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Category: Poetry

पलट के आऊंगी शाखों पे खुशबुएं लेकर,,,,,,मौसम ज़रा बदलने दे:फड़नवीज़

(मुंबई)पलट के आऊंगी शाखों पे खुशबुएं लेकर,,,,,,मौसम ज़रा बदलने दे:फड़नवीज़
महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की पत्नी अमृता फडणवीस ने मंगलवार को शायरी के जरिए कहा कि हम वापसी करेंगे।
पेशे से बैंकर अमृता ने ट्वीट किया, ‘‘पलट के आऊंगी शाखों पे खुशबुएं लेकर, खिजां की जद में हूं मौसम ज़रा बदलने दे!’’
उन्होंने महाराष्ट्र के लोगों का आभार जताया। अमृता ने कहा, ‘‘आपकी वहिनी के तौर पर यादगार पांच साल के लिए आप सबका शुक्रिया।’’
मराठी में भाई की पत्नी को ‘वहिनी’ कहा जाता है ।

Rapper Yo Yo Honey Singh Booked For Vulgar Lyrics

[Chd,Pb] Rapper Yo Yo Honey Singh Booked For Vulgar Lyrics
Pop singer Honey Singh and music producer Bhushan Kumar have been booked by Punjab police on the charge of using vulgar lyrics against women in their latest song.
The rapper has been booked following a complaint lodged by the Punjab State Women Commission which sought action against him for allegedly using vulgar lyrics against women in the song.
The case has been registered at the Mataur police station in Punjab’s Mohali district.

मुलायम होंगे कठोर या खांसते रह जायेंगे?या फिर कोई दावँ नया दिखलायेंगे??

मुलायम होंगे कठोर या खांसते रह जायेंगे,या फिर कोई दावँ नया दिखलायेंगे
सपा की साइकिल का अब क्या होगा ,ट्यूब बचेगी या टायर तबाह होगा
पहिया कौन सा कौन लेकर भागेगा,सपा की साइकिल का अब क्या होगा
चैन स्नैच होगी या पैडल कोई टूटेगा ,हैंडल किसके हाथों अब टूटेगा
कॅरियर पर लदा माल किसका होगा ,चचा भतीजे में से कौन हैंडल लूटेगा ,
मुलायम होंगे कठोर या खांसते रह जायेंगे,या फिर कोई दावँ नया दिखलायेंगे
भुआ या भगवा के हाथों सत्ता गवाएंगे ,सपा की साइकिल का अब क्या होगा?

लंकाओं का मोह त्यागो बाबा ,जाओ अपने गुजरात

काईयां गुज्जु मोदी उठाया अमेरिकन तीर और चीनी कमान
शानबान से करने चले यूपी में लखनऊ का भी सम्पूर्ण उद्धार
रावणों में मच गई खलबली,दिल्ली -यूपी तक उठी फ़रियाद
हमारी लंकाओं का मोह त्यागो बाबा जाओ अपने गुजरात

तन्हाईयों के शौकीन बीमार बन जाते हैं,डॉक्टर्स की भाषा में डिप्रेस्ड कहलाते हैं

तन्हाईयों के शौकीन बीमार बन जाते हैं
डॉक्टर्स की भाषा में डिप्रेस्ड कहलाते हैं
उम्मीद की एक किरण स्याह अँधेरे भगाती है
छोटी सी आरजू भी तमाम उम्र साथ निभाती है
साथ मिले जिसे ऎसी आरज़ूओं का
आंधियां उसका क्या बिगाड़ पाती है
परछाईयाँ सब एक सी ही दिखती है
दिल परखने पर फर्क नजर आता है
ये तो खेल है यारब तमाम उम्र भर का
उम्मीद पर “झल्ला”कायम कायनात है

रकीब का कबूलनामा,खुदारा ये कैसा तलाक है?

ज़िंदगी बेवफ़ा है बचपन से सुनते आये हैं
तुमने भी बेवफाई की,ताज्जुब की बात है
रिश्ते नही निभाए,दुनिया का दस्तूर है
रकीब का कबूलनामा,ये कैसा तलाक है?

आया समय बढ़ा बेढंगा नेता नाच रहा हो नंगा

आया समय बढ़ा बेढंगा
नेता नाच रहा हो नंगा
लोक कल्याण को लोग लगाते प्याऊ
आप वालों ने भीषण गर्मी में तुड़वाया
गुरुतेग बहादुर हैं हिन्द की चादर
चाँदनी चौक में महान स्मारक
वहीं पे जाकर हथौड़ा बजवाया
आया समय बढ़ा बेढंगा
नेता नाच रहा हो नंगा

पत्ते टूटे कोम्पल फूंटी प्रकृति नववधू सुहाई ,मनवा बजे ढोलक फाग मस्ती छाई

Happy Spring
बसंत ऋतू आई आई ,बूढ़ा मनवा भी ले अंगड़ाई
कामदेव का बाण चला ,उल्लास उमंग फिर भाई
पत्ते टूटे कोम्पल फूंटी प्रकृति नववधू सी सुहाई ,
मनवा बजे ढोलक डम डम फाग की मस्ती छाई
हर ठौर ऋतु सुहावनी छाई,सुगंध मादकता लाइ
कहाँ ढूँढू अपना सजन,कहाँ छुपा है मोरा मदन
पवन चले सनन सनन ,मनवा उड़े गगन गगन
कहाँ ढूँढू अपना सजन, कहाँ छुपा है मादक मदन

बहुत शुक्रिया बढ़ी मेहरबानी “कन्हैया” जी जेल छोड़ आये

बहुत शुक्रिया बढ़ी मेहरबानी कन्हैया जी जेल छोड़ आये
करूँ पेश तुमको नजराना कौन सा ये मेरी समझ ना आये
गालिगफ़्तौरों की इस दुनिया में एक और नायब आया है
जिसे नया अवतार बताने को मीडिया फिर से ललचाया है
करूँ पेश इनको नजराना कैसा ये मेरी समझ ना आये
जेएनयू में अपने आकर फिर से अलख पुरानी जगाये हैं
पार्टियों के थिंक टैंक फिर काम काज लगे जाएँ हैं
सोशल मीडिया के महारथी माउस में घुसे जाएँ हैं
करूँ पेश इनकों नजराना कैसा ये मेरी समझ ना आये
कोई कहे भगत सिंह तो कोई कहे कन्हाई
कृष्ण ,कन्हाई बनाने को उनकी “मीडिया”ललचाई
करूँ पेश इनकों नजराना कैसा ये मेरी समझ में ना आये
कहते हैं युग हैं नरेंद्र मोदी के नाम ,सो सही राग अलापे हो
अच्छा है केजरीवाल की शिक्षा से अपने को सजाये हो
जेल की थोड़ी सी शिक्षा से ही सुधरे सुधरे नजर आये हो
करे पेश तुमको नजराना कौनसा “झल्ली” समझ में ना आये

क्या हुआ गर राज दफन हैं फाइलों में,नेता जी का झंडा आज भी मुल्क में झूलता है

फुलगेंदवा अब करेजवा में चोट नहीं करता ।
हर लाइन पे इक कौम की बस वोट चाहिए॥
दलित के नाम पर रोटियां तो रोज सिकती हैं।
इनके दर्द से सारा मुल्क आज भी रोता है॥
मैंने कब कहा दम है मेरे अल्फाजों में ।
जुनूने मुल्क है सर चढ़ कर बोलता है ॥
जुनूने कौम की क्या बात कहें ये “झल्ला”।
“बोस” की बात पे कटने वाले आज भी हैं॥
क्या हुआ अगर राज दफन हैं फाइलों में |
नेता जी का झंडा आज मुल्क में झूलता है||
कर्णधारों ने पुतले बना रखा है नेता जी को|
लेकिन सैल्यूट तो इन्ही को मिला करते हैं ||