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बिडेन,शेक्सपियर के हैमलेट की तरह भारत को दवाएं के भम्बड़भूसे में फंसे

झल्लीगल्लां
इंडोअमेरिकन
USAओए झल्लेया!ये नए प्रेजिडेंट जो बिडेन क्या चाहते हैं? चुनांवों के समय भारत से दोस्ती का दम भरते रहे।चुनाव जीतने के बाद कॉरोनानुसरों के वध के लिए बनाई जा रही वैक्सीन में उपयोग किये जा रहे कच्चे माल को देने में आनाकानी करने लगे।अब हमने दवाब बनाया तो सकारात्मक जवाब आने लग गए हैं।अरे इन डेमोक्रेट्स को सौचना चाहिए कि यही भारत है जिसने संकट की घड़ी में हमे बिनाशर्त दवाएं भेजी थी अब हमारी बारी आई तो हुकूमत ढील मिठयाई करने लगी।
झल्ला
सर् जी
झल्लालगता है अमेरिकन बिडेन जी ने ब्रिटिश नॉवेलिस्ट शेक्सपियर के देनमार्की पात्र हैमलेट को गम्भीरता से ले लिया है तभी कभी करूं या ना करूं के भम्भडभूसे में वडे हुए हैं

लो जी! मैंने भी 250 ,₹ में वैक्सीन लगवा ही ली (व्यंग)

Vaccination लो जी! ये खोती भी ठाणे हो आई । बोले तो गदहिया पोलिस स्टेशन हो आई।कहने का मतलब है कि हम भी नजदीक के प्राइवेट अस्पताल में श्रीमती संग कोरोना वैक्सीन कॉविशिल्ड लगवा आये।सो दूसरों की तरह हमने भी इठलाते,श्रीमती जी ने बल खाते मुस्कुराते फोटो खिंचवांई।इन्हें सोशल मीडिया पर अपलोड तो बनता है।
सुबह आसमान साफ देख कर जल्द नहा धो कर जम कर नाश्ता किया । पूजा पाठ करके ब्लड प्रेशर और ब्लड शुगर नापी तो लगभग सामान्य आई । एआप लोगों से क्या छुपाना ,चलो बता दी देता हूँ।ब्लड प्रेशर 137/76/57 और ब्लड शुगर 111/193 आया जिसे देख कर मूड अच्छा बन गया।सामान्य तापमान देखा तो 31 ड स सो मुंह पर मास्क लगा श्रीमती जी को उनकी ही स्कूटी पर बैठा कर नजदीक के अस्पताल पहुंचें ।सड़क किनारे गाड़ियों के जमघट में अपनी स्कूटी लगभग घुसेड़ कर अंदर रिसेप्शन पर पहुंचे।प्राइवेट अस्पताल में तब इक्का दुक्का ही थे सो नम्बर जल्द आ गया। नंबर आया तो दूसरे काउंटर पर रेजिस्ट्रेशन के लिए भेज दिया जहां विराजे दूसरे रिसेप्शनिस्ट ने आधार कार्ड और फोन नंबर मांगा। कुछ एंट्री करके फिर वापिस पहले काउंटर पर भेज दिया जहां 500 ₹ की मांग की गई और पर्चे थमा कर बेसमेंट में भेज दिया गया।ये रखम टेबल के नीचे से नही वरण ऊपर से ली गई।इसलिए यह कहा जा सकता है कि हमारे टैक्स से सोने की लंका बनाने वाली वर्तमान सरकार अब लंका देखने के लिए टिकट से एंट्री दे रही है।सो सीजीएचएस लाभार्थी होने के उपरांत भी पेंशनर को जब थोड़ी सी भी राशि बेफजूल देना पड़े तो दिल मे फफोले उठने स्वाभाविक है।
खैर बेसमेंट में स्थित तीसरे रिसेप्शनिस्ट को रिपोर्ट किया।उन्होंने भी कुछ एंट्री करके आगे चौथे डेस्क पर भेज दिया जहां ब्लड प्रेशर और प्लस नापी गई जो 140/90 आई घर मे यह 137/76 थी।बुजुर्ग कहते आये हैं कि अस्पताल में आकर बी पी बढ़ ही जाता है सो इसे भी सामान्य बढ़ाव मां कर लाइन में बैठ गए। दो लाभार्थियों के पश्चात नम्बर आ गया डॉक्टर साहिब ने हम दोनों को (एक साथ नही) वैक्सीन लगा कर 20 मिनट्स तक बाहर प्रतीक्षा करने की एडवाइस दी।यहां हमने अधिकार के साथ एक दूसरे की फोटो खींची।मैंने आदतन डॉक्टर्स साहिब से वैक्सीन के साइड इफेक्ट्स के विषय मे पूछ लिया।डॉक्टर साहिब ने आश्वस्त करते हुए बताया कि 700 वैक्सीन लगा चुके हैं लेकिन कोई शिकायत नही आई।हाँ बाहर केमिस्ट से पैरासिटामोल जरूर खरीद कर लेते जाना ।श्रीमती जी ने व्यंग मारा ,चश्मा अपना ही पहन कर चलना वरना घर पहुंच कर कहोगे की वैक्सीन के कारण धुंधला दिख रहा है।
20 मिनेट्स के पश्चात पुनः तीसरी डेस्क पर पहुंचे और वहां पेपर्स पर स्टाम्प लगावा कर हमें जाने का आदेश मिल गया।यहां बताता चलूं कि डॉ राणा अच्छे मूड में थे सो पता ही नही चला कि कब सुई बांह में घुसी और कब बाहरनिकल गई।यहां तक कि दवाई का भी कोई अहसास नही हुआ।हाँ पर्चे के पीछे लक्की ड्रा का प्रॉमिस छपा है अब उसकी प्रतीक्षा में पर्चे को संभालने की टेंशन जरूर रहेगी
यहां तक किसी को कोई टिप्पणी का अधिकार नही है लेकिन अतिआधुनिक इस अस्पताल में पांच डेस्क पर सिजदा करने पर यह पाया कि सभी जगह रजिस्टर पर ही एंट्री की गई।कंप्यूटर के इस युग मे पेपरलेस का दावा मगर सब जगह पेपर वर्क ।ये कुछ हजम नही हुई ।

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अखिलेश्यादव को कुल्हाड़ी (वैक्सीन)पर ख़्वाहमखा पैर मारने की मजबूरी होगी

#उत्तेजितभाजपाई
ओए झल्लेया! ये विपक्षियों को कौन सी कम्पनी का कीड़ा काट गया।देख तो #अखिलेश्यादाव जैसे युवा पढ़े लिखे भी देशी कोरोना #वैक्सीन के ही खिलाफ बोलने लगे गए।
#झल्ला
चतुर सेठ जी!अखिलेश्यादव को कुल्हाड़ी (वैक्सीन)पर ख़्वाहमखा पैर मारने की मजबूरी होगी
कोई बात नही।किसी किसी को कम्पनियों के मोह में नई कुल्हाड़ी पर ही बेफालतू में पैर मारने की मजबूरी होती है