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देश की सर्वोच्च अदालत ने फ्लाइट्स सेफ्टी मानदंडों को नहीं अपनाने के लिए डी जी सी ऐ को अवमानना का नोटिस दिया

सुप्रीम कोर्ट ने फ्लाइट्स सेफ्टी को पायलट्स फटीग नहीं रोकने के लिए डी जी सी ऐ को अवमानना का नोटिस दिया

सुप्रीम कोर्ट ने फ्लाइट्स सेफ्टी को पायलट्स फटीग नहीं रोकने के लिए डी जी सी ऐ को अवमानना का नोटिस दिया

देश की सर्वोच्च अदालत ने सुरक्षा मानदंड नहीं अपनाए जाने के लिए नागरिक उड्डयन नियामक की खिंचाई करते हुए अवमानना का नोटिस जारी किया है|
गौरतलब है कि यात्री विमानों को उड़ाने के लिए पायलट्स की ड्यूटी समय [फ्लाईंग हावर्स]निश्चित किये जाने के लिए मई २०११ में Civil Aviation Regulations [सी ऐ आर] के गठन करके पायलट्स को श्रम दंड[fatigue] से बचाने के लिए नियम बनाने को कहा गया था |इस विषय में कहा गया था कि थकान भरे श्रम अवधि से पायलट्स में थकावट आती है जिसे उड़ानों के लिए असुरक्षित माना गया था| इसी लिए फ्लाइट्स की सेफ्टी हेतु पायलट्स के लिए फ़्लाइंग समय सीमा निश्चित की जानी आवश्यक है|यदपि डी जी सी ऐ द्वारा बीते साल की फरवरी में नियमवाली जारी कर दी गई थी लेकिन उसे सभी एयर लाइन्स के लिए जरुरी नहीं किया गया था|इसके फलस्वरूप पायलट्स के कार्य समय के विषय में तो कहा गया मगर फलाईट्स के समय के विषय में कोई दिशा निर्देश शामिल नहीं किया गया|
इस उपेक्षा को गंभीरता से लेते हुए एपेक्स कोर्ट ने कोर्ट कि अवमानना माना और डी जी सी ऐ को नोटिस जारी किया है|

एयरलाइंस के टिकटों पर अस्वीकृत टैक्स और फीस लगाना मान्य नियमों का उल्लंघन है:सुप्रीम कोर्ट

एयरलाइंस के टिकटों पर सुप्रीम कोर्ट

देश की सर्वोच्च न्यायालय ने एयरलाइंस के अनियमित टैरिफ स्ट्रक्चर पर टिपण्णी करते हुए नागरिक उड्डयन नियामक [डीजीसीए] को एयरलाइंस के टैरिफ स्ट्रक्चर की जांच करने को कहा है|। मूल किराये पर अतिरिक्त चार्ज लगाने वाली एयरलाइंस पर जुर्माना नहीं लगाने के लिए उड्डयन नियामक की भी आलोचना की गई है।सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि एयरलाइंस यात्रियों से किसी भी रूप में ट्रांजैक्शन फीस नहीं ले सकती।फिलहाल बजट एयरलाइंस यात्रियों से 6 % ट्रांजैक्शन फीस लेती हैं। एयरलाइंस की तरफ से बेसिक किराये और फ्यूल सरचार्ज का 6 % बतौर ट्रांजैक्शन फीस वसूला जाता है।वहीं फुल सर्विस कैरियर इकोनॉमी क्लास के टिकट पर 220 रुपये ट्रांजैक्शन फीस वसूलती हैं। साथ ही फुल सर्विस कैरियर बिजनेस क्लास के टिकट पर 500 रुपये ट्रांजैक्शन फीस वसूलती हैं। इस पर कोर्ट ने कहा कि एयरलाइंस कंपनियां टिकटों पर अस्वीकृत टैक्स और फीस लगाकर मान्य नियमों का उल्लंघन कर रही हैं।

तीसरी बार विजय पताका फहराने वाले नरेन्द्र मोदी राज्यपाल के हाथों सुप्रीम कोर्ट में हार गए

तीसरी बार विजय पताका फहराने वाले नरेन्द्र मोदी राज्यपाल के हाथों सुप्रीम कोर्ट में हार गए

गुजरात में तीसरी बार विजय पताका फहराने वाले नरेन्द्र मोदी आज राज्यपाल के हाथों सुप्रीम कोर्ट में हार गए| सर्वोच्च न्यायलय ने जस्टिस आर ऐ मेहता को गुजरात का लोकायुक्त बनाए जाने के फैसले को चुनौती देने वाली राज्य सरकार की याचिका को खारिज कर दिया है |राज्यपाल कमला बेनीवाल ने जस्टिस मेहता की न्युक्ति की थी .
सर्वोच्च अदालत ने कहा है कि बेशक राज्यपाल मंत्रिपरिषद की सलाह के काम करने के लिए बाध्य है लेकिन जस्टिस मेहता की नियुक्ति सही थी क्योंकि गुजरात हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस से सलाह के बाद उन्हें लोकायुक्त बनाया गया था .|
इससे पूर्व जनवरी 2012 में हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति वीएम सहाय ने एक खंडपीठ द्वारा राज्यपाल के निर्णय की वैधता पर बंटा हुआ फैसला आने के बाद लोकायुक्त की नियुक्ति को बरकरार रखा था। न्यायमूर्ति सहाय ने संवैधानिक संकट पैदा करने को लेकर गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की खिंचाई करते हुए कहा गया था कि राज्यपाल को नियुक्ति का विवेकाधीन अधिकार होता है। मुख्यमंत्री द्वारा लोकायुक्त मुद्दे को लेकर की जा रही उछलकूद- नौटंकी लोकतंत्र के विखंडन को दर्शाती है। हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए राज्य सरकार ने दलील दी थी कि अपने विवेक का इस्तेमाल करते हुए राज्य सरकार की सलाह लिए बिना लोकायुक्त की एकतरफा नियुक्ति अवैध है। साथ ही हाई कोर्ट द्वारा मोदी के खिलाफ इस्तेमाल किए गए कड़े शब्दों पर एतराज जताते हुए टिप्पणियों को हटाने की मांग की गई है। राज्यपाल ने आठ वर्ष से खाली पड़े लोकायुक्त के पद पर 25 अगस्त 2011 को सेवानिवृत्त न्यायाधीश मेहता की नियुक्ति कर दी थी।