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डॉ मन मोहन सिंह ने जम्मू -कश्मीर को रेल मार्ग से जोड़ने का राष्ट्रीय सपना साकार किया

डॉ मन मोहन सिंह ने जम्मू&कश्मीर को रेल मार्ग से जोड़ते हुए पीरपंजाल पर्वत श्रृंखला में 11 किलोमीटर लंबी बनिहाल-काजीगुंड रेलवे लाइन का आज उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने यह भारत का सबसे बड़ा और एशिया में दूसरी सबसे बड़ी परिवहन सुरंग है। उद्घाटन भाषण[यह पी एम् १६४ वा भाषण है] इस अवसर पर प्रधान मंत्री ने ट्रेन में बनिहाल से काजीगुंड तक यात्रा भी की इस एतिहासिक यात्रा में उनके साथ यूं पी ऐ अध्यक्षा श्री मति सोनिया गाँधी के अलावा गवर्नर एन एन वोहरा + रेल मिनिस्टर मल्लिकार्जुन खडगे + मुख्य मंत्री उमर अब्दुल्लाह + और स्कूली छात्राएं भी थी|
| उदघाटन भाषण में [१६४वा भाषण]प्रधान मंत्री ने कहा कि हम इंजीनियरिंग के एक ऐसे आश्‍चर्यजनक नमूने को राष्‍ट्र और देश के नाम समर्पित करने जा रहे हैं जिसे रेलवे के तकनीकी विशेषज्ञों और कर्मचारियों ने सर्वोत्‍कृष्‍ट हिमालय से तराशा है। यह निसंदेह एक बहुत बड़ा यादगार अवसर है।
जम्मू-ऊधमपुर-कटरा-काज़ीगुण्ड-श्रीनगर-बारामूला रेल मार्ग, एक राष्‍ट्रीय स्‍वप्‍न रहा है। आपमें से कुछ लोग जानते हैं कि ये सपना किसी और ने नहीं बल्कि महाराजा प्रताप सिंह ने आज से बहुत साल पहले 1898 में देखा था। तब से यह सपना तमाम मुश्किलों के रास्ते से गुज़रा है। इस वास्‍तविकता के बावजूद कि इस रेल संपर्क के लिए एक परियोजना को आज से काफी पहले यानी 1905 में ही मंजूरी मिल गई थी, इसे अभी तक पूरा नहीं किया जा सका। देश के बंटवारे के बाद जम्मू भी दूसरे भारतीय रेलवे नेटवर्क से कटकर रह गया था। 1971 में जम्मू को तो भारतीय रेलवे के बाकि नेटवर्क से एक ब्रॉडगेज लाइन के ज़रिए पठानकोट के रास्ते से जोड़ा था, ये श्रीमती इंदि‍रा गांधी का एक सपना था जो उन्‍होंने पूरा कि‍या लेकिन, जम्मू के उत्‍तर की ओर की लाइन पर कोई काम नहीं हो सका।आख़िरकार श्रीमती इंदिरा गांधी जी ने इस बेहद महत्‍वपूर्ण लाइन पर 1983 में काम शुरू करवाया। हम तब से अब तक एक लम्बा सफर तय कर चुके हैं और मुझे बहुत खुशी है कि हमारे पुराने सपने को यथार्थ रूप देने का काम बहुत अच्छे ढंग से संपूर्णता की तरफ आगे बढ़ रहा है। इस महत्‍वपूर्ण और निसंदेह खूबसूरत रेलवे प्रोजेक्ट के बहुत से हिस्से पूरे हो चुके हैं। मैं स्‍वयं सन् 2005 में इस रेलवे संपर्क के जम्मू-ऊधमपुर हिस्से के उद्घाटन से जुड़ा रहा हूं। तत्‍पश्‍चात 2008 में अनन्तनाग और माज़होम के बीच रेल संपर्क कायम हो गया। माज़होम-बारामूला भाग 2009 में पूरा हुआ और इसके बाद काज़ीगुण्ड-बारामूला के बीच 119 किलोमीटर लम्‍बी रेलवे लाइन बिछाई गई।
आज शुरू हो रहे बनिहाल-काज़ीगुण्ड रेल संपर्क को संपूर्णता तक पहुंचाने में तमाम लोगों ने कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और विपरीत मौसम की चुनौतियां का सामना करते हुए जबरदस्‍त मेहनत की है। पीरपंजाल में 11 किलोमीटर लंबी सुरंग, जो भारत में सबसे लंबी सुरंग है, जिसे मुकम्मल करने में 7 साल लगे। ये सिर्फ इंजीनियरिंग का एक आश्‍चर्यजनक उदाहरण ही नहीं है बल्कि इसका महत्‍व कहीं अधिक है। पूरे साल इस रेल संपर्क की सुविधा कश्मीर घाटी के लोगों को बाकी हिन्दुस्तान में होने वाले आर्थिक विकास से जोड़ कर उन्हें बहुत फायदा पहुंचाएगी। रेल संपर्क की ये सुविधा जम्मू-कश्मीर में होने वाले आर्थिक कामों को हि‍न्‍दुस्‍तान की तरक्की का एक अटूट हिस्सा बना सकेगी। ये रेल संपर्क खुशहाली और रोज़गार उपलब्‍ध कराएगा। जम्मू व कश्मीर में बनने वाले सामान और चीज़ें देश के बाकी हिस्से में पहुंचेंगी और इसी तरह देश के दूसरे हिस्सों में बनने वाले सामान यहां लाए जा सकेंगे। आम लोगों के आने-जाने और व्‍यापार का सिलसिला रफ्तार पकड़ेगा। देश के इस सबसे खूबसूरत राज्‍य में पर्यटन को और बढ़ावा मिलेगा जिसके परिणामस्‍वरूप दूसरे संसाधनों का विकास होगा। अब कश्मीर घाटी के दोनों तरफ के लोगों को पूरे साल आपस में जोड़े रखने वाला एक किफायती माध्‍यम स्‍थापित हो जाएगा।
कश्मीर घाटी की रेलवे लाइन अभी तक एक द्वीप की तरह है। जैसे-जैसे यह प्रोजेक्ट तेजी से आगे बढ़ेगा, हम इस लाइन को हिन्दुस्तान के बाकी नेटवर्क से जोड़ते जाएंगे। कटरा-ऊधमपुर सेक्शन पर काम चंद महीनों में पूरा हो जाएगा और इसके बाद सिर्फ ऊधमपुर और बनिहाल के बीच के हिस्से पर काम बाकी रहेगा, जो सबसे चुनौती भरा है। 359 मीटर ऊंचा चनाब पुल दुनिया में मेहराबदार रेलवे पुलों में सबसे ऊंचा रेलवे पुल होगा। मैं रेलवे विभाग से कहना चाहता हूं कि वो इस हिस्से के काम को जितना जल्दी हो सके पूरा करने की भरपूर कोशि‍श करें ताकि हम कश्मीर घाटी को देश के बाकी हिस्सों से हर मौसम में इस्तेमाल के लायक यातायात की व्‍यवस्‍था से जोड़ सकें।
जिस रेल संपर्क का आज उद्घाटन किया जा रहा है वो जम्मू-कश्मीर के विकास के लिए केन्‍द्रीय यूपीए सरकार की कोशिशों का एक हिस्सा है। आपको याद होगा कि 2004 में जब मैं यहां दौरे पर आया था, तो मैंने जम्मू-कश्मीर के लिए नए रूप की एक परियोजना का ऐलान किया था। मुझे आपको ये बताते हुए खास खुशी हो रही है कि नए रूप की इस परियोजना में शामिल 67 प्रोजेक्टों में से, 34 पूरे हो चुके हैं और बाकी के क्रियान्‍वयन के सिलसिले में अच्छी शुरूआत हो रही है। इस सिलसिले में 7215 करोड़ रुपए की रकम जारी की गई है। पूरे किए गए चंद महत्‍वपूर्ण परियोजनाओं में, राज्‍य में 1 हजार माइक्रो हाइड्रो-इलेक्ट्रिक परियोजनाओं का क्रियान्‍वयन, ख़ानाबल-पहलगांव और नरबल-तंगमर्ग सड़कों को बनाना, 14 नए डिग्री कालेजों को शुरू करना, 9 नए आई टीआई संस्‍थानों को बनाना, श्रीनगर हवाई अड्डे पर यात्री और बुनियादी ढांचे की नई सुविधाएं देना और इस हवाई अड्डे को एक अंतर्राष्‍ट्रीय हवाई अड्डे की शक्ल देना, राज्‍य पुलिस में 5 नए भारत रिजर्व बटालियन का गठन, बारह पर्यटन विकास प्राधिकरण का गठन आदि शामिल हैं।
इसके अलावा, करीब 1 हजार करोड़ रुपए की लागत की परियोजना, जम्मू और लद्दाख क्षेत्रों की विशेष ज़रूरतें पूरी करने के लिए, लागू किए गए हैं। जम्मू-कश्मीर के नौज़वानों को कौशल की ट्रेनिंग देने और उन्हें यथोचित रोज़गार देने के लिए लागू की जा रही अनुशंसाओं और उड़ान योजनाओं के अच्‍छे नतीजे सामने आने लगे हैं। जम्मू कश्मीर में विशेष छात्रवृत्ति की योजना राज्‍य के नौज़वानों को प्रोत्‍साहित करने के साथ उन्हें इस योग्‍य बना रही है कि वो देश के दूसरे हिस्सों में मौजूद शैक्षिक सुविधाओं का लाभ हासिल कर सकें।
मैं आपको विश्‍वास दि‍लाना चाहता हूं कि‍ हि‍न्‍दुस्‍तान की केन्‍द्रीय सरकार जम्‍मू और कश्‍मीर के विकास को आगे बढ़ाने के लि‍ए हर ओर से सहयोग देगी। अंत में, मैं भारतीय रेलवे को इस बेहद कठिन काम को सफलतापूर्वक पूरा करने के लिए हार्दिक बधाई देता हूं। साथ ही साथ मैं जम्‍मू और कश्‍मीर के लोगों को भी इस अवसर पर बधाई देता हूं। मुझे पूरी उम्मीद है कि काम के बाकी हिस्से को निर्धारित समय में जल्‍द से जल्‍द पूरा किया जाएगा। ताकि जम्‍मू और कश्मीर के लोग साल के बारह महीनों के दौरान मौसम के विरुद्ध होने के ख़तरे से मुक्‍त होकर इस रेल संपर्क से लाभान्वित हो सकें।”
गौरतलब है कि इंजीनियरिंग के इस अद्भुत कार्य में करीब 1300 मजदूरों और 150 इंजीनियरों ने पिछले सात वर्षों तक अथक परिश्रम किया। सुरंग पर काम नवम्बर 2005 में शुरू हुआ था। इस सुरंग का निर्माण नवीन ऑस्ट्रियाई सुरंग पद्धति से किया गया है और भारत में पहली बार इस पद्धति का इतने बड़े पैमाने पर प्रयोग किया गया है।

डॉ मन मोहन सिंह ने दहशतगर्दी से लोहा ले रहे काश्मीर को भरोसा दिलाया कि पूरा भारत उनके साथ मुत्तहिद खड़ा है

प्रधान मंत्री डॉ मन मोहन सिंह ने दहशतगर्दी से आये दिन लोहा ले रहे जम्मू ,काश्मीर के अवाम को आज पुनः यह भरोसा दिलाया कि पूरा भारत रियासत में तेज़ रफ़्तार और हमहगीर(Sustainable) तरक्की को यक़ीनी बनाने के लिए उनके साथ खडा है| किश्‍तवाढ़ में 55 सौ करोड़ रुपए की लागत से 850 मेगावॉट की अपने किस्म कि पहली रतले पन बिजली परियोजना की आधारशिला रखने के मौके पर प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में कहा कि “आज सबसे पहले मैं अपनी forces के उन जवानों को अपना ख़िराजे अक़ीदत पेश करना चाहूंगा जो मुल्क की हिफ़ाज़त के सिलसिले में दहशतगर्दों से लोहा लेते हुए शहीद हुए हैं। मैं यह भी वाज़ेह कर देना चाहता हूं कि

हमारा पूरा मुल्क दहशतगर्दों के ख़िलाफ मुत्तहिद होकर खड़ा है और दहशतगर्द अपने मक़ासिद में कभी कामयाब नहीं हो पाएंगे।

सभी के सहयोग से नौज़वान नस्लों के लिए एक बेहतर मुस्तक़बिल की तामीर की जा सकेगी|
850 मेगावाट के रतले Hydroelectric प्रोजेक्ट की संगेबुनियाद रख कर मुझे बड़ी खुशी हो रही है। ये प्रोजेक्ट रियासत जम्मू व कश्मीर में मौजूद जबरदस्त Hydroelectric Potential को बरू-ए-कार लाने की हमारी कोशिशों के सिलसिले में एक अहम कदम है।
मुझे बताया गया है कि ये मुल्क का पहला Hydroelectric प्रोजेक्ट है जिसको अमल में लाने के लिए International tariff based competitive bidding का जरिया अपनाया गया है।
ये बात भी काबिलेज़िक्र है कि 262 करोड़ रुपए की लागत वाले Environmental Management और Rehabilitation & Resettlement मंसूबे इस प्रोजेक्ट के साथ-साथ अमल में लाए जाएंगे। मुझे पूरा यकीन है कि रियासती हुकूमत और प्रोजेक्ट से वाबिस्ता और लोग वो तमाम कदम उठाएंगे जिनके तहत प्रोजेक्ट के इलाके में रहने वाले लोगों को उनका हक आसानी से हासिल हो सके। इसमें National Resettlement and Rehabilitation Policy के मुताबिक रोज़गार और मकामी ज़रूरियात के मुताबिक इज़ाफी फायदे शामिल हैं।
मैं रियासती हुकूमत को इस प्रोजेक्ट पर मुबारकबाद देता हूं। साथ ही मैं रियासती हुकूमत, Project Developers और Project से वाबिस्ता दीग़र एजेंसियों को अपनी नेक ख्वामहिशात पेश करता हूं। मैं उम्मीद करता हूं कि इस Project को उसकी तकमील की तयशुदा तारीख फरवरी 2018 तक पूरा करने की हर मुमकिन कोशिश की जाएगी। मुझे ये भी यक़ीन है कि रतले प्रोजेक्ट से पैदा होने वाली बिजली जम्मू व कश्मीर के अवाम की खुशहाली बढ़ाने में अहम किरदार अदा करेगी और तामीर-ए-क़ौम की हमारी कोशिशों को और पक्का करेगी।
मुझे पूरा यक़ीन है कि कई मुश्किल भरे साल गुज़रने और हमारी इज़तेमाई कोशिशों के नतीजे में जम्मू व कश्मीर अब तेज रफ़्तार तरक्की के रास्ते पर चल निकला है। ताहम हमें यह बात याद रखनी चाहिए कि दीग़र चीज़ों के अलावा बिजली की अच्छी दस्तयाबी हमारी तरक्की की कोशिशों की रफ़्तार को बनाए रखने के लिए बहुत लाज़िम है। एक तरफ जहां चिनाब, झेलम, सिंधु जैसी नदियों ने जम्मू व कश्मीर को 14,000 मेगावाट के Hydroelectric Potential से मालामाल कर रखा है, वहीं हम अब तक महज़ 2500 मेगावाट के Potential को ही बरू-ए-कार ला सके हैं। रियासती और मरकज़ी हुकूमतें बाकी Potential को भी बरू-ए-कार लाने के लिए तमामतर कोशिशें कर रही हैं और इस बारे में मैं रि‍यासत के लोगों को यकीन दि‍लाना चाहता हूँ कि‍ जो भी काम समय पर न होगा मरकजी सरकार उसमें पूरा-पूरा सहयोग और मदद देगी। इसके अलावा मरकज़ी हुकूमत जम्मू व कश्मीर की रियासत को बिजली की मौसमियाती किल्लत का सामना करने के लायक बनाने के लिए भी अपना तआव्वुन दे रही है और देती रहेगी।
एक तरफ जहां रियासत-ए-जम्मू व कश्मीर को मरकज़ी जनरेटिंग स्टेशनों से की जाने वाली बिजली की Supply बढ़कर 1664 मेगावाट हो गई है फिर भी रियासत में बिजली की किल्लत है। रियासत को इस कमी पर काबू पाने का अहल बनाने के लिए मुझे इस मौके पर ये ऐलान करते हुए खुशी हो रही है कि मरकज़ की जानिब से रियासत जम्मू-कश्मीर को मज़ीद 150 मेगावाट बिजली की Supply की जाएगी। मुझे इस बात की भी खुशी है कि National Hydroelectric Power Corporation के दो हालिया तक़मीलशुदा Hydroelectric प्रोजेक्टों यानी नीमूबाज़गो और चुटक से मुकम्मल 89 मेगावाट बिजली जम्मू-कश्मीर के अवाम को दस्तयाब अब हो रही है। मैं यह भी उम्मीद करता हूं कि मुस्तकबिल करीब में बारामूला का उड़ी-2 प्रोजेक्ट भी चालू होने के लिए तैयार हो जाएगा।
जम्मू-कश्मीर की मजमूई तरक्की के एक हिस्से के तौर पर एनएचपीसी ने रियासत के 5 आईटीआई इदारों की हालत बेहतर बनाने के लिए उनको अपनी निगरानी में लिया है और 2 मज़ीद आईटीआई इदारों को वह आइंदा अपनी निगरानी में ले लेंगे। इसके अलावा एनएचपीसी गांदरबल के नज़दीक कंगन में एक हाइड्रो ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट भी कायम करेगी। इसके लिए एक Memorandum of Understanding पर हाल ही में एनएचपीसी और जम्मू-कश्मीर State Power Corporation के माबेन दस्तख़त किए गए हैं। पॉवर ग्रिड कार्पेारेशन ऑफ इंडिया भी रियासत में एक आईटीआई इदारा कायम करेगी। हम एक हज़ार 629 करोड़ रुपए की लागत से श्रीनगर-लेह Transmission लाइन बिछाने का मंसूबा बना रहे हैं ताकि यहां से बिजली निकासी और तरसील का रास्ता हमवार हो सके। इसके ज़रिए लद्दाख के इलाके को पूरे साल बिजली की दस्तयाबी हो सकेगी। तरक्की के लिए सलामती एक पेशगी शर्त है। हमारा मुशाहदा है कि जम्मू व कश्मीर में सलामती सूरत-ए-हाल में बेहतरी नज़र आई है। साल 2012 में रियासत में दहशतग़र्दी के नतीजे में रुनुमा होने वाला तशद्दुद पिछली दो दहाईयों में सबसे कम रहा है। हालांकि हमें अभी कल जैसे वाक़यों को पूरी तरह से रोकने की ज़रूरत है। इसके साथ हमें अवाम में ऐतेमाद पैदा करने और इन्तेज़ामी उमूर में उनकी शिरकत को बढ़ावा देने की कोशिशों को जारी रखना चाहिए।
2004 में रियासत के अपने एक दौरे के दौरान मैंने जम्मू-कश्मीर के लिए अस्सर-ए-नो तामीर के एक मंसूबे का ऐलान किया था। इसमें 37,000 करोड़ रुपए से ज़्यादा के Projects और स्कीमें शामिल थीं जिनका मक़सद इकतेसादी बुनियादी ढांचे की तामीर, बुनियादी ख़िदमात की फराहमी, रोज़गार और आमदनी पैदा करने वाली सरगर्मियों को फरोग़ देना और देहशतगर्दी से मुतास्सिर ग्रुपों की Rehabilitation & Resettlement था। मुझे ये भी इत्तला देते हुए खुशी हो रही है कि मज़कूरा तामीर-ए-नो के मंसूबे के तहत शामिल 67 प्रोजेक्टों और स्कीमों में से, 34 के सिलसिले में, काम मुकम्मल हो चुका है। बाकी कामों को लागू करने में अच्छी पेशरफ्त हो रही है। इसके अलावा करीब 1000 करोड़ रुपए की लागत के प्रोजेक्टों को लागू किया जा रहा है ताकि जम्मू और लद्दाख के खित्तों की खुसूसी तरक्कियाती ज़रूरतों की तकमील हो सके।
जम्मू-कश्मीर के नौज़वानों को हुनरमंदी की तरबियत देने और मुफीद रोज़गार फराहम कराने के लिए लागू की जा रही ‘हिमायत’ और ‘उड़ान’ नाम की स्कीमों के हौसलाअफज़ा नतीजे सामने आए हैं। जम्मू व कश्मीर के लिए खुसूसी वज़ीफे की स्कीम ने रियासत के नौज़वानों की हौसलाअफज़ाई की है और उन्हें इस काबिल बनाया है कि वो मुल्क के दीग़र हिस्सों में दस्तयाब बेहतरीन तालीमी सहूलतों से मुस्तफीद हो सकें।
जम्मू व कश्मीर के अवाम के लिए एक बेहतर मुस्तक़बिल की फराहमी से वाबिस्ता हमारी पालिसियां पूरी तरह से उसी वक़्त कामयाब हो सकती हैं जब रियासत में जारी तमाम सियासी और इक़तेसादी अमल में जम्हूरियत और शिराकत का माहौल कायम रहे। इस अमल में हर सतह पर होने वाले Elections भी शामिल हैं। ये Elections सही मायनों में अवामी ख्वाहिशात और उम्मीदों का इज़हार करते हैं। लिहाज़ा मैं तमाम लोगों से गुजारिश करूंगा कि वो इस तरह के अमल में बाकायदगी से शामील हों, शरीक़ हों ताकि हम सब मिलकर जम्मू और कश्मीर की नौज़वान नस्लों के लिए एक बेहतर मुस्तक़बिल की तामीर कर सकें।”

डॉ. मनमोहन सिंह ने उत्‍तराखंड में एक हेलिकॉप्‍टर की दुर्घटना में लोगों की मृत्‍यु पर दुःख व्‍यक्‍त किया

प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने उत्‍तराखंड में भारतीय वायुसेना के एक हेलिकॉप्‍टर की दुर्घटना में लोगों की मृत्‍यु पर दुःख व्‍यक्‍त किया है। अपने संदेश में उन्‍होंने कहा कि हमारी सेना के जवान और अधिकारी उत्‍तराखंड में बहुत ही बहादुरी से बचाव और राहत कार्य कर रहे हैं। इस दुर्घटना से मुझे बहुत दुःख हुआ है। जिनकी जाने गई हैं, मैं उनके परिवारों के प्रति संवेदना व्‍यक्‍त करता हूं। पूरा देश भी मेरे साथ इस क्षति पर दुःखी है। उनके निस्‍वार्थ कार्य से हजारों लोगों की जानें बची हैं। उनके कार्य को जारी रखना ही उनके प्रति सबसे अच्‍छी श्रद्धांजलि होगी।
उत्तराखंड में जारी त्रासदी में फंसे लोगों को बचाने में लगा वायु सेना का एक चापर एमआई-17 क्रैश हो गया है। यह हादसा गौरीकुंड के समीप हुआ। प्राप्त जानकारी के अनुसार हेलीकॉप्टर केदारनाथ से लौट रहा था।इस हादसे में 12 लोगों के शव बरामद कर लिए गए हैं। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन संसथान [ एनडीएमए ]ने इस हादसे में मृतकों की संख्या 19 होने की बात कही है।
बताया जा रहा है कि नौ एनडीआरएफ + छह आईटीबीपी +चार वायुसेना के लोग इस हेलीकॉप्टर में मौजूद थे।

उत्तराखंड में सिविल राहत राशि और सेना के खर्चे का आडिट भी करा लेना चाहिए

उत्तराखंड में आई प्राकृतिक आपदा से हुई जान माल की भारी हानि को लेकर बढ रहे ग्राफ में इस सप्ताहांत तक कोई स्थिरता नही आ पाई है | आने वाले दो तीन दिनों में वर्षा का अनुमान लगाया जा रहा है जिससे भयावहता के बढने की आशंका जताई जाने लगी है| भारतीय सेनाओं और आम जनता द्वारा राहत कार्य जारी हैं लेकिन राजनितिक दलों में हमेशा की तरह इस विपदा पर भी राजनीति शुरू हो गई है|
विपक्ष इस आपदा की विभीषिका को देखते हुए इसे राष्ट्रीय आपदा घोषित किये जाने की मांग करने लगा है तो सत्ता रुड सरकारें इससे बचती दिख रही है|इसके बावजूद भी केंद्र सरकार ने एक हज़ार करोड़ रुपयों की सहायता का एलान किया है जिसमे से १४५ करोड़ रुपये रिलीज भी किये जा चुके हैं| कांग्रेस अध्यक्षा श्री मति सोनिया गांधी ने अपनी पार्टी के एम् पी और एम् एल ऐ को एक महीने का वेतन दान करने के निर्देश भी जारी कर दिए हैं|दूसरे प्रदेशों के सिख सगत +विपक्षी एम् एल ऐ+राहत भेजने लगे हैं यहाँ तक कि गुजरात के बहु चर्चित मुख्य मंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी देहरादून का दौरा करके गुजराती तीर्थ यात्रियों को बाहर निकालने में दिलचस्पी दिखाई है|कांग्रेस और भाजपा के विधायकों ने एक माह का वेतन दान करने की घोषणा की है|
आज न्यूज चैनलों ने एक चौंकाने वाला समाचार दिया है जिसके अनुसार स्थानीय प्रशासन ने सेना के हेलीकाप्टरों को तेल [ ऐ टी ऍफ़ ]देने से मना कर दिया है|
चैनलों पर लगातार दिखाया जा रहा है कि राहत कार्यों के तमाम दावे केवल हवाई ही साबित हो रहे हैं| अब यह स्वाभाविक सवाल पैदा उठता है कि सहायता राशि कहाँ जा रही है ? इस के मद्दे नजर यह कहना अभी जल्द बाजी कहा जा सकता है मगर पुराने अनुभवों को देखते हुए जरुरी जरुरी है कि सहायता राशि का साथ साथ आडिट भी कराया जाना चाहिए| स्वयम प्रधान मंत्री डॉ मन मोहन सिंह ने मनरेगा के एक कार्यक्र में मंत्री जय राम रमेश को सलाह देते हुए कहा था कि देखा गया है कि कई वर्षों के बाद आडिट में गड़े मुर्दे खुलते हैं ऐसे में हाथो हाथ आडिट करा लिया जाना चाहिए| उसी भावना के अंतर्गत अब इस राहत राशि का भी आडिट करा लिया जाना जरुरी है|
इसके अलावा यह भी देखा गया है कि सेना जब भी ऐड टू सिविल पॉवर में लगाई जाती है तो उसका खर्चा स्टेट को डेबिट किया जाता है |और उस खर्चे के आडिट का भी वोही हाल होता है जो सिविल में आडिट का होता है|इसीलिए सेना के खर्चे का भी आंतरिक और बाह्य आडिट करा लिया जाना चाहिए|
चूंकि आज कल इस विपदा को मानव निर्मित बता कर इसकी जांच कि मांग भी की जाने लगी है ऐसे में कोई शक नही कि मात्र एक वर्ष बाद होने वाले चुनावों में इसे मुद्दा बनाया जा सकता है इसीलिए अभी समय रहते दूध का दूध और पानी का पानी करलेना ही उचित होगा|इससे सरकार शासन का अस्तित्व दिखाई देगा| और समय रहते भ्रष्टाचार को हतोत्साहित किया जा सकेगा|

शरद पवार की धुआंधार बालिंग के सामने बोर्ड के सचिव शिर्के और कोषाध्यक्ष जगदाले पेवेलियन लौटे

बी सी सी आई के पूर्व अध्यक्ष शरद पवार धुआंधार बालिंग को देखते हुए अब बोर्ड की कई विकेट्स खुद ही गिरने लगी हैं | बोर्ड के सचिव संजय जगदाले और कोषाध्यक्ष अजय शिर्के ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया। श्रीनिवासन को भेजे इनके इस्तीफे में कहा गया है कि क्रिकेट में हाल ही के घटनाक्रम से वे लोग बेहद आहत हैं।इसके अलावा पवार की घोषणा के बाद सचिन तेंदुलकर ने भी स्वयम के आहत होने की बात कह दी है|
जॉइंट सेक्रेटरी अनुराग ठाकुर जो अभी तक एन श्रीनिवासन के लिए एम्पायरिंग करते फिर रहे थे उन्होंने भी अब बोर्ड की इमरजेंसी मीटिंग बुलाने की जरुरत स्वीकार कर ली है| भाजपा के नेता अरुण जेटली[नार्थ] और आई पी एल के चेयर मैन केन्द्रीय सरकार में संसदीय कार्यों के राज्य मंत्री राजीव शुक्ला अभी भी श्रीनिवासन को पेवेलियन लौटाने के लिए अपनी उंगली उठाने को तैयार नही दिख रहे|लेकिन प्रधान मंत्री डा. मन मोहन सिंह ने जब से खेल और राजनीती को अलग रखने की बात कही है और कांग्रेस पार्टी अध्यक्षा श्री मति सोनिया गाँधी पार्टी की इमेज सुधारने के लिए एडी चोटी का जोर लगा रही हैं|ऐसे में दागी आई पी एल के चेयर मैन पद से चिपके हुए राजीव शुक्ला के मंत्री पद जरूर खतरे में पड़ सकता है|
श्री जगदाले उस तीन सदस्यीय इनक्वायरी कमिटी से भी बाहर हो गए हैं, जो मयप्पन के खिलाफ आईपीएल में सट्टेबाजी के आरोपों की जांच के लिए बनाई गई है।हर तरफ से दबाव को देखते हुए श्रीनिवासन ने वर्किंग कमिटी की इमरजेंसी मीटिंग शनिवार को बुलाने की घोषणा की है लेकिन अविश्वास प्रस्ताव केवल आम सभा में ही लाया जा सकता है|

पी एम् ने श्रीमति सोनिया के साथ मतभेदों से इंकार करते हुए कहा हम साथ साथ हैंP C of Dr Man mohan Singh In Plane

कांग्रेस अध्यक्षा श्रीमती सोनिया गाँधी ने यद्यपि डा. मन मोहन सिंह को राज्य सभा का चुनाव[ पांचवी बार] जितवा कर यह साबित कर ही दिया है कि प्रधान मंत्री और यूं पी ऐ अध्यक्षा में कोई मतभेद नही है लेकिन इसके बावजूद आज प्रधान मंत्री डॉ .. मन मोहन सिंह ने स्वयम भी मतभेदों की खबरों को निराधार बताया है| डा. सिंह ने बेहद ईमान दारीसे यह स्वीकार करते हुए कहा कि वह आज भी महत्वपूर्ण मुद्दों पर आपस[ प म &पार्टी प्रेजिडेंट] में सलाह-मशविरा करते हैं।और उनमे कोई मतभेद नही है|
जापान और थाईलैंड की पांच दिवसीय यात्रा से लौटने के दौरान अपने विशेष विमान में संवाददाताओं से बातचीत में एक प्रश्न के उत्तर में डा. सिंह ने दोहराया “मेरे और कांग्रेस अध्यक्ष के बीच कोई मतभेद नहीं है। हम तकरीबन सभी मुद्दों पर साथ मिलकर काम करते हैं।”
रेलमंत्री पवन बंसल + कानून मंत्री अश्विनी कुमार के इस्तीफे को लेकर श्रीमति सोनिया के साथ मतभेद के बारे में पूछे जाने पर प्रधानमंत्री ने कहा कि , जहां भी परामर्श की आवश्यक होती है, मैं [डा]कांग्रेस अध्यक्ष[श्रीमती सोनिया] से मशविरा करता हूं और इसलिए ऐसा कहना गलत होगा कि श्री मति सोनिया और मेरे [डा]बीच किसी तरह के मतभेद हैं।
यह पूछे जाने पर कि क्या कांग्रेस केंद्र की संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार से तृणमूल कांग्रेस और द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) के अलग होने के बाद अगले आम चुनाव के लिए नए सहयोगियों की तलाश कर रही है, इस प्रश्न को उन्होंने पार्टी पर छोड़ते हुए कहा कि पार्टी इस पर विचार करेगी।
प्रधानमंत्री ने आईपीएल विवाद पर कहा है कि राजनीति और खेल को अलग रखा जाना चाहिए। हालांकि अभी इस मामले की जांच चल रही है इसलिए इस मुद्दे पर कुछ भी बोलना ठीक नहीं होगा।
संसद की कार्यवाही को बाधित करने के लिए विपक्ष की निन्दा करते हुए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने आज कहा कि यह पहले की अपेक्षा अब ज्यादा असहिष्णु हो गया है ।PRESS RELEASE OF M E A

राज्य सभा के लिए कांग्रेस ने एक नया सांसद असम से जीता मगर तेलंगाना से दो लोक सभा सांसद गवां दिए

झल्ले दी झल्लियाँ गल्ला

एक कांग्रेसी चीयर लीडर झल्ला

बेशक यह आप जी के लिए क्षणिक ख़ुशी की बात ही हो सकती है क्योंकि पी एम् के साथ केवल एक ही सांसद राज्य सभा में आप जी के खाते में आया है जबकि तेलंगाना निर्माण के लिए धर्म युद्ध लड़ रहे आप कि पार्टी के सांसद [१]विवेक+[२]जगन्नाथ ने आप की पार्टी से किनारा कर लिया है|इनके साथ लुभाव में केशव राव भी पतली गली से निकल लिए है|अर्थार्त राज्य सभा में एक नया सांसद आया और लोक सभा से दो सांसद निकल गए

डा. मन मोहन सिंह तीसरी बार पी एम् बने या ना बने लेकिन नई संसद[राज्य सभा] के लिए तो जीत ही गए

डा मन मोहन सिंह के प्रधान मंत्री की तीसरी पारी के लिए बेशक आये दिन सवाल उठते रहते हो मगर डा. सिंह ने अगली संसद[राज्यसभा] में अपनी सीट तो सुरक्षित कर ही ली है| प्रधानमंत्री डा. मनमोहन सिंह [कांग्रेस]ने लगातार पांचवी बार गुरुवार को राज्यसभा के लिए अपनी सीट सुरक्षित कर ली है | डा. मन मोहन सिंह की पार्टी कांग्रेस ने असम से राज्य सभा की दूसरी सीट भी जीत ली है।गौरतलब है कि प्रथम वरीयता के लिए केवल डा. सिंह ही प्रत्याशी थे| इसके अलावा पार्टी व्हिप भी जारी किया गया था| डा. सिंह १९९१ से असम से निर्वाचित होते आये हैं|
असम विधानसभा के प्रधान सचिव और निर्वाचन अधिकारी जीपी दास के अनुसार 126 सदस्यीय सदन में डा. सिंह को प्रथम वरीयता के 49 वोट मिले जबकि कांग्रेस के दूसरे उम्मीदवार एस कुजूर को 45 वोट मिले।
ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोकेट्रिक फ्रंट (AIUDF) के अमीनुल इस्लाम को केवल 18 वोट ही मिले
एआईयूडीएफ केंद्र में संप्रग का सहयोगी दल है जिसके 18 विधायकों ने दूसरी वरीयता के अपने वोट प्रधानमंत्री को दिए।
विपक्षी असम गण परिषद [ AGP ]और भाजपा[ BJP] ने मतदान से गैर-हाजिर रहने का फैसला किया था। इनके केवल क्रमश: नौ और पांच वोट हैं। असम से राज्य सभा में अब कांग्रेस के पांच सदस्य हो गए हैं जबकि ऊपरी सदन के लिए राज्य से कुल सात सीटें हैं।
सुबह नौ बजे से लेकर शाम 4 बजे तक हुए मतदान की गिनती शाम पांच बजे शुरू हुई।
प्रधान मंत्री की वर्तमान सदस्यता १४ जून को समाप्त होने जा रही है| अब डा. मन मोहन सिंह तीसरी बार पी एम् बने या ना बने लेकिन नई संसद[राज्य सभा] के लिए तो चुनाव जीत ही गए इसके अलावा एक बात और क्लीयर हो गई है कि यूं पी ऐ की अध्यक्षा श्री मति सोनिया गाँधी और प्रधान मंत्री डा. मन मोहन सिंह में कोई दरार नहीं है|

चीन और भारत ने विश्व की एक तिहाई आबादी के हितों के लिए सीमा विवाद को छोड़ कर आठ समझौते किये

[नई दिल्ली]विश्व की दो बड़ी शक्तियों ने विश्व की एक तिहाई आबादी के हितों के लिए सीमा विवाद को सीमा पर ही छोड़ा कर सहयोग और शांति बहाली का वायदा किया और आठ सूत्री समझौते पर हस्ताक्षर किये दिल्ली के हैदराबाद में आयोजित इस शिखर वार्ता में भारत के प्रधान मंत्री डाक्टर मन मोहन सिंह ने सीमा विवाद पर अपनी सराकर के रुख के अनुसार गंभीरता से लिखे भाषण को धीरे धीरे पड़ कर सुनाया तो चीन के युवा प्रधान मंत्री ली कछ्यांग ने अपने देश के अनुसार तेज +एक्शन और जोश में पत्रकारों का सामना किया |
भारत और चीन के बीच सोमवार को प्रतिनिधिमंडल स्तर की शिखर वार्ता खत्म हो गई। दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों की मौजूदगी में कैलाश-मानसरोवर यात्रा आसान बनाने एवं बह्मापुत्र पर हाइड्रोलॉजिकल डाटा साझा करने के साथ-साथ कुल आठ समझौतों पर हस्ताक्षर हुए।
तीन दिवसीय दौरे पर भारत आए चीनी प्रधानमंत्री ने मीडियाकर्मियों को संबोधित करते हुए कहा कि भारत बेहद अहम पडौसी है और इसके साथ हमेशा शांति और सहयोग पर जोर रहेगा। दोनों देशों के बीच आपसी रणनीतिक साझेदारी बढ़ने की उम्मीद है।
भारतीय प्रधानमंत्री डा. सिंह ने कहा कि दोनों देश सीमा पर शांति चाहते हैं। विकास के लिए अमन होना जरूरी है लेकिन इसके साथ ही उन्होंने कारोबारी रिश्ते भी मजबूत बनाने में इंटरेस्ट दिखाया | ने चीन जाने का न्यौता स्वीकार करते हुए यह आशा जताई कि भविष्य में दोनों देशों के बीच रिश्ते और मजबूत होंगे। उन्होंने चीन से भारत के लिए अपना बाजार और खोलने की मांग की।
इससे पहले, रविवार को हालिया सीमा विवाद के साये में चीनी प्रधानमंत्री के साथ मुलाकात में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने सीमाओं पर शांति का मुद्दा उठाया। प्राप्त जानकारी के अनुसार दोनों नेताओं के बीच एक घंटे चली बातचीत में दोनों पक्षों ने अपने-अपने मुद्दों को उठाया।
प्रधानमंत्री ने अपने चीनी काउंटरपार्ट के सम्मान में रात्रिभोज भी दिया| कांग्रेस अध्यक्षा श्री मति सोनिया गांधी+पार्टी उपाध्यक्ष राहुल गांधी+लोकसभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज और राज्य सभा प्रतिपक्ष अरुण जेटली + सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव + प्रकाश करात भी उपस्थित थे।दौरे पर आए ली मंगलवार को भारत की आर्थिक राजधानी मुंबई जाएंगे। भारत के बाद चीन के पी एम् को पाकिस्तान भी जाना है।
जिन मुद्दों पर हस्ताक्षर हुए वोह निम्न हैं :-
[1]. कैलाश-मानसरोवर यात्रा को सुगम बनाने एवं मार्ग में सुविधाएं बढ़ाने के लिए दोनों देशों के बीच समझौता।
[2]. वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय द्वारा संयुक्त आर्थिक समूह के तहत तीन कार्यसमूहों का गठन।
[3]. कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण प्राधिकरण के अंतर्गत मांस, मत्स्य उत्पादों एवं चारा व चारा सामग्री,+ समुद्री उत्पादों का एक-दूसरे देशों में निर्यात को बढ़ावा देने का समझौता।
[4.] शहरी क्षेत्र में सीवेज ट्रीटमेंट के क्षेत्र + अन्य आपसी हित के मुद्दों पर एक-दूसरे के साथ अनुभव का आदान-प्रदान करना।
[5]. जल के कुशल प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में आपसी सहयोग को बढ़ावा देना।[6] नदियों को लेकर हाइड्रोलॉजिकल डाटा को एक-दूसरे से साझा करने को लेकर समझौता।
[7]. भारत और चीन के शहरों व प्रांतों के लोगों के बीच आपसी सहयोग को सुविधाजनक बनाने के लिए समझौता।
[8] किताबों के अनुवाद एवं प्रकाशन के क्षेत्र में समझौता।

डा.. मन मोहन सिंहने पुराने रिश्तों का हवाला देते सीआईआई से सहयोग की कामना की

कंफेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्रीज (सीआईआई) की वार्षिक बैठक को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री डा. मन मोहन सिंह ने आज कंफेडरेशन से अपने पुराने मधुर रिश्तों का हवाला देते हुए व्यावसायिक क्षेत्र में साझेदारी की कामना की | उन्होंने कहा की वर्तमान में उद्योग जगत में निराशा है |विकास दर गिरकर पांच प्रतिशत तक पहुंच गई है| सरकार विकास दर आठ प्रतिशत तक हासिल करने के लिए प्रयास कर रही है। लेकिन विकास की इस नई इबारत को लिखने के लिए सरकार और व्यावसायिक क्षेत्र की साझेदारी की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा, विकास दर में आई गिरावट अस्थायी है।
इस वार्षिक बैठक में उद्योगपतियों को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा है कि कारोबारी माहौल, जो 2007 में असामान्य रूप से आशावादी था, आज असामान्य रूप से निराशावादी है। प्रधानमंत्री ने कहा कि पांच फीसदी की धीमी विकास दर निराशाजनक है, लेकिन फिर से यह आठ फीसदी हो सकता है।प्रधानमंत्री ने कहा, हमें स्वीकार करना होगा कि निर्यात कमजोर रहेगा और चालू खाता घाटा उम्मीद से अधिक रहेगा। हम राजकोषीय घाटे को कम करने के लिए हरसंभव कदम उठाने को प्रतिबद्ध हैं।
उन्होंने कहा, वर्तमान अस्थायी आर्थिक गिरावट के लिए आंशिक तौर पर वैश्विक तत्व जिम्मेदार हैं। हमें सुधारात्मक कदम उठाने होंगे।
उन्होंने साथ में यह भी कहा, नौकरशाही में भ्रष्टाचार और काहिली समस्याएं हैं। गठबंधन चलाना आसान नहीं।
भूमि अधिग्रहण को लेकर पिछले दिनों उठे विवादों पर उन्होंने कहा कि भूमि अधिग्रहण विधेयक + जल्द ही संसद में पेश होगा। कोयला खदान और पेट्रोलियम के छेत्र में सुधार किये जायेंगे |
डा. सिंह ने भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) की वार्षिक आमसभा में कहा कि सरकार प्रत्यक्ष विदेशी निवेश नीति में और राहत देगी और मुद्रास्फीति कम करने के लिए कदम उठाएगी।
उन्होंने कहा कि वर्तमान विकास दर निराशाजनक है। यह अस्थाई गिरावट है, जिसके लिए आंशिक तौर पर वैश्विक तत्व जिम्मेदार हैं। हम आठ फीसदी विकास दर पर लौट सकते हैं। उन्होंने साथ ही कहा कि सरकार विकास को बढ़ावा देने के लिए निर्णायक और त्वरित कार्रवाई करेगी।
पी एम् ने कहा कि कारोबारी माहौल, जो वर्ष 2007 में असामान्य रूप से आशावादी था, आज अनावश्यक रूप से निराशावादी है। मैं भारतीय उद्योग जगत से अपील करूंगा कि हमारे संकल्प में विश्वास रखे और निराशा में न फंसे। मनमोहन सिंह ने कहा कि राजकोषीय घाटा बढ़ने से चालू खाते का घाटा बढ़ा है। अनुमान है कि वर्ष 2012-13 में यह जीडीपी के करीब पांच फीसदी तक रहेगा।
उन्होंने कहा कि रक्षा विभाग की मंजूरी की प्रतीक्षा में पेट्रोलियम क्षेत्र में 20 अरब डॉलर मूल्य का निवेश और 40 ब्लॉकों में तेल-गैस खोज का काम वर्षों से रुका हुआ था। इस समस्या को जल्द सुलझा लिया जाएगा