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Tag: Supreme Court

1947 से शुरू हुए अवैद्ध कब्जे रोके जाते तो शायद अरावली कांड नही होता

झल्लीगल्लां
पर्यावरणविद
अरावली में अवैद्ध निर्माणओए झल्लेया! ये क्या हो रहा है?ओए ये अतिक्रमणकारियों ने मुल्क के पर्यावरण को पलीता लगाने की ठान ली है।हुकूमतें भी इन्हें रोकने में कोई रुचि नही दिखा रही।अब देख राजधानी से सटे फरीदाबाद के अरावली के जंगलों को काट करके अवैद्ध निर्माणों को समय रहते रोका नही गया जिसके फलस्वरूप अब 10000 अवैद्ध घर बस चुके हैं।सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के पालन में भी फरीदाबाद निगम +हरियाणा सरकार का ढीला ढाला रवैय्या दिख रहा है।अवैद्ध खनन से त्रस्त इस वन छेत्र में अवैद्ध घरों के निर्माण में बैंक भी कर्ज देने में उदारता का परिचय देते रहते है।ओए ऐसे में कैसे मिलेगी हमे ऑक्सीजन +बचेगा हसाडा पर्यावरण और ओज़ोन लेयर ???
झल्ला
झल्लाभापा जी!ये अवैद्ध कब्जे तो 1947 से ही शुरू हो गए थे।जो बेचारे मुस्लिम भाई पाकिस्तान गए उनकी प्रॉपर्टी पर नाजायज कब्जे हुए फिर जो अभागे पाकिस्तान से हिन्दू आये उनके नाम पर लूट मचाई गई।इस अवैद्ध कब्जे के व्यवसाय को समाप्त करने के लिए 1947 से शुरुआत हो तो शायद यह काला गोरखधंदा बन्द हो सकेगा

वरिष्ठ पत्रकार विनोद दुआ के खिलाफ राजद्रोह के आरोप में दर्ज प्राथमिकी रद्द

(नयी दिल्ली,3 जून) विनोद दुआ के खिलाफ राजद्रोह के आरोप में दर्ज प्राथमिकी रद्द
आरोप था कि दुआ ने अपने यूट्यूब कार्यक्रम में प्रधानमंत्री पर कुछ आरोप लगाए थे श्री दुआ आजकल अस्वस्थ हैं और पत्नी सहित अस्पताल में इलाज करवा रहे हैं
।उच्चतम न्यायालय ने पत्रकार विनोद दुआ के यूट्यूब कार्यक्रम को लेकर उनके खिलाफ राजद्रोह के आरोप में हिमाचल प्रदेश के एक स्थानीय भाजपा नेता द्वारा दर्ज करायी गई प्राथमिकी बृहस्पतिवार को रद्द करते हुए कहा कि 1962 का फैसला प्रत्येक पत्रकार को सुरक्षा का अधिकार देता है।
न्यायमूर्ति यू यू ललित और न्यायमूर्ति विनीत सरन की पीठ ने हालांकि दुआ का वह अनुरोध अस्वीकार कर दिया कि जिसमें उन्होंने कहा था कि जब तक एक समिति अनुमति नहीं दे देती, तब तक पत्रकारिता का 10 साल से अधिक का अनुभव रखने वाले किसी मीडिया कर्मी के खिलाफ कोई प्राथमिकी दर्ज नहीं की जाए।
पीठ ने कहा कि यह कार्यपालिका के अधिकार क्षेत्र में हस्तक्षेप होगा।
पीठ ने पिछले साल छह अक्टूबर को दुआ का पक्ष सुनने के बाद याचिका पर आदेश को सुरक्षित रख दिया था।

O2 अलॉटमेंट को गठित टास्क फोर्स चरमराई व्यवस्था पर ही निर्भर रहेगी ?

झल्लीगल्लां
रिटायर्डन्यायाधीश
Judiciaryओए झल्लेया! आखिरकार अदालतों ने ही लोक तन्त्र की रक्षा करनी है ।कोरोना महामारी में तीनों स्तम्भ बेशक धाराशाई हो गए लेकिन सुप्रीमकोर्ट ने ऑक्सीजन अलॉटमेंट के लिए 10 डॉक्टरों वाली 12 सदस्यीय स्पेशल टास्क फोर्स बना कर सबको राहत दी है।ओए हुण ऑक्सीजन के लिए हायतौबा बन्द हो जाणी है
झल्ला
झल्लाभापा जी!ये तो सराहनीय है लेकिन टास्क फोर्स निर्भर तो उपलब्ध चरमराई व्यवस्था पर ही रहेगी

सुप्रीमकोर्ट जी!निरन्तर महंगी हो रही न्याय व्यवस्था को मुफ्त कराने को भी प्रयास जरूरी

झल्लीगल्लां
चिन्तितनागरिक
Judiciaryओए झल्लेया!ये क्या हो रहा है? ओए मुल्क में नोटों के बंडल लेकर घूम रहे कोरोना मरीजों को पर्याप्त उपचार नही मिल रहा प्राइवेट अस्पतालों में 250 ₹ में भी टीका नही लग रहा और माननीय सुप्रीम कोर्ट फ्री में सभी को टीके लगवाने का फरमान जारी कर रही है।
झल्ला
झल्लाभापा जी!बेशक जान बचाने को सभी विकल्प खुले रहने चाहिए लेकिन कहा गया है कि “चैरिटी बिगिन्स एट होम” सो माननीय सर्वोच्च न्यायालय जी को स्वत संज्ञान में लेकर दिनों दिन महंगी होती जा रही न्याय व्यवस्था को मुफ्त कराने को भी प्रयास करने चाहिएं।

SAD Demands Probe into Ambulance use by Mukhtar Ansari

(Chd,Pb) SAD Demands Probe into Ambulance use by Mukhtar Ansari
The Shiromani Akali Dal on Monday sought a probe into the use of a private ambulance by Punjab police for ferrying gangster-turned-politician Mukhtar Ansari from jail to a court last week.
This ambulance has now been found abandoned near Rupnagar ,
Shiromani Akai Dal (SAD) leader Daljit Singh Cheema
claimed all this has lent credence to the assertions of the Uttar Pradesh police that the Punjab government was in cahoots with Ansari and that there were orders from the very top to facilitate him in every manner possible. There cannot be any other answer as to why the Punjab Police allowed Ansari the use of a private ambulance which had been registered on the basis of fake documents. This could be part of a bigger conspiracy which needs to the unearthed by a free and fair probe by a central agency, Cheema said in a statement here.
The Supreme Court had recently directed the Punjab government to hand over the custody of Ansari to the Uttar Pradesh Police within two weeks after which a UP police team left for Punjab on Monday.

पुलिसिये ने हड़काया तो एमपी में जंगलराज दिखा,काश!मंत्री जज को हड़काये …

झल्लीगल्लां
न्यायविद
ओएJudiciary झल्लेया!ये मध्यप्रदेश में क्या जंगलराज चल रहा है?हत्यारे नेता को दो वर्षों मे भी गिरफ्तार नही किया जा सका । भृष्ट+हत्यारोपियों को भी शासन के इस प्रकार के संरक्षण से तो वहां जंगल राज ही कहा जायेगा।
झल्ला
Jhallaaभापा जी! कांग्रेसी नेता को बसपाई ने मार डाला। पुलिसिये ने जज को हड़का डाला तो माननीय सुप्रीम कोर्ट को मध्यप्रदेश में जंगलराज दिखने लग गया।यहां 7 दशकों से पँजांब राज्य और केंद्र में अपने हक के कंपनसेशन/रिहैबिलिटेशन क्लेम के लिए भटक रहे हैं कहीं कोई सुनवाई नही हो रही।ऊपर वाले से दुआ है कि पँजांब या केंद्र का कोई मंत्री किसी जज को हड़का दे तो शायद सम्माननीय सुप्रीम कोर्ट को लोक तन्त्र की परिभाषा बदलने की जरूरत महसूस होने लगे

आन्दोलनजीविओं से पनप रहे परजीवियों के लिए प्रथक कोपभवन जरूरी

न्यायविद
Judiciaryओएझल्लेया!अब तो खुश हो जा।ओए सर्वोच्च न्यायालय ने दोबारा सुना दिया है कि कभी भी और कहीं भी कैसे भी प्रदर्शन का अधिकार नही मिल सकता।ठीक है असहमति का हक सबको है लेकिन यारा ये तो आन्दोलनजीवी शाहीन बाग के बाद अब सिंधुऔर गाजीपुर बोर्डरों पर परजीवियों को जन्म देने में जुट गए हैं।टॉप कोर्ट के तमाचे से शायद आंदोलन के नाम पर सार्वजनिक स्थलों पर कब्जा करने और अराजकता फैलाने वालों को सद्बुद्धि मिलेगी
झल्ला

झल्ला

झल्ला

भापा जी! अभी तक आन्दोलनजीवियों से पनप रहे परजीवियों के नाश को कोई वैक्सीन नही बनी है इसीलिए रामायणकालीन कैकई को याद करके आन्दोलनजीविओं के लिए प्रथक कोपभवनों की व्यवस्था करवा दो

सुप्रीम कोर्ट की तरफ ट्रेक्टर मुड़ गए तो भैंस तो पानी मे जाए ही जाए

#पीड़ितनागरिक
ओए झल्लेया!ये किसानों के नाम पर दिल्ली को क्या गधीघेड़ में डाल रखा है।ओए इनके नेता गुरनाम सिंह चढूनी और शिव कुमार कक्का के उजागर होते आपसी स्वार्थों की तरफ से ध्यान बांटने के लिए 26 जनवरी को दिल्ली में ट्रेक्टरमार्च निकालने की धमकी दी जा रही है और सर्वोच्च न्यायालय इसे रोकने के बजाय याचकों को दिल्ली पुलिस के पास भेज रही हैवोही दिल्ली पुलिस को आंदोलनकारियों को कोरोना प्रोटोकॉल का पालन तक नही करा पाई।
#झल्ला
भापा जी!अभी तो निशाना रिपब्लिकडे परेड है अगर खुदा नाखास्ता कल को किसी ने उंगली करके सुप्रीम कोर्ट की तरफ ट्रेक्टर मौड़ दिए तो भैंस तो पानी मे जाए ही जाए

शीर्ष अदालत ने फाइलें दबाने वालों पर ओनली नाराजगी व्यक्त करके ही इतिश्री कर ली

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ओए झल्लेया! अब तो #सुप्रीमकोर्ट ने भी फाइलें दबा कर रखने वाले अधिकारियों को लताड़ दिया ।ओए ये करप्शन का दाग कब मिटेगा?कब हमे न्याय मिलेगा??
#झल्ला
भापा जी !शीर्ष अदालत ने फाइलें दबाने वालों पर ओनली नाराजगी व्यक्त करके ही इतिश्री कर ली
आप जी की ये पीड़ा जायज़ है।लेकिन शीर्ष अदालत ने भी इन भृष्टाचारियों पर ओनली नाराजगी व्यक्त करके इतिश्री कर ली।काश विभागों/मंत्रालयों/राज्यों से ब्यौरा मांग कर न्याय का पहिया आगे खिसका दिया होता

SC Refuses to Quash FIRs Against Amish Devgan:Derogatory Remarks ;Sufi Saint

(New Delhi)Derogatory Remark Against Sufi Saint:SC Refuses to Quash FIRs Against Amish Devgan
The Supreme Court on Monday refused to quash FIRs lodged in different states against TV news anchor Amish Devgan for his alleged defamatory remark against Sufi saint Khwaja Moinuddin Chisti during a show on June 15. The top court, however, said Devgan will get protection from any coercive action if he continues to cooperate with the probe.
A bench of justices AM Khanwilkar and Sanjiv Khanna also transferred all FIRs lodged in different states including Maharashtra, Uttar Pradesh and Telangana against Devgan to Ajmer in Rajasthan.
Earlier, the top court had granted protection to Devgan from any coercive action in connection with the FIRs.
After that, the apex court has been extending the protection from any coercive action to the journalist.