Ad

Category: Poetry

BJP To Cage Congress Through a Granth On Emergency Days

[Chandigarh]BJP To Cage Congress Through a Granth On Emergency Days
B J P Led Haryana government today said it will publish a “Granth” (book) on Emergency days, which will be released on January 26, 2016.
The book entitled as ‘Shubhr Jyotsana’ would comprise articles, poems, stories and other such literary material written on the Emergency,
As per official release,The items would be collected up to December 31 for publication of the “Granth”,
According to the release, if anyone has any material based on Emergency he/she should submit the same in the office of concerned District Information and Public Relations Officer by December 31 on any working days between 9 am and 5 pm.
“Apart from this, if anybody possesses any video or audio of the days of Emergency, the same could also be submitted to the office of concerned District Information and Public Relations Officer,”
Apart from this, anyone possessing the clippings of articles and news items published in newspapers during the days of Emergency, can also submit the same in the office of concerned District Information and Public Relations Officer, it added.
file photo of swearing ceremony

नितीश और लालू ने सोनिया का बिहार में कहना माना ,डूबता इनका ये नाखुदा क्या गुल खिलायेगा

नितीश और लालू ने सोनिया का कहना माना
डूबता इनका ये नाखुदा क्या गुल खिलायेगा ?
माइनस +माइनस किताबों में प्लस होते हैं
बिहार के चुनावों में क्या ये जादू हो पायेगा??
कश्तियाँ उनकी क्या किनारे पे उत्तर पाएंगी ???
बिहार में पतवार जिन्होंने कांग्रेस को थमा दी है
वापिसी उनकी बिहार में क्या हो पाएगी ????
नाखुदा जिन्होंने कांग्रेस को बना रखा है

उफ़ ये गर्मी तो जाने का नाम ही नहीं लेती,अरे मेहमान तो दो दिन ही अच्छा होता है

सूरज तुझे भी पूरा हक़ है हमें रुलाने का
पर चुप कराने का हुनर भी आना चाहिए
ठीक है,तुम्हें कपडे अच्छे नहीं लगते
सामाजिक तकाजा है ,सो मजबूरी है
मोती मानस चून से दुश्मनी हुई पुरानी
इंसानों की जान पर आफत बन आई है
ये गर्मी क्या क्या गुल खिलाएगी
पारा तो जा पहुंचा हैं ४३ पर अभी
उफ़ ये गर्मी तो जाने का नाम ही नहीं लेती
अरे मेहमान दो दिन का ही अच्छा होता है
माना होंगें तुम्हारे चाहने वाले भी दुनिया में
उनको भी मेजबानी का अवसर मिलना चाहिए

भूकम्प नाल जी ना भरया,आंधी विच सबना नू उड़ाया

अंन्हेरी घुल्ली मी वरसाया ,प्रभु जी ये केडा रूप वखाया
भूकम्प नाल जी ना भरया,आंधी विच सबना नू उड़ाया
प्रभु जी मन विच तुवाड़े की आया,रोणा क्यों कर भाया
दिन नू तुस्सी रात बनाया ,महाभारत क्यूँ याद आया
प्रभु जी आप तो हो जाणी जॉन फिर ये क्यों पँगा पाया

PM Pays Homage To Nobel Gurudev Rabindranath Tagore On His Birth Anniversary

[New Delhi] Nobel Gurudev Rabindranath Tagore’s Birth Anniversary is celebrated across the globe Today
Prime Minister Of India Narendra Modi Pays Homage To Nobel Gurudev Rabindranath Tagore [Rabi]On His Birth Anniversary
PM Tweeted “I Bow to Gurudev Rabindranath Tagore[Nick Named Rabi] on his Birth Anniversary”.
Gurudev Has Decorated Literature With His Notable Works Like
Gitanjali, Gora, Ghare-Baire, Jana Gana Mana, Rabindra Sangeet, Amar Shonar Bangla (other works) He Won Nobel Prize in Literature In 1913
Gurudev Was Born On 7th May 1861
In Calcutta,And Died At The Age Of 80
On 7th August 1941

कोई कहे चाँद उल्टा तो किसी का सूरज टेढ़ा, हर किसी के दिमाग में फितूर ही है फितना

जिधर देखो उधर क़यामत है ढाता जलजला नेपाल से भारत रोजाना कहर ढाता जलजला
कोई कहे चाँद उल्टा तो किसी का सूरज टेढ़ा हर किसी के दिमाग में फितूर ही है फितना
किसी के तारे हुए गायब जमीन कोई ढूंढता ,कोई लगाता अट्ठास तो कोई अनायास नाचता
फितूरी फ़ितनों की जिंदगानी बुलबुला है इस फानी दुनिया में बस इतना ही जान लो
हर मुल्क में हर कौम में है जगह मौजूद हैं जीवट+मतवाले+दिलवाले इस दुनिया में
गम अपने भुला मदद को निकल पढ़ते हैं दुनिया में ,इंसानियत इसी को कहते होंगें ज़माने वाले

किसान मर रहा परिवार रो रहा,जोरावर लगाये अट्ठास,जीते जी सुध ले न कोई ,मरे पर आसूं बहें जार जार

पोलिस कहे “आप” है चोर “आप”कहे पोलिस चोर कांग्रेस कहे भाजपा है चोर भाजपा कहे कांग्रेस चोर
संसद हो या सड़क चोर खुद ही चोर को कह रहे चोर चोर चोर का शोर मचा चहुँ और, राम!सारे के सारे चोर
किसान मर रहा परिवार रो रहा जोरावर लगाये अट्ठास जीते जी सुध ले न कोई मरे पर आसूं बहाएं जार जार
लाशों के सौदागर लाशों पर करते लाखों की बरसात खाकी हो खादी या फिर हो सूटेड सरकार खोलते सूटकेस
मरा किसान मेरा है सो है लाख ,करोड़ों का लाशों के ये व्यापारी हर लाश पर कहते जाते, वन्स मोर भई वन्स मोर
जीते जी सुध ले नहीं कोई, कुकुरमुत्ते ,दीखते केवल गरीब किसान की दर्दनाक मौत के ही बाद
चहुँ और इन चोरों का मचा घनघोर अंधकार किस और छुपी सच्ची भौर झल्ले किसान को कहाँ मिलेगी ठौर,
चोर चोर के शोर में चोरों की इस चौंध में कब मिलेगी “चमक” विरोधी डोर

वोह तो साले हैं कमीने हैं उनका पिछौंडा है भारी,लेकिन करिश्माई लात वाले हैं हम: #आपरेआप

#‎आपरेआप‬
“आप”को”हम” होने का कभी हुआ होगा भ्रम,अब तो केवल “में” है और रह गए है हम
क्योंकि उनकों निकाल कर ले लिया है दम, पांच सालों तक नहीं रहेगा अब कोई गम
बजाएं वोह अपनी तूती कहीं और जाकर;हमें तो हमारा नक्कारखाना बेहद प्यारा है
आप में हम है और हम में है”मैं”शामिल ,फिर क्यूँ रहें उनकी बीमारी में हम ग़ाफ़िल
नैचुरल ट्रीटमेंट तो है केवल अपने लिए,उनकों तो एलोपैथी सर्जरी बेहद जरूरी है
अरे भाई मुफ्त की बिजली एंड पानी और देना पढ़ेगा दिल्ली को फ्री में वाई फाई
सबकुछ फ्री में ही लुटाना था जुमला अजीम, लेकिन नहीं हैं किसी उल्लू के पट्ठे हम
वोह तो साले हैं कमीने हैं उनका पिछौंडा है भारी,लेकिन करिश्माई लात वाले हैं हम

जननी मांग रही जनने का अधिकार पुत्री एक जनने दो मोहे परिवार के पालनहार InternationalWomen’s Day

जननी आज भी मांग रही जनने का अधिकार
पुत्री एक जनने दो मोहे परिवार के पालनहार
बलात्कार की घटनाएँ खुद ही रुक जाएंगी
जब सामने आ खड़ी होगी सशक्त एक ही नार
सरकारें बदली,पोलिस बदली,बदले हुकमरान
एक बार बस सोच को बदलो बदलेगा संसार
एक दिन पर्याप्त नहीं बस अब फूलों के हार
फूल खिलें सब बगिया में दो ऐसा वरदान

योगेन्द्र खुजिया रहे खुद की दाढ़ी आज कल केजरीवाल की मूंछ से पहुँच जो हो गई दूर

योगेन्द्र खुजिया रहे खुद की दाढ़ी आज कल
केजरीवाल की मूंछ से पहुँच जो हो गई दूर
दिल्ली के चुनावी मंथन से निकले दो रत्न अनमोल
इन्हें मिला बाबा जी का ठुल्लु माखन खाए कोई और
कढ़े नियमों की सीख से”आप”में विपदा भारी
, चंद दिनों की सत्ता फिर से छन्दों में उतरी जाये
नमक नमक से सौ गुनी, राजनीती कर ली जाये
रक्त चाप कम हो अपना, दूसरे का बढ़ता जाये
नमक जरा सा बना कर गांधी ने अंग्रेज दिए भगाए
नमक तोड़ो कानून की धज्जियां आज उड़ती जाएँ
गांधी नमक सांसदों के घर घर फ्री में बंटता जाये
बोरो में भर नमक यादव सांसदों के घर भिजवाये
दिए घरों भिजवाये ये कैसी रची लीला योगेन्द्र महान
सांसदों को तो लगी नहीं उलटे “आप”ही तिल मिलाए
प्रशांत हुए अशांत मुंबईकर”राम”की लीला कीनी लीक
केजरीवाल को ही दे बैठे पार्टी के कढ़े नियमों की सीख
कढ़े नियमों की सीख से हुई कुछ ऐसी विपदा भारी
चंद दिनों की सत्ता फिर से छन्दों में ही गाइ जाये