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Tag: Reservation

Thakur Raja Bhaiya to Float New “Jansatta” Party to Oppose Reservation

[Lucknow,UP]MLA Raja Bhaiya to Float New “Jansatta” Party to Oppose Reservation
Controversial politician and six-time independent MLA Raghuraj Pratap Singh, also known as Raja Bhaiya, Friday said he will float a new party opposed to reservation in promotions and the draconian provisions of the SC/ST Act.
Singh has been a minister in state governments headed by Akhilesh Yadav, Kalyan Singh and Rajnath Singh.
He has faced 48 cases and has been the state’s prisons minister in the Samajwadi Party government.
.He said that among the issues that his party will raise is the Scheduled Caste and Scheduled Tribe (Prevention of Atrocities) Act, which he said has “draconian provisions .
Raja Bhaiya is believed to have a considerable influence among the upper caste Thakur voters.
In November 2002, the Mayawati government had slapped charges under the Prevention of Terrorism Act (POTA) against Raja Bhaiya. But in 2003, within minutes of the Mulayam Singh Yadav taking over as the chief minister, all charges against him were dropped.

Reservation Inferno Attacks BEST Buses In Mumbai

[Mumbai] Reservation Inferno Attacks BEST Buses In Mumbai
Two BEST buses were attacked by agitators in Kanjurmarg and Bhandup suburbs of Mumbai.
In view of the stone-pelting on buses, the Brihanmumbai Electric Supply and Transport (BEST) partially suspended its services in those areas
Protesters also hurled stones at a public transport bus in Wagle Estate area of the neighbouring Thane city.
They blocked some areas there, including the key Teen Hath Naka junction, resulting in long queues of vehicles on the road leading to Mumbai.
A bus was also attacked in Ghansoli area of Navi Mumbai following which the city transport authority suspended its services in the area, an official said.
At some places, protesters raised slogans against Maharashtra Chief Minister Devendra Fadnavis and Public Works Department Minister Chandrakant Patil for allegedly insulting sentiments of the Maratha community.
As per officials The suburban railway services on the western, central, harbour and trans-harbour lines were not affected,
Around 70 lakh people travel in local trains daily in the Mumbai region.
The Maratha Kranti Morcha, which is spearheading the agitation for reservation in jobs and education, has called for the shutdown in Mumbai and some neighbouring districts today.
Another outfit, the Sakal Maratha Samaj, called for the bandh in Navi Mumbai and Panvel areas.
Yesterday, large-scale violence marred a state-wide protest by Maratha outfits demanding reservation for the community.
A constable died and nine other policemen were injured amid suicide attempt by three agitators during the violence.
Agitators had clashed with the police and torched vehicles at several places, while Internet services were suspended in rural areas of Aurangabad district to prevent any untoward incident. In Jalna, the police had fired in the air to quell protests.
Quotas for Marathas, a politically influential community that constitutes around 30 per cent of the state’s population, has been a hugely contentious issue.
Fadnavis had cancelled his visit to a temple in Pandharpur on Monday after protesters threatened to disrupt the event.
file photo

भाजपा पर मायावती के हमले के जवाब में डॉ उदित राज ने उलटे बसपा सुप्रीमो को ही दलित विरोधी बताया

भाजपा ने मायावती के हमले के जवाब में उलटे बसपा सुप्रीमो को ही दलित विरोधी बताया और दलितों को इससे भर्मित नहीं होने की अपील भी की |
भारतीय जनता पार्टी के विशेष आमंत्रित सदस्य डॉ. उदित राज ने कहा कि बसपा नेत्री सुश्री मायावती के मुख्यमंत्री काल में पदोन्नति में आरक्षण का अधिकार कमजोर पैरवी के कारण लखनऊ हाईकोर्ट से छिना था।
उन्होंने आरोप लगाया कि सुश्री मायवती इतना सफेद झूठ बोलती हैं कि दलित समाज इनको इस चुनाव में सबक सिखाएगा। पदोन्नति में आरक्षण का अधिकार अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार ने संवैधानिक संशोधन करके बहाल कराया था। इसके लिए सुश्री मायावती को भाजपा का धन्यवाद करना चाहिए, ऐसा न करके बल्कि जो दलित विरोधी काम उन्होंने खुद किया है उसे वह भाजपा पर थोप रही हैं।
डॉ. उदित राज ने आगे कहा कि वर्ष 1997 में भारत सरकार के कार्मिक एवं प्रशिक्षण मंत्रालय ने पांच आरक्षण विरोधी आदेश जारी किए थे और उन्हें वापस कराने के लिए डॉ. उदित राज के नेतृत्व में अनुसूचित जाति-जनजाति संगठनों के अखिल भारतीय परिसंघ का गठन हुआ था। वर्ष 1997 से लेकर 2000 तक आंदोलन चला और उस समय की एनडीए सरकार ने 81वां, 82वां और 85वां संवैधानिक संशोधन करके आरक्षण बचाया था। पूरे देश की अनुसूचित जाति-जनजाति के लोग भाजपा के इस योगदान को अब मानने लगे हैं और उन्होंने कांग्रेस व बहुजन समाज पार्टी की एक दशक से दलितों के प्रति इनकी नीतियों को देखा परखा है। इसी कारण से वर्तमान लोकसभा चुनाव में उनका झुकाव भाजपा में बढ़ा है।
डॉ. उदित राज ने दलित समाज से अपील की है कि मायावती के बहकावे में न आएं और भाजपा को वोट व समर्थन देकर अपनी भागीदारी सुनिश्चित करें। सुश्री मायावती जवाब दें कि उन्होंने केंद्र सरकार को समर्थन दिया तो क्यों 10 साल से संसद में लंबित आरक्षण कानून बनाने वाला विधेयक पास नहीं करवाया। पदोन्नति में आरक्षण का विधेयक भी संसद में लंबित है। क्या सुश्री मायावती ने कांग्रेस को समर्थन अपने निजी स्वार्थ में देकर दलितों के हितों की कुर्बानी नहीं की है।
डॉ. उदित राज ने कहा कि वंचितों के हित में नरेंद्र मोदी का प्रधानमंत्री बनना जरूरी है।

आर्थिक आधारित आरक्षण के सुझाव को बेशक रद्दी की टोकरी नसीब हुई मगर इसकी जड़ों की तलाश शुरू हो गई है

जाति आधारित आरक्षण के स्थान पर आर्थिक आधार बनाने के लिए कांग्रेस के महा सचिव जनार्दन द्विवेदी के सुझाव को पार्टी के चुनावी मेनिफेस्टो में शामिल करने के बजाय कांग्रेस अध्यक्षा श्रीमती सोनिया गांधी ने उसे रद्दी की टोकरी में डाल दिया है लेकिन इस मुद्दे को लेकर आरक्षण के बल पर राजनीती करने वालों ने इस रिजेक्टेड सुझाव की संसद के बाहर और भीतर आलोचना करनी शुरू कर दी है |एक पत्रकारों का धड़ा इस सुझाव पर भाजपा के पी एम् प्रत्याशी नरेंद्र मोदी को घेरने में लग गया है | यह भी कहा जा रहा है कि चुनावों के मध्य नजर इस मुद्दे को उठाया जा रहा है |
अब ऊपरी तौर से दिख रहा है कि सूत या कपास के बिना ही लट्ठम लठ चल रहा है मगर इस सुझाव की जड़ों की खुदाई तो शुरू हो ही गई है|
चुनावो से ठीक पहले यह मुद्दा उछालना किसी भी तरह से किसी की भी निजी राय नहीं हो सकती और जनार्दन द्विवेदी सरीखे भरोसे मंद +गम्भीर और वरिष्ठ नेता से मजाक की भी उम्मीद नहीं की जा सकती तब ऐसा क्या कारण है कि मुद्दे को उछाला गया |जिस प्रकार से श्री मति सोनिए गांधी ने आगे आकर सामाजिक न्याय के नाम पर आरक्षण की वकालत करते हुए इस दिशा में और अधिक काम का आश्वासन दिया है उससे लगता है कि अपने पुराने और अब दूर छिटक चुके वोट बैंक [आरक्षण के लाभार्थियों] को बसपा+ सपा से काट कर कांग्रेस की तरफ मोड़ना एक कारण हो सकता है इसके अलावा इस मुद्दे पर भाजपा को घेरने की कवायद भी दिखाई दे रही है जिस तरह से आर्थिक आधार पर आरक्षण के विषय में भाजपा से राय पूछी जा रही है उससे यह भी दिखता है कि चुनावों के मध्यनजर भाजपा से आर्थिक आधार पर आरक्षण पर राय लेकर भाजपा से आरक्षण के लाभार्थी जातियों के वोट काटे जा सके
अध्यक्षा श्रीमती सोनिया गांधी ने अपने कांग्रेस महासचिव के इस सुझाव को सिरे से खारिज कर दिया है।अपने सबसे करीबी माने जाने वाले नेता की दलीलों को खारिज करते हुए सोनिया ने अनुसूचित जाति+ जनजाति + पिछड़े वर्गो को आरक्षण का श्रेय कांग्रेस को देते हुए इसे आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता जताई।
संप्रग सरकार को बाहर से समर्थन दे रही सपा के रामगोपाल यादव+बसपा प्रमुख मायावती ने संसद के भीतर इसे लेकर हंगामा किया |प्रमुख विपक्षी दल भाजपा ने इसके समय को लेकर सवाल खड़ा कर दिया।
राज्यसभा में बसपा ने कांग्रेस से स्थिति साफ करने की मांग की और सपा ने केंद्र सरकार पर सामाजिक न्याय से भागने का आरोप लगा दिया।
कांग्रेस के भीतर पीएल पुनिया +अजीत जोगी जैसे दलित और पिछड़े नेताओं ने जनार्दन द्विवेदी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया।
इस सबसे बचने के लिए सोनिया गांधी ने अपने बयान में साफ कर दिया कि कांग्रेस शुरू से अनुसूचित जातियों+ जनजातियों + पिछड़े वर्गो के उत्थान के लिए प्रतिबद्ध रही है और आगे भी रहेगी।
श्रीमती सोनियागांधी ने सांत्वना देते हुए बताया कि कांग्रेस ने ही 1950 के दशक में अनुसूचित जातियों +जनजातियों को सरकारी नौकरियों व शिक्षा संस्थाओं के साथ-साथ संसद और विधानसभाओं में आरक्षण सुनिश्चित कराया था।
पिछड़े वर्गो के लिए आरक्षण भले ही वीपी सिंह की सरकार ने लागू किया हो मगर श्रीमती सोनिया गांधी ने इसका श्रेय भी कांग्रेस को ही दिया। उनके अनुसार अनुसूचित जाति+ जनजाति + पिछड़े वर्गो के लिए आरक्षण की प्रणाली पर कांग्रेस के रुख में कोई शक नहीं है।
उन्होंने निजी क्षेत्र में अनुसूचित जाति और जनजाति की भागीदारी बढ़ाने के लिए संप्रग सरकार द्वारा उठाए गए कदमों की भी जानकारी दी। उन्होंने याद दिलाया कि संप्रग सरकार ने इन वर्गो के छात्रों के लिए विशेष छात्रवृति की शुरुआत की थी, जिसका लाभ हर महीने एक करोड़ से अधिक छात्र उठा रहे हैं। एक कदम आगे बढ़ते हुए सोनिया ने अनुसूचित जाति और जनजाति का विकास सुनिश्चित करने के लिए अलग से बजट आवंटित करने के प्रति भी प्रतिबद्धता जताई है ।