Ad

Tag: UGC

बेसिक शिक्षा तो सुधरी नहीं चले हैं उच्च शिक्षा को सुधारने

झल्ले दी झल्लियाँ गल्लां

भाजपाई चेयर लीडर

औए झल्लेया मुबारकां! औए हसाड़े प्रकाश जावड़ेकर जी ने देश में उच्च शिक्षा के स्तर को ऊपर उठाने के लिए कमर कस ली है|उन्होंने घोषणा कर दी है के विश्वविद्यालय अनुदान आयोग [यूंजीसी]को समाप्त करके उच्च शिक्षा आयोग बनाया जायेगा| अब देखना सब कुछ पारदर्शी हो जाएगा|
Jamos Cartoon

झल्ला

वाह रे मेरे भोले सेठ जी ! बेसिक शिक्षा को तो सुधार नहीं सके चले हो उच्च शिक्षा को उठाने |अरे बाबा ! कमजोर नीवं पर खड़ी इमारत का हमेशा गिरने का खतरा बना रहता है |शायद उच्च शिक्षा के नाम पर डिग्रियां बेचने वालों के साथ समझौते के आसार जयादा होते होंगे तभी इसी दिशा में सभी चलते दिखाई देते हैं

India’s Highly Criticized Education System Has 21 Fake Universities:UGC

[New Delhi]Highly Criticized Education System Has 21 Fake Universities.State Governments Are Proven Incompetent To Close Them Down.
As per information available with the University Grants Commission (UGC), there are 21 Fake Universities which have been listed in the UGC list of Fake Universities and are functioning in contravention or violation of the UGC Act, 1956 in different parts of the country.
These are available on the UGC website According to the UGC, some institutions are offering Undergraduate/ Postgraduate degrees in various subjects which are not established under either Central/State or UGC Act and hence these Fake Universities do not have right to confer/grant any degree.
As per the information received from the UGC, some of the actions have been taken by UGC against these Fake Universities But these are proven inappropriate
(i) All self-styled unrecognized and unapproved institutions are cautioned that running of Undergraduate and Postgraduate degree courses and giving misleading advertisements shall attract severe action under the provisions of appropriate laws including the UGC Act and the Indian Penal Code, etc.
(ii) Cases have also been filed in various courts by UGC against fake universities/institutions.
(iii) The UGC in the interest of general public/students defends the cases in the court. Action relating to closing down the fake institution is to be taken by the concerned state government and local authorities.
(iv) The UGC has also written to the Vice Chancellor/ Director/ In charge of the 21 fake universities to close the down the fake institutions immediately.
(v) Reminder letters to the State/UT Principal Secretaries/Education Secretaries have been issued to take the appropriate action against the Fake Universities located in their jurisdiction.
This information was given by the Union Human Resource Development Minister, Smt. Smriti Irani in Rajya Sabha
File Photo
Smriti Irani

यूजीसी को भंग करने का अभी तक कोई निर्णय नहीं लिया गया है:एचआरडी

[नई दिल्ली] यूजीसी को भंग करने का अभी तक कोई निर्णय नहीं लिया गया है:मानव संसाधन विकास मंत्री
मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने आज उन खबरों का खंडन किया जिनके अनुसार यूंजीसी को भंग किये जाने की बात की जा रही है |मंत्रालय ने स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि यूजीसी का गठन संसद के एक अधिनियम के द्वारा किया गया था और इसे एकपक्षीय तरीके से भंग नहीं किया जा सकता।इसीलिए कुछ समाचार माध्यमों में छपी खबर कि यूजीसी को भंग किया जा रहा है, गलत और अवांछित है।मानव संसाधन विकास मंत्री ने बताया कि अपेक्षित लक्ष्य को प्राप्त करने और बेहतर प्रदर्शन करने की दिशा में यूजीसी को मजबूत बनाने तथा इसके पुनर्गठन की अनुशंसा करने के लिए अनुभवी और विख्यात शिक्षाविदों की एक समिति का गठन किया था। डॉ. हरि गौतम की अध्यक्षता में समिति ने अपनी रिपोर्ट सचिव (उच्चतर शिक्षा) को सौंप दी थी। इस रिपोर्ट की अभी मंत्रालय में जांच की जानी है। समिति को विश्लेषण करने, समीक्षा करने तथा मंत्रालय को अनुशंसा करने के अधिकार दिये गए थे। मंत्रालय इसकी बारीकी से जांच करने के बाद इस पर अपनी राय बनाएगा। इस प्रकार, यूजीसी को भंग करने का कोई ऐसा निर्णय नहीं लिया गया है और इस मामले में कोई भी निर्णय लेने से पहले अनुशंसाओं को समझना तथा उसका विश्लेषण करना बाकी है।

डी यूं ने अपनी हटधर्मिता छोड़ते हुए चार साल के विवादित ऍफ़ वाई यूं पी को स्क्रैप किया

दिल्ली यूनिवर्सिटी ने केंद्र सरकार से टकराव को अवॉयड करते हुए चार साल के स्नातक कार्यक्रम [FYUP] को स्क्रैप कर दिया
यूजीसी के दबाव के आगे अपनी हट धर्मिता छोड़ते हुए दिल्ली विश्वविद्यालय[डीयू] ने आज अपने विवादास्पद चार वर्षीय स्नातक कार्यक्रम[FYUP] को रद्द कर दिया और तीन वर्षीय स्नातक कार्यक्रम के पुराने ढांचे को फिर से अपनाने की घोषणा करके विवाद को समाप्त करने की पहल कर दी है |
यूं पी ऐ सरकार के कार्यकाल से ही विवादों में घिरे डीयू के कुलपति प्रो दिनेश सिंह द्वारा जारी बयान में सभी संबद्ध विश्वविद्यालयों के प्राचार्यो से नये सत्र में दाखिला शुरू करने को कह दिया गया है। इससे हजारों छात्रों को राहत मिलेगी लेकिन जिन छात्रों ने बीते वर्ष ऍफ़ वाई यूं पी कोर्स में एडमिशन लिया था उनके भविष्य या उन्हें क्षतिपूर्ति के विषय में कोई घोषणा नहीं की गई है |गौरतलब है कि यूं पी ऐ के कद्दावर मंत्री कपिल सिब्बल के कार्यकाल में इमरजेंसी शक्तियों का प्रयोग करते हुए डी यूं में यह FYUPलागू किया गया था जिसके अंतर्गत तीन वर्ष का स्नातक कोर्स चार वर्ष का कर दिया गया|एक वर्ष के लिए अतिरिक्त फाउंडेशन कोर्स लागू किया गया लेकिन उस कोर्स की गुणवत्ता और स्तर भी हमेशा शिक्षक और छात्र संघों की आलोचना के शिकार होते रहे| इस विवादित कोर्स के रोल बैक की मांग उठती रही है |

कपिल सिब्बल की डी यूं में चार साल के ग्रेजुएशन की घरैड को अब बहुरानी स्मृति ईरानी भुगत रही हैं

झल्ले दी झल्लियां गल्लां

कांग्रेसी चीयर लीडर

ओये झल्लेया ये नई सरकार तो उच्च शिक्षा का भी बेड़ा गर्क करने पर तुल गई है |मानव संसाधन मंत्री स्मृति ईरानी ने यूं जी सी को [स्वायत ] दिल्ली यूनिवर्सिटी से भिड़ा दिया है |
केंद्र सरकार के अधीन यूं जी सी कह रही है कि ग्रेजुएट कोर्स चार साल के बजाय तीन साल का करो|ये तो डी यूं के लिए “करो तो भी मरो और न करो तो भी मरो” वाली स्थिति हो गई| डी यूं अगर यूं जी सी का पालन करके तीन साल का ग्रेजुएशन कोर्स करती है तो पुराने मंत्री कपिल सिब्बल से बुरा बनती है और अगर पालन नहीं करती तो मिलने वाले अनुदान+और डिग्री मान्यता दोनों हाथ से निकल सकते हैं|

झल्ला

ओ मेरे चतुर सुजाण जी पुरानी कहावत है कि “बिच्छू के काटे का मंतर आता नहीं चले हैं सांप के बिल में हाथ देने” अरे अपने देश में चालू तीन वर्षीय शिक्षा नीति का सही तरह से पालन कराने के बजाय विदेशी तर्ज पर चार साल का ग्रेजुएशन कोर्स करा डाला और चौथे साल के कोर्स को तैयार करने की कुछ तैयारी भी की नहीं |इसीलिए छात्रों ने भी बगावत की हुई है | आप जी की सरकार तो एक चतुर सास की तरह घरैड डाल कर निकल गई और ५०००० से ज्यादा छात्रों को एक साल के अप्रभावी कोर्स के लिए एक्स्ट्रा एक साल गवाना पड़ रहा है और खर्चा भुगतना पड़ रहा है |बेचारी नई नई बहुरानी स्मृति ईरानी को इस तीन और चार साल के गणित के सवाल हल करने के लिए माथा पच्ची करनी पड़ेगी | वैसे झल्ले विचारानुसार यह पहली बार नहीं हुआ है यूं पी टी यूं ने दशक पररव तीन साल का होटल मैनेजमेंट डिप्लोमा शुरू कराया था उस समय कहा गया था कि यह डिप्लोमा ग्रेजुएशन के समान है लेकिन कोर्स पूरा होते ही सभी कुछ बदल गया अब वह तीन साल का डिप्लोमा केवल डिप्लोमा ही है और सैकड़ों छात्र अपनी किस्मत को रो रहे हैं |

फैसले से 64,000 छात्र प्रभावित होंगे।

मेरी गल्ल मन्नो , नौकरियों की दौड़ छोड़ो ,झट से विदेशी डिग्री लो और पट से देसी हुकुमरान बन जाओ

झल्ले दी झल्लियाँ गल्ला

एक चिंतित बुद्दि जीवी

ओय झल्लेया ये तुहाडे कपिल सिबल ने कौन सा नया फुहाड़ा डाल दिया ओये हसाड़े मुल्क में पहले ही नौकरियां नहीं हैं प्रबंध कालेजों की सींटे भरने में पसीने छूट रहे हैं और अब काबिल सिब्बल के मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने विदेशी विश्वविद्यालयों को अपने-अपने कैम्पस खोले जाने की इजाजत देने के लिए औद्योगिक नीति और संवर्धन विभाग (डीआईपीपी) तथा आर्थिक मामला विभाग (डीईए) को इस संबंध में प्रस्ताव भेज दिया है ओये पहले हसाड़े नौजवान बेशक बाहर पढाई के लिए जाते रहे हैं मगर उन्हें वहां नौकरियाँ मिलती रहीहैं और अब तो देश की कमी विदेश में जायेगी और बेरोजगारी बढायेगी|

झल्ला

अरे मेरे सोणे महानुभाव जी आप ये क्यों नहीं सोचते के पहले महात्मा गाँधी+जवाहर लाल नेहरु+ इंदिरा गाँधी+ राजीव गाँधी+राहुल गाँधी कपिल सिबल आदि आदि विदेशों में पढाई करके आये तब जाकर यहाँ हुकुमरान बने अब तो घर बैठे बैठे ही ४०० विदेशी यूनिवर्सिटी के टोप सरपर रख कर फोटो खिचवाने का सुनहरा मौका मिलेगा| भाई जीमेरी मानो तो छोटी मौटी नौकरियों को छोड़ो, झट से विदेशी डिग्री लो और पट से देसी हुकुमरान बन जाओ

विदेशी विश्वविद्यालयों के लिए एक कंपनी के रूप में भारत में अपने कैम्पस खोलने का रास्ता साफ़ हो गया है

विदेशी विश्वविद्यालयों के लिए भारत में अपने कैम्पस खोलने का रास्ता साफ़ हो गया है | मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने कंपनी अधिनियम के तहत एक कंपनी के रूप में देश में विदेशी विश्वविद्यालयों को अपने-अपने कैम्पस खोले जाने की इजाजत देने के लिए औद्योगिक नीति और संवर्धन विभाग (डीआईपीपी) तथा आर्थिक मामला विभाग (डीईए) को इस संबंध में प्रस्ताव भेजा है।
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) अधिनियम के तहत नियम बनाने के लिए केन्द्र सरकार को प्रदत्त अधिकारों के तहत, मानव संसाधन विकास मंत्रालय यूजीसी [UGC ](विदेशी शिक्षण संस्थानों के कैम्पस की स्थापना और उनका संचालन) नियमों को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया में है, ताकि विदेशी विश्वविद्यालय भारत में अपने कैम्पस स्थापित कर सकें और विदेशी उपाधि जारी कर सकें। मंत्रालय ने डीआईपीपी[ DIPP ] तथा डीईए[ DEA ] से नियमों के संबंध में सुझाव मांगे थे। डीआईपीपी तथा डीईए दोनों ने मंत्रालय के प्रस्ताव का समर्थन किया है।
प्रस्तावित नियमों के तहत यूजीसी द्वारा विदेशी शिक्षण संस्थानों (एफईआई)[FEI ] को एक बार विदेशी शिक्षा प्रदाता (एफईपी) [FEP ]के रूप में अधिसूचित करने के बाद एफईआई भारत में अपने कैम्पस खोल सकते हैं। एफईआई को निर्धारित पात्रता शर्तें पूरी करनी होगी। कोई भी एफईआई भारत में अपना कैम्पस खोलना चाहता है तो वह कंपनी अधिनियम 1956 के खंड-25 के अंतर्गत एक संघ के जरिए पंजीकृत होकर कैम्पस खोल सकता है। एफईआई को विश्व के शीर्ष 400 विश्वविद्यालयों में श्रेणीबद्ध किया जाएगा। नियमों के तहत आवेदन करने को इच्छुक सभी एफईआई बिना लाभ वाले वैधानिक संस्थाओं के रूप में काम कर रहे हों, साथ ही वे 20 वर्षों से संचालन में हों तथा देश के मान्यता प्राप्त एजेंसी द्वारा मान्यता दी गई हो, या उस देश में मान्यता के अभाव में अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर स्वीकृति मान्यता प्राप्त प्रणाली के जरिए मान्यता दी गई हो।
मुख्य कैम्पस में विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध पाठ्यक्रम के अनुकूल ही एफईपी को अपने कैम्पस में पाठ्यक्रम उपलब्ध कराने होंगे। प्रत्येक एफईआई को एफईपी में अधिसूचित होने से पहले उन्हें कम से कम 25 करोड़ रुपए का कोष रखना होगा। यूजीसी अथवा इन नियमों के प्रावधान का उल्लंघन किए जाने के संबंध में एफईपी पर 50 लाख से एक करोड़ रुपए तक का जुर्माना किया जा सकता है। एफईपी द्वारा जारी की गई उपाधि को विदेशी उपाधि के रूप में मान्यता दी जाएगी।