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Category: Jhalli Gallan

सोचे-समझे बिना कभी किसी को पीड़ा नहीं पहुंचानी चाहिए .

अंतर दाव लगी रहै, धुआं ना प्रगटै सोई
कै जिय आपन जानहिं, कै जिहि बीती होइ
अर्थ : रहीम दास जी कहते है मन में अग्नि धधकती रहती है, परन्तु उसका धुंआ
बाहर प्रकट नहीं होता. जिस व्यक्ति के मन पर जो घटित हो रहा होता है ,
उसका अंतर ही उसको जान सकता है, अन्य कोई नहीं .
भाव : इस दोहे का भाव यही है कि प्रत्येक व्यक्ति का अपने जीवन में अपना
ही दुःख- सुख होता है. किसी की क्या पीड़ा है , वह तब तक नहीं जानी
जा सकती , जब तक वह स्वयं अपने मुख से न कहे .
इसलिए बिना सोचे-समझे कभी किसी को पीड़ा नहीं पहुंचानी चाहिए .
जीवन में न जाने कितने-कितने लोगों के साथ हमारा मिलना-जुलना
होता है और उनके मन की बात को जाने बिना ही हम या तो उन्हें
सलाह देने लगते हैं या उनके किसी कार्य अथवा बात को देख-सुनकर
उस पर टिप्पणी करने लगते है या उसकी आलोचना करने लगते हैं .
यह प्रवृति सरासर गलत है .

अच्छे खासे आंबेडकर स्टेडियम की माँ +भैन एक कर दी

झल्ले दी झल्लियाँ गल्लां
एक खेल प्रेमी
ओये झल्लेया ये क्या हो रहा है??आज़ादी को हासिल किये छह दशक हो गए और ओलंपिक्स में केवल छह मेडल्स ही मिले हैं गोल्ड का एक भी नहीं |खेल युवा मंत्री है मंत्रालय है+खिलाड़ी हैं +खेल बोर्ड हैं+करोड़ों रुपयों का खर्चा है फिर मेडल क्यूं नहीं आ रहे??
झल्ला
पहलवान जी बात दरअसल ये है कि हमारे देश में खेल नीतियाँ भ्म्बरभूसे[गधिगेड] में ही पड़ी रहती है|पुराने कि बात छोड़ो कल की ही देखो|
दिल्ली के आंबेडकर स्टेडियम में फूटबाल का कितना बढिया ग्राउंड है टर्फ भी है |और वहां आने वाले दिनों में डूरंड टूर्नामेंट भी खेला जाना है मगर अच्छे खासे बाबा राम देव को बयाना ले जाते लेजाते आम्बेडकर स्टेडियम में घुसेड दिया \अब बाबा तो बाबा हज़ारों चेले भी साथ हो लिए |ऐसे में अच्छे खासे स्टेडियम की माँ भैन एक हो गई होगी |अब आप ही बताओ जब मंत्री +जनता +नेता+संतरी ही यूं बिदयों तब आगे कौन हवाल

रेप जैसे क्राईम भी अब छोटे मोटे क्राईम दिखने लगे ?

झल्ले दी झल्लियाँ गल्लां
एक छुटभैया पत्रकार
ओये झाल्लेया व्हाट इज दिस ये किरण बेदी अपने को समझती क्या है हैं बाबा रामदेव के मंच से नीचे उतरते ही इस रिटायर्ड पोलिस अधिकारी को रेप जैसे क्राईम भी छोटे मोटे क्राईम दिखाई देने लग गए |हमारे लिए तो हर तरफ मुसीबत ही मुसीबत है अब रेप की खबर को दिखाया तो उसका भी विरोध\ऐसे कैसे चलेगा|
झल्ला
बेदी ने ज़रा सी किरण क्या दिखा दी सभी बौखला गए हो |अच्छा ये बताओ को गलत कया कहा है किरण का कहना है कि छोटे मौते अपराधों पर जो ज़ूम करके दिखाया जाता है बड़े अपराधों को मिनिमाईस कर दिया जाता है|अब बाबा राम देव और अन्ना के मूवमेंट पर मंच की कवरेज के बजाये स्टूडियो में बहस की जा रही है |और तो और मुम्बई में सिक्युरिटी वाले को रेप के प्रयास और मर्डर के आरोप में पकड़ भी लिया गया मगर एम् डी एल आर के मालिक और हरियाणा के गृह राज्य मंत्री गोपाल कांडा अभी तक फरार है |यहाँ तक की कांडा अपनी शर्तों पर ही सरेंडर करने की आज्ञा मांग रहा है अब आप ही बताओ की व्हेयर तू स्टेंड

[कनक]सोने में मादकता है पाने वाला बौराए ही बौराए

झल्ले दी झल्लियाँ गल्लां
एक अन्ना + बाबा समर्थक
ओये झल्लेया ये क्या हो रहा है ओये आज़ादी के इतने सालों के बाद भी हम अंग्रेजों के लन्दन से एक भी गोल्ड लेकर नहीं आ सके|ओये हसाड़े पहलवानों ने थोड़ा दम दिखाया मगर इतनी लम्बी चोडी खिलाड़ियों +अधिकारियों की फौज होने के बावजूद भी ओनली छह पदक ही मिले और इनमे एक पदक भी गोल्ड नहीं |गोल्ड से चूकने वाला सुशील पहलवान पहले ही बीमार पड़ गया आते हसाड़े डाक्टर +शेफ +अफसर क्या कर रहे थे ???
झल्ला
शांत हो जा भाई |आप जी की मंचों पे तो चली नहीं अब मुझ झल्ले की क्यूं ऐसी की तैसी करने पे तुले हो|आप तो पड़े लिखे ज्ञानी दिख रह
हो|आपने वोह दोहा नहीं सुना कि
कनक कनक ते सौ गुनी मादकता अधिकाए
या पाए बौराए जग वा खाए बौराए
अब सुशील ने कनक[अन्न]खाया तो बीमार हो गया खिलाडियों ने पूर्वजों कि मानी और कनक[सोने]से दूर रहे
तो ठीक रहे |
वैसे हमारे देश में तो कांस्य या फिर क्वाटर फायनल में आने वालों को भी सरकारे+मंत्रालय+आर्गेनाइजेशन्स
सभी सोने से लाद रही है| वैसे आज़ादी पाए अभी छह दशक ही तो हुए हैं|और छह पदक ले आये अब बच्चो की जान ही ले लोगे|
थोड़ा इंतज़ार करो खेल मंत्री युवा अजय माकन ने कह दिया है की अगले ओलंपिक्स में २५ मेडल ले आयेंगे सो वेट यूं जस्ट वेट

इन्द्रियों को वश में कर लेने वाले मोह -माया के जाल से मुक्त रहते हैं

Rakesh Khurana [Right] In A Social Gathering

जो रहीम तन हाथ है, मनसा कहुं किन जाहिं
जल में जो छाया परी, काया भीजती नाहीं

अर्थ : कवि रहीम कहते हैं कि यदि शरीर पर अपना वश है तो मन कहाँ जाएगा?
जैसे – यदि पानी में अपना प्रतिबिम्ब दिखाई दे तो शरीर नहीं भीगता.
भाव : कवि रहीम का संकेत यहाँ इन्द्रियों को वश में करने की ओर है . उनका
कहना है कि यदि आदमी पूर्ण संयम से अपनी समस्त कर्मेन्द्रियों को
वश में कर ले तो वह अपनी ज्ञानेन्द्रियों अर्थात मन को भी वश में कर
सकता है . जिस प्रकार पानी में दिखाई देने वाले प्रतिबिम्ब को पानी
गीला नहीं कर सकता , उसी प्रकार अपनी कर्मेन्द्रियों और ज्ञानेन्द्रियों
को वश में कर लेने वाले व्यक्ति को सांसारिक मोह -माया अपने जाल
में कभी नहीं फंसा सकती .

मुम्बई में दोपहर में दंगे शाम को पाकिस्तान की भारतीय चौकियों पर फायरिंग???

झल्ले दी झल्लियाँ गल्लां
एक भारतीय
ओये झल्लेया ये क्या हो रहा है?ओये म्यांमार और असाम में भडकी सम्प्रदाईक हिंसा की चिंगारी से मुम्बई में भी शोले भड़काने की साजिश हो रही है| नेताओं ने निर्दोष अल्पसंख्यकों को आज़ाद मैदान में इकट्ठा किया और उन्हें भड़का दिया| पत्थर चले +लाठियां उठी +आंसू गैस फ़ैली और हवाई फायर दागे गए |बेचारे दो लोग मर गए कई लोग घायल हो गए |सरकारी गैर सरकारी गाड़ियां टूटी मीडिया के वाहन जले | पोलिस वालों के साथ ही मीडिया कर्मी भी घायल हुए|
अफ़सोस तो इस बात का है की सत्ता में सहयोगी पार्टी के अलावा दूसरे कई दलों के अल्पसंख्यक नुमाईन्दों ने इसका आयोजन किया था |और ये अपने
लोगों को कंट्रोल नहीं कर पाए तो देश को कैसे कंट्रोल कर पाते होंगें??इन्होने असाम में प्रताडित अल्पसंख्यकों के शिविरों में बाद इन्तेजामी और मीडिया की अनदेखी का आरोप लगा कर लोगों को भड़का दिया|
झल्ला
ओये भोले बादशाहों दरअसल ये राजनीति में वर्चस्व की लड़ाई है| ये तो आप भी मानोगे कि हसाड़े सोणे ते मन मोहने पी एम् ने तत्काल असाम कोकराझाड़ का दौरा भी किया था उन्होंने वहां बँगला देशियों की घुसपैंठ से सीधे इंकार करके अल्पसंख्यकों के जख्मो पर मलहम भी लगाया था उसे मीडिया ने भी दिखाया ही था |दरअसल झलेविचानुसार कहानी कुछ और ही है|
अभी जन्माष्टमी पर हिन्दू वादी संगठनों और कांग्रेसी नेताओं ने गोविन्दाओं से पूरे मुंबई में दही हांडी तुड़वा कर करोड़ों रुपये इकट्ठा किये + खर्च किये और दूसरों से बडत ले ली अब एन सी पी +एस पी आदि दल कैसे पीछे रहते इन्होने अपने वोट बैंक को इकट्ठा किया और अपनी शक्ति का प्रदर्शन कर दिया |लेकिन हाँ कल जब मुम्बई में जब दंगाई दंगे कर रहे थे तब उसके थोड़ी दिएर के बाद ही पाकिस्तान की तरफ से पञ्च भारतीय चौकियों पर फायरिंग भी की गई|हो सकता है की इन दोनों घटनाओं में कोई लिंक जोड़ना जल्दबाजी होगी मगर एक बात तो साफ़ है की पड़ोसी मुल्क की फौज मौके की तलाश में जरूर है|

नाम की कमाई से कुकर्मों का अंत =कबीरवाणी

नाम की कमाई से कुकर्मों का अंत
जबहिं नाम ह्रदय धरयो, भयो पाप का नास
जैसे चिनगी आग की, परी पुरारी घास

भावार्थ
संत कबीर दास जी कहते हैं जिस समय हमारे ह्रदय में नाम प्रकट हो जाता है, हमारे कुकर्मों का अंत हो जाता है .
जिस प्रकार घास का बड़े से बड़ा ढेर भी चिंगारी से जलकर राख हो जाता है . इसी प्रकार हम संसारी कितने
भी खोटे कर्म कर चुके हों, नाम की कमाई हमारे सब पापों का नाश कर देती है .
कबीर दास जी नाम का प्रताप इस तरह भी बताते हैं –
नाम जपत कोढ़ी भला, चुइ-चुइ पड़े जिस चाम
कंचन देह किस काम की, जिस मुख नाहीं नाम

अर्थात अगर कोई कोढ़ी भी, जिसके घाव से पानी बह रहा है, परन्तु अंतर में वह नाम से जुड़ा हुआ है तो वह
उस व्यक्ति से कहीं अच्छा है, जो सोने जैसी काया लेकर सांसारिक मोहमाया, विषयभोग में लिप्त है.

कांग्रेसियों से कहा जा रहा है कि कुल्हाड़ी पर दोनों पावँ दे मारें

झल्ले दी झल्लियाँ गल्लां
कांग्रेसियों से कहा जा रहा है कि कुल्हाड़ी पर दोनों पावँ दे मारें
एक भाजापाई
ओये झल्लेया ये कांग्रेसियों को क्या हो गया है ये कया करने पे तुले हुए हैं| पहले जंतर मंतर करके अन्ना हजारे को बिना भाव के ही चलता कर दिया अब योग गुरु बाबा राम देव को सियासी योग सिखा कर सन्यासी की भी राम राम करने पर अमादा हो रहे हैं |क्यूं नहीं एक बार में भ्रष्ट लोगों को बेनकाब करके उनके विरुद्ध कार्यवाही करवा देते +लोक पाल बनवा देते +सी बी आई का दुरूपयोग रोक देते+विदेशों से काला धन वापिस ले आते +
झल्ला
वाह जनाबे आली वाह आप का मतलब है कि सभी किन्तु परन्तु लगा कर कुल्हाड़ी से बचते फिर रहे कांग्रेसियों को यह सलाह दी जाए कि वोह कुल्हाड़ी पर ही अपने दोनों पावँ दे मारें \कांग्रेसियों को भी शिकारपुर का ही समझा है क्या ???

परमात्मा के अवतरण से सांसारिक बेड़ियों से मुक्ति= भगत श्री नीरज मणि ऋषि

विषय -परमात्मा का अवतरण सांसारिक मोह -माया की बेड़ियों से मुक्ति

जब श्री कृष्ण भगवान् का जन्म हुआ तो उस समय वासुदेव जी की सारी बेड़ियाँ टूट गईं, जेल के सारे दरवाजे खुल गए और वे बंधनमुक्त
हो गए. इसी प्रकार जब हमें परमात्मा और संतों की संरक्षता एवं समीपता प्राप्त होती है तो हमारी भक्ति परवान चढ़ती है और हमारी
आत्मा निर्बंध हो जाती है और संसार के मोह-माया के बन्धनों से मुक्त हो जाती है.
हमारे जीवन का उद्देश्य भगवत प्राप्ति है. संत हमें समझाते हैं कि हाथों से जगत के कार्य करो और मन से प्रभु की भक्ति करो. परमात्मा से दूर जाकर तो दुःख मिल सकता हैं परन्तु परमात्मा की संरक्षता एवं संतों के सानिध्य में रहकर कोई कमी नहीं आती. साधना करने में जो
साधन भक्तों के पास हैं उनकी प्रभु रक्षा करते हैं तथा जो साधन भक्तों के पास नहीं हैं उनका प्रबंध करते हैं. प्रभु की अपने भक्तों के
लिए ऐसी प्रतिज्ञा है .
कृष्ण जन्माष्टमी के पावन अवसर पर श्री रामशरणम् आश्रम गुरुकुल डोरली , मेरठ में]

भगत श्री नीरज मणि ऋषि
जी द्वारा दिए गए प्रवचन का एक अंश
प्रेषक: श्री रामशरणम् आश्रम गुरुकुल डोरली , मेरठ
file photos .

समूचे राष्ट्र से ही माफ़ी मांग लेते

झल्ले दी झल्लियाँ गल्लां
समूचे राष्ट्र से ही माफ़ी मांग लेते
एक बुद्धि जीवी
ओये झल्लेया ये क्या हो रहा है ओये संसद में आज कल बहस कम हो रही है और माफ़ी वाफी शाफी ज्यादा मांगी जाने लगी है |अभी कांग्रेसी सोनिया के धमकाने पर भाजपाई डडा आडवानी ने माफ़ी मांगी अब सपाई जया बच्चन के तीखे तेवरों से घबरा कर पहली बार गृह मंत्री बने बेचारेकांग्रेसी सुशील कुमार शिंदे ने बहन से माफ़ी मांग कवच धारण किया तब जाकर विपक्ष के विरोधी ओलों से आपने सर की रक्षा की
झल्ला
सर जी बात तो आपजीकी दुरुस्त है चंगा होता अगर ये लोग आपस में माफ़ी मांगने के बजाय समूचे राष्ट्र से ही हाथ जोड़ कर सर निवा कर नहीं तो कुर्सी छोड़ कर माफ़ी मांग लेते Permalink: http://jamosnews.com/