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बादलों की पोल खोल रैली में पूर्व सीएम ने १९४७ के पीड़ितों से अन्याय को स्वीकारा

[फरीदकोट,पंजाब] बादलों की पोल खोल उर्फ़ जबर रैली में पूर्व सीएम ने भी स्वीकारा के १९४७ के पीड़ितों को न्याय नहीं मिला| सत्तारूढ़ कांग्रेस की सरकार की तरफ से तमाम रुकावटों के बावजूद हाई कोर्ट के आदेश पर आयोजित इस रैली में हमहुंआ के संगत पहुंची |जिससे सत्ता से बाहर हुए अकालियों में विशेष उत्साह देखने को मिला |विशाल एकट्ठ को सम्बोधित करते हुए पांच बार मुख्य मंत्री रहे साबका मुख्य मंत्री प्रकाश सिंह बादल ने जम कर कांग्रेस पर हमला बोला |उन्होंने कांग्रेस के धरम और पंजाबी विरोधी गतिविधियों को भी गिनाया|
वरिष्ठतम नेता ने यह भी बताया के १९४७ में एक गलत आत्मघाती निर्णय से जो कत्लेआम हुआ वोह उन्होंने स्वयं देखा है
पांच लाख पंजाबी प्रभावित हुए जिन्हें अपनी जमीन जायदाद भी खोनी पड़ी |भारत में इन्हें न्याय नहीं दिया गया | जो जमीने वोह छोड़ कर आये थे उनके आग्रह के बावजूद वोह भी नहीं दी गई |
गौरतलब हे के पाकिस्तान में छोड़ी गई भूमि के बदले भारत सरकार ने पाकिस्तान सरकार मुआवजा वसूल लिया था जिसे भारत में छोड़ी गई भूमि से एडजस्ट किया गया लेकिन दुर्भाग्य से पीड़ितों की पीढ़ियां गुजरें के बावजूद अभी भी हजारों उत्तराधिकारियों को उनके हक के रिहैबिलिटेशन क्लेम नहीं दियगए| अनेक लोग हाई कोर्ट और पंजाब ओल्ड लैंड रिकॉर्ड कार्यालय के चक्कर काट रहे हैं
इनके हक मारने के लिए तत्कालीन पंजाब सरकार द्वारा २००५ में काला एक्ट लाया गया| आश्चर्यजनक रूप से प्रधान मंत्री और मुख्य मंत्री कार्यालय से फॉरवर्ड ग्रिएवान्सेस भी इधर उधर भटकाई जा रही है |

कांग्रेस के आरटीआई एक्ट की कैप्टेन की सरकार में ही उडी धज्जियां

[चंडीगढ़,पंजाब]कांग्रेस के आरटीआई एक्ट की कैप्टेन की सरकार में ही उडी धज्जियां
कांग्रेस द्वारा वर्ष २००५ में पारदर्शिता के लिए आर टी आई एक्ट लाया गया था लेकिन दुर्भाग्य से पंजाब में कांग्रेस की सरकार में ही इसकी धज्जियां उड़ाई जा रही हैं|न केवल आरटीआई वरन पीएमओ के मार्फ़त भेजी जा रही शिकायतों का भी जवाब नहीं दिया जा रहा|
पंजाब सरकार के विभागों में स्टाफ की कमी का रोना रोया जाता है|