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आतंकवादी कौन है और कौन सा पागल है यह तो जांच का विषय है :सी बी आई से पूछो

झल्ले दी झल्लियाँ गल्लां

एक नया नया बना सोशलाईट

ओये झाल्लेया ये हसाड़े सोणे मुल्क में क्या गर्दी मची हुई है जिसे देखो एक दूसरे की पगड़ी उछालने में लगा हुआ है |ये राजनीतिक देश के दुःख से दुखी नहीं बल्कि अपने विरोधियों यहाँ तक ही अपने सहयोगियों के सुख से ज्यादा दुखी दिखने लगे हैं| अब देखो केन्द्रीय इस्पात मंत्री बेनी प्रसाद वर्मा और मुलायम सिंह यादव एक दूसरे की पगड़ी पे हाथ डाल रहे हैं |राज्य और देश की ज्वलंत समस्यायों से जनता का ध्यान बाँट रहे हैं|सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव को गुंडा कहने से जब मन नहीं भरा तो अब मुलायम सिंह को आतंक वादी बताने लग गए हैं| लेकिन आतंकवादियों से संबंध होने का आरोप मढने वाले केन्द्रीय मंत्री सुरक्षा एजेंसियों के पास जाने को तैयार नहीं हो रहे|अपने प्राणों को मुलायम सिंह यादव से खतरा तो बता रहे हैं मगर ऍफ़ आई आर दायर नहीं करवा रहे|उधर सपा सुप्रीमो बेनी के इस आरोप को भुना कर मुस्लिम वोट बैंक को लुभा रहे हैं| मुलायम सिंह ने लखनऊ में बेनी प्रसाद का नाम लिए बगैर कहा, ‘एक केंद्रीय मंत्री कहता है कि मुलायम आतंकवादियों से मिले हैं। अगर मुसलमानों की तकलीफ सुनना, उनके बीच जाना आतंकवादियों से मिलना है तो मुझे कोई कुछ भी कहे फर्क नहीं पड़ता |इससे यह बात साफ जरुर हो गई है कि उस केंद्रीय मंत्री [बेनी]की नजर में मुसलमान आतंकवादी हैं।पार्टी प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी ने कहा कि यह आरोप इसलिए लगाया है कि सपा प्रमुख मुसलमानों के साथ इंसाफ किए जाने की बात करते हैं।पहले पागल बताये गए बेनी बाबू अब राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की शाखा की उपज लगाने लग गए हैं |,

आतंकवादी कौन है और कौन सा पागल है यह तो जांच का विषय है :सी बी आई से पूछो

आतंकवादी कौन है और कौन सा पागल है यह तो जांच का विषय है :सी बी आई से पूछो


झल्ला

भापा जी थैली तो एक ही है|अब इसमें कौन आतंकवादी है और कौनसा पागल है +मुस्लिमो का दुश्मन है यह तो जांच का विषय है |सी बी आई से जांच करवाने के बाद ही कुछ असलियत का पता चल पायेगा इसीलिए आतंकवादी कौन है और कौन सा पागल है यह तो सी बी आई से पूछो

Comments

  1. Insaan says:

    झल्ले दीआं झल्लियाँ गल्लां, इस लिए दोनों राजनैतिक झल्लों की बाते सुनते सुनते आम आदमी स्वयं झल्ला बना हुआ है| वास्तव में व्यक्तिवादी आम आदमी तो सदियों से झल्ला बना हुआ है| चिरकाल से भारतीय-चलचित्र और नौटंकी द्वारा प्रभावित आम आदमी अवास्तविक व महत्वहीन जीवन जीते जीते हसीं ख़ुशी किसी झल्ले द्वारा जानवरों जैसे हांके जाने का अभ्यस्त हो चुका है| गरीब क्या, अमीर क्या, अनपढ़ व पढ़ा हुआ कोई भी व्यक्तिवादी भारतीय रोज़ी रोटी जुटाता जैसे तैसे जीवन यापन कर अपनी देह त्याग इस भारतीय दुनिया से कूच कर जाता है| कुछ अवसरवादी झल्ले संगठित हो बहुसंख्यक व्यक्तिवादी झल्लों पर प्रभुत्व बना भारत के लोकतंत्र होने का ढोल पिटते नहीं थकते| यह सब झल्ले दीआं झल्लियाँ गल्लां हैं| इस झल्लों के देश में झल्लों को व्यक्तिवाद छोड़ संगठित रूप से अरविन्द केजरीवाल के नेत्रित्व में अपने झल्ले-पन का त्याग करते अवसरवादी व भ्रष्ट झल्लों को मार भगाना होगा| नहीं तो JamosNews.com पर jhalli gallan पढने का अवसर तो सदैव मिलता ही रहेगा!