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Tag: Dr. Harsh Vardhan

पाकिस्तान की गोलियों के जवाब में भारत ने पोलियो उन्मूलन में मानवतावादी सहयोग की पेशकश भेजी

[नई दिल्ली]पाकिस्तान की गोलियों के जवाब में भारत ने मानववादी उत्तर में पोलियो उन्मूलन में सहयोग की पेशकश भेजी | भारत को पोलियो मुक्त राष्ट्र घोषित किया जा चुका है|
केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने पोलियो उन्मूलन में पाकिस्तान को सहयोग की पेशकश की है
उन्होंने विश्व पोलियो दिवस पर सभी पक्षों से आत्मसंतुष्ट हुए बगैर पोलियो के खिलाफ जंग जारी रखने का आह्वाहन किया |
केन्द्रीय मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने पाकिस्तान में पोलियो उन्मूलन में मदद के लिए वहां की सरकार को पूर्ण सहयोग देने की पेशकश की है।
विश्वभर में आज पोलियो के जितने भी मामले सामने आ रहे हैं, उनमें से 85 % का वास्ता पाकिस्तान से ही है। यह पाकिस्तान के पड़ोसी देश भारत के लिए चिंता का विषय है।
विश्व पोलियो दिवस पर डॉ. हर्षवर्धन ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री श्री नवाज शरीफ की उस हालिया घोषणा का स्वागत किया जिसमें उन्होंने एक ‘राष्ट्रीय आपात कार्य योजना-2014’ पर अमल करने की बात कही है। इस कार्यक्रम पर आने वाले समूचे खर्च का वहन सरकार वर्ष 2018 तक करेगी।
मंत्री ने पड़ौसी मुल्क की ,इस योजना को सटीक बताया |
पोलियो के खिलाफ जंग के लिए भारत के सामाजिक समूहों की मदद लेने के कदम की सभी अंतर्राष्ट्रीय संगठनों ने सराहना की है, जिनमें विश्व स्वास्थ्य संगठन, यूनिसेफ, रोटरी इंटरनेशनल और बीमारी नियंत्रण के लिए अमेरिकी केन्द्र भी शामिल हैं। पोलियो के खिलाफ जंग के लिए इस तरह की पहल के बारे में सबसे पहले वर्ष 1994 में दिल्ली में कल्पना की गई थी, जिस दौरान डॉ. हर्षवर्धन इस राज्य के स्वास्थ्य मंत्री थे।
डॉ. हर्षवर्धन ने इस ओर ध्यान दिलाया कि यह विशेष मॉडल अपनाने से पाकिस्तान को भी पोलियो उन्मूलन अभियान में अच्छी कामयाबी मिलेगी। जब तक समाज के सभी समूहों खास कर पाकिस्तान के मौलवियों को इस मुहिम में शामिल नहीं किया जाएगा, तब तक पोलियो का जड़ से उन्मूलन करने के लक्ष्य को पाना संभव नहीं हो पाएगा।
‘ पोलियो उन्मूलन में अपने उल्लेखनीय कार्य के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ), रोटरी फाउंडेशन, लायंस इंटरनेशनल, भारतीय चिकित्सा संघ और अनेक अन्य राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय संस्थानों से पुरस्कार प्राप्त कर चुके डॉ. हर्षवर्धन ने कहा, ’विश्व पोलियो दिवस इसलिए मनाया जाता है क्योंकि कोई भी बीमारी राष्ट्रीय सीमाओं का ख्याल नहीं रखती है। विश्व स्तर पर वर्ष 1998 से ही तकरीबन 40 देशों को कहर ढाने वाले पोलियो वायरस से एक या उससे ज्यादा मर्तबा जूझना पड़ा है, जबकि ये मुल्क पोलियो मुक्त घोषित किये जा चुके थे।‘
जहां तक पाकिस्तान और अफगानिस्तान का सवाल है, वहां से पोलियो महज एक बस यात्रा जितनी दूर है। डॉ. हर्षवर्धन ने कहा कि इसके लिए सीमाओं पर अनेक तरह की व्यवस्था की गई है। मसलन, पाकिस्तान से यहां आने-जाने वाले यात्रियों को टीका लगवाने की सुविधाएं मुहैया करायी गई हैं। इसके अलावा, विशेष टीमों को तैनात कर आपात स्थिति में बचाव के लिए भी योजनाएं बनाई गई हैं।
फोटो कैप्शन
The Union Minister for Health and Family Welfare, Dr. Harsh Vardhan administering the polio vaccine drops to children under-five years to mark the World Polio Day, in New Delhi on October 24, 2014.

संजीव चतुर्वेदी प्रकरण में घिरे डॉ. हर्षवर्धन ने एम्स में प्रणालियों की समीक्षा शुरू की

[नई दिल्ली]संजीव चतुर्वेदी सी वी ओ प्रकरण में घिरे केन्‍द्रीय स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने आज अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्‍थान में सभी प्रणालियों की समीक्षा शुरू कराई |डॉ. हर्षवर्धन ने अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्‍थान AIIMSसहित देश के सभी केन्‍द्रीय अस्‍पतालों की प्रणालियों की गहन पड़ताल शुरू की है|डॉ हर्षवर्धन के अनुसार ‘जिन्‍होंने मुख्‍य सतर्कता आयोग को कमजोर करने का प्रयास किया उन्‍होंने एम्‍स में निगरानी व्‍यवस्‍था को नुकसान पहुंचाया इसीलिए ऐसे व्‍यवस्‍थागत भ्रष्‍टाचार समाप्‍त करने के लिए समीक्षा की जा रही है|
आज नई दिल्‍ली में उन्‍होंने कहा कि अपने कार्यकाल के पहले 90 दिन के अंतर्गत वे निरंतर मंत्रालय और उसके विभागों की पारदर्शिता की जांच कर रहे हैं। उन्‍होंने कहा कि‍ जल्‍द ही इस जांच पड़ताल के नतीजे लोगों के सामने आएंगे।
डॉ. हर्षवर्धन ने कहा कि अस्‍पतालों में भ्रष्‍टाचार के अनेक पहलू हैं, जिनकी जानकारी एक चिकित्‍सक होने के नाते उन्‍हें है। उन्‍होंने कहा कि बिस्‍तरों के आवंटन से लेकर कर्मचारियों या महत्‍वपूर्ण व्‍यक्तियों के लिए बिस्‍तर आरक्षित करने तक व्‍याप्‍त भ्रष्‍टाचार के सभी पहलुओं को दूर करने का वे प्रयास कर रहे हैं।
एम्‍स में नियुक्‍त उप सचिव श्री संजीव चतुर्वेदी को मुख्‍य सतर्कता अधिकारी के पद से हटाए जाने को लेकर हाल में उठे विवाद के बारे में डॉ. हर्षवर्धन ने कहा कि सीवीओ के रूप में उनकी नियुक्ति असंगत थी, क्‍योंकि इसकी मंजूरी केन्‍द्रीय सतर्कता आयोग से नहीं ली गयी थी। सी वी सी दवारा इस न्युक्ति का विरोध २०१२ और २०१३ में किया गया था| उन्‍होंने कहा के संजीव को ना तो सस्पेंड किया गया है और नहीं कहीं बाहर ट्रांसफर ही किया गया है इसके बावजूद इस प्रकरण को राजनीतिक रंग दिए जाने पर उन्होंने खेद व्‍यक्‍त किया।
डॉ. हर्षवर्धन ने कहा कि एम्‍स में सभी प्रणालियों को अधिक पारदर्शी बनाने की आवश्‍यकता है। दूरदराज के क्षेत्रों से आने वाले रोगियों को बिस्‍तरों की स्थिति और डाइलिसिस मशीनों की उपलब्‍धता या आपरेशन की तारीख जैसी जानकारी, पहले से दी जानी चाहिए।
फाइल फोटो

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तम्‍बाकू पर टैक्स बढ़ाने के बाद अब खेती में इस घातक उत्पाद के विकल्प की तलाश शुरू

केंद्र सरकार खेती में घातक तम्बाकू के बेहतर व्‍यवहार्य विकल्प पर विचार करने को राजी हो गई है |वैसे आम बजट में तम्बाकू प्रोडक्ट्स पर मोदी सरकार ने टैक्स बढ़ा कर संयुक्त राष्ट्र के आह्वाहन को समर्थन दे दिया था अब यूनियन हेल्थ मिनिस्टर डॉ हर्षवर्धन ने तम्बाकू से मुक्ति के उपायों पर चर्चा करना स्वीकार कर लिया है| डा. हर्षवर्द्धन ने कहा है कि इस विषय में स्‍वास्‍थ्‍य मंत्रालय अनुसंधान के निष्‍कर्ष साझा करने के लिए तैयार है |
स्‍वास्‍थ्‍य मंत्रालय प्रतिष्ठित संगठनों द्वारा किए गए अनुसंधान के उन निष्‍कर्षों को सरकार और सभी सम्‍बद्ध पक्षों के साथ साझा करने को तैयार है जिनके अनुसार यह साफ तौर पर सिद्ध हो चुका है कि किसानों को तम्‍बाकू की खेती के व्‍यवहार्य विकल्‍प प्रदान किए जा सकते हैं।
केन्‍द्रीय स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री डा हर्ष वर्धन ने कहा कि यह धारणा गलत है कि यदि सरकार लोगो की तम्‍बाकू सेवन की लत छुड़वाने में कामयाब हो गई तो तम्‍बाकू की खेती करने वाले क्षेत्रों में किसान गरीब हो जाएंगे। उन्‍होंने कहा कि इसके विपरीत हमारे पास ऐसे साक्ष्‍य हैं कि यदि उन्‍हें साहूकारों के चंगुल से छुटकारा दिला दिया जाये तो उनकी आमदनी बढ़ सकती है।
उन्‍होंने कहा कि तम्‍बाकू उत्‍पादों पर शुल्‍क बढ़ने से सरकारी खजाने में महत्‍वपूर्ण इजाफा होगा लेकिन तम्‍बाकू के सेवन से होने वाली कैंसर और टीबी जैसी जान लेवा बीमारियों की लागत उससे कहीं अधिक है। विश्‍व स्‍वास्‍थ्य संगठन के अनुमान के अनुसार भारत में धुंए वाले तम्‍बाकू से होने वाली बीमारियों के उपचार की प्रत्‍यक्ष लागत 90.7 करोड़ अमरीकी डालर और बिना धुंए वाले तम्‍बाकू के उपचार की लागत 28.5 करोड़ अमरीकी डालर आती है।
फोटो कैप्शन
[फाइल]विश्व तम्बाकू निषेध दिवस पर एन सी सी की रैली में डॉ हर्षवर्धन

चिकित्सकों के लिए पहली जुलाई शपथ दोहराने का दिन:राष्‍ट्रीय चिकित्‍सा दिवस:डॉ.हर्षवर्धन

चिकित्सकों के लिए पहली जुलाई शपथ दोहराने का दिन:राष्‍ट्रीय चिकित्‍सा दिवस:डॉ.हर्षवर्धन
स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने आज कहा कि देश के सभी चिकित्‍सकों का यह कर्तव्‍य है कि वे अपने समय के महान चिकित्‍सक और राजनीतिज्ञ डॉ बिधान चन्‍द्र रॉय के सपने को पूरा करें। उन्‍होंने कहा कि चाहे वह एलोपैथिक चिकित्‍सक हो या पारंपरिक और घरेलू चिकित्‍सा प्रणा‍ली द्वारा उपचार करने वाला चिकित्‍सक हो, उन सबको डॉ बिधान चन्‍द्र रॉय के विचारों को याद करना चाहिए।
उल्‍लेखनीय है कि डॉ रॉय को 1961 में उनके जीवन काल में भारतरत्‍न से विभूषित किया गया था।
डॉ हर्षवर्धन राष्‍ट्रीय चिकित्‍सक दिवस (01 जुलाई) की पूर्व संध्‍या पर चिकित्‍सक बिरादरी को संबोधित कर रहे थे। उन्‍होंने कहा कि आज का दिन डॉक्‍टरों के लिए शपथ दोहराने का दिन है।
डॉ. हर्षवर्धन ने कहा कि हमारे देश में डॉक्‍टर अध्‍यापकों के रूप में, सशस्‍त्र बलों, गैर सरकारी और स्‍वयंसेवी क्षेत्रों तथा पूरे देश के प्राथमिक स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्रों में कठिन परिस्थितियों में भी काम करने में पीछे नहीं हैं। उन्‍होंने डॉक्‍टरों को उनकी कर्तव्‍यपरायणता के लिए सलाम किया और कहा कि आपदा के समय हमारे देश के डॉक्‍टर अपने जीवन की परवाह न करते हुए भी सेवा करते हैं।
डॉ. हर्षवर्धन ने कहा कि स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री होने के नाते उनका यह कर्तव्‍य है कि वे स्‍वस्‍थ जीवन शैली को प्रोत्साहन देकर देश से बीमारियों का भार कम करें। उन्‍होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने उन्‍हें निर्देश दिया है कि अनुसंधान, अभिनव प्रयोगों और आधुनिक प्रौद्योगिकी के जरिए स्‍वास्‍थ्‍य क्षेत्र में आमूल परिवर्तन किया जाए। उन्‍होंने कहा कि विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन द्वारा निर्धारित मानदंडों के अनुसार हमारे यहाँ आबादी के अनुपात में चिकित्‍सों की संख्‍या काफी कम है, इसलिए पहले की अपेक्षा भारत को अधिक डॉक्‍टरों की जरूरत है।

डॉ. हर्षवर्धन ने पूर्व के बयान पर स्पष्टीकरण देते हुए एड्स रोकथाम में कंडोम भूमिका कम आंकने से इंकार किया

डॉ. हर्षवर्धन ने अपने पूर्व के बयान पर स्पष्टीकरण देते हुए एड्स रोकथाम में कंडोम की भूमिका को कम आंकने से इंकार किया
केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने 24 जून को न्यूयॉर्क टाइम्स को दिए साक्षात्कार में उनके बयान को मीडिया में तोड़-मरोड़कर पेश किए जाने पर निराशा व्यक्त की है।
डॉ. हर्षवर्धन ने कहा कि भ्रम पैदा करने वाले शीर्षकों से यह छवि बनाने की कोशिश की गई है कि मुझे कंडोम की सफलता के बारे में गलतफहमी है या कंडोम को लेकर मेरे मन में कोई नैतिक समस्या है। यह तथ्य से परे है, क्योंकि पिछले दो दशकों से मैं सुरक्षित यौन संबंध की आवश्यकता पर जोर दे रहा हूं और कंडोम तथा अनुशासन के इस्तेमाल पर जोर दे रहा हूं। यह यूएनएआईडीएस के संयम-निष्ठावान बनें- कंडोम (Abstinence-Be Faithful-Condom- ABC) की लाइऩ पर है और इससे यूगांडा में बहुत सफलता मिली है। अब यह दुनिया के अनेक देशों के एड्स विरोधी अभियान का हिस्सा है।
स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि उन्होंने पूरे देश में सुदृढ़, स्वैच्छिक रक्तदान प्रणाली की नींव रखी है और इससे दूषित रक्त से एचआईवी वायरस के संक्रमण पर रोक लगता है।अमरीका की सरकारी यात्रा पर गये डॉ. वर्षवर्धन ने कहा कि स्वयंसेवी संगठन का कोई भी अनुभवी कार्यकर्ता यह जानता है कि कंडोम इस्तेमाल करते हुए कभी कभार फट जाता है। इसीलिए सरकार को भारत में राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन या राज्य सरकारों के जरिए सुरक्षित यौन संबंध को समग्र मानने पर ध्यान देना चाहिए। इसमें जीवन साथी के प्रति निष्ठा की भूमिका को प्रमुखता से बताने पर जोर होना चाहिए।
डॉ. हर्षवर्धन ने कहा कि उनके बयान को भारत में समलैंगिकता के अपराधिकरण से जोड़कर देखा गया, जबकि यह मामला स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के दायरे से बाहर है।
स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि विवाह की संस्था को बचाए रखने की परम्परा प्रासंगिक सरकारी कानूनों से जुड़ी है। यहां तक कि तलाक संबंधी कानून भी मेल-मिलाप के प्रयासों पर जोर देता है और अंतिम विकल्प के तौर पर ही अलगाव का सुझाव देता है। पति-पत्नी को पूर्णता का अर्ध मानने की संस्कृति आधुनिक युग में भी बनाई रखी जानी चाहिए, क्योंकि आधुनिक समय में मूल्यों में गिरावट आ रही है।
“स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि एड्स की रोकथाम में वैवाहिक, ईमानदारी और निष्ठा की प्रमुखता के बारे में जानकारी देने वाला मेरा बयान न केवल सांस्कृतिक परामर्श है, बल्कि यह वैज्ञानिक भी है। स्वास्थ्य मंत्री के रुप में एड्स विरोधी सरकारी कार्यक्रमों के बारे में संचार रणनीति में इस साधारण संदेश को शामिल करने को मैं औचित्यपूर्ण मानता हूं।
स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि कंडोम सुरक्षित यौन संबंध का वायदा करता है, लेकिन सर्वाधिक सुरक्षित यौन संबंध वफादार जीवन साथी के साथ ही होता है। बचाव इलाज से बेहतर है। ”

डॉ.हर्षवर्धन ने राम मनोहर लोहिया अस्पताल के निरीक्षण में सरकारी लक्ष्यों को सीमा से पूर्व प्राप्त करने का आह्वाहन किया

[नई दिल्ली]डॉ.हर्षवर्धन ने राम मनोहर लोहिया अस्पताल के निरीक्षण में सरकारी लक्ष्यों को सीमा से पूर्व प्राप्त करने का आह्वाहन कियाकेंद्रीय स्वास्थय मंत्री डॉ.हर्षवर्धन ने आज दिल्ली के राम मनोहर लोहिया अस्पताल का अौचक दौरा किया। स्वास्थ्य मंत्री ने अस्पताल में साफ-सफाई और अन्य व्यवस्थाओं का जायजा लिया। इस मौके पर डॉ.हर्षवर्धन ने अस्पताल के स्टाफ से भी बातचीत की उनके मुद्दों को जाना। गौरतलब है कि डॉ आर एम एल अस्पताल दिल्ली का एक प्रमुख अस्पताल है।डॉ.हर्षवर्धन ने अपनी चिकित्सक बिरादरी को आग्रह किया कि सरकारी लक्ष्यों की प्राप्ति निर्धारित अवधि से पूर्व कर ली जानी चाहिए |उन्होंने समाज सेवा के हाई स्टैंडर्ड्स की प्राप्ति के लिए भी प्रेरित किया |
गौरतलब है कि दिल्ली में अाये तूफ़ान के कारण राजधानी में बिजली आपूर्ति बाधित हुई है और लगातार कटौती की जा रही है इससे एक ओर जहां आम जनता बेहाल है, इसका असर अस्पतालों में मरीजों के इलाज पर भी पड़ रहा है।इसीलिए जनता में आक्रोश है और कांग्रेस+आप द्वारा इसे मुद्दा बनाया जा रहा है सम्भवत इसी असंतोष को जवाब देने के लिए केंद्रीय स्वास्थय मंत्री डॉ.हर्षवर्धन ने अस्पतालों का निरीक्षण करने का बीड़ा उठाया है डॉ आर एम एल अस्पताल के निदेशक डॉ एच के कार ने मंत्री को रेन हार्वेस्टिंग+ अस्पताल में कार्यप्रणली की जानकारी दी
दिलशाद गार्डन स्थित गुरुतेग बहादुर अस्पताल(जीटीबी)में भी आपातकालीन सेवाएं बाधित होने के समाचार हैं
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The Union Minister for Health and Family Welfare, Dr. Harsh Vardhan visited Dr. Ram Manohar Lohia Hospital to review the sanitation drive in the hospitals of New Delhi, in New Delhi on June 11, 2014.

गोपीनाथ मुंडे की दुर्घटना में हुई मृत्यु से सबक लेकर ,डॉ हर्षवर्धन ट्रैफिक के प्रति जागरूकता अभियान चलाएंगे

भारत के स्वास्थ्य मंत्री डॉक्टर हर्षवर्धन ने केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री गोपीनाथ पांडुरंग राव मुंडे की सड़क दुर्घटना में मंगलवार को हुई मृत्यु से सबक लेते हुए ट्रैफिक नियमों के पालन के प्रति जागरूकता अभियान चलाने की बात कही है | डॉक्टर हर्षवर्धन ने आज दावा किया है कि अगर गोपीनाथ मुंडे ने सीट बेल्ट पहना होता तो उनकी जान बच सकती थी|
मुंडे का मंगलवार को एक कार हादसे में निधन हो चुका है|डाकटरों की रिपोर्ट के अनुसार आंतरिक चोटें मृत्यु का कारण बनी हैं|
मुंडे के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए महाराष्ट्र के बीड जाने से पहले चांदनी चौक से भाजपा के सांसद और केंद्रीय स्वास्थय मंत्री डॉ हर्षवर्धन ने कहा, के ट्रैफिक के प्रति गलत धारणा के कारण उन्होंने अपना एक अच्छा दोस्त खो दिया|
शोकाकुल सांसद ने पिछली सीट बेल्ट को पहनना उतना ही ज़रूरी बताया जितना आगे की सीट का बेल्ट
डॉ हर्षवर्धन ने कहा कि अधिकांश लोग मानते हैं कि कार में पिछली सीट पर लगाई गयी बेल्‍ट केवल सजावट के उद्देश्‍य से लगाई जाती है। वास्‍तव में अगली सीटों की बैल्‍ट की तरह पिछली सीट पर बैल्‍ट लगाना भी अनिवार्य होता है। किसी अप्रिय स्थिति में यह जीवन बचाने का कारण हो सकती है।
मंगलवार को लाल बत्‍ती को पार कर एक प्राइवेट इंडिका कार ने श्री मुंडे की कार को साइड से टक्‍कर मार दी थी। इस दुर्घटना से उनकी कार को तो अधिक क्षति नहीं पहुंची लेकिन कार को लगे तेज धक्‍के की वजह से श्री मुंडे की गर्दन के जोड़ और उनकी रीढ़ की हड्डी को गंभीर चोट पहुंचीजो घातक सिद्ध हुई
स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री ने अगस्‍त, 1997 में ऐसी ही घटी एक अन्य दुर्घटना में ब्रिटेन की प्रिंसेस डायना की मृत्यु का भी उदाहरण दिया |
इस दुर्घटना ग्रस्त कार में सिर्फ सीट बैल्‍ट लगाने वाला ही एक मात्र बचा था |
इसके अलावा 2007 में दिल्‍ली के पूर्व मुख्‍यमंत्री साहिब सिंह वर्मा का भी एक सड़क दुर्घटना में निधन हो गया था। डॉ. हर्ष वर्धन ने कहा कि श्री वर्मा ने यदि सीट बैल्‍ट लगाई होती तो उनकी जान बच सकती थी।कभी-कभी ऐसा होता है कि जब व्‍यक्ति दुर्घटना के कारण बाहर नहीं गिरता, तब भी उसके शरीर को गंभीर चोट पहुंचती है। ऐसा ही मुंडे के साथ भी हुआ |
डॉ. हर्षवर्धन ने कहा, अमरीका में अनुसंधान से पता चला है कि सीट बैल्‍ट बांधने से कार की अगली सीट पर बैठे यात्री को जान का जोखिम 45 % कम हो जाता है जबकि सामान्‍य से गंभीर किस्‍म की चोट लगने का जोखिम 50 % घट जाता है। वैन और स्‍पोर्ट युटिलिटी वाहनों की पिछली सीट पर बैठे लोगों ने यदि सीट बैल्‍ट लगा रखी हो तो कार दुर्घटना के दौरान जान का जोखिम 75 % मामलों में बेहतर ढ़ग से टाला जा सकता है।दुर्भाग्य वश भारत में सीट बेल्ट को अब भी गंभीरतापूर्वक लागू नहीं किया गया है। य‍ह गंभीर चिंता का विषय है।
डॉ. हर्षवर्धन ने आश्वासन दिया कि स्‍वास्‍थ्‍य और परिवार कल्‍याण मंत्रालय गाड़ी चलाते समय सुरक्षा नियमों की अनदेखी करने वाले लोगों को जागरूक करने की पहल करेगा।
फोटो कैप्शन
The Union Minister for Health and Family Welfare, Dr. Harsh Vardhan flagging off the rally of school students to commemorate World No Tobacco Day, in New Delhi on May 30, 2014.