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Category: Jhalli Gallan

मोदी के पेटीएम् मार्का “मोदक”तो ग्राहकों के भी पेट में मरोड़ डालने लग गए

झल्ले दी झल्लियाँ गल्लां

क्रुद्ध व्यापारी

ओऐ झल्लेया!ये पेटीएम वालों ने क्या गोरखधंधा फैला रखा है ?इन्होंने पहले कहा के फ्री में डिजिधन मुहैय्या करवाएंगे लेकिन नोटबंदी के तुरंत बाद जब डिजिधन की जरुरत बढ़ गई तो अपने असली दांत दिखाने शुरू कर दिए| दुकानदारों के साथ ही ग्राहकों की जेब भी अनाप शनाप ढंग में काटी जाने लग गई है| ओऐ अनेकों वेबसाईटों पर पेटीएम् के खिलाफ शिकायतों की बाढ़ लग गई है| मोदी के ये पेटीएम् मार्कामोदक तो दुकान्दारोंके साथ ही ग्राहकों के भी पेट में मरोड़ डालने लग गए

झल्ला

ओ मेरे चालाक सेठ जी! |बाजार में अनेकों डिजिधन मुहैय्या करवाने वाले हैं लेकिन आपलोगों की भेड़ चाल का फायदा उठाते हुए पेटीएम् वालों ने अपनी समानांतर अर्थ व्यवस्था सफल कर ली और अपना बैंक स्थापित कर लिया है |अब जब आधा अरब रूपया उसकी जेब में चला गया तो सभी रोने लग गए |अरे भापा जी अब तो चिड़िया खेतों को चुग गई |शारदा+माल्या+कुबेर+गरुड़+सहारा जैसों का कुछ नहीं हुआ तो अब इस पे टी एम् का क्या बिगड़ेगा ?

डीडीऐ की नई उज्जवल हाउसिंग स्कीम का भविष्य क्या होगा?

झल्ले दी झल्लियाँ गल्लां

भाजपाई चेयर लीडर

ओऐ झल्लेया मुबारकां! हसाड़े कर्मठ वेंकैय्या नायडू साहिब के अथक प्रयासों से दिल्ली विकास प्राधिकरण[डीडीऐ]अगले महीने से १२ हजार नए मकानों की स्कीम ला रहा है|ओऐ! अब बिल्डर्स के शिकंजे से मुक्त होंगे और सब जरुरत मंदों को सस्ते मकान मिल जायेगे

झल्ला

ओ मेरे चतुर सेठ जी !खैर मुबारक जी! लेकिन १९७९ में भी ऐसी ही स्कीम निकाली गई थी जिसे २००६ में पूरा किया गया लेकिन उनकी फाइलें अभी भी डी डी ऐ के एकाउंट्स सेक्शन में फसी हैं |डी डी ऐ में किसी को यह नहीं पता के
कितने मकान दिए गए+
कितनों से पैसा वसूला गया +
कितनों को माफ़ किया गया
और लंबित पैसे वसूलने के लिए क्या कार्यवाही की गई
इसके पार्श्व में डीडीऐ की नई उज्जवल हाउसिंग स्कीम के भविष्य का क्या होगा?

मुलायम होंगे कठोर या खांसते रह जायेंगे?या फिर कोई दावँ नया दिखलायेंगे??

मुलायम होंगे कठोर या खांसते रह जायेंगे,या फिर कोई दावँ नया दिखलायेंगे
सपा की साइकिल का अब क्या होगा ,ट्यूब बचेगी या टायर तबाह होगा
पहिया कौन सा कौन लेकर भागेगा,सपा की साइकिल का अब क्या होगा
चैन स्नैच होगी या पैडल कोई टूटेगा ,हैंडल किसके हाथों अब टूटेगा
कॅरियर पर लदा माल किसका होगा ,चचा भतीजे में से कौन हैंडल लूटेगा ,
मुलायम होंगे कठोर या खांसते रह जायेंगे,या फिर कोई दावँ नया दिखलायेंगे
भुआ या भगवा के हाथों सत्ता गवाएंगे ,सपा की साइकिल का अब क्या होगा?

केजरीवाल ने मीडिया में बने रहने के लिए जंग साहिब से पहला पाठ पढ़ा

झल्ले दी झल्लियाँ गल्लां

कांग्रेसी चीयर लीडर

ओ ऐ झल्लेया! ये तो बेशर्मी की हद ही हो गई|पहले तो इन आपियों ने हसाड़े कर्मठ उपराज्यपाल नजीब जंग का जीना मुश्किल कर दिया और उन्हें कठपुतली बता कर इस्तीफा देने को मजबूर कर दिया |इस्तीफा देने के पश्चात् भी इनके कपिल मिश्रा+मनीष सिसोदिया आदि ने कठपुतली बताने में देर नहीं की और आज सुबह ही इनके सीएम् अरविन्द केजरीवाल घड़ियाली आंसू बहाने जंग साहिब के निवास पर जा पहुंचे |ओऐ जनता इन आपियों की असलियत समझ चुकी है अब इनके बहकावे में कोई नहीं आने वाला

झल्ला

ओ मेरे चतुर सुजान!जंग साहिब ने शिक्षा के छेत्र में लौटने की घोषणा की है इसीलिए केजरीवाल मीडिया में बने रहने के लिए जंग साहिब से पहला पाठ पढ़ने गए थे

राहुल ने सोशल मीडिया तकनीक सीखी,पुराने आरोपों को “कॉपी कट” करके गुजरात में “पेस्ट” किया

jamos

झल्ले दी झल्लियाँ गल्लां

कांग्रेसी चीयर लीडर

ओऐ झल्लेया! हसाड़े सोंने राहुल गाँधी जी ने नरेंद्र भाई दमोदर दास उर्फ़ मोदी की पोल उसके ही राज्य गुजरात में खोल कर रख दी |ओऐ ! अब तो साफ हो ही गया के मोदी नाम के इस प्राणी ने दागी सहारा और बिड़ला समूहों से काले धन की उगाही की थी |अब तो इसकी जांच होनी ही चाहिए |मोदी को अपने घर वापिस लौट जाना ही चाहिए |

झल्ला

मुबारकां!चतुर सुजान जी!आपके युवराज राहुल गाँधी ने सोशल मीडिया की तकनीक सीख ली|”आप” से निष्कासित प्रशांत भूषण के आरोपों को कॉपी कट करके गुजरात में पेस्ट कर दिया |

जेटली जी!व्यापारियों को डिजिटलाइज्ड करने के लिए नेट के सिग्नल तो दिलवाओ

जेटली जी!व्यापारियों को डिजिटलाइज्ड करने के लिए नेट के सिग्नल तो दिलवाओ

जेटली जी!व्यापारियों को डिजिटलाइज्ड करने के लिए नेट के सिग्नल तो दिलवाओ


झल्ले दी झल्लियाँ गल्लां

भाजपाई चेयर लीडर

ओऐ झल्लेया ! अब तो खुश होजा
ओऐ! हसाड़े छोटे व्यापारियों को डिजिटलाइज्ड करने के लिए वित्त मंत्री अरुण जेटली ने टैक्स में छूट की सौगात दे दी है |ओऐ! अब २० करोड़ के कारोबारियों को २% की छूट दी जाएगी

झल्ला

ओ मेरे चतुर सेठ जी !फाइनेंसियल ट्रांजेक्शन के लिए आवश्यक इन्टरनेट की सुविधा भी तो मुहैय्या करवाओ| ऍन सीआर में आमजन अपने मोबाइल से कत्थक डांस करते दिख जायेंगे | गुरुग्राम के बहुसितारा “मेदांता”अस्पताल की पार्किंग में भी पेटीएम के सिग्नल पाने के लिए कसरत करनी पड़ती है| इसीलिए जेटली जी!व्यापारियों को डिजिटलाइज्ड करने के लिए नेट के सिग्नल तो दिलवाओ

अखलेश जी! नोटबंदी का दौर है”कैशलेस”रिश्वत वसूली के लिए स्वाइप मशीन्स लगवा दो

traffic hazard In Meerut

झल्ले दी झल्लियाँ गल्लां

कांग्रेसी चीयर लीडर

ओ ये झल्लेया!ये क्या हो रहा है?ओ ये एक तरफ तो जनता नोटबंदी से परेशान हैं ऊपर से ये यूपी ट्रैफिक पुलिस वाले जहां देखो बीच सड़क में रोक कर वसूली करने लगते हैं |ई रिक्शा+टैक्सी +ट्रक ड्राइवर्स की तो जिंदगी ही बर्बाद हो रही है

झल्ला

ओ मेरे चतुर सुजान!मुद्दा तो ये करता है सभी को परेशान|इस परेशानी से बचने के लिए सपाई मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को समाजवादी रुख अपना कर ट्रैफिक पुलिस को रिश्वत वसूली के लिए भी स्वाइप मशीन्स [SoP] दे देनी चाहिए |इससे सौ +पच्चास देने और लेने वाले दोनों के लिए सुविधा हो जाएगी |
अर्थार्त चौराहों पर रिश्वत वसूली की”कैशलेस”सफलता के लिए स्वाइप मशीन्स लगवा दो

अरे सांसदों!नोटबंदी पर आडवाणी जी की आवाज को नक्काराए अवाम समझो

jamos

झल्ले दी झल्लियाँ गल्लां

कांग्रेसी चीयर लीडर

आये झल्लेया!ये संसद में पिछले तीन सप्ताह से क्या हो रहा है?अब तो भाजपा के ही लाल कृष्ण आडवाणी ने भी व्यथा व्यक्त कर दी है |आये वयोवृद्ध आडवाणी जी ने तो इस्तीफे देने का मन बना लिया है|आये अब तो मोदी सरकार को समझ आ जाना चाहिए के बकौल आडवाणी यदि लोक सभा का शीतकालीन सत्र नोटबंदी पर बिना चर्चा के ही समाप्त हो गया तो सारी संसद ही हार जाएगी

झल्ला

ओ मेरे चतुर सुजान!आडवाणी जी की आवाज को नक्काराए अवाम समझो |इसीलिए आखरी दिन में ही सही चर्चा कर ही लो|आडवाणी जी ने धीमे आवाज में ही सही लेकिन जनभावना व्यक्त की है इसीलिए झल्लेविचारानुसार आडवाणी जी में अगला राष्ट्रपति बनने के सभी गुण मौजूद हैं

मोदी रुपी”बिक्रम”बोला तो राहुल रुपी “बैताल” चला

jamos

झल्ले दी झल्लियाँ गल्लां

उत्तेजित कांग्रेसी

आये झल्लेया ये क्या हो रहा है?ये नरेंद्र भाई दामोदर दास नाम का झोलाछाप “मोदी” अपनी रैलियों में तो बोल ही रहा है ,अब पार्लियामेंट में भी बोलने की जिद्द कर रहा है |ये प्राणी संसद में बोलने को इतना उतावला क्यूँ है??

झल्ला

ओ मेरे चतुर सुजान जी!नरेंद्र भाई दामोदर दास मोदी ने बिक्रम और बैताल की कथा कण्ठस्थ की हुई है| मोदी रुपी बिक्रम बोला तो राहुल रुपी बैताल चला|४४ में से होजाएंगे ४ गायब |
लगता हे आपलोगों ने भी इस रहस्य को जानलिया है और इसीलिए देश नोटबंदी को झेल रहा है और आपलोग झोलाछाप मोदी को नोटबंदी पर भी संसद में बोलने नहीं दे रहे हो और खुद राहुल को “रिज्जू “के खिलाफ बोलने के लिए उकसा रहे हो

नोटबंदी से व्यक्तिगत परेशानी ?मुझे तो नही है

jamos[नई दिल्ली ]नोटबंदी से व्यक्तिगत परेशानी ?मुझे तो नही है नोटबंदी से आपको व्यक्तिगत रूप से क्या परेशानी है? जब से मोदी ने पत्रकारों को सलूट किया और थैंक्यू कहा है उसी समय से में नोटबंदी पर पनपे असन्तोष के कारणों को जानने में जुट गया |
आज सुबह से मैं मिलने वालों से पूछ रहा हूँ के भई आपको व्यक्तिगत रूप से नोटबंदी से क्या परेशानी है
लेकिन अभी तक व्यक्तिगत परेशानी से किसी ने भी रूबरू नहीं कराया ।सिक्योरिटी गार्ड+ड्राइवर+काम वाली बाई जैसे मेहनतकश लोगों से पूछा+कालेज जानेवाले स्टूडेंट्स से पूछा+ इन्हें पढ़ाने वालों से पूछा +सर्विस क्लास से लेकर पेंशनरों से पूछा लेकिन अभी तक सभी ने कहा के इस नोटबंदी से उन्हें व्यक्तिरूप से कोई परेशानी नहीं है। अब जब इन लोगों को कोई परेशानी नहीं है तो फिर ऐ टी एम् +और बैंकों के बाहर भीड़ क्यूँ दिखाई जा रही है |यह जानने के लिए नोएडा के तीन बैंक और उनके ऐटीएम् पर पहुंचा ।
वहां का नजारा कुछ अलग ही दिखाई दिया लंबी लाईन ,किसी को पता नहीं के
कौन जमा करवाने वाला है ?
कौन पैसे निकालने वाला है??
कौन पैसे बदलवाने वाला है ???
अर्थार्थ सभी एक ही लाईन में लगे हैं ।लाइन में लगे एक सज्जन ने बताया के उनके आगे लगे अनेकों लोग कई कई बार लाईनों में लग रहे हैं। इसका अभिप्राय आसानी से यह लगाया जा सकता है के ये सज्जण भी लाईने बनाते आ रहे हैं
वैसे लोगों की भीड़ देख कर यह स्वीकार किया जाना चाहिए के समस्या है लेकिन उसे अधिक फैलाया जा रहा है ।
इस सुनामी होती जा रही समस्या से निबटने के लिए बैंकों की भी भूमिका को सुधारा जाना आवश्यक हो गया है ।
बैंकों को अपने कस्टमर्स के लिए विशेष व्यवस्था +कार्यदिवस +कार्य अवधि घोषित की जानी चाहिए
ये सर्वविदित है के बैंकों द्वारा अपने
कस्टमर्स को टोकन बांटे जाने की प्रथा है । दुर्भाग्य वश ये व्यवस्था कहीं भी दिखाई नहीं दे रही
आवश्यक फॉर्म्स भरवाने की औपचारिकता लाइन में लगे लगे भी पूरी करवाई जा सकती है
वैसे मैं सच्च बताता हूँ के मुझे भी व्यक्तिगत रूप से कोई परेशानी नही हुई |सरकारी पेंशनर हूँ |जरुरत से ज्यादा और जरूरत से कम कभी सरकार ने दिया नहीं |इसीलिए १००० और ५०० रुपयों की बोरियां होने का तो सवाल ही पैदा नही होता थोड़ा बहुत क्रेडिट कार्ड्स और डेबिट कार्ड्स से काम चल जाता है| वरिष्ठ नागरिक की लाइन मे शामिल होकर मात्र दस मिनट्स में ५००० रुपये निकाल कर अपने घर भी पहुँच गया यकीन मानिये ये ५००० रुपये ५० रुपये के नोटों में मिले