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तत्ते तवे पर ढुई रखने वाले शाहीन बाग में ही थे वोह कब का उजड़ गया

#आमदुखीदैनिकयात्री
ओए झल्लेया! ये क्या हो रहा है ? हमे सर्वोच्च न्यायालय से राहत की उम्मीद थी लेकिन कोर्ट का हथौड़ा दिल्ली मार्ग बंधकों पर नही चला उल्टे अनेको किंतुपरंतु के साथ हमारी समस्या भम्भडभूसे में वड़ गई
#झल्ला
भोले भापा जी तत्ते तवे पर ढुई रखने वाले शाहीन बाग में ही थे वोह कब का उजड़ गया
तत्ते तवे पर ढुई रखने वाले शाहीन बाग में ही थे वोह बाग तो कब का उजड़ गया ।फिलहाल खेतमालिक हाथों में हल लिए हुए जमे हैं

सुप्रीमकोर्ट जी!आम आदमी के दर्द की चीखें हुक्मरानों के कान से कोसों दूर

#अनुभवीवकील
ओए झल्लेया!
ये क्या हो रहा है?
ओए कोरोनावधि में भी सरकार ब्याज पर ब्याज वसूल कर आम आदमी की कमर तोड़ने पर तुली हुई है।कहने को तो सरकार इस चक्रवृद्धि ब्याज को माफ कर रही है लेकिन एक माह से ज्यादा हो गया मगर अभी तक फ़ाइल खिसकाने वाले सरकारी पहिये जाम हुए पड़े है।ओए माननीय #सुप्रीमकोर्ट ने भी आम आदमी की दिवाली को ना बिगाड़ने के आदेश दे दिए है
#झल्ला
भापा जी !सुप्रीमकोर्ट जी!आम आदमी के दर्द की चीखें हुक्मरानों के कान से कोसों दूर हैं
।अब देखों सात दशकों से 1947 के पीड़ित अपने हक के #कंपनसेशनक्लेम के लिए दर दर भटक रहे हैं लेकिन संसद तो क्या माननीय #सुप्रीमकोर्ट भी स्वतः संज्ञान नही ले रही

छात्रों के रूम रेंट माफ़ी को लेकर ‘युवा हल्ला बोल’ पहुँचा सुप्रीम कोर्ट

छात्रों के रूम रेंट माफ़ी को लेकर ‘युवा हल्ला बोल’ पहुँचा सुप्रीम कोर्ट
युवा हल्ला बोल’ लीगल टीम की शोभा प्रभाकर ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में दायर पेटिशन के माध्यम से मांग की गई है कि केंद्र सरकार सभी राज्यों और जिला प्रशासनों को निर्देश दे कि लॉकडाउन की मार झेल रहे छात्रों का किराया माफ हो। साथ ही, केंद्र सरकार एक रेंट पूल फंड बनाये जिसके जरिये उन मकानमालिकों की मदद की जा सके जो गुज़ारा किराए से ही चलता है।
अपने गांव घर से दूर रहकर पढ़ाई कर रहें छात्रों के लॉकडाउन तक रूम किराया माफ़ी का मुद्दा ‘युवा हल्ला बोल’ ने अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचाया है। ‘युवा हल्ला बोल’ लगातार बेरोज़गार छात्रों के किराया माफ़ी मुहिम के ज़रिए केंद्र और राज्य सरकारों का ध्यान आकर्षित कर रहा है।
‘युवा हल्ला बोल’ के द्वारा चलाया गया #NoRentForStudents दो दिन ट्वीटर पर ट्रेंड किया जिसमें 25000 से ज्यादा ट्वीट भी हुए। इसके बाद संगठन ने चेंज डॉट ऑर्ग पर एक ऑनलाइन पेटिशन के जरिये हस्ताक्षर अभियान चलाया जिसमें हज़ारों छात्रों ने अपना समर्थन किया है। छात्र और बेरोज़गार युवाओं समेत कई कलाकार, पत्रकार, साहित्यकार और राजनीतिक कार्यकर्ताओं ने भी ‘युवा हल्ला बोल’ की मुहिम का साथ दिया।
आंदोलन का नेतृत्व कर रहे अनुपम ने कहा कि देश एक महामारी से गुज़र रहा है और सभी कारोबार बंद पड़े है ऐसे में मध्यम और निम्न मध्यम वर्ग से आने वाले छात्रों के लिए यह दोहरी मार है। पहले तो उन्हें खुद को घर से दूर रहकर खुद को सुरक्षित रख अपने खाने-पीने का इंतज़ाम करना है तो वहीं दूसरी तरफ़ मकान मालिकों के किराए को लेकर लगातार बढ़ रहा दवाब।

उम्मीदवारों के आपराधिक ब्यौरे सियासी दलों की वेबसाइट पर हों:सुप्रीम कोर्ट

(नई दिल्ली)उम्मीदवारों के आपराधिक ब्यौरे सियासी दलों की वेबसाइट पर हों:सुप्रीम कोर्ट
उच्चतम न्यायालय ने बृहस्पतिवार को सभी सियासी दलों को निर्देश दिया कि वे चुनाव लड़ रहे अपने उम्मीदवारों के खिलाफ लंबित आपराधिक मामलों का ब्यौरा अपनी वेबसाइट पर अपलोड करें ।
अब बताना होगा कि पार्टी ने ऐसे उम्मीदवार को ही क्यों चुनें जिनके खिलाफ आपराधिक मामले लंबित हैं।
न्यायालय ने एक अवमानना याचिका पर यह आदेश पारित किया। उस याचिका में राजनीति के अपराधीकरण का मुद्दा उठाते हुए दावा किया गया था कि सितंबर 2018 में आए शीर्ष अदालत के निर्देश का पालन नहीं किया जा रहा है जिसमें सियासी दलों से अपने उम्मीदवारों के आपराधिक रिकॉर्ड का खुलासा करने को कहा गया था।
न्यायमूर्ति रोहिन्टन फली नरीमन की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि सियासी दल उम्मीदवारों के खिलाफ लंबित आपराधिक मामलों की विस्तृत जानकारी फेसबुक और ट्विटर जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, क्षेत्रीय भाषा के एक अखबार और एक राष्ट्रीय अखबार में प्रकाशित करवाएं।
न्यायालय ने कहा कि सियासी दलों को ऐसे उम्मीदवार को चुनने के 72 घंटे के भीतर चुनाव आयोग को अनुपालन रिपोर्ट देनी होगी जिसके खिलाफ आपराधिक मामले लंबित हैं। साथ ही न्यायालय ने यह भी कहा कि जिन उम्मीदवारों के खिलाफ आपराधिक मामले लंबित हैं उनके बारे में अगर राजनीतिक दल न्यायालय की व्यवस्था का पालन करने में असफल रहते हैं तो चुनाव आयोग इसे शीर्ष अदालत के संज्ञान में लाए।
उच्चतम न्यायालय ने कहा कि प्रतीत होता है कि बीते चार आम चुनाव से राजनीति में अपराधीकरण तेजी से बढ़ा है।

उच्चतम न्यायालय ने जामिया हिंसा पर कड़ा रुख दिखाया

(नई दिल्ली)उच्चतम न्यायालय ने जामिया हिंसा पर कड़ा रुख दिखाया
#दिल्लीउच्चन्यायालय ने #जामिया विश्वविद्यालय में छात्रों पर पुलिस कार्रवाई के विरोध में दाखिल याचिका को सुनवाई के लिए तुरंत सूचीबद्ध करने से इनकार किया।
वकीलों ने #उच्चतमन्यायालय से भी संशोधित नागरिकता कानून के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर हमले की घटनाओं पर संज्ञान लेने का अनुरोध किया।
लेकिन उच्चतम न्यायालय ने छात्रों के प्रदर्शन के दौरान हुए उपद्रव और सार्वजनिक संपत्तियों को हुए नुकसान पर सख्त रुख अपनाया
#नागरिकताकानून पर हो रही हिंसा पर संज्ञान लेने के वकीलों के कथन पर उच्चतम न्यायालय ने कहा, हम पर इस तरह से दबाव नहीं बनाया जा सकता।
उच्चतम न्यायालय ने संशोधित कानून के खिलाफ हिंसक प्रदर्शनों पर कहा
हम बस इतना चाहते हैं कि उपद्रव बंद हो जाने चाहिए

मौजूदा सरकार में ‘‘संवैधानिक मूल्य सुरक्षित नहीं हैं:डॉ मनमोहन सिंह

(नयी दिल्ली) मौजूदा सरकार में ‘‘संवैधानिक मूल्य सुरक्षित नहीं हैं:डॉ मनमोहन सिंह
पूर्व प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह ने मंगलवार को कहा कि मौजूदा सरकार में ‘‘संवैधानिक मूल्य सुरक्षित नहीं हैं।’’ सिंह ने संसद परिसर में संवाददाताओं से कहा, ‘‘उच्चतम न्यायालय ने जो भी फैसला दिया है उसका सम्मान होना चाहिए।’’ नरेंद्र मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए उन्होंने यह भी कहा, ‘‘ जिस तरह से केंद्र सरकार ने महाराष्ट्र में कदम उठाया है उससे साफ है कि मौजूदा शासन के हाथों में संवैधानिक मूल्य सुरक्षित नहीं हैं।’’ उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को निर्देश दिया कि महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस बुधवार को विधानसभा में अपना बहुमत सिद्ध करें।
न्यायमूर्ति एन वी रमण, न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति संजीव खन्ना की तीन सदस्यीय खंडपीठ ने कहा कि विधायकों की खरीद फरोख्त से बचने के लिए यह जरूरी है।
फ़ाइल फोटो

परालीप्रदूषण की रोकथाम में निष्क्रिय पँजांब सरकार पर कोर्ट की फटकार

(नई दिल्ली)परालीप्रदूषण की रोकथाम में निष्क्रिय पँजांब सरकार पर कोर्ट की फटकार
पराली जलाने पर प्रतिबंध लगाने के आदेशों के बावजूद इसे जलाने का सिलसिला बदस्तूर जारी रहने पर उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को पंजाब और हरियाणा को आड़े हाथ लिया। न्यायालय ने कहा कि वायु प्रदूषण की वजह से दिल्ली के लोगों को मरने के लिये नहीं छोड़ा जा सकता।
न्यायमूर्ति अरूण मिश्रा और न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता की पीठ ने पराली जलाने पर अंकुश लगाने में इन राज्यों के विफल रहने पर नाराजगी व्यक्त की और कहा, ‘‘क्या इसे बर्दाश्त किया जाना चाहिए? क्या यह आंतरिक युद्ध से कहीं ज्यादा बदतर नहीं है? बेहतर होगा कि आप इन सभी को विस्फोट से खत्म कर दें।’’
शीर्ष अदालत ने दिल्ली में जल और वायु प्रदूषण के मसले पर एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाने के लिये केन्द्र और राज्यों को भी फटकार लगायी।

दूसरों को नुक्सान पहुंचा कर इडब्लूएस को १०% आरक्षण नहीं :सुप्रीम कोर्ट

[नई दिल्ली]दूसरों को नुक्सान पहुंचा कर इडब्लूएस को १०% आरक्षण नहीं :सुप्रीम कोर्ट
उच्चतम न्यायालय ने कहा कि आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग को मिलने वाला 10 प्रतिशत आरक्षण शिक्षण सत्र 2019-20 में महाराष्ट्र के पीजी मेडिकल पाठ्यक्रमों में दाखिले पर लागू नहीं होगा
क्योंकि जब तक एमसीआई अतिरिक्त सीटों का सृजन नहीं करता, दूसरों को नुकसान पहुंचा कर 10 प्रतिशित ईडब्ल्यूएस आरक्षण नहीं दिया जा सकता
उच्चतम न्यायालय ने कहा कि ईडब्ल्यूएस के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण लागू होने से पहले ही महाराष्ट्र में पीजी मेडिकल पाठ्यक्रमों में दाखिले की प्रक्रिया शुरू हो गई थी

सुप्रीम कोर्ट ने अमेज़न+फ्लिपकार्ट को अधिक प्रदुषण वाले पटाखे बेचने से रोका

[नई दिल्ली] सुप्रीम कोर्ट ने अमेज़न+फ्लिपकार्ट को अधिक प्रदुषण वाले पटाखे बेचने से रोका
न्यायमूर्ति ए के सीकरी और न्यायमूर्ति अशोक भूषण की पीठ ने फ्लिपकार्ट और एमेजन जैसी ई-व्यापारिक वेबसाइटों को उन पटाखों की बिक्री करने से रोक दिया है जो निर्धारित सीमा से अधिक शोर करते हैं।
उच्चतम न्यायालय ने दीपावली, दूसरे त्यौहारों पर पटाखे फोड़ने के लिए रात आठ बजे से दस बजे की समय सीमा निर्धारित करते हुये देशभर में कम प्रदूषण उत्पन्न करने वाले हरित पटाखे बनाने की अनुमति दे दी।
अब प्रतिबंधित पटाखे फोड़े जाने की स्थिति में संबंधित इलाके के थाना प्रभारी जिम्मेदार होंगे।
शीर्ष अदालत ने पिछले साल नौ अक्टूबर को दीपावली से पहले पटाखों की बिक्री पर अस्थाई प्रतिबंध लगा दिया था परंतु बाद में न्यायालय ने कारोबारियों की याचिका खारिज करते हुये 19 अक्टूबर, 2017 के अपने आदेश में किसी प्रकार की ढील देने से इंकार कर दिया था

गुजाराभत्ता से तिरस्कृत महिला का सम्मान+गरिमा बची रहती है???

झल्ले दी झल्लियाँ गल्लां

एक कांग्रेसी चिंतक

औए झल्लेया मुबारकां! औए उच्च न्यायालय ने भी विवाहिता को पति की संपत्ति मानने से इंकार करते हुए व्यभिचार को अपराध की श्रेणी से बाहर कर दिया है |औए अब सोशल पोलिसिंग वाले किसी का उत्पीड़न नहीं कर सकेंगे|कोई मोब लिंचिंग नहीं होगी |

झल्ला

मेरे चतुर सुजान ! सुन लो खोल कर दोनों कान !सुप्रीम कोर्ट की सार्री बातें सिरमाथे लेकिन पतनाला कहाँ गिरेगा ये तो बताओ ?अरे बाबा माना के व्यभिचार प्राचीन अवशेष मात्र हैं लेकिन सामान्य तलाक +डिवोर्स+तीन तलाक देने वालों के हाथों त्यागी गई महिला को गुजाराभत्ता दिलवाने से क्या तिरस्कृत महिला का सम्मान + गरिमा बची रहती है?अरे बाबा ये भी तो बाबा डीएम के ज़माने के अवशेष हैं इसे भी हटवाओ