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इसरो से जुड़े फ़ोटो वैज्ञानिक सुरेश की संदिग्ध मौत

(हैदराबाद) इसरो से जुड़े फ़ोटो वैज्ञानिक सुरेश की संदिग्ध मौत
#एनआरएससी के 56 वर्षीय वैज्ञानिक #सुरेश कुमार अपने आवास पर रहस्यमय परिस्थितियों में मृत पाए गए।
एनआरएससी #इसरो का एक विभाग है और कुमार इस केंद्र के फोटो विभाग में कार्यरत थे।
पुलिस के अनुसार कुमार की पत्नी चेन्नई में रहती हैं और उन्होंने कई बार अपने पति को फोन किया था। कुमार का कोई उत्तर न मिलने पर उनकी पत्नी ने उनके मित्रों को इसकी सूचना दी।
कुमार के मित्र उनके फ्लैट पर पहुंचे तो दरवाजा बाहर से बंद पाया जिसके बाद उन्होंने दरवाजा तोड़ दिया। भीतर जाने पर कुमार मृत मिले और उनके सिर पर चोट के निशान थे। पुलिस के अनुसार प्रथम दृष्टया यह मामला हत्या का लगता है। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

ISRO Decorated with Another Feather By Launching RISAT-2B

[ISriharikota] SRO Decorated with Another Feather By Launching RISAT-2B
India’s Polar Satellite Launch Vehicle (PSLV-C46) today successfully launched the RISAT-2B satellite from Satish Dhawan Space Centre (SDSC) SHAR, Sriharikota in Andhra Pradesh. This was the 72nd launch vehicle mission from SDSC SHAR, Sriharikota and 36th launch from the First Launch pad.
RISAT-2B is a radar imaging earth observation satellite weighing about 615 kg. The satellite is intended to provide services in the field of Agriculture, Forestry and Disaster Management.
A total number of 5,000 visitors witnessed the launch live from the Viewer’s Gallery, which is opened to the public.
ISRO is now gearing up for the launch of Chandrayaan-2 onboard GSLV MkIII during the window of July 09, to July 16, 2019, with an expected Moon landing on September 06, 2019.

PM Congratulates ISRO for Breaking New Barriers:20 Satellites Launched

[New Delhi] PM Of India Narendra Modi Congratulates ISRO for Launch of Record 20 Satellites
Modi Tweeted His Joy
“20 satellites in a go! @isro continues to break new barriers. Hearty congratulations to our scientists on the monumental accomplishment,”
Prime Minister Narendra Modi today hailed scientists for the monumental accomplishment of launching 20 satellites in one go PM said ISRO Continues to Break New Barriers.
PM Modi Tweeted
“Our space programme has time and again shown the transformative potential of science & technology in people’s lives,”
“Over the years we developed expertise & capability to help other nations in their space initiatives. This is the skill of our scientists,”He also lauded the role of students in the making of satellites.
“Saw with immense joy that students from institutions in Pune & Chennai played a role in the making of satellites. This touched me.
File Photo
PM In ISRO

ओबामा ने मंगलगृह की सफलता का सबूत मांग लिया तो मोदी के जेब में इसरो की फोटो मुँह बंद कर देगी

mars first photo to modi

mars first photo to modi


झल्ले दी झल्लियां गल्लाँ

इसरो चीयर लीडर

ओये झल्लेया मुबारकां ओये दुनिया ने अब हसाड़ी वैज्ञानिक काबिलियत का लोहा मान लिया है आये दिन हमें जीरो वाला देश जीरो वाला देश कहते नहीं थकते थे अब देखो हमने पहली बार बढे सस्ते में ही मंगल गृह की कक्षा में प्रवेश कर लिया|और आज अपने सोणे पी एम नरेंद्र भाई दामोदर मोदी को मंगल गृह के गृह की पहली तस्वीर भी दे दी

ओबामा ने मंगलगृह की सफलता का सबूत मांग लिया तो मोदी के जेब में इसरो की फोटो मुँह बंद कर देगी

ओबामा ने मंगलगृह की सफलता का सबूत मांग लिया तो मोदी के जेब में इसरो की फोटो मुँह बंद कर देगी


झल्ला

|ये आप जी ने बढ़ा चंगा किया क्योंकि ओबामा ने मंगलगृह की सफलता का सबूत मांग लिया तो मोदी के जेब में इसरो की फोटो वहां सबका मुँह बंद कर देगी ||ये आप जी ने वाकई बढ़ा ही चंगा कर दिया क्योंकि मंजीत भाई मोदी आज अमेरिका जा रहे हैं वहां यह फोटो बढे काम आयेगी

Mars First Photo

Mars First Photo

पी एम ने PSLV-C23 सफल व्यवसायिक उड़ान की बधाई दी,सार्क देशों के कल्याणार्थ उपग्रह बनाने को भी कहा

नरेंद्र मोदी आज श्रीहरिकोटा से पीएसएलवी-सी23 की सफल व्यवसायिक उड़ान के गवाह बने |उन्होंने पड़ोसी देशों के कल्याण के लिए “एक कृत्रिम उपग्रह बनाने को भी कहा |अंग्रेजी तथा हिंदी दोनों भाषाओं के मिले-जुले भाषण में पी एम श्री मोदी ने भारतीय वैज्ञानिकों की कई पीढ़ियों की तपस्या का जिक्र किया और कहा कि उपनिषद से उपग्रह तक की यात्रा एक लंबी यात्रा रही है। उन्होंने कहा कि भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन के दौरे के समय वे वैज्ञानिकों की चार पीढ़ियों से मिले हैं।नरेंद्र मोदी २९ जून को ही श्री हरिकोटा पहुँच गए थे
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने श्रीहरिकोटा से पोलर सेटेलाईट लॉंच वेहिकल- पीएसएलवी-सी23 का सफल प्रक्षेपण देखा।
मिशन कंट्रोल सेंटर से अपने बधाई संदेश में उन्होंने अंतरिक्ष वैज्ञानिकों को अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में हासिल महारथ को सामाजिक परिवर्तन, आर्थिक विकास तथा संसाधनों के संरक्षण के लिए पूरी तरह से उपयोग करने को भी कहा | भारत को भारत की वसुधैव कुटुम्बकं की प्राचीन मान्यताओं का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत का अंतरिक्ष कार्यक्रम मानवता की सेवा के उद्देश्य से प्रेरित है, न कि शक्तिशाली बनने के उद्देश्य से। उन्होंने कहा कि विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भारत की एक उज्ज्वल परम्परा है, जिसमें अंतरिक्ष विज्ञान भी शामिल है। श्री मोदी ने कहा कि भास्कराचार्य तथा आर्यभट्ट जैसे प्राचीन भारत के महान वैज्ञानिक कई पीढ़ियों को प्रेरित कर रहे है। उन्होंने कहा कि भारत को अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के लाभ विकासशील देशों, विशेषकर पड़ोसी देशों के साथ सांझा करना चाहिएं। उन्होंने अंतरिक्ष वैज्ञानिकों का आह्वान किया कि वे सार्क देशों के लिए कृत्रिम उपग्रह तैयार करें, जिसकी सेवाएं अपने पड़ोसी देशों को भारत की ओर से एक उपहार के तौर पर दिया जाए।
श्री मोदी ने कहा कि पूरी तरह से स्वदेशी भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम अंतर्राष्ट्रीय दबाव तथा बाधाओं के बीच विकसित हुआ है। चंद्रमा मिशन पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी के सोच से प्रेरित था। उन्होंने कहा कि मंगल मिशन तथा उपग्रह आधारित नौ-वहन इन दिनों चल रही परियोजनाओं में से एक हैं।
आम आदमी के लिए अंतरिक्ष तकनीकी के लाभ का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि इससे आधुनिक संचार-व्यवस्था संभव है, सुदूर गांवों में बच्चों को स्तरीय शिक्षा प्रदान करके उन्हें सशक्त बनाया जा सकता है तथा टेलीमैडिसन द्वारा बेहतरीन स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकती है। डिजीटल भारत के हमारे स्वप्न को साकार करने में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है|

PSLV-C23

PSLV-C23


प्रधानमंत्री ने कहा कि अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में निरंतर विकास हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने अत्याधुनिक उपग्रहों के विकास तथा सेटेलाईट फुटप्रिन्ट बढ़ाने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि भारत के पास विश्व के लिए सर्विस प्रोवाईडर प्रक्षेपित करने की क्षमता है और इस उद्देश्य की ओर काम करना होगा।
प्रधानमंत्री ने भारत के युवा वर्ग को अंतरिक्ष कार्यक्रमों से जोड़ने का आह्वान किया। श्री मोदी ने कहा कि श्रीहरिकोटा में युवा वैज्ञानिकों को मिलकर तथा उनके काम एवं उपलब्धियों को देखकर वे बेहद खुश हुए। उन्होंने डॉ. के. राधाकृष्णन के नेतृत्व की सराहना की और कहा कि भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के लिए उनकी सोच का पैमाना, उसकी गति तथा कौशल इत्यादि बेहतरीन है। कुछ ही महीनों में मंगल ग्रह की कक्षा में हमारे वायुयान को स्थापित करने में जुटे अंतरिक्ष वैज्ञानिकों को उन्होंने अपनी शुभकामनाएं दी।
इस अवसर पर आंध्र प्रदेश के राज्यपाल श्री नरसिम्हन, आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री चंद्रबाबू नायडू, संसदीय मामलों के केंद्रीय मंत्री श्री वैंकेय्या नायडू, प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्यमंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह, अंतरिक्ष-सचिव डॉ. राधाकृष्णन, तथा प्रो. यू.आर. राव और डॉ. कस्तूरीरंगन जैसे वरिष्ठ वैज्ञानिक उपस्थित थे।
गौरतलब है के अंतरिक्ष यान ने सोमवार को सुबह 9:52 बजे उड़ान भरी। इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी अंतरिक्ष केंद्र श्रीहरिकोटा में मौजूद थे।
पीएसएलवी की यह 27वीं उड़ान है। पीएसएलवी ने अपने साथ सी23 जर्मनी, फ्रांस, सिंगापुर, कनाडा के उपग्रह लेकर उड़ान भरी।
पीएसएलवी-सी23 का प्रक्षेपण देखने के लिए मोदी रविवार शाम को ही श्रीहरिकोटा पहुंच चुके थे। एनडीए के सरकार के सत्ता में आने के बाद यह इसरो का पहला अंतरिक्ष अभियान है।
The Prime Minister, Shri Narendra Modi , at Sriharikota, in Andhra Pradesh on June 29, 2014.

The Prime Minister, Shri Narendra Modi , at Sriharikota, in Andhra Pradesh on June 29, 2014.


नरेंद्र मोदी ने बताया कि देश के अंतरिक्ष कार्यक्रम में एक ऐसा समय भी आया था, जब रॉकेट साइकिल पर ले जाए थे और आज एक लंबी दूरी तय करते हुए हम अंतरिक्ष कार्यक्रम के क्षेत्र में दुनिया के शीर्ष छह देशों की कतार में शामिल हो चुके हैं।वेदों की ऋचाओं में वर्णित विज्ञानं को आज के वैज्ञानिकों ने साकार करके उपग्रह तक पहुंचा दिया है |
फोटो कैप्शन [१]The Prime Minister, Shri Narendra Modi addressing after the successful launch of PSLV – C 23, at Sriharikota, in Andhra Pradesh on June 30, 2014.
The ISRO Chairman, Dr. K Radhakrishnan is also seen.

अंतरि‍क्ष वि‍भाग के सचि‍व डा. के राधाकृष्‍णन की सेवानिवृति अब वर्ष के आखिरी दिन होगी

अंतरि‍क्ष वि‍भाग के सचि‍व डा. के राधाकृष्‍णन की सेवानिवृति अब वर्ष के आखिरी दिन होगी
अंतरि‍क्ष वि‍भाग के सचि‍व डा. के राधाकृष्‍णन के कार्यकाल में चार माह की वृद्धि‍ की गई है अब डा. राधाकृष्‍णन की सेवानिवृति इस वर्ष के अंतिम दिवस को होगी
मंत्रि‍मंडल की नि‍युक्‍ति‍समि‍ति‍ने अंतरि‍क्ष वि‍भाग के सचि‍व और अंतरि‍क्ष आयोग के अध्‍यक्ष डा. के राधाकृष्‍णन के कार्यकाल को 29-08-2014 से 31-12-2014 तक बढाने की स्वीकृति‍प्रदान की है। यह फैसला कार्य की आवश्यकता और जनहि‍त को देखते हुए लि‍या गया है।
अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी+ उपयोग + अंतरिक्ष कार्यक्रम प्रबंधन में 40 वर्षों से भी अधिक विस्तृत उनका कैरियर उपलब्धियों से सुसज्जित है।
डॉ. के. राधाकृष्णन 29 अगस्त 1949 को इरिन्जालाकुडा, केरल में पैदा हुए। उन्होंने 1970 में केरल विश्वविद्यालय से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में स्नातक परीक्षा उत्तीर्ण की, आईआईएम बेंगलूर में पीजीडीएम पूरा किया | और आईआईटी, खड़गपुर से अपने “भारतीय भू-प्रेक्षण प्रणाली के लिए कुछ सामरिक नीतियाँ” शीर्षक वाले शोध प्रबंध पर डॉक्टरेट की उपाधि हासिल की
सौजन्य ब्यूरो&इसरो

Dr Manmohan Singh Commended ISRO For Successfully Launching GSLV D5 Carrying GSAT-14 Payload

PM congratulates ISRO on the successful launch of GSLV D5
Prime Minister, Dr. Manmohan Singh, has congratulated the scientists and engineers of Indian Space Research Organization (ISRO) for the successful launch of GSLV D5 carrying GSAT-14 payload.
Commending ISRO for the successful launch, he described it as yet another important step that the country has taken in the area of science and technology.
The Geosynchronous Satellite Launch Vehicle [GSLV] D5 was launched from the Satish Dhawan Space Centre in Sriharikota today.
It includes an indigenous cryogenic rocket stage.Sriharikota: