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Category: Economy

अरविन्द केजरीवाल ने दिल्ली में बिजली के बिल फाड़े और जलवाए

टीम अन्ना से अलग हुए अरविन्द केजरीवाल ने आज अपनी राजनीतिक उडान दिखाते हुए अपने लिए लक्की जंतर मंतर पर रविवार को पहला प्रदर्शन किया | राजधानी दिल्ली में बिजली के बढ़े हुए बिलों का मुद्दा उठाते हुए केजरीवाल ने लोगों से अपील की कि वे न तो बिजली बिल भरें और न किसी को अपनी बिजली सप्लाई काटने दें। उन्होंने यहां तक कह दिया कि यह भी एक तरह का सविनय अवज्ञा आंदोलन है। गौरतलब है कि सविनय अवज्ञा आंदोलन आजादी से पहले महात्मा गांधी की अगुवाई में हुआ था जिसमें देशवासियों ने अंग्रेजी सरकार का बनाया हुआ नमक कानून तोड़ा था। इस अवसर पर अनेकों लोगोने अपने बिजली के बिल फाड़े और उनकी होली जलाई |इस नए आह्वान से सभी सकते में दिखाई दे रहे हैं|
रविवार को जंतर मंतर पर टीम केजरीवाल के आह्वान पर लोग जुटे थे इनमे से अधिकतर बढ़े हुए बिजली बिलों से परेशान हैं। वहां मौजूद कई लोगों ने माईक पर केमेरा के सामने बताया कि पांच-पांच, दस-दस गुना ज्यादा बिल आ रहे हैं। केजरीवाल ने कहा कि दिल्ली में बिजली कंपनी मुनाफे में चल रही है। ऐसे में बिजली की दर कम की जानी चाहिए थी। मगर, कांग्रेस सरकार को लोगों की नहीं बल्कि कंपनियों की चिंता है। इसलिए बिजली सस्ती करने के बदले और महंगी कर दी गई। एक तरफ तो सरकार गरीबों की मदद के नाम पर रोजाना सब्सिडी का नारा लगाती है मगर रिक्शे और छोटे मोटे खोके वालों पर चार पांच गुना बिल ठोका गया है|ये सभी आज जंतर मंतर पर बिल लेकर आये थे|

सविनय अवज्ञा आंदोलन

केजरीवाल ने लोगों से अपील की कि इस बार कोई बिजली का बिल न भरे। उन्होंने कहा कि ‘डर यह दिखाया जाता है कि बिजली काट दी जाएगी। लेकिन, अगर बिजली विभाग के लोग किसी की भी बिजली काटने आएं तो पूरा मोहल्ला या पूरी बस्ती मिलकर उनका विरोध करे। अगर पूरे इलाके के लोग एकजुट होकर विरोध करेंगे तो किसी की हिम्मत नहीं है कि आपकी बिजली काट सके।’
अपने इस आह्वान को केजरीवाल ने आजाद भारत का सविनय अवज्ञा आंदोलन करार दिया। उन्होंने कहा कि जब इन बिजली बिलों पर कहीं कोई सुनवाई नहीं हो रही है तो लोगों के पास इसके अलावा कोई चारा नहीं है कि वे बिजली बिलों का भुगतान करने से इनकार कर दें।
टीम अरविन्द के प्रशांत भूषण ने बिजली का घोटाला उजागर करते हुए इसके कानूनी पहलुओं को उजागर किया|कुमार बिश्वास के संचालन में मनीष सिशोदिया ने सरकार पर आरोप लगाया कि अरबों रुपयों की

महंगी सरकारी जमीन का सस्ता आवंटन

सरकारी जमीन इन बिजली कम्पनिओं को मात्र एक रुपया महीना किराये पर दे दी गई गई|इसके अलावा बिजली उत्पादन सस्ता होने के उपरांत भी बिजली की दरें बडाई जा रही है |इसके लिए सरकार+बिजली विभाग और निजी कंपनियों की मिली भगत है|

भाजपा सकते में

अरविन्द केजरीवाल के इस सविनय अवज्ञा आंदोलन से सकते में आये कांग्रेस और भाजपा ने अरविन्द के इस आन्दोलन की आलोचना की है|भाजपा के प्रवक्ता मुख़्तार अब्बास नकवी ने इस आन्दोलन को आपसी फूट से ग्रसित पार्टी का भटकाने वाला आन्दोलन बताया

दिल्ली सरकार की ओपचारिकता

इससे पूर्व बिजली के अनापशनाप बढ़े बिलों का मामला दिल्ली सरकार की कैबिनेट में उठ चुका है| इस माह के पहले सप्ताह में मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने बिजली के बिलों के विषय में आ रही शिकायतों की ऊर्जा मंत्री को जांच के आदेश भी दिए थे कंपनियों को भी बिलों की समीक्षा करने को कहा गया था|

सरकार की उदासीनता

गौरतलब है कि दिल्ली में इंडिया अगेंस्ट करप्शन [आईएसी ] ने बिजली कंपनियों के घाटे के रोने को , सरासर गलत बताया है |.आई ऐ सी का आरोप है कि दिल्ली में बिजली सप्लाई करने वाली कंपनियों रिलायंस और टाटा ने अपने बही-खाते में हेर-फेर करके मुनाफे को घाटे के रूप में दिखा दिया और उसके आधार पर सरकार से बिजली के रेट बढ़ाने की मंजूरी ले ली|.हैरानी की बात यह है कि शीला दीक्षित की सरकार को बिजली कंपनियों के इस खेल की पूरी जानकारी थी. फिर भी सरकार धोखाधड़ी करने वाली कंपनियों पर कार्रवाई करने की बजाए उन्हें शह दे रही है| बिजली सप्लाई की व्यवस्था देखने वाली सरकारी संस्था दिल्ली विद्युत नियामक आयोग (डीईआरसी) के अध्यक्ष बरजिंदर सिंह ने अपनी जांच में कंपनियों की चोरी भी पकड़ी थी. जांच के बाद डीईआरसी इस नतीजे पर पहुंची थी कि बिजली के दाम बढ़ाने की जगह इसमें 18 % की कमी करनी चाहिए| इस आदेश के बाद रिलायंस और टाटा के अधिकारियों ने शीला सरकार से इस आदेश को रोकने की गुहार लगाई थी. शीला दीक्षित ने इन कंपनियों का साथ दिया और बरजिंदर सिंह के रिटायर होते ही ऐसे नए अधिकारी की नियुक्ति की जिसने बिजली के दाम बढ़ाने का आदेश पारित कर दिया.
.निजी कम्पनिओं को बिजली सप्लाई और बिल वसूली का ठेका दिया गया है| इन्हें बेशकीमती सरकारी जमीन कोडिओं के मूल दी गई है | आये दिन बिजली उत्पादन में खर्चा ज्यादा होने की दुहाई देते हुए बिजली की दरें बड़ा दी जाती है| केबिनेट में मुद्दा उठाने और चीफ मिनिस्टर द्वारा दखल देने के बावजूद उपभोक्ता को राहत के बजाये परेशानी ही मिल रही है| अभी भी दिल्ली में कंपनियां अनापशनाप बिजली के बिल भेज रही हैं| इन कम्पनिओं के दावों का आडिट तक नहीं कराया जा रहा |बेशक ये निजी कम्पनियाँ हैं मगर चीफ मिनिस्टर चाहें तो इनका आडिट कैग से कराया जा सकता है और उसके आधार पर बिजली की दरें तय की जा सकती हैं|लेकिन आरोप है कि ऐसा कुछ भी नहीं किया जा रहा |इससे लोगों को खासी परेशानी का सामना करना पड़ा रहा है। बिजली कंपनियों के दफ्तरों में लोगों की कोई सुनवाई नहीं हो रही है और बिल जमा न करने पर उनकी बिजली काटने की धमकी दी जा रही है| मुख्यमंत्री द्वारा दिए गए जांच के आदेश भी बेमानी साबित हो रहे हैं| इससे गरीब उपभोक्ताओं में स्वाभाविक असंतोष व्याप्त हो रहा है जिसे आज अरविन्द केजरीवाल ने सफलता पूर्वक भुना लिया

डाक्टर मन मोहन सिंह ने आज खुल कर विकास की बांसुरी बजाई

प्रधान मंत्री डाक्टर मन मोहन सिंह ने आज खुल कर विकास की बांसुरी बजाई और देश वासिओं को मोहने का प्रयास किया|आज टी वी चेनलों पर सीधे प्रसारण में डाक्टर मन मोहन सिंह ने राष्ट्र के नाम सन्देश दिया| अर्थ शास्त्री होने के बावजूद उन्होंने एक कुशल राजनीतिक की भांति जहां देश के लिए वित्तीय सुधारों को जरुरी बताया वहीं विपक्ष को भी निशाने पर रखा |
पी एम् ने राष्ट्र के नाम हिंदी और अंगरेजी में सन्देश दिया संभवत पहली बार उन्होंने हिंदी में संबोधन किया |चूंकि हिंदी बेल्ट में ज्यादा असर दार तरीके से कल के भारत बंद को सफल बनाया गया है इसीलिए हिंदी में सन्देश देते हुए उन्होंने बंद को अनावश्यक और बहकाने वाला बताया|उन्होंने डीजल+गैस की कीमतों में बढोत्तरी और ऍफ़ डी आई को देश के लिए जरुरी बताते हुए कहा कि
[१] देश में जरुरत का ८०%तेल को विदेशों से आयात किया जाता है| वहां तेल के दामो में बढोत्तरी होने से हमारे देश में उसका असर पड़ना लाजमी है अभी तक सरकार ने कीमतें बड़ा कर आम जनता पर कोई बोझ नहीं पड़ने दिया मगर अब १७/=प्रति लीटर दाम बदने पर केवल ५/= हे बढाये गए है| शेष राशि को सरकार द्वारा व्यय किया जा रहा है|अभी तक देश में डीजल का प्रयोग उद्योगों के अलावा महंगी गाडिओं में भी प्रयोग किया जाता है और महंगी गाड़ियों के लिए डीजल पर सब्सिडी देना उचित नहीं है|
[२]केरोसीन आयल गरीब आदमी द्वारा यूज किया जाता है इसीलिए उस पर कोई दाम नहीं बढाये गए हैं|पेट्रोल पर भी बोझ का किया गया है|
|[३]५०% जनता द्वारा साल में ६ से कम सिलेंडर ही यूज किये जाते हैं इसीलिए हमने ६ सिलेंडरों पर सब्सिडी को जारी रखा है|
[४ ]विदेशी निवेश को खुदरा व्यापार में जरुरी बताते हुए उन्होंने कहा कि ऍफ़ डी आई से किसी को कोई नुक्सान नहीं होगा|इस विषय में लोगों को गुमराह किया जा रहा है| पैसा पेड़ों पर नहीं लगता | विदेशी निवेश जरुरी है जिससे नवजवानों को नौकरियां मिलेंगी|पूरे विश्व में आर्थिक मंदी का दौर चल रहा है|यहाँ तक कि चीन भी इससे अछूता नहीं रहा है|१.४० लाख हज़ार करोड़ का वित्तीय घाटा २ लाख करोड़ तक पहुँचने के कगार पर पहुँच गया इससे विदेशों में साख गिरने का खतरा भी उत्पन्न हो गया |ऐसे में विदेशों से कर्ज़ लेने के लिए अपने खर्चे स्वयम उठाने जरुरी हैं |उन्होंने विदेशों का उदहारण देते हुए बताया कि अनेक देशों में मंदी के असर से जूझने के लिए वहां तनख्वाहें और पेंशन कम की जारही है |ऐसी स्थिति को में देश में नहीं आने दे सकता|
इस अवसर पर उत्साह से भरे पी एम् ने विपक्ष पर भी प्रहार किये उन्होंने कहा कि विरोधिओं द्वारा देश को गुमराह किया जा रहा है|१९९१ में भी यही किया गया था मगर ये झूठे साबित हुए अभी भी ये गलत ही साबित होंगें|उन्होंने कहा कि उनकी सरकार आम आदमी की सरकार है और आम आदमी के विकास और कल्याण के लिए काम करती रहेगी|इसके लिए उन्होंने विशवास+सहयोग और समर्थन का आग्रह किया |
डाक्टर मन मोहन सिंह को बीते दिनों विदेशी और देशी मीडिया द्वारा सायलेंट मोड़+ लेम डक+दब्बू और फिसड्डी कहा जा रहा था लेकिन आज पी एम् ने इन सारे अलंकरणों को अनावश्यक गैर जिम्मेदाराना आरोप और छवि को खराब करने वाले साबित करते हुए पूरे आत्मविशवास से अपने चुनावी घोषणा पत्र को समय सीमा में पूरा करने का वायदा दोहराया

सरकार की मजबूती से शेयर बाज़ार भी उत्साहित

भारत बंद के बावजूद भी ऍफ़ डी आई के लिए अधिसूचना जारी किये जाने से निवेशकों का हौंसला लौटने लगा है| आज सुबह घरेलू बाजारों ने मजबूती के साथ शुरुआत की है।
सेंसेक्स ६२ अंक के साथ १८४११ और निफ्टी 23 अंक लेकर 5577 पर खुले हैं।
आईटी अभी गति नहीं पकड़ पाई है|
केंद्र सरकार ने सभी किन्तु परंतुओं को दरकिनार करते हुए एविएशन, मल्टीब्रैंड में एफडीआई पर नोटिफिकेशन जारी कर दिया है।
इसी के फलस्वरूप लगातार घाटा झेल रही किंगफिशर एयरलाइंस+ स्पाइसजेट और जेट एयरवेज के शेयर्स भी चडते दिखाई दिए हैं।

भारत बंद की सफलता या असफलता का आंकलन शुरू हो गया है

कल के भारत बंद से हुए लाभ या हानि बंद सफल या असफल का आंकलन शुरू हो गया है|भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) से लेकर वामपंथी पार्टियों द्वारा आहूत और व्यापार संघों द्वारा समर्थित इस एक दिवसीय देश व्यापि हड़ताल से सामान्य जनजीवन प्रभावित हुआ और सड़क परिवहन+ रेलवे, फैक्टरी+ खनन, छोटे और बड़े दुकान दार+ शिक्षण संस्थान और अस्पतालों का काम काज अवरुद्ध हुआ।
आर्थिक सामाजिक और राजनीतिक पंडित द्वारा अपने अपने नज़रिए से इसका आंकलन किया जा रहा है | डीजल+रसोई गैस और ऍफ़ डी आई को भी बाँट कर ही देखा जा रहा है| जहां तक आर्थिक हानि का सवाल है

आर्थिक हानि

भारतीय उद्योग परिसंघ [सी आई आई]ने इस देश व्यापि हड़ताल से सवा दो अरब डालर अर्थार्त साड़े बारह हज़ार करोड़ भारतीय रुपयों की हानि का अनुमान लगाया है| जबकि एक अन्य संस्था एसोसिएटेड चैम्बर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (एसोचैम) ने 10 हजार करोड़ के नुकसान का अनुमान व्यक्त किया है|शेयर मार्केट भी सहमा सा ही रहा जोकि शाम तक उभर नहीं पाया |सेंसेक्स १४६ अंक और निफ्टी ४५ अंक लुडक कर बंद हुए| |कनफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (सीएआईटी) के राष्ट्रीय महासचिव प्रवीण खंडेलवाल के अनुसार देश भर के लगभग पांच करोड़ कारोबारी प्रतिष्ठानों में काम काज बंद रहा| श्री खंडेलवाल ने दावा किया है कि देश भर के 25 हजार से अधिक व्यापार संघ हड़ताल में शामिल हुए। |
सूचना एवं प्रसारण मंत्री अम्बिका सोनी ने भी हड़ताल से छोटे व्यापारिओं के पेट पर लात मारे जाने पर चिंता व्यक्त की है| स्वयम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बेनर्जी ने इसे अर्थ नाश की संज्ञा दी है|अब यह कहना अनुचित नहीं होगा कि भारत बंद हुआ और उससे आर्थिक हानि भी हुई \

सरकार पर असर

केंद्रिय वित्त मंत्री पी. चिदम्बरम ने कहा कि हड़ताल से अर्थव्यवस्था प्रभावित हुई है, लेकिन उन्होंने दोहराया कि सरकार सुधार का फैसला वापस लेने पर विचार नहीं कर रही है।
श्री चिदम्बरम ने कहा कि लोकतंत्र में सरकारी नीति का विरोध करने का सबको अधिकार है। लेकिन जिस प्रकार का यह विरोध हैं वह दुखद है| इससे देश को भारी नुकसान होगा।
सम्ब्व्थ इसी नुक्सान की भरपाई के लिए सरकार ने ऍफ़ डी आई के लिए अधिसूचना[नोटिफिकेशन]जारी कर दिया है|

औद्योगिक संगठनों पर असर

इनका कहना है कि सरकार को राजनीकि दबाव में सुधार के फैसले से पीछे नहीं हटना चाहिए।
सीआईआई के अध्यक्ष आदि गोदरेज ने उम्मीद जताई है कि विभिन्न पार्टियां देश में प्रतीक्षित आर्थिक सुधारों के लिए काम करेंगी।
सीआईआई का मानना है कि , सुधार के सरकार के फैसले के सकारात्मक पहलुओं के बारे में आम आदमी को बताया जाना जरूरी है।

राजनीतिक असर

केंद्र सरकार ने इस बंद का मजाक उड़ाया है| कानून मंत्री सलमान खुर्शीद और पी एम् ओ मंत्री नारायण सामी ने अपने पीछे भाग रही मीडिया की भीड़ से व्यंगात्मक शैली में पूछा कहाँ बंद है?आप लोग मौजूद है हम काम कर रहे हैं| गाड़ियां चल रही है फिर बंद कहाँ है?
वित्त मंत्री पी चिदम्बरम ने एक कदम आगे जाते हुए बताया कि सरकार को कोई खतरा नहीं है सरकार के पास पहले भी दोस्त थे अभी भी सरकार को नीतियों पर सहयोग करने वाले नए दोस्त मिल गए हैं।

बंद से बाहर

यदपि कंग्रेस शासित प्रदेशों में भी बंद का असर देखा गया मगर ऍफ़ डी आई के मुद्दे पर केंद्र सरकार को तलाक से पहले सेपरेशन देने वाली टी एम् सी ने बंद से स्वयम को अलग रखा है| सी एम् सुश्री ममता बेनर्जी की दलील हैकी उनका प्रदेश पहले ही कर्जे में डूबा है ऐसे में बंद से और हानि होगी | उन्होंने बंद से बंगाल का नाश होना बताया है|
एन डी ऐ की सहयोगी शिव सेना ने बंद से महाराष्ट्रा को अलग रखने की अपील की थी |इसके लिए गणेश चतुर्थी के उत्सव को कारण बताया गया है|
इस बंद से बेशक यूं पी ऐ को नए दोस्त मिल गए हों मगर दूसरी तरफ भारतीय राजनीति में अलग अलग राग अलापने वाले धुर्र विरोधी धड़े एक ही सुर में सुर मिलाने लग गए हैं|एक अनुमान के अनुसार छोटी बड़ी लगभग ४० पार्टियाँ एक जुट हो गई हैं| सपा और वाम पन्थियो ने बेशक भाजपा से दूरी बनाए रखने का प्रयास किया मगर अपने दल की शासित प्रदेश यूं पी में भाजपा के साथ मिल कर बंद को सफल बना दिया|

डीजल,एल पी जी की कीमत और ऍफ़ डी आई के विरोध में मेरठ में व्यापक बंद

लगता है की भैंस के आगे बीन बजाने के दिन बीत गए तभी सी सी एस यूनिवर्सिटी के छात्र भैंस के आगे ट्रम्पेट बजा कर अपना विरोध प्रगट कर रहे हैं|

This Picture Shows The Results Of Today,s Agitation

Burning Of Effigies Is The Prime Formality Of Any Agitation


केंद्र सरकार की कोयला+डीजल +एल पी जी और ऍफ़ डी आई आदि की नीतिओं के विरोध में आज मेरठ में व्यापक बंद हुआ| बाज़ार+सिनेमाघर+पेट्रोल पम्प और अधिकाँश स्कूल भी बंद रहे|यदपि आन्दोलन शान्ति पूर्वक रहा मगर एक दो स्थानों पर दवा व्यापारिओं आदि ने बंद का विरोध किया और जबरन बंद कराने वालों के साथ हाथा पाई भी हुई |सुबह सिटी स्टशन पर शालीमार और खतौली में नौचंदी एक्सप्रेस ट्रेन्स रोक कर विरोध जताया गया|

ड्रीम लाईनर दूरी की उड़ानों में सस्ता है मगर छोटी घरेलू उड़ानों पर लगाया


पूर्व घोषणा के अनुसार पहला बोइंग 787 ड्रीमलाइनर प्लेन दिल्ली से चेन्नई के बीच घरेलू उड़ान के लिए उड़ाया गया। चेन्नई एयरपोर्ट पर लैंड करने पर इसे महाराजा का स्टेटस देते हुए वॉटर कैनन सैल्यूट दिया गया और पारंपरिक तरीके से पूजा की गई। प्लेन के कैप्टन ए. एस. सोमन थे| यद्यपि इसमें २५०+सीटें है मगर पहली उड़ान में इस पर 118 पैसेंजर सवार थे। लौटते समय केवल 92 पैसेंजरों के साथ इसने दिल्ली के लिए उड़ान भरी। एक आधिकारिक प्रेस रिलीज में और कम्पनी की साईट पर कहा गया,है कि शानदार डिजाइन वाला एयर इंडिया का बोइंग 787 ड्रीमलाइनर आसमान में सबसे एडवांस्ड एयरक्राफ्ट है। इसके पंखों, पिछले हिस्से और डेक को इस तरह तैयार किया गया है कि दूसरों के मुकाबले यह ईंधन की काफी कम खपत करता है।इस यान को प्राप्त करने वाला भारत विश्व में पांचवा देश बन गया है|
इतना आधुनिक और महंगा ड्रीमलाइनर बोइंग विमान में बुधवार को संचालन के पहले ही दिन तकनीकी गड़बड़ी आ गई। विमान का एसी फेल हो गया। नतीजतन उड़ान में दो घंटे की देरी हुई। बाद में इंजीनियरों ने खराबी दूर की, तब जाकर विमान को बेंगलूर के लिए रवाना किया जा सका। वहीं, दूसरा ड्रीमलाइनर विमान भी एयर इंडिया के बेड़े में शामिल हो गया है।
विमान को आइजीआइ एयरपोर्ट से दोपहर 4.30 बजे उड़ान भरना था, लेकिन खराबी की वजह से इसे शाम 6.30 बजे रवाना किया गया।
एयर इंडिया का पहला बोइंग विमान आठ सितंबर को दिल्ली लाया गया था। एयर इंडिया ने विमान निर्माता कंपनी बोइंग को 27 विमान काऑर्डर दिया है। सारे विमान एयर इंडिया को साल 2016 तक आपूर्ति किए जाने हैं|।एयर इंडिया को बोईंग ७८७ मिलना शुरू हो गए हैं| सरकारी विमानन कम्पनी एयर इंडिया को बुधवार को दूसरा बोइंग 787 ड्रीमलाइनर मिल गया। कम्पनी इस विमान के साथ ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण पूर्व एशिया के नए गंतव्यों के लिए उड़ान शुरू करने पर विचार कर रही है।
तीसरा विमान महीने के आखिर में मिल जाने की उम्मीद है |इस साल के आखिर तक पांच 787 विमान और कारोबारी साल के आखिर तक सात विमान मिल जाने का अनुमान है।
एयर इंडिया कम ईंधन पीने वाले और पर्यावरण अनुकूल माने जाने वाले इस विमान को हासिल करने वाली दुनिया की पांचवीं कम्पनी है।

विमान बिना उतरे 16 हजार किलोमीटर तक लगातार उड़ सकता है।

कम्पनी इस विमान को मध्यपूर्व, यूरोप, एशिया और ऑस्ट्रेलिया के कई मार्गो पर लगाना चाहती है। कम्पनी को पहला ड्रीमलाइनर चार सालों की देरी से आठ सितम्बर को मिला। कम्पनी को पहली आपूर्ति मई 2008 में होनी थी।
लगातार घाटे में जारही एयर इंडिया की साख पर आजकल बड़े बड़े प्रश्न चिन्ह लगाये जा रहे हैं|बड़े बड़े बैल आउट पैकेज के बाद भी इस महाराजा की माली हालत बिगड़ती जा रही है| प्रबंधन में मिस मेनेज मेंट + पायलटों की हड़ताल और सुधारात्मक रिपोर्टों पर अम्ल में देरी से एयर इंडिया के डिसबेंडमेंट की मांग तक उठने लगी है|इस पर इतने महंगे २७ ड्रीम लाइनर्स के खरीद केलिए चार साल पहले आर्डर्स दे दिए गए|लेकिन कंपनी ने ये ड्रीम पूरा करने में ढील दिखाई अब चार साल बाद दो यान भारत में लैंड कराये गए हैं|इन प्लेन्स को लाने की इतने जल्दी दिखाई गई है कि नीचे लिखे तथ्यों को दरकिनार कर दिया गया है|
[१]अन्तराष्ट्रीय उड़ानों के लिए अभी तक उड़ान योजना और चालक दल के प्रशिक्षण की योजना जल्द तैयार की जानी है|
[२]इतने मंहगे और इतनी सुविधाओं से सुसज्जित ये यान लम्बी दूरी के लिए उपयोगी बताये जा रहे हैं लेकिन इन्हें कम दूरी की घरेलू उड़ानों पर लगाया जा रहा है|
[३]पहली उड़ान में ही ५०% से भी कम सीटें भरी जा सकी वापिसी पर तो और भी कम यात्री ही आये |
[४]बोईंग ड्रीम लाइनर कम्पनी ने यानों की डिलीवरी को चार साल तक टाला है इसके लिए हर्जाने का प्रावधान होने पर भी अभी तक हर्जाना फायनल नहीं किया जा सका है|
[५] प्लेन्स की मेंटिनेंस के लिए भारत में कोई प्रशिक्षित नहीं किया जा सका है

इतने सारे किन्तु परन्तु होने पर भी इतने महंगे यानों को घाटे वाले रूट्स पर उड़ाने के पीछे कौन सी सुधारात्मक नीति है इसका जवाब एयर इंडिया द्वारा दिया जाना भी जरुरी है| वैसे समय रहते अगर इसका आडिट करा लिया जाना भी श्रेयकर होगा

भारत बंद के आह्वाहन से बाज़ार सहमा :शुरुआती गिरावट दर्ज़

राजनीतिक अस्थिरता का असर बाज़ार पर पड़ना शुरू हो गया है| आज भारत बंद का अहवाह्न है|सम्भवत इसीलिए भारतीय बाजारों की शुरुआत तेज गिरावट के साथ हुई है। सेंसेक्स 200 अंकों और निफ्टी में 60 अंकों तक की शुरूआती गिरावट देखी गई है।अस्थिरता के अलावा एशियाई बाजारों की गिरावट और भारतीय रुपये की कमजोरी ने भी असर डाला है| एफएमसीजी शेयरों में आई खरीदारी से बाजार में बड़े पैमाने पर गिरावट हावी नहीं हो पाई है।
फिलहाल बीएसई का 30 शेयरों वाला प्रमुख इंडेक्स सेंसेक्स 134 अंक यानि 0.7 फीसदी की गिरावट के साथ 18,362 के स्तर पर कारोबार कर रहा है। वहीं एनएसई का 50 शेयरों वाला प्रमुख इंडेक्स निफ्टी 49 अंक यानि 0.9 फीसदी की कमजोरी के साथ 5,550 के स्तर पर कारोबार कर रहा है।

एल पी जी पर ममता ने व्यंग किया और केंद्र ने मारी चोट

केंद्र सरकार को निष्ठुरता से छोड़ कर राजनीतिक पंडितों को धत्ता बताने वाली पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री एवं तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख ममता बनर्जी ने आज केंद्र सरकार का मजाक उड़ाया |उन्होंने व्यंग्य कसते हुए कहा है कि सरकार
blockquote>रियायती मूल्य पर सिर्फ छह सिलेंडर उपलब्ध करवाकर लोगों को डायटिंग सिखा रही है।

ममता ने आज [बुधवार] को संवाददाता सम्मेलन में कहा कि केंद्र सरकार प्रति परिवार प्रति वर्ष रियायती दर सिर्फ छह सिलेंडर उपलब्ध करवाकर लोगों को डायटिंग करना सिखा रही है। सरकार चाहती है कि हम उपवास करें। सिर्फ छह सिलेंडर से कोई भी परिवार कैसे गुजारा कर सकता है? उन्होंने सिलेंडरों की संख्या छह से बढ़ाकर 24 किये जाने की मांग की है|
सुश्री ममता ने सरकार पर नाटक करने का आरोप भी लगाया और कहा कि मुझे प्रधानमंत्री कार्यालय की तरफ से कोई सूचना नहीं मिली थी। जबकि मैंने अपने फैसले के विषय में कांग्रेस प्रमुख सोनिया गांधी को पहले ही बता दिया था।
मुख्यमंत्री ने बहुब्रांड रिटेल में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) के मुद्दे पर सरकार पर तत्कालीन वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी[अब राष्ट्रपति] के वादे से मुकरने का आरोप लगाते हुए कहा कि इस पर फैसला आम सहमति से होना चाहिए।
ममता ने मंगलवार को संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार से समर्थन वापस लेने का ऐलान किया। केंद्र सरकार में शामिल उनके मंत्री शुक्रवार को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को अपना इस्तीफा सौंपेंगे। ममता ने कोलकाता में पार्टी के सांसदों एवं मंत्रियों की बैठक के बाद यह निर्णय लिया था।ममता ने डीजल की कीमतों में हुई वृद्धि और बहुब्रांड रिटेल में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) के मुद्दे पर केंद्र सरकार को 72 घंटे की मोहलत दी थी लेकिन केंद्र सरकार के रुख में कोई बदलाव न आने पर उन्होंने यह फैसला किया

उधर कांग्रेस ने भी पहले की लकीर को छोटा करके केलिए उसके समक्ष बड़ी लकीर खीचने की अपनी परम्परा को जारी रखा है|कांग्रेस नेता जनार्दन द्विवेदी ने आज घोषणा करते हुए बताया कीकांग्रेस शासित १० प्रदेशों में छह के स्थान पर ९ सिलेंडरों का वितरण किया जाएगा|तीन अतिरिक्त सिलेंडरों पर सब्सिडी का भार राज्य सरकार द्वारा उठाया जाएगा|
इसके जवाब में बंगाल के नेता एन गुप्ता का कहना है की राज्य सरकार पहले ही ढाई लाख करोड़ का कर्जा है|२२ हज़ार करोड़ प्रति वर्ष ब्याज दिया जाना है|केंद्र सरकार कोई छूट देने को तैयार नहीं है ऐसे में तीन सिलेंडरों पर सब्सिडी की प्रतिपूर्ति केंद्र द्वारा कराई जानी चाहिए|

महंगाई दर की दहाई ने नीतिओं पर लगे प्रश्न को एन्लार्ज किया


मन मोहन सरकार की आर्थिक मुश्किलें लगातार सुरसा की तरह बडती जा रही हैं| ममता बेनर्जी +मुलायम सिंह यादव + ऍफ़ डी आई मुद्दे के अलावा + डीजल और रसोई गैस की बढ़ी कीमतों के बाद अब महंगाई दर के आंकड़ों ने भी सरकार की नीतिओं पर प्रश्न चिन्ह को और एनलार्ज[ बड़ा] कर दिया है महंगाई दर के नए आंकड़ों के मुताबिक जुलाई के मुकाबले अगस्त महीने में महंगाई दर दो डिजिट्स[ अंकों] में पहुंच गई है.
जुलाई के मुकाबले अगस्त के महीने में आम जरूरत की चीजें और महंगी हो गई हैं| जुलाई में खुदरा महंगाई दर 9.८६% थी जो अगस्त में बढ़कर 10.03 % पर पहुंच गई है. सबसे ज्यादा 20.79 % की बढ़ोतरी रोजाना के इस्तेमाल में आने वाली सब्जियों के दामों में दर्ज की गई है| खुदरा महंगाई दर का ये हाल डीजल और रसोई गैस के दाम बढ़ाए जाने से पहले का है. ज़ाहिर है कि जब डीज़ल और एलपीजी के दाम बढ़ने का असर बाज़ार पर पड़ेगा तो सितंबर महीने की महंगाई दर के आंकड़े और भी सरकार को परेशानी में डालने वाले होंगे|
अभी तक खुदरा छेत्र में विदेशी निवेश के लाभ तो उसके प्रारम्भ होने के बाद ही दिखाई देंगे मगर अभी खुदरा बाज़ार ऑंखें दिखाने लगा है|इसके लिए कोई उपयोगी नीति के प्रति कोई इच्छा शक्ति दिखाई नहीं दे रहे है|

ममता ने निष्ठुरता से केंद्र सरकार छोडी भारत बंद से भी अलग रहेंगी

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री सुश्री ममता बनर्जी सभी राजनीतिक पंडितों को धत्ता बताते हुए केंद्र सरकार के प्रति निष्ठुर हो गई है| टी एम् सी ने यूं पी ऐ २ से सपोर्ट वापिस लेने की घोषणा कर दी है|शुक्रवार [२१-सितम्बर]को पार्टी के छह मंत्री प्रधान मंत्री को इस्तीफा सौंप देंगें| बेशक इस कदम से केंद्र सरकार के गिरने की संभावनाएं बेहद कम हैं मगर इस एक घटक[१९]के चले जाने से सरकार की निर्भरता पूरी तरह से सा पा और बा सा पा पर हो जायेगी|यह एक संकट की बात हो सकती है| ममता के फैसले के बाद कांग्रेस में सरगर्मी तेज हो गई है। इस मुद्दे पर आज कांग्रेस कोर ग्रुप की बैठक है। आज ही सोनिया गांधी प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और वित्त मंत्री पी चिदंबरम से बात करेंगी।
बेशक डी एम् के ने २० तारीख के भारत बंद का समर्थन करने का एलन किया है मगर सपोर्ट वापिस लेने की कोई बात नहीं कही है| चेन्नई में डीएमके भी इसी सपोर्ट मुद्दे पर बैठक करने वाली है।
कोलकाता में ममता के इस ऐलान से दिल्ली में बैठी यूं पी ऐ सरकार हिल उठी है । अभी तक ममता की बगावती मुद्रा को महज दिखावा माना जा रहा था और समझा जा रहा था कि वो मनमोहन सरकार को किसी परेशानी में नहीं डालेंगी। लेकिन ममता ने सारी उम्मीदों को दरकिनार कर दिया। उन्होंने साफ कर दिया वो अपनी शर्तों पर किसी भी तरीके से झुकने को तैयार नहीं हैं।उनकी पहली ममता आम जनता के साथ है| ममता की तीन शर्तें रखी हैं
[१]ऍफ़ डी आई पर फैसला वापस ले सरकार।
[२]गरीबों को 12 सिलेंडर दे सरकार।
[३]डीजल की कीमतों में रोलबैक हो |
संसदीय समिति की तीन घंटे की मीटिंग के बाद ममता ने साफ कर दिया कि शुक्रवार को रेल मंत्री मुकुल रॉय समेत उनके सभी छह मंत्री इस्तीफा दे देंगे। हालांकि इस ऐलान के साथ ही ममता ने 48 घंटे की ऐसी मोहलत भी दे दी जिसके बाद कांग्रेस भी ये मानने लगी है कि ममता की मांगों पर सहानूभूतिपूर्वक विचार होगा और वो अब भी तृणमूल को अपना अहम सहयोगी मानती है। कांग्रेस अभी भी उम्मीद का दामन नहीं छोड़ना चाहती। ममता ने समर्थन की औपचारिक वापसी के लिए शुक्रवार का दिन तय किया है, यानी कांग्रेस के पास उन्हें मना लेने का कुछ समय है शायद इसीलिए ममता के विरुद्ध अभी तक कांग्रेस के लहजे में कोई तल्खी नहीं आई है|
कांग्रेस के लिए हमेशा ही संकटमोचक की भूमिका निभाने वाली समाजवादी पार्टी पर भी दबाव बढ़ गया है। महंगाई से लेकर एफडीआई जैसे मुद्दों को लेकर सरकार के विरोध का एलान करने वाली एसपी के लिए कांग्रेस का साथ देना फिलहाल मुश्किल लग रहा है। पार्टी ने आरोप लगाया है कि कांग्रेस ने ममता के अल्टीमेटम पर गौर न करके गलती की।प्रोफ़ेसर राम गोपाल यादव ने तो यहाँ तक कह दिया है कि सरकार ने विश्वसनीयता खो दी है मगर सपोर्ट विड्रा पर कोई बयाँ नहीं है|
अब अगर केबिनेट द्वारा पास किया गया ऍफ़ डी आई को निरस्त किया जाता है तब देश और विदेश में भी सरकार की साख गिरेगी|अब केवल प्रधान मंत्री पर ही नहीं बल्कि पूरी सरकार पर ही दब्बू+फिसड्डी +लंगडी बत्तख का आरोप लगेगा|इससे सरकार जरूर बचाना चाहेगी|अपनी सरकार बचाने के लिए डीजल से २य़ा३ रुपयों का रोल बैक और एल पी जी के सिलेंडरो कि संख्या बढाने पर समझौता हो सकता है |इसके संकेत सरकार द्वारा पहले से ही दिए जा रहे हैं|
ममता के इस रुख ने देश की राजनीति में तूफान मचा दिया है। अब घटक या बाहर से समर्थन दे रहे दलों पर भी यह दबाब होगा कि अब बाहर से समर्थन वाली राजनितिक चाल चलने वाले नहीं है|जाहिर है ऐसे में अगले 48 घंटे सिर्फ सरकार के लिए ही नहीं बल्कि पूरे देश के लिए अहम है। तृणमूल के रुख के बाद 20 सितंबर को होने जा रहा भारत बंद अब और भी अहम इस लिहाज से हो गया है क्योंकि इसमें एनडीए से लेकर लेफ्ट, टीडीपी, समाजवादी पार्टी ही नहीं, डीएमके जैसे यूपीए के सहयोगी भी शिरकत कर रहे हैं। यानी यूपीए सरकार को बेहद कड़ी राजनीतिक सयम से इस नई चुनौती का सामना करना है। प्रधानमंत्री डाक्टर मनमोहन सिंह,की अर्थशात्र निपुण टीम और कांग्रेस के पुराने धुरंधर इस संकट कि घड़ी में कितने कामयाब होते हैं यह तो समय बताएगा| और शायद नया इतिहास भी बनेगा|

ममता बेनर्जी ने केवल सपोर्ट ही विड्रा नहीं किया वरन यूं पी ऐ २ की सरकार पर करारे प्रहार भी किये हैं|अपनी प्रेस कांफ्रेंस में बड़ी सफाई से २० तारीख के बंद [सपा+लेफ्ट+भाजपा]से अपने आप को अलग करते हुए जहां एक्ला चलो का संकेत दिया वहीं कांग्रेस पर आरोप भी लागाया कि ज्वलंत कोयला घोटालों से जनता और राज नीतिक पार्टिओं का ध्यान हटाने के लिए ऍफ़ डी आई +डीजल और रसोई गेस को मुद्दा बनाया गया है|सरकार कि यह चल कामयाब नहीं होने दी जायेगी|