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Category: Politics

कांग्रेस ने अन्ना टीम द्वारा विकल्प की तलाश का स्वागत किया

अन्ना हजारे ने राजनितिक संस्कृति बदलने के लिए अनशन त्याग कर धर्मनिरपेक्ष विकल्प तलाशने की बात क्या कह दी कि यूं पी ऐ के महारथियों ने अन्ना टीम पर कीचड उछालना शुरू कर दिया है|दिग्विजय सिंह और अम्बिका सोनी ने आज कहा कि अन्ना टीम का गुप्त अजेंडा उजागर हो गया है इसकी उन्हें ख़ुशी है
इन दोनों वरिष्ठ नेताओं ने एक स्वर में अन्ना को राजनीती में आने का न्यौता देते हुए कहा है कि लोक तंत्र में सबको राजनीती में आने का हक़ है लेकिन जनता द्वारा चुने गए सभी प्रतिनिधियों के विषय में अपशब्द नहीं कहने चाहिए |उन्होंने यह भी चेतावनी दे है कि राजनीति में आने पर राजनीती की सीमाओं के विषय में जानकारी भी उन्हें[अन्ना] हो जायेगी |

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अन्ना राजनितिक संस्कृति बदलने के लिए विकल्प देंगे अनशन कल समाप्त होगा

टीम अन्ना के सभी अनशनकारी शुक्रवार३-०८-२०१२ की शाम पाच बजे अपना अनशन समाप्त कर देंगे। अन्ना हजारे और अरविंद केजरीवाल ने इस बात का ऐलान करते हुए अब राजनितिक संस्कृति बदलने के लिए राष्ट्रव्यापि आन्दोलन चलाने का इशारा किया है
अन्ना ने साफ कर दिया है कि वे खुद चुनाव नहीं लड़ेंगे। बल्कि जनता के बीच से साफ-सुथरे धर्म निरपेक्ष उम्मीदवारों को खोजना उनके लिए सबसे बड़ी चुनौती होगी|उन्होंने एक विकेंद्रित, लोकतात्रिक और धर्मनिरपेक्ष विकल्प देने का वादा भी किया है।
टीम अन्ना की मांग को बिल्कुल अनसुना करके सरकार ने मानवीय और राजनितिक संवेदनाएं त्याग कर अनशन कारियों को मौत के मुह में धकेल दिया है | इस अप्रिय स्थिति से बाहर निकालने के लिए और सरकार के लिए एक नया सर दर्द पैदा करने के लिए अब आन्दोलन को एक नया रूप देने का एलान किया गया है|
इससे पहले पिछले आठ दिन से अनशन पर बैठी टीम अन्ना को गुरुवार की सुबह पूर्व सेनाध्यक्ष जनरल वीके सिंह और धर्मगुरू श्री श्री रवि शकर सहित बड़ी संख्या में समाज के विभिन्न क्षेत्र के शीर्षस्थ लोगों ने अनशन तोड़ कर चुनावी क्रान्ति शुरू करने की अपील की। इनमें पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त जे.एम. लिंगदोह, वरिष्ठ पत्रकार कुलदीप नैयर, फिल्म अभिनेता अनुपम खेर और जस्टिस संतोष हेगड़े सहित सुप्रीम कोर्ट के कई रिटायर्ड जज भी शामिल हैं। इसी तरह मैगसायसे पुरस्कार से सम्मानित संदीप पाडे और एकता परिषद के पीवी राजगोपाल जैसे कई सामाजिक कार्यकर्ता, योगेंद्र यादव जैसे समाजशास्त्री, ईएएस सरमा जैसे वरिष्ठ प्रशासनिक पदों से रिटायर्ड हुए अधिकारियों ने भी टीम अन्ना से राजनीति को नई दिशा देने की अपील की है।
इन लोगों ने अपील की है कि वह इस सत्ता से उम्मीद छोड़ अपनी ऊर्जा एक वैकल्पिक राजनीतिक ताकत तैयार करने में लगाएं। इन शीर्षस्थ लोगों ने देश के आम लोगों से भी अपील की है कि अगर टीम अन्ना इस चुनौती को स्वीकार करती है तो वे इनका साथ देने के लिए सामने आएं।

अन्ना अनशन तोड़ो राजनितिक विकल्प दो

टीम अन्ना के अनशन का आज नौवां दिन है इनके साथ ही सरकार भी अभी तक पलके झपकाने को तैयार नहीं दिखती संभवत इसीलिए अब राजनितिक विकल्प देने की संभावनाए तलाशी जाने लगी हैं|इस दिशा में जनता से दो दिनों में राय माँगी गई है|दो दिनों के बाद राजनीतिक विकल्प देने का फैसला किया जाएगा जंतर-मंतर पर अन्ना हजारे के अलावा अरविंद केजरीवाल, गोपाल राय और मनीष सिसोदिया भी अनशन कर रहे हैं।
अरविंद केजरीवाल और गोपाल राय की तबीयत बिगड़ती ही जा रही है। गोपाल राय को आठवें और नौवें दिन उल्टी हुई है
टीम अन्ना के समर्थन में मुम्बई से जंतर-मंतर पहुंचे अनुपम खेर ने 23 जाने-माने लोगों द्वारा आंदोलन के समर्थन में लिखा गया एक लेटर पढ़ा जिसमे टीम अन्ना से अनशन तोड़कर देश को नया राजनीतिक विकल्प देने की अपील की गई है ।
लेटर लिखने वालों में पूर्व जनरल वीके सिंह, पूर्व चीफ जस्टिस वीआर कृष्ण अय्यर, पूर्व नौसेना प्रमुख राम तहलियानी, पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त जेएम लिंगदोह, प्रख्यात पत्रकार कुलदीप नैयर और अनुपम खेर आदि शामिल हैं।
अनुपम खेर द्वारा मंच पर इस चिट्ठी को पढने के बाद प्रशांत भूषण ने कहा कि अब देश की जनता ही हमें बताए कि हमें राजनीतिक विकल्प देने के बारे में सोचना चाहिए या नहीं। उन्होंने कहा कि जनता दो दिनों के भीतर सोशल साइट्स या जैसे भी संभव हो, अपनी राय हमें बता दे। इसके बाद राजनीतिक विकल्प देने पर फैसला किया जाएग।
मुम्बई में अनाना के समर्थन में प्रदर्शन कर चुके अनुपम खेर ने जंतर मंतर पर कहा, कि करप्शन के खिलाफ आवाज उठाना सबका अधिकार है। इस आंदोलन को लोगों तक पहुंचाना बहुत जरूरी है लेकिन पूरी कोशिश की जा रही है कि आंदोलन को अपनी ही मौत मरने दिया जाए। अनुपम खेर ने सरकार को धिक्कारते हुए कहा कि हम भूखे-प्यासे पड़ोसी का भी हाल-चाल पूछ लेते हैं लेकिन यहां तो अनशन के इतने दिन बीत जाने के बाद भी सरकार की तरफ से कोई नहीं आया। उन्होंने कहा, ‘मैं जंतर-मंतर पर अपना चेहरा दिखाने नहीं आया हूं। मैं यहां एक आम आदमी की तरह आया हूं। यह आंदोलन तब तक चलेगा जब तक कि करप्शन हमारे समाज से खत्म नहीं हो जाता।’

अन्ना टीम को दिल्ली पोलिस ने अस्पताल जाने का नोटिस दिया

आमरण अनशन पर आठ दिनों से बैठे अरविन्द केजरीवाल +गोपाल राय और मनीष सिशोदिया को दिल्ली पोलिस ने अस्पताल जाने को कह दिया है इस बाबत एक पत्र भेजने के अलावा पोलिस के पांच अधिकारी सादे वस्त्रों में अनशन स्थल पर पहुंचे और अन्दर बाहर इंस्पेक्शन भी किया|
आज सुबह से ही अरविन्द केजरीवाल सरकार पर निशाना साध रहे थे कि जबरदस्ती अस्पताल में भर्ती करके उनकी ह्त्या की जा सकती है|ख़ुदकुशी का आरोप लगाने वालों को चेताया गया था कि यह ख़ुदकुशी नहीं वरन बलिदान है |और यह कोई अपराध नहीं है|
और अब पोलिस का पत्र और फिर इंस्पेक्शन भी हो गया यूं तो रोजाना पोलिस कि गश्त होती थी मगर आज अन्दर तक घुस कर जांच की गई|पोलिस का यह कहना है कि अन्ना ने अनशन से पहले यह लिख कर एफिडेविट दिया है कि क़ानून का पालन होगा इसीलिए अब जब तबियत खराब हो रही है तब इन्हें अस्पताल चले जाना चाहिए \अनशन कारियों का कहना है कि उनके सभी पेरामीटर दुरुस्त हैं\

मुलायम डांट पड़ते ही सी एम् मुस्कुरा कर बोले काम करके दिखाएँगे

सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव के लख्ते जिगर अखिलेश यादव को ज़रा सी डांट कया पड़ी की अब अपने बुजुर्ग पार्टी प्रमुख को खुश करने के लिए काम करके दिखाने की बात कहने लग गए हैं|
बीते दिन पार्टी प्रमुख ने विधायकों और मंत्रियों की एक मीटिंग की थी इसमें उन्होंने सबको काम कम और ज्यादा ब्यान बाज़ी के लिए लताड़ा था प्रमुख की नाराज़गी की बात मीडिया में भी उछली तो आज मुख्यमंत्री ने प्रेस कांफ्रेंस करके स्थिति को संभालने का प्रयास किया
दरअसल पार्टी प्रमुख की नज़र २०१४ के चुनावों पर है और उन्होंने काम करके दिखाने के लिए अपने पुत्र अखिलेश की सरकार को छह महीने दिए थे उसमे से चार महीने बीत भी गए हैं मगर अनावश्यक बयाँबाजी ज्यादा हो रही हैउन्होंने ब्यान बाज़ी से बचने कार्यकर्ताओं की अनदेखी नहीं करने और जनता की उम्मीदों पर खरा उतरने को जरुरी बताया|
कार्यकर्ताओं की सुनवाई न होने का जिक्र करते हुए सपा प्रमुख ने कहा कि इनके बल पर ही हम सत्ता में आए हैं। इनकी अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
मुलायम ने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर सरकार समय रहते मैसेज नहीं दे पायी तो २०१४ के लोकसभा चुनाव में पार्टी को नुकसान उठाना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि मैं किसी का नाम नहीं लेना चाहता पर रिपोर्ट सबकी मिल रही है। जनता ने बहुत उम्मीद से सत्ता दी है, उसे नाउम्मीदी नहीं मिलनी चाहिए।
मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने इस मौके पर कहा कि चुनाव घोषणा पत्र के अस्सी फीसदी वादों को या तो सरकार पूरा कर चुकी है या पूरा होने के कगार पर हैं। जो योजनाएं शुरू की गयी हैं उसका लाभ कुछ दिन बाद देखने को मिलेगा।
प्रदेश मुख्यमंत्री ने आज मुस्कुराते हुए अपनी सरकार की गलतिओं को स्वीकार तो किया मगर बिजली के महा संकट के लिए सारा दोष पूर्व की बसपा सरकार के मत्थे मड दिया |मायावती की मूर्ति तोड़े जाने के मामले पर बोलते हुए उन्होंने मजाकिया लहजे में कहा कीअभी तो स्पेयर मूर्ति रखी थी सो लगवा दी गई है भविष्य के लिए मूर्ति बनाने का सांचा तैयार करवा लिया जाएगा और जरुरत पड़ने पर प्लास्टर आफ पेरिस की मूर्ति बनवा ली जायेगी \
अपराधों में वृधि के प्रति गंभी रुख अपनाते हुए उन्होंने अपराध नियंत्रण में ढिलाई बरतने वालों के खिलाफ सख्त कार्यवाही का आश्वासन भी दिया

केजरीवाल ने लगाया ह्त्या का आरोप और अन्ना ने भरी हुंकार

अन्ना टीम के अनशन का आज आठवां दिन है|आज जहां अन्ना ने हुंकार भर कर जन लोकपाल के आने तक उनका अनशन जारी रखा जाएगा जबकि अरविन्द केजरीवाल ने सरकार पर उनकी [अरविन्द की]ह्त्या के षड्यंत्र रचाने का आरोप लगाया है
आज टीम अनशन का आठवाँ और अन्ना का चौथा दिन है आज अरविन्द केजरीवाल और गोपाल राय की तबियत खराब बताई जा रही है तभी ये दोनों मंच पर बैठे नहीं दिखाई दे रहे |सवाबाढ़ बजे के करीब अरविन्द थोड़ी देर के लिए मंच पर आये और सरकार पर उनकी [अरविन्द की]ह्त्या के षड्यंत्र रचाने का आरोप लगाया |उन्होंने बताया की सरकारी हलकों में कहा जा रहा है कि अरविन्द को आत्महत्या के आरोप में गिरफ्तार करके अस्पताल में भर्ती किया जा सकता है जहां उन्हें स्लो पोय्जन देकर मारा जा सकता है जबकि यह आत्म ह्त्या नहीं वरन आत्म बलिदान है और बलिदान कोई अपराध नहीं है |गांधी जी २५ दिन और संत तुका राम ४५ दिन तक अनशन पर रहे |उन्हें कभी नहीं पकड़ा गया अब ये सरकार अंग्रेजों से भी गई गुज़री हो गई है |
उन्होंने जयप्रकाश नारायण को कोट किया जेल में जय प्रकश को स्लोपायजन दिया गया इसके अलावा एक और स्वामी को अनशन से उठा कर अस्पताल में डाला गया अनशन स्थल पर तो वे ठीक थे मगर अस्पताल में उनकी मौत हो गई | यही षड्यंत्र अब उनके[अरविन्द]के साथ भी रचा जा रहा है|
उन्होंने बताया कि अभी तक कुछ कमजोरी जरूर है मगर मेरे सारे पेरामीटर ठीक हैं ऐसे में अस्पताल लेजाना किसी भी द्रष्टि से उचित नहीं है अगर जबरदस्ती अस्पताल ले जाया जाएगा तो जनता का डाईत्व उन्हें वापिस लाना होगा | अभी तक सरकारी अस्पताल जांच के सैम्पल ले रहे थे अब उन्हें सैम्पल भी नहीं दिए जायेंगे|
उधर सरकार इस मुद्दे पर संवाद स्थापित करने के मूड में नहीं दिख रही गृह मंत्री का चार्ज संभालने के बाद सुशील कुमार शिंदे ने अन्ना टीम से बात करने के स्थान पर उनका मज़ाक उड़ाना ज्यादा पसंद किया \श्री शिंदे ने कहा की अन्ना टीम मंच से नीचे और मंच के ऊपर कुछ अलग कह रही है जबकि अन्ना तीसरे नज़रिए की बात कर रहे हैं ऐसे में कैसे बात की जा सकती है|

जिलों के बाद अब यूनिवर्सिटी का नाम बदलने की कवायद

अंग्रेज़ी के विश्विख्यात साहित्यकार शेक्सपियर ने कहा था की नाम में क्या रखा है मगर आज कल उत्तर प्रदेश सरकार नाम के सहारे ही प्रदेश को २०१४ के चुनावों तक ले जाना चाहती है|जिलों के नाम बदलने के बाद अब कांशीराम उर्दू, अरबी-फारसी विश्वविद्यालय, लखनऊ का नाम बदल कर ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती उर्दू, अरबी फारसी विश्वविद्यालय कर दिया गया है अजमेर दरगाह के सज्जादनशीन सैयद जैनुल आबेदीन अली खान और पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने इस पर ऐतराज भी जता दिया है मायावती ने तो इसे बसपा आन्दोलन के जन्म दाता कांशीराम के प्रति एहसान फरामोशी बताया है| जबकि सूफी संतों के नाम पर राजनीति किये जाने की सैय्यद जैनुल ने भी गलत बताया है
मायावती सरकार के कार्यकाल में शुरू किये गऐ उर्दू अरबी फारसी विश्वविद्यालय का नाम बदलने के लिये सपा नेता एवं नगर विकास मंत्री आजम खां ने पिछले दिनों मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को पत्र लिखकर विश्वविद्यालय का नाम उर्दू अरबी फारसी के किसी विद्वान या साहित्यकार के नाम पर रखे जाने का सुझाव दिया था। विश्वविद्यालय के कुलपति की और से इस सुझाव पर दस नाम आए थे जिसमें सूफी संत हजरत ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती के नाम पर सरकार ने सहमति जताई है।
1993 में पूरी तरह से हाशिए पर आ गए सपा प्रमुख मुलायमसिंह यादव को कांशीराम जी ने ही सहारा देकर सपा-बसपा की गठबंधन सरकार में मुख्यमंत्री पद पर बैठाया था। अब उसी सपा सरकार द्वारा माननीय कांशीराम के नाम पर बनी यूनिवर्सिटी का नाम बदलने से उनके साथ एहसान फरामोशी की जा रही है

भारत में आये बिजली के महा संकट को फिलहाल टाल दिया गया है

एक मंत्री की नाकामी को उजागर कर रहे तीन पावर ग्रिड[नोर्दर्न +इस्टर्न+नार्दर्न इस्टर्न] के महज़ २४ घंटों में दोबारा फेल्यौर को बेशक १० घंटों में शाम आठ बजे तक और कहीं कहीं देर रात तक ठीक कर लिया गया है मगर इसकी जांच और पुनरावर्ती की रोक थाम के उपायों के लिए कदम बढाने के बजाये राज्य और केंद्र सरकार अभी तक दोषारोपण के पुराने हथकंडे ही अपना रहें है |
इस फेल्यौर से २० राज्यों और[२] यूं टी की पीड़ित ६० करोड़ जनता के जख्मो पर नमक छिड़कते हुए वीरप्पा मोइली को बिजली का अतिरिक्त प्रभार दे दिया गया है और फेल हुए मंत्री को प्रोमोट करके गृह मंत्री बना दिया गया है|
आजाद भारत में सबसे बड़े इस बिजली संकट से पीड़ित ६० करोड़ जनता की परेशानियों को विश्व मीडिया ने सुर्ख़ियों में लिया है और इस संकट से अमेरिका जैसे विकसित देश ने सबक रिपीट सबक लिया है
मंगलवार को बिजली गुल होने से देश की 60 करोड़ आबादी का जनजीवन ठहर सा गया था। आठ से नौ घंटे बाद राजधानी दिल्ली समेत देश के कई राज्यों में बिजली बहाल हो सकी। पावर ग्रिड कॉरपोरेशन के अनुसार रात के 11.30 बजे तक उत्तरी ग्रिड में 86 फीसदी तक बिजली सप्लाई होने लगी थी जबकि पूर्वी ग्रिड के 79 फीसदी हिस्सों में बिजली की सप्लाई शुरू हो गई थी।
कॉरपोरेशन के अनुसार शाम साढ़े आठ बजे तक पूर्वोत्तर ग्रिड में 100 फीसदी और दिल्ली में 90 फीसदी बिजली की सप्लाई होने लगी थी।
बिजली सप्लाई बंद हो जाने से दिल्ली मेट्रो के अलावा भारतीय रेलवे की लंबी दूरी की बिजली से चलने वाली सैकड़ों ट्रेनें जहा की तहा खड़ी हो गई। इस बार की गड़बड़ी के लिए उत्तर प्रदेश के अलावा पंजाब, हरियाणा और राजस्थान को जिम्मेदार बताया जा रहा था, जिन्होंने उत्तरी ग्रिड में अपने कोटे से बहुत ज्यादा बिजली ले ली थी।
पहली बार पैदा हुए इस तरह के हालात में पूरा केंद्रीय तंत्र बदहवास नजर आया। केंद्रीय ऊर्जा मंत्री सुशील कुमार शिदे व उनके अमले ने संकट का ठीकरा राज्यों पर फोड़ पल्ला झाड़ लिया। कोई यह बताने की स्थिति में नहीं था कि आखिर ग्रिडों को राज्यों की मनमर्जी पर कैसे और क्यों छोड़ दिया गया है और इन पर समय रहते लगाम लगाने का तंत्र आखिर क्यों गायब है।उधर यूं पी पंजाब और बिहार ने तत्काल कोटे से अधिक बिजली लेने का खंडन भी कर दिया
दोपहर से शाम तक दिल्ली व अन्य महानगरों में ट्रैफिक लाइटें गुल होने से यातायात की हालत खस्ता हुई पड़ी थी। मेट्रो तथा मेल-एक्सप्रेस ट्रेनों में फंसे यात्रियों की हालत खस्ता रही। गाजियाबाद से मुगलसराय के बीच सवा सौ ट्रेनें घटों रुकी रहीं। जबकि दिल्ली से गुवाहाटी, हावड़ा, भुवनेश्वर, चंडीगढ़, अमृतसर, मुंबई, लखनऊ के बीच सैकड़ों ट्रेनें लेट हो गई। दिल्ली में मेट्रो रेल प्रबंधन ने यात्रियों को बीच में ही उतार कर उनके पैसे वापस किए।
केंद्र व तमाम राज्यों में सरकारी व निजी दफ्तरों, अस्पतालों व कारखानों में शुरू में पावर बैकअप से काम चलाने की कोशिश की गई। अनेक जगहों पर कर्मचारियों को समय से पहले छुट्टी दे दी गई। जिन पेट्रोल पंपों के पास बैकअप था वे तो चलते रहे, बाकियों ने बंदी की तख्तिया टाग दीं। इस दौरान एटीएम बंद होने से लोगों को भारी दिक्कत का सामना करना पड़ा। सोमवार को जहा 15 घटे में तकरीबन 35 करोड़ लोग प्रभावित हुए थे, वहीं मंगलवार के महा संकट ने आधे देश को अपनी चपेट में ले लिया।
यह पहला मौका है जब ग्रिड में बार-बार खराबी सामने आ रही है। इसी तरह पहली बार ऐसा हुआ है जब तीन ग्रिड एक साथ फेल हुए हैं मुख्य सचिव के अनुसार उन्हें सुबह ही सूचना मिल गई थी कि पूर्वी ग्रिड से 3000 मेगावाट अतिरिक्त बिजली खींची गई है। ऐसा करने वाले चारों राज्यों के खिलाफ कार्रवाई के आदेश दिए गए हैं। पावरग्रिड के सीएमडी आरएन नायक पहली बार पैदा हुए इस तरह के हालात से परेशान दिखाई दिए। उन्होंने भरोसा दिया कि आगे ऐसे हालात पैदा न हों, इसके पूरे प्रयास किए जाएंगे।
सुशील कुमार शिदे के लगभग छह साल के कार्यकाल में बिजली क्षेत्र बद से बदतर हो गया। इस दौरान न सिर्फ नई बिजली परियोजनाओं की रफ्तार सुस्त हो गई है, बल्कि चालू बिजली संयंत्रों और ट्रासमिशन प्रणालियों की हालत भी बिगड़ी है।
शिदे के कार्यकाल में 11वीं योजना में नई बिजली क्षमता का लक्ष्य बुरी तरह पिछड़ गया। मूल लक्ष्य 78 हजार मेगावाट का था, जिसे घटाकर 63 हजार मेगावाट किया गया। लेकिन अंतत: केवल 54,800 मेगावाट की नई क्षमता ही सृजित की जा सकी। इस दौरान महत्वाकाक्षी अल्ट्रा मेगा पावर प्रोजेक्ट भी बुरी तरह पिछड़ गए। चार में केवल एक मध्य प्रदेश स्थित शासन प्रोजेक्ट में काम हो सका। बाकी सभी किसी न किसी वजह से ठप पड़े हैं। राज्य बिजली बोर्डो की बदहाली बढ़ने से निजी कंपनिया बिजली क्षेत्र में उतरने से घबराने लगी हैं।
अब 12वीं पंचवर्षीय योजना में 85 हजार मेगावाट नई क्षमता के सृजन का प्रस्ताव है, लेकिन उसके पूरा होने की भी कोई सूरत नजर नहीं आती। खुद शिदे का कहना है कि 20 हजार मेगावाट की परियोजनाओं को कोयला और गैस मिलने के लाले पड़े हैं।बिहार को ५०० एमवी तक के लिए कोयला नहीं दिया जा रहा

ऊर्जा मंत्रालय का काम देश में बिजली क्षमता के लक्ष्य तय करना, इन्हें पूरा करने के लिए केंद्रीय बिजली उपक्रमों के अलावा राज्यों को निर्देशित करना तथा कोयला, पर्यावरण व वन, पेट्रोलियम व विदेश मंत्रालय जैसे ईधन उपलब्धता से संबंध रखने वाले मंत्रालयों व विभागों के साथ समन्वय बनाना है दुर्भाग्य से ऐसा नहीं हो रहा है \उदहारण के लिए
[१] बिहार को ५०० एम् वी क्षमता के प्लांट के लिए पी एम् द्वारा सेंक्शन करने के बावजूद कोयला नहीं दिया जा रहा
[२]हरियाणा में नए प्लांट के लिए भूमि के अधिग्रहण के लिए उपजाऊ जमीन चिन्हित कि गई है जिसके विरोध में अब किसानो के साथ सेना के रिटायर्ड जनरल वी की सिंह भी उतर आये हैं|
यहाँ कि व्यवस्था को आईना दिखाने के लिए दो उदहारण गौर करने लायक हैं
[१]कल आस्ट्रेलिया में भी बिजली गई थी मगर उसे थोड़े समय में ही ठीक कर लिया गया
[२]अमेरिका में जबकि बिजली नहीं गई मगर वहां के बेक अप सिस्टम को चेक अवश्य किया गया भारत में आये बिजली के महा संकट को देखते हुए बेक अप सिस्टम को चेक किया गया

यूं पी पंजाब बिहार बोले हमने नहीं ली ज्यादा बिजली

यूं पी बिहार और पंजाब ने केंद्र के आरोपों को ख़ारिज करते हुए कहा है की इन राज्यों में कोटे से ज्यादा बिजली नहीं ली गई |गोरतलब हे की सुशील कुमार शिंदे और और उनके सी एम् डी नायक ने मौजूदा ग्रिडों के ट्रिप होने के लिए राज्यों द्वारा अधिक बिजली खीचने को कारण बताया था अब उस आरोप का जवाब देते हुए यूं पी बिहार और पंजाब ने इनकार कर दिया है|
२४ घंटे में दो बार नार्दन ग्रिड और अज नार्दन =इस्टर्न और नार्दन इस्टर्न ग्रिड भी फ़ैल हो गई जिसके फलस्वरूप २० राज्यों और २ यूं टी में बिजली गुल हुई है इसका ठीकरा राज्यों पर फोड़ा गया था मगर राज्यों ने तत्काल इसका खंडन कर दिया है

चिदम्बरम को वित्+शिंदे को गृह और मोयली को बिजली मंत्रालय

केन्द्रीय मंत्रिमंडल में में आज फेर बदल किया गया है बिजली मंत्री सुशील कुमार शिंदे को गृह मंत्री और गृह मंत्री पी चिदम्बरम को वित् मंत्री बनाया गया है कारपोरेट अफेयर मिनिस्टर वीरप्पा मोइय्ली को बिजली का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है मौजूदा बुरे दौर में इन तीनो की कठिन परीक्षा होगी|
श्री चिदम्बरम को उनका पसंदीदा वित् मंत्रालय दिसंबर २००८ के बाद पुनः दिया गया है |अभी तक यह मंत्रालय प्रधान मंत्री के पास था
वर्तमान में अर्थ व्यवस्था एक नाजुक दौर से गुजर रही है ऍफ़ डी आई पर घमासान मचा हुआ है| भारतीय रुपया अमेरिकी डालर के मुकाबिले रोजाना लुडक रहा है| स्लो डाउन के इस दौर में महंगाई दिनों दिन बड़ती जा रही है|.ऐसे में श्री चिदम्बरम को अपने पुराने अनुभव का इस्तेमाल करना होगा |
बिजली के मौजूदा संकट में फ़ैल साबित हो रहे मंत्री को गृह मंत्री के पद पर प्रोमोट किया गया है | गृह मंत्रालय बेशक काबलियत के बजाय हाई कमान का भरोसा ज्यादा मांगता है मगर असाम जैसे प्रदेशों में आये दिन होने वाले दंगों को कंट्रोल किया जाना भी जरुरी होगा|और बिजली मंत्रालय में फ़ैल होने पर गृह मंत्रालय में ज्यादा दबाब रहेगा |
बिजली के मौजूदा संकट को देखते हुए एक फुल फ्लेज्ड मंत्री का होना जरुरी है मगर इसका अतिरिक्त प्रभार दिया जाना इसकी गंभीरता को कम कर रहा है|यह अपने आप में चिंता का विषय होगा |Permalink: http://jamosnews.com/

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