रया ।
तहलका जैसी पत्रिकाओं ने प्रकाशित किया है कि यह पुस्तक गांधी परिवार के विरूध्द ”पुराने हिसाब किताब चुकाने” के उद्देश्य से लिखी गई एक गपशप है। जबकि दूसरी और दि एशियन एज ने पुस्तक की समीक्षा ‘दिल्ली दरबार के रहस्यपूर्ण वातावरण से पर्दा उठना‘ (Unraveling the mystique of Delhi’s Durbar) शीर्षक से प्रकाशित की है। हालांकि कोई भी इससे इंकार नहीं कर सकता कि तवलीन की नवीनतम पुस्तक अत्यन्त ही रोचक पठनीय है।
‘एशियन एज‘ में समीक्षक अशोक मलिक की यह टिप्पणी बिल्कुल सही है कि अपनी सारी पहुंच के बावजूद राजधानी में राजनीतिक पत्रकार अक्सर लुटियन्स दिल्ली के लिए अंतत: बाहरी ही रहते हैं। कम से कम 10 जनपथ के संदर्भ में यह शत-प्रतिशत सत्य है।
अनगिनत समस्याओं वाला भारत एक विशाल देश है। संविधान और कानून सरकार को देश का शासन प्रभावी ढंग से चलाने की सभी जिम्मेदारी प्रदान करते हैं। जैसाकि सभी लोकतंत्रों में लोकतांत्रिक तंत्र का मुखिया प्रधानमंत्री होता है। लेकिन देश में सभी जानते हैं कि आज के भारत में मुखिया प्रधानमंत्री नहीं अपितु कांग्रेस अध्यक्ष हैं। यही वह स्थिति है जो इन दिनों देश की अनेक समस्याओं की मूल जड़ है।
यह पुस्तक अपने पाठकों को बताती है कि एक समय था जब इसकी लेखक का न केवल राजीव गांधी के साथ अपितु श्रीमती सोनिया गांधी के साथ भी घनिष्ठ सम्बन्ध था। तब अचानक यह निकटता समाप्त हो गई। अशोक मलिक लिखते हैं : तवलीन की पुस्तक हमें ”10 जनपथ की रहस्यात्मकता या गुप्तता” को समझने में सहायता करती है।
मलिक द्वारा ”इंदिरा गांधी हत्याकाण्ड में राजीव के और सोनिया के सामाजिक मित्रों को फंसाने के विचित्र दुष्टताभरे अभियान” की ओर इंगित करने ने ‘मुझे पुस्तक के अध्याय 14 के उन सभी आठ पृष्ठों को पढ़ने को बाध्य किया‘ जिनपर मलिक की टिप्पणी आधारित है। तवलीन से भी इस सम्बन्ध में इंटेलीजेंस ब्यूरो (आई0बी0) ने पूछताछ की थी। इस प्रकरण के सम्बन्ध में तवलीन का अंतिम पैराग्राफ हमारी गुप्तचर एजेंसियों की काफी निंदा करता है:

”जांच के अंत में, हमारी गुप्तचर एजेंसियों के स्तर के बारे में मुझे गंभीर चिंता हुई। इसलिए मुझे कोई आश्चर्य नहीं हुआ जब कुछ महीने बाद यह जांच कि भारत के प्रधानमंत्री की हत्या में कोई बड़ा षडयंत्र था, को चुपचाप समाप्त होने दिया गया।”
312 पृष्ठों वाले इस संस्मरण की शुरूआत में लेखक का चार पृष्ठीय ‘नोट‘ है। इस पुस्तक में तवलीन सिंह की टिप्पणियों से आप असहमत हो सकते हैं और उनके कुछ निष्कर्षों को चुनौती दे सकते हैं। लेकिन मुझे उनके इस शुरूआती ‘नोट‘ में दम लगता है जिसे इस अंतिम पैराग्राफ में सारगर्भित ढंग से समाहित किया गया है:
”दरबार लिखना मुश्किल था। राजीव गांधी की मृत्यु के तुरंत बाद मैंने इसे लिखना शुरू किया। मैं उन्हें तब से जानती थी जब वह एक राजनीतिज्ञ नहीं थे और अपने को मैंने इस अनोखी स्थिति में पाया कि उन्हें यह बता सकूं कि कैसे भारतीय इतिहास में सर्वाधिक प्रचण्ड बहुमत वाला प्रधानमंत्री अंत में कैसे निराशाजनक स्थिति में पहुंचा। केवल इसलिए नहीं कि मैं भी उस छोटे से सामाजिक ग्रुप का हिस्सा थी जिसमें वह भी थे, लेकिन इसलिए कि एक पत्रकार के रूप में मेरा कैरियर इस तरह से बदला कि मैंने उस भारत को देखा जो राजीव के एक राजनीतिज्ञ के रूप में लगभग समानांतर चलता रहा था। तब मुझे लगा कि उन्होंने भारत की अपेक्षाओं को पूरा नहीं किया लेकिन जब मैं इस पुस्तक को लिखने बैठी तो मुझे अहसास हुआ कि वही अकेले नहीं थे जिन्होंने भारत को शर्मिंदा किया। एक समूचे सत्तारूढ़ वर्ग ने ऐसा किया। वह सत्तारूढ़ वर्ग जिससे मैं भी सम्बन्धित हूं।

जैसे कहानी आगे बढ़ती है यह मानों मेरे अपने जीवन का दर्पण है, राजनीतिज्ञ के रूप में राजीव के संक्षिप्त जीवन और कैसे वंशानुगत लोकतंत्र के बीज बोए गए-का ही यह एक संस्मरण नहीं है बल्कि एक पत्रकार के रूप में मेरा भी है। मैंने पाया कि पत्रकारिता की स्पष्ट दृष्टि ने उस देश को समझने के मेरे नजरिए को बदला जिसमें मैं अपने सारे जीवन भर रही हूं। और इसने मूलभूत रूप से उस नजरिए को बदला जिसमें मैं उन लोगों को देख सकी जिनके साथ मैं पली-बढ़ी। मैंने देखा कि कैसे वे भारत से अलिप्त हैं, उसकी संस्कृति और इतिहास उनके लिए कैसे विदेशी हैं, और इसी के चलते वे पुनर्जागरण और परिवर्तन लाने में असफल रहे। मैंने देखा कि एक पत्रकार के रूप में मेरे जीवन ने उन द्वारों को खोला जिनसे मुझे लगातार शर्म महसूस हुई कि कैसे मेरे जैसे लोगों ने भारत के साथ विश्वासघात किया है। मैं मानती हूं कि इसी के चलते भारत को उसके सत्तारूढ़ वर्ग ने शर्मिंदा किया है और वह वैसा देश नहीं बन पाया जैसा उसे बनना चाहिए था। यदि हम कम विदेशी होते और भारत की भाषाओं और साहित्य की महान संपदा, राजनीति और शासन सम्बन्धी उसके प्राचीन मूलग्रंथों और उसके ग्रंथों के बारे में और ज्यादा सचेत होते तो हम अनेक चीजों में परिवर्तन कर पाते लेकिन हम असफल रहे और अपने बच्चों कीे उनके ही देश में अपनी तरह, विदेशियों की तरह पाला। सभी विदेशी चीजों पर मंत्रमुग्ध और सभी भारतीय चीजों का तिरस्कार।
एक नया सत्तारूढ़ वर्ग धीरे से पुराने का स्थान ले रहा है। एक नयी, अभद्र राजनीतिज्ञों का वर्ग सत्ता पर नियंत्रण हेतु सामने आ रहा है। किसानों और चपरासियों के बच्चे और उन जातियों जो कभी अस्पृश्य माने जाते थे, की संतानें भारत के कुछ बड़े प्रदेशों पर शासन कर चुके हैं। लेकिन पुराने सत्तारूढ़ की बराबरी की चेष्टा में वे अपने बच्चों को अंग्रेजी पढ़ाते हैं और उन्हें पश्चिम के विश्वविद्यालयों में भेजते हैं। इसमें भी कोई हर्जा नहीं है बशर्ते कि वे उन्हें अपनी भाषाओं और संस्कृति से विमुख नहीं करते हों।
एक भारतीय पुनर्जागरण की संभावना, जैसाकि पहली पीढ़ी के उन भारतीयों जो उपनिवेश के बाद के भारत में पली-बढ़ी है, हमारी हो सकती थी और सिमटती और दूर होती जा रही है। सत्तारूढ़ वर्ग के हाथों में एक राजनीतिक हथियार-वंशवाद, देश जिसकी आत्मा पहले से ही शताब्दियों से गहरे ढंग से दागदार है के नए उपनिवेश का मुख्य स्त्रोत बनता जा रहा है। यह वह मुख्य कारण है जिसके चलते तेजी से विस्तारित और फैलते शिक्षित मध्यम वर्ग का लोकतंत्र और लोकतांत्रिक संस्थाओं से मोहभंग होता जा रहा है।
तवलीन की इन पंक्तियों ने मुझे लार्ड मैकाले द्वारा फरवरी 1835 में ब्रिटिश संसद में की गई टिप्पणियों का स्मरण करा दिया:

”मैंने पूरे भारत की यात्रा की और ऐसा व्यक्ति नहीं देखा जो कि भिखारी हो या चोर हो। इस तरह की संपत्ति मैंने इस देश में देखी है, इतने ऊंचे नैतिक मूल्य, लोगों की इतनी क्षमता, मुझे नहीं लगता कि कभी हम इस देश को जीत सकते हैं, जब तक कि हम इस देश की रीढ़ को नहीं तोड़ देते, जो कि उसकी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत में है। इसलिए मैं प्रस्ताव करता हूं कि हमें इसकी पुरानी और प्राचीन शिक्षा-व्यवस्था, इसकी संस्कृति को बदलना होगा। इसके लिए यदि हम भारतीयों को यह सोचना सिखा दें कि जो भी विदेशी है और अंग्रेज है, वह उसके लिए अच्छा और बेहतर है, तो इस तरह से वे अपना आत्मसम्मान खो देंगे, अपनी संस्कृति खो देंगे और वे वही बन जाएंगे जैसा हम चाहते हैं-एक बिल्कुल गुलाम देश।”
मैकाले द्वारा अपनाई गई उपनिवेशवादी नीति अंग्रेजों द्वारा भारत लागू शिक्षा व्यवस्था में विद्यमान थी। इसका प्रभाव स्वतंत्रता के बाद भी बना हुआ है। वे लोग जो केवल हिंदी या कोई भारतीय भाषा बोलते हैं और अच्छी अंग्रेजी नही बोल पाते, उन्हें हमारे देश में निकृष्ट समझा जाता है। मैंने अक्सर इस तथ्य को समझने के लिए अपना उदाहरण दिया है। मैं अपने जीवन के आरंभिक बीस वर्षों में-जो मैंने सिंध में बिताए-बहुत कम हिंदी जानता था। राजस्थान आने के बाद मैंने परिश्रमपूर्वक इसका अध्ययन किया। लेकिन मुझे वर्ष 1957 में दिल्ली आने पर यह अनुभव हुआ कि अंग्रेजी भारत में उंचा स्थान कैसे रखती है
उदाहरण के लिए, जब भी टेलीफोन की घंटी बजती थी और मैं इसे उठाता था, मेरा पहला वाक्य होता था आज भी है-‘हां, जी’ जिसके जवाब में अक्सर उधर से पूछा जाता था, ‘साहब घर में हैं?’ यह मान लिया जाता था कि घर से कोई नौकर बोल रहा है। और मैं उनसे कहता था, ‘आपको आडवाणी से बात करनी है तो मैं बोल रहा हूं।‘

स्मृति ईरानी पर अमर्यादित टिपण्णी पर भाजपा ने किया संजय निरुपम के बहिष्कार का एलान

स्मृति ईरानी के खिलाफ अमर्यादित टिप्पणी करने वाले कांग्रेस के सांसद संजय निरुपम का भाजपा ने बहिष्कार करने के घोषणा की है|। बीजेपी ने संजय निरुपम के बहिष्कार की घोषणा करते हुए कहा है कि जिस भी न्यूज़ चैनल पर वह होंगे बीजेपी का कोई भी नेता बहस में भाग नहीं लेगा। इसके अलावा स्मृति ईरानी ने संजय निरुपम को कानूनी नोटिस भी भेजा है। बीजेपी ने संजय निरुपम के साथ-साथ कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाधी से भी माफी मांगने की मांग की है।बीजेपी प्रवक्ता सांसद रविशंकर प्रसाद ने कहा कि हमारी राष्ट्रीय महिला मोर्चा की अध्यक्ष स्मृति ईरानी पर पार्टी को गर्व है। बतौर नेता उन्होंने बेहतरीन काम किया है। बीजेपी प्रवक्ता ने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष खुद एक महिला हैं, इसलिए हम सोनिया गांधी से उम्मीद करते हैं कि वह अपने सांसद के इस व्यवहार के लिए माफी मांगेंगी। उन्होंने कहा कि अगर ऐसा नहीं हुआ तो बीजेपी सोनिया के खिलाफ भी प्रदर्शन करेगी।
गौरतलब है कि संजय निरुपम अक्सर अपने बयानों और उसकी भाषा को लेकर विवादों में रहते हैं।संसद से लेकर टी वी चैनल्स पर अपनी दबंगई के लिए प्रसिद्द हैं|पिछले दिनों आज तक अजेंडा में भी सभी मर्यादाएं तक पर रख कर उन्होंने योग गुरु बाबा राम देव ने उन्हें उद्दंड बालक की संज्ञा दीथी | गुरुवार की शाम गुजरात के चुनाव नतीजों पर ऐ बी पी चैनल पर बहस के दौरान निरुपम, मोदी को मिली जीत पर दंगों को लेकर सवाल उठा रहे थे। स्मृति इरानी ने इस पर निरुपम को याद दिलाया कि 2002 के गुजरात दंगों के वक्त वह भी शिवसेना में थे। इसके बाद संजय निरुपम को यह भी याद नहीं रहा कि वह टीवी पर हैं और जनता उन्हें लाइव देख रही है।संजय निरुपम ने स्मृति पर निजी हमले करने शुरू कर दिए। उन्होंने कहा, ‘स्मृति आप मुझे मेरा अतीत याद दिला रही हैं, लेकिन आप क्या थीं? आप तो पैसों के लिए टीवी पर ठुमके लगाती थीं और आज राजनीतिक विश्लेषक बन गईं।’ न्यूज़ चैनल के एंकर ने निरुपम को निजी हमले करने से रोका, स्मृति ने भी उनकी बातों पर ऐतराज जताया। जब संजय निरुपम नहीं रुके तो स्मृति ने कहा,’ कांग्रेस सांसद छिछोरेबाजी पर उतर आए हैं। निरुपम और उन बदमाशों में कोई अंतर नहीं जो दिल्ली की सड़कों पर छेड़छाड़ और बलात्कार करते हैं।’इसके बाद संजय निरुपम बीजेपी सांसद के कैरेक्टर पर सवाल उठाने लगे। प्रोग्राम में मौजूद दूसरे विश्लेषक शाहिद सिद्दीकी ने भी निरुपम की भाषा पर ऐतराज जताया |सोशल साईट ट्विटर पर भी विरोध का सिलसिला शुरू हो गया है| [१]बॉलीवुड अभिनेत्री पायल रहतोगी ने ट्विटर पर लिखा है, ‘आप (संजय निरुपम) भी तो पैसे के लिए बिग बॉस में आए थे और अपने घटिया रवैये की वजह से पहले ही हफ्ते में निकाल दिए गए.'[२]फिल्म निर्माता प्रीतीश नंदी ने भी निरुपम के बड़बोलेपन पर अपनी नाराजगी जताई. उन्होंने ट्वीट किया, ‘न्यूज चैनल पर होने वाली बहस की खूबसूरती यही है कि मुद्दों से ज्यादा इसमें हिस्सा लेने वाले वक्ताओं के बारे में खुलासे हो जाते हैं. अब संजय निरुपम को ही ले लीजिए.'[३] संघ परिवार ने ट्वीट किया, ‘संजय निरुपम की यह घटिया टिप्पणी कांग्रेस के असली चेहरे को बेनकाब करती है.'[४]वहीं मशहूर लेखिका मधु किश्वार ने भी टिप्पणी पर कड़ी आपत्ति जताई. उन्होंने लिखा, ‘संजय निरुपम की इस आपत्तिजनक टिप्पणी से मैं इतनी आहत हुई कि मेरे पास शब्द नहीं है. यह राजनेताओं के गिरते स्तर को दर्शाता है बीजेपी

संजय निरुपम V/S स्मृति ईरानी

की ओर प्रवक्ता रविशंकर प्रसाद ने शुक्रवार को कहा, उम्मीद है कि सोनिया जी स्वयं इस घटना पर क्षमा मांगेंगी। यदि सोनिया जी ने माफी नहीं मांगी तो सोनिया गांधी जी के खिलाफ भी प्रदर्शन किए जाएंगे। हम एबीपी न्यूज से भी माफी मांगने की अपेक्षा करते हैं। हम प्रेस की आजादी का सम्मान करते हैं, हमारी विनम्र अपेक्षा है कि चैनल कुछ न कुछ कार्रवाई जरूर करेगा।
पूरे देश में नारी के सम्मान की रक्षा के लिए धरना,प्रदर्शन ,आन्दोलन किये जा रहे हैं |आज आम नागरिक नारी के सम्मान के लिए लिखे स्लोगन्स वाले प्ले कार्ड्स उठाए राष्ट्रपति भवन तक पहुँच गए |केंद्र और दिल्ली राज्य सरकारे इस दिशा में सभी संभव कदम उठाने का आश्वासन दे रहे है मगर दूसरी तरफ सत्ता रुड दल का उद्दंड नेता एक टी वी चैनल पर एक नारे के समक्ष छिछोरेबाजी के डायलाग बोले इसकी भर्त्सना की ही जानी चाहिए|

गुजरात में किंकर्तव्य विमूड हुई कांग्रेस हिमाचल में एब्सोल्यूट मेजोरिटी को सेलेब्रेट नहीं कर पा रही है:Himachal Changeover

Himachal Pradesh Election

गुजरात में नरेन्द्र मोदी के जीत से किंकर्तव्य विमूड की स्थिति से जूझ रही कांग्रेस हिमाचल प्रदेश में प्राप्त पार्टी की एब्सोल्यूट मेजोरिटी को भी उत्साह पूर्वक सेलेब्रेट नहीं कर पा रही है| बेशक हिमाचल की जनता ने पिछली हर बार की तरह सत्ता परिवर्तन करते हुए कांग्रेस को राज्य की बागडोर थमा दी है। कांग्रेस को कुल 68 सीटों में से 13 सीटों के फायदे के साथ 36 सीटें मिली हैं, जबकि बीजेपी 15 सीटों के नुकसान के बाद 26 सीटों पर सिमट गई है। छह सीटों पर अन्य उम्मीदवारों को जीत मिली है।यह अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है|भाजपा के भ्रष्टाचारों के आरोपों का सामना कर रहे ७८ वर्षीय वीर भद्र सिंह ने राहुल गांधी की पांच चुनावी सभाओं में कांग्रेस को जितवाकर राहुल गांधी का कद बढाया हैऔर पूर्ण सत्ता की डोर अपनी पार्टी की आलाकमान श्रीमति सोनिया गाँधी के हाथों में थमाई है उसे देखते हुए इसे कांग्रेस के बजाये वीर भद्र सिंह की जीत कहा जा सकता है|
प्रेम प्रकाश धूमल की अगुवाई वाली बीजेपी सरकार में आए भ्रष्टाचार के मामले उसी पर भारी पड़े और जनता ने धूमल की राजनीतिक छवी को धूमिल करके कांग्रेस के हाथ का साथ दिया।
प्रदेश में इस बार एक ही चरण में मतदान 4 नवंबर को कराया गया था जिसमे रिकॉर्ड वोटिंग हुई थी। एक्जिट पोलों के मुताबिक हिमाचल में कांग्रेस को बढ़त की संभावना पहले ही जताई जा रही थी।, ।गुजरात में बीजेपी के कुछ उम्मीदवार अपनी जीत को लेकर इतने आश्वस्त थे कि उन्होंने रात में ही अपनी जीत के पोस्टर लगा दिए थे जगह जश्न का महौल बनाया जा रहा है मगर कांग्रेस पर भ्रष्टाचार के आरोपों को बी जे पी की तरफ मौड़ कर विजयश्री चूमने वाले वीर भद्र सिंह को क्रेडिट दिया जाना जायज़ ही कहा जाना चाहिए

नसबंदी के राजनीतिक दुष्प्रभाव की एल पी जी के रूप में पुनरावर्ती की संभावना दिखने लग गई है

झल्ले दी झल्लियाँ गल्लां

एक कांग्रेसी
ओये झाल्लेया देखा हसाडी अध्यक्षा श्रीमती सोनिया गांधी जी की लीडरशिप का कमाल ।सूरज कुण्ड में संवाद बैठक का आयोजन करके उन्होंने कांग्रेसी मंत्रियों को जनता से संवाद स्थापित करके 2014 के मार्ग को आसान करने को कह दिया है । ऍफ़ डी आई को इंडिया में लाकर जहाँ सड़े गले देसी उद्योगों में जान डाली जा रही हैं वहीं अमेरिका में डेमोक्रेट बराक ओबामा को भी जितवा दिया है और तो और सूरज कुण्ड तक बस में सफ़र किया और मित्वियतता के खिलाफ सीधा मोर्चा खोल दिया है ।ओये अब तो 2014 में हसाडी सरकार फिर बने ही बने।

नसबंदी के राजनीतिक दुष्प्रभाव एल पी जी के रूप में

झल्ला
मेरे चतुर सुजान जी यह ठीक है कि आपजी की लीडर वाकई लोह महिला की छवि बनाने में लगी है मगर इनकी सरकार की नीतियाँ कुछ उलटा ही सन्देश दे रही है। उदहारण के तौर पर इसी संवाद बैठक में कांग्रेसियों ने एल पी जी कैपिंग के विरुद्ध चेतावनी दे दी है।इससे पहले एन सी पी भी आप की सरकार को आम आदमी की रसोई से दूर रहने की सलाह दे चुकी है। और तो और राय बरेली में श्रीमती प्रियंका गाँधी को भी रसोई गैस से होने वाले राजनितिक नुक्सान के विषय में बताया जा रहा है।मुझे याद आता है कि इमरजेंसी के दौरान देश की आबादी कम करने के लिए नस बंदी का अभियान चलाया गया था बेशक यह देश हित में था मगर जिस प्रकार जबरदस्ती से यह अभियान चलाया गया उसके नकारात्मक नतीजे मिले और अच्छे अच्छों की कुर्सियां खिसक गई।अब ये एल पी जी की कैपिंग कर दी गई है| महंगी करने के बावजूद भी आम आदमी की पहुँच से दूर की जा रही है| संयुक्त परिवार को कई टुकड़ों में दिखाने को विवश किया जा रहा है| इस विशेष शाक थेरेपी नीति से आम परिवार त्रस्त हैं ।ऐसे में एतिहासिक नसबंदी के राजनीतिक दुस्प्रभाव की २०१४ में पुनरावर्ती की संभावना तो दिखने लग गई है।

नितिन गडकरी ने आज मुम्बई में आक्रामक रुख से अपना बचाव किया

भाजपा अध्यक्ष नितिन गडकरी ने आज खुद पर लग रहे भ्रष्टाचार के आरोपों को कन्फ्यूज करने की साजिश बताया और मीडिया+कांग्रेस+आई ऐ सी पर जम कर प्रहार किये| उन्होंने कहा की जब भाजपा अध्यक्ष अपने ऊपर लगे आरोपों की जांच स्वयम करवा रहा है तब कांग्रेस अपने दामाद के विरुद्ध जांच क्यूं नहीं करवा रही?
मुंबई एयर पोर्ट पर इकट्टा हुए भाजपा के कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा की केंद्र की सरकार खुद ४.३४ हज़ार करोड़ रुपयों के भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरी हुई है|’भ्रष्टाचार से कांग्रेस का मुंह काला है। मैं हर तरह की जांच के लिए तैयार हूं। मंत्री रहते हुए मैंने एक पैसे का भ्रष्टाचार नहीं किया। मेरे पास केवल साडे बार करोड़ रुपये हैं| आदर्श सोसायटी से मेरा संबंध नहीं है। मुझे बदनाम करने की कांग्रेश द्वारा साजिश रची गयी है। मैं ईंट का जवाब पत्थर दूंगा।’
इसीलिए अब भाजपा को भी भ्रष्ट बता कर दोनों को एक सामान साबित करने में जुटी है|लेकिन मेरे पर जो भी आरोप लगाए जा रहे हैं वोह सब भ्रामक है| अरविन्द केजरीवाल और एक महिला [अंजलि दमानिया]किसी के इशारे पर भजपा को बदनाम करने पर उतारू हैं| मत दाताओं को कन्फ्यूज करने के लिए कांग्रेस की साजिश है|

नितिन गडकरी ने आज मुम्बई में आक्रामक रुख से अपना बचाव किया


गडकरी ने कहा की मीडिया के एक सेक्शन को सुपारी देकर मुझे बदनाम करने की कोशिश की जा रही है|उन्होंने अपनी उपलब्धिओं का बखान करते हुए बताया कीउन्होंने अपने मंत्री पद का कोई दुरूपयोग नहीं किया वरन २८०० हज़ार करोड़ की बचत कराई | गडकरी ने हाल ही में उन पर लगे सभी आरोपों पर एक एक करके सफाई दी। सफाई में उन्होंने यही कहा कि यह सब झूठे आरोप हैं, जबकि वह तो किसानों की भलाई के लिए काम कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि
पूर्ति

पूर्ति में 12 हजार शेयर होल्डर्स हैं और उन्हें खूब मुनाफा हो रहा है जबकि उनके और उनके परिवार के पास सिर्फ एक लाख रुपये के शेयर हैं। गडकरी ने कहा कि शरद पवार और अजय संचेती के साथ पार्टनरशिप जैसा आरोप बकवास है। उन्होंने कहा, मैं उनका पार्टनर नहीं हूं। मेरा उनसे कोई संबंध नहीं है। मुझे बदनाम करने की कोशिश हो रही है। शेयर होल्डर्स के धन निवेश से अपना पल्ला झाड़ते हुए उन्होंने कहा कि पूर्ति में निवेश करने वालों के धन के विषय में तो उनसे ही पुछा जाना चाहिए|गडकरी ने कहा कि वह किसी भी संदिग्ध कंपनी के डायरेक्टर नहीं हैं और हर तरह की जांच के लिए तैयार हैं। बीते दिन कांग्रेस अध्यक्षा श्रीमती सोनिया गाँधी द्वारा भाजपा पर भ्रष्टाचार के आरोपों का जवाब देते हुए गडकरी ने कांग्रेस अध्यक्षा पर सीधा निशाना साधा | उन्होंने पूछा कि क्या कांग्रेस दामाद की जांच के लिए तैयार हैं? गडकरी ने कहा, मैं डरता नहीं हूं। मैं ईंट का जवाब पत्थर से देना जानता हूं।उनके कार्यकाल में पास एक प्रोजेक्ट की कीमत ४८१ करोड़ थी उनकी सरकार बदलने के बाद वोह प्रोजेक्ट अभी तक पूरा नहीं हुआ है और उसके कीमत चार गुना बड़ा दी गई है|
गडकरी ने शरद पवार और संचेती से किसी भी प्रकार के रिश्तों से इंकार किया | उन्होंने कार्यकर्ताओं में जोश भरते हुए कहा कि अगले प्रधान मंत्री भाजपा के और सरकार एन डी ऐ की बनेगी|