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Category: Economy

राबर्ट वढेरा को निशाना बना रहे भाजपाई भी तो बेटी दामाद वाले हैं

झल्ले दी झल्लियाँ गल्लां

एक कांग्रेसी

ओये झल्लेया ये भाजपा वालों को क्या भसूडी पड़ जाती है|अब देखो महाराष्ट्र में खुले सिंचाई घोटाले में आरटीआई कार्यकर्ता अंजलि दमानिया ने व्हिसल ब्लोअर का काम किया|उन्होंने भाजपा के अध्यक्ष नितिन गडकरी और एक सांसद अजय संचेती सम्बन्धी भ्रष्टाचार के केस उजागर किये तो भाजपा ने बेचारी अंजलि के खिलाफ केस दायर कर दिया |अब इसके आधार पर हसाडे प्रवकता जनार्दन द्विवेदी ने प्रेस कांफ्रेंस करके भाजपा अध्यक्ष नितिन गडकरी के खिलाफ जांच की मांग क्या कर दी अब ये सारे चट्टे बट्टे हसाडे बेचारे जवाई बाबू राबर्ट वढेरा के पीछे ही पड़ गए हैं|जवाई बाबू बेचारे सीधे साधे अपना बिजनेस कर रहे हैं तो उन्हें भी राजनीति की दलदल में घसीटा जा रहा है|वैसे जवाई बाबू खानदानी बिजनेस मेन हैं उन्होंने डी एल ऍफ़ से डील करके पैसा क्या कमा लिया ये भाजपाई हसाडी सोनिया जी के भी पीछे हाथ धो कर पड़ गए हैं| ये भी तो बेटी दामाद वाले हैं | ओये ऐसा भी कभी होता है |

राबर्ट वढेरा को निशाना बना रहे भाजपाई भी तो बेटी दामाद वाले हैं


झल्ला

चतुर सुजाण जी आप भी तो गड़े मुर्दे उखाड़ रहे हो|महाराष्ट्र में १९८३ से ठेके लंबित हैं|संचेती को २००७-२००८ में विदर्भ सिंचाई विकास निगम से बांध का ठेका मिला |इसके भुगतान के लिए गडकरी ने आपके पवन बंसल को चिट्टी लिखी बेशक संचेती का नाम आदर्श घोटाले में भी आ चुका है लेकिन आप कहाँ सोये हुए थे |अब नरेन्द्र मोदी ने १८८० करोड़ की यात्राओं का हिसाब माँगा तो आपने उसके जवाब में गडकरी की कुण्डली खंगालनी शुरू कर दी| आप सरकार में बैठे हो और जांच करवाने के बजाये जांच की मांग का नाटक ही तो कर रहे हो | आप तो राजनीतिक शतरंज़ के पुराने घाघ हो आपको पता होना चाहिए कि क्रिया की प्रतिक्रिया और एक्शन का रिएक्शन होता ही है|

उत्तर प्रदेश और दक्षिण भारत के पांच एअरपोर्ट को अंतर्राष्ट्रीय दर्जा :यात्रा भी महंगी हो सकती है

उत्तर प्रदेश और दक्षिण भारत के पांच एअरपोर्ट को अंतर्राष्ट्रीय दर्जा :यात्रा भी महंगी हो सकती है

प्रधानमंत्री डाक्टर मनमोहन सिंह की अध्यक्षता में कैबिनेट की मीटिंग में उत्तर प्रदेश के लखनऊ व वाराणसी तथा दक्षिण भारत के तिरुचिरापल्ली, मंगलूर और कोयम्बतूर समेत देश के पांच हवाई अड्डों को पूर्ण अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का दर्जा 4 अक्टूबर 2012 को दे दिया गया है|.
यह दर्जा पाने के बाद इन पांचों हवाई अड्डों पर सुविधाओं का विस्तार होगा तथा अंतरराष्ट्रीय उड़ानों का दायरा बढ़ जाएगा. इससे इन क्षेत्रों के आर्थिक विकास को गति मिलेगी.लेकिन इसके साथ ही यहाँ करों की वसूली भी बाद जायेगी अर्थार्त यहाँ भी यात्रा महंगी हो सकती है|अगर दिल्ली से तुलना की जाये तो दिल्ली में केवल एक शुल्क ही १३००/= है|:
[१]घरेलू यात्री
[२]अंतर्राष्ट्रीय यात्री 1300/=
+ यूं डी ऍफ़
आधुनिकीकरण के बाद यहां से चीन, कोरिया, सिंगापुर, हांगकांग, मलेशिया, आस्ट्रेलिया, यूरोप, अमेरिका आदि के शहरों को सीधी उड़ानें संभव होंगी.केंद्रीय मंत्रिमंडल ने लखनऊ, वाराणसी, मंगलोर, तिरुचिरापल्ली तथा कोयंबटूर हवाईअड्डों को अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डा का दर्जा दिये जाने के प्रस्ताव को गुरुवार को मंजूरी दे दी।
आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीईए) की बैठक के बाद वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने संवाददाताओं से कहा, ‘ये सभी हवाईअड्डे मध्यम से लंबी दूरी वाले विमानों के परिचालन में सक्षम हैं और रात्रि परिचालन की सुविधाओं से भी युक्त हैं।’ उन्होंने कहा कि हवाई अड्डों को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप उन्नत बनाया गया है और इस घोषणा से घरेलू या अंतरराष्ट्रीय पर्यटन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। साथ ही यह संबंधित क्षेत्र के आर्थिक विकास में भी मददगार होगा। । वित्तमंत्री ने कहा कि इन सभी एयरपोर्ट पर इमिग्रेशन समेत अन्य सुविधाओं का भी विस्तार किया जाएगा। लखनऊ एयरपोर्ट पर फिलहाल एयरबस 300 विमान के सभी मौसमों में उड़ान भरने की सुविधा है। जबकि एयरपोर्ट पर 14 विमानों को पार्क करने की सुविधा है। इंटरनेशनल एयरपोर्ट बनने के बाद विमान पार्किंग की संख्या भी बढ़ेगी। जबकि वाराणसी एयरपोर्ट पर एयरबस 320 विमानों के सभी मौसम में उड़ानें भरने की क्षमता है और पांच विमानों की पार्किंग की सुविधा है। वाराणसी से देश की सरकारी और निजी एयरलाइनों के साथ दो विदेशी थाई एयरवेज और कास्मिक एयरवेज अपनी उड़ानें संचालित करते हैं।
नागर विमानन मंत्रालय ने इन हवाई अड्डों को अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का दर्जा दिए जाने का प्रस्ताव किया था। मेरठ में हवाई पट्टी के विस्तारीकरण का प्रस्ताव सारे आश्वासनों के बावजूद लंबित है|

राबर्ट वढेरा ने कलोनाईज़र को फायदा पहुंचा कर अपना घर भरा:कांग्रेस बोली केजरीवाल झूठे हैं

इंडिया अगेंस्ट करप्शन के नेता अरविंद केजरीवाल ने अब यूं पी ऐ अध्यक्षा श्रीमति सोनिया गांधी के दामाद और श्रीमति प्रियंका गांधी के पति रॉबर्ट वाड्रा पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए हैं| कांग्रेस ने तत्काल इसे नकार कर आरोप लगाने वालों को झूठा करार दे दिया| श्री केजरीवाल ने श्री वाड्रा पर आरोप लगाया है कि उन्‍होंने डीएलएफ से बिना ब्‍याज के लोन लिया और बदले में कंपनी को गैरकानूनी तरीके से फायदा पहुंचाया\ कांग्रेस की ओर से कहा गया है कि झूठे आरोप लगाना केजरीवाल की पुरानी आदत है। भ्रष्टाचार और कालेधन को लेकर सरकार पर अक्सर हमला बोलने वाले जनता पार्टी के अध्यक्ष सुब्रह्माण्यम स्वामी ने कहा है कि नेताओं पर आरोप लगाने से कुछ नहीं होता। आरोपों को लेकर जनहित याचिका दायर की जानी चाहिए |
आरोप लगाया गया है कि रॉबर्ट ने
[१] 2007 से 2010 के बीच प्रॉपर्टी खरीदी।
[२] डीएलएफ ने बिना कोई सिक्योरिटी लिए और बिना ब्याज वसूले वाड्रा को लोन दिया। यहीं नहीं
[३]डीएलएफ ने अपनी कई महंगी प्रापर्टियों को कौडि़यों के भाव पर वाड्रा और उनकी कंपनी को बेचा। सवाल यह है कि
[४] डीएलएफ ने वाड्रा पर इतनी मेहरबानी क्यों की। उनका आरोप है कि
[५] डीएलएफ ने कांग्रेस शासित राज्यों में खुद को प्रमोट करने के लिए वाड्रा का सहारा लिया।श्री केजरीवाल का आरोप है कि अनेकों कंपनियों के माध्यम से यह करोड़ों का घालमेल किया गया।
[६] इनमें से 5 कंपनियों में वाड्रा और उनकी मां का भी हिस्सा है।
[७] डीएलएफ ने गुड़गांव में 10 करोड़ के लागत वाले अपार्टमेंट को 75 लाख रुपये में वाड्रा को बेचा।
[८]इसके अलावा ग्रेटर कैलाश में एक करोड़ रुपये का फ्लैट खरीदा गया है। जबकि उसकी वास्तविक कीमत पांच करोड़ रुपये से अधिक है। जबकि
[९] बीकानेर में जमीन खरीदी गई है।
[१०]मानेसर में 15 करोड़, पलवल में 42 लाख, मेवात में 76 लाख और 69 लाख रुपये की प्रॉपर्टी खरीदी गई है। ये सारी फंडिंग डीएलएफ के माध्यम से हुई है।
[११]इसके अलावा साकेत में हिल्टन होटल 150 करोड़ रुपये में खरीदा गया जिसकी कीमत उस समय 300 करोड़ रुपये से ज्यादा थी और वर्तमान में 500 करोड़ रुपये से ज्यादा है। वहीं केजरीवाल के सहयोगी शांति भूषण ने कहा है कि अब वाड्रा के खिलाफ जांच की आवश्यकता नहीं है क्योंकि उनका अपराध साबित हो चुका है। अब उनके खिलाफ सीधी कार्रवाई होनी चाहिए
इससे पूर्व भी अरविन्द की टीम ने १५ मंत्रिओं पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाये हैं| उसके विषय में भी जांच की मांग को दोहराया गया| उन्‍होंने मांग की कि अभी जो आरोप लगाए जा रहे हैं, उसकी भी जांच होनी चाहिए.वरिष्‍ठ वकील और पूर्व केंद्रीय मंत्री शांति भूषण ने कहा कि देश में जो हो रहा है, वह हैरान करने वाला है.|
शांति भूषण ने इस घोटाले को ‘रॉबर्ट वाड्रा घोटाला’ या ‘सोनिया गांधी के दामाद का घोटाला’ नाम दिया है
शुक्रवार को एक संवाददाता सम्मेलन में केजरीवाल के सहयोगी एवं प्रसिद्ध अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने कहा कि आखिर क्यों डीएलएफ ने वाड्रा को बगैर ऋण व बगैर सुरक्षा राशि के यह रकम दी?
प्रशांत ने रजिस्ट्रार ऑफ इंडिया से मिले दस्तावेजों के आधार पर यह आरोप लगाये गए हैं|
उन्होंने कहा कि वाड्रा की कंपनियों को पहले डीएलएफ ने सस्ता ऋण दिया और फिर इसके द्वारा अपनी सम्पत्तियों को कौड़ियों के मोल बेच दिया। भूषण ने आरोप लगाया कि वाड्रा को सस्ती जमीन देने के कारण दिल्ली एवं हरियाणा की सरकारों ने डीएलएफ के लिए भूमि अधिग्रहण किया। उन्होंने कहा कि हम इस पूरे मामले की जांच की मांग करते हैं।
गौरतलब है कि २ अक्टूबर को केजरीवाल ने दो बड़ी हस्तियों के खिलाफ भ्रष्टाचार के सबूत पेश करने की बात कही थी आज उसी कड़ी में श्री वढेरा के खिलाफ आरोप लगाए गए हैं| केजरीवाल ने कहा कि वे 10 अक्टूबर को इसी तरह एक और शख्सियत के खिलाफ सबूत पेश करेंगे।

बाज़ार का एरो लगातार हरा रंग [ऊपर] दिखाने के बाद आज लाल रंग[नीचे] में तब्दील हो गया|

सरकार के आर्थिक सुधार से जुड़े फैसलों की घोषणा करने की वजह से लगातार हरा एरो[ऊपर] दिखाने वाला इंडेक्स आज लाल रंग[नीचे] में तब्दील हो गया| शुरुआत में बाजार में तेजी दिखी लेकिन उसके बाद बाजार में मुनाफावसूली का दौर शुरू होने से गिरावट का रुख देखने को मिला। सेंसेक्स 120 अंक की गिरावट के साथ 18,938 के स्तर पर यानि 0.63%और निफ्टी 41 अंक गिरकर 5,747 के स्तर परअर्थार्त ०.७०%पर बंद हुआ।निफ्टी में सर्किट फिल्टर लागू होने और मुनाफावसूली की वजह से भारतीय शेयर बाजार के प्रमुख सूचकांक आज गिरावट के साथ बंद हुए।
बाजार की शुरुआत भी मजबूती के साथ हुई। निफ्टी 5800 के स्तर के ऊपर खुला। इसके बाद बाजार में मजबूती पर कारोबार होने लगा लेकिन अचानक निफ्टी में सर्किट फिल्टर लागू होने की वजह से नेशनल स्टॉक एक्सचेंज में कारोबार अपने-आप रुक गया। इस दौरान निफ्टी 5800 के स्तर के नीचे फिसल गया। सेंसेक्स 18,757 और निफ्टी 4888 लाल निशान पर चले गये। दरअसल एमके ग्लोबल के 59 गलत सौदों की वजह से निफ्टी में सर्किट फिल्टर लागू हो गया, जिससे एक्सचेंज का कारोबार रुक गया था।९.५५ से १०.०५ तक कारोबार प्रभावित रहा हालाँकि एनएसई के स्पष्टीकरण के बाद 10:05 बजे बाजार में दोबारा खरीद-बिक्री शुरू हो गयी और बाजर वापस हरे निशान पर लौट आया लेकिन जल्द ही अपनी बढ़त गँवा कर लाल निशान पर चला गया। इस दौरान अनेकों निवेशकों को भारी हानि होने के भी समाचार हैं|

बाज़ार का एरो लगातार हरा रंग [ऊपर] दिखाने के बाद आज लाल रंग[नीचे] में तब्दील हो गया|

किंग फिशर के जहाज उड़ाने वालों ने आज सडकों पर जुलुस निकाला

किंगफिशर एयरलाइंस के कर्मचारियों ने आज शुक्रवार को मुम्बई की सडकों पर जुलूस निकाला और अपने सात माह से लम्बित वेतन और अन्य बकायों के भुगतान की मांग की। कल केंडल मार्च भी निकाला गया था |१२ अक्टूबर तक उड़ानें न शुरू होने की खबर से किंगफिशर एयरलाइंस का शेयर भी 4.७ % टूटा
गौरतलब है कि बीते दिन किंगफिशर प्रबंधन ने अपनी आंशिक ताला बंदी को 12 अक्टूबर तक बढ़ाकर हड़ताली कर्मचारियों पर दबाव बनाने की कोशिश की है।संभवत इसी दबाब का जवाब देने के लिए कर्मचारिओं ने आज रैली निकाली|
किंगफिशर के एक कर्मचारी की पत्नी द्वारा आत्महत्या किए जाने के एक दिन बाद , आज कर्मचारिओं में कंपनी +व्यवस्था के प्रति रोष और जनता में सहानुभूति दिखाई दी|
किंगफिशर कर्मचारी की पत्नी की आत्महत्या से कम्पनी के अन्य कर्मचारी सदमे में हैं, क्योंकि उनमें से कई कर्मचारियों को महीनों से वेतन नहीं मिला है

बीमा और फंड्स की कटौती

यहाँ यह बताना भी जरुरी है कि कर्मचारिओं के वेतन से सीधे अनेक प्रकार के फंड्स [पेंशन+बीमा]की किश्त काट कर सम्बन्धित विभागों में +कम्पनिओं में जमा करवाई जाती है ऐसे में सात महीने से वेतन नहीं मिलने से बीमा और फंड्स की किश्त की कटौती भी लंबित हो गई होगी| ये किश्तेंकर्मिओं के परिवार के भविष्य की सुरक्षा के लिए बेहद जरुरी भी हैं| सम्बन्धित विभाग को ये किश्तें जमा नहीं करवाए जाने से कर्मिओं के परिवार का भविष्य भी असुरक्षा के घेरे में आ जाता है|

कंपनी का अड़ियल रुख

कर्मचारी प्रबंधन के उस निर्णय से भी चिंतित हैं, जिसके तहत आंशिक बंदी एक सप्ताह और बढ़ा दी गई है।
आधी रात से ठीक पहले बंदी की मियाद बढ़ाने के लिए कंपनी ने हड़ताली पायलट, विमान रखरखाव इंजीनियर और तकनीशियन को जिम्मेदार ठहराया है| यह बंदी पहली अक्टूबर से ही लागू है। अब कम्पनी केवल एक माह का वेतन देकर हड़ताल खुलवाने पर अमादा है|
विमानन कम्पनी की ओर से जारी एक बयान में कहा गया है, ”हमें खेद है कि अवैध हड़ताल अभी तक वापस नहीं ली गई है और कम्पनी में सामान्य स्थिति बहाल नहीं हो पाई है, जिसके कारण पूरी कम्पनी का कामकाज लगातार बाधित है।कम्पनी के सचिव राघवन कल इस्तीफा दे चुके हैं|आज 12 अक्टूबर तक उड़ानें न शुरू होने की खबर से किंगफिशर एयरलाइंस का शेयर भी 4.7 % टूटा

मंत्रालय का रुख

उधर सिविल एविएशन मंत्री चौधरी अजित सिंह ने इस पूरे मामले में कर्मिओं को राहत दिलाने में असमर्थता जताई है|फिर भी उन्होंने फ्लाईट्स की सेफ्टी के लिए कंपनी के ऊपर डी जी सी ऐ के प्रतिबंधों का पालन किया जाना आवश्यक कर दिया है|
बताते चलें कि डेकन कंपनी को टेक ओवर करने वाली इस किंग फिशर एयर लाइंस ने यात्रिओं से लगभग ६० करोड़ रुपयों का सर्विस टेक्स वसूला मगर अभी तक

किंग फिशर के जहाज उड़ाने वालों ने आज सडकों पर जुलुस निकाला

जमा नहीं कराया है|इसके अलावा सात माह का वेतन जो कि इस राशि का लगभग दोगुना होगा पेंडिंग है| बाज़ार हेसियत से सात गुना अधिक का कर्जा है|जबकि फ्रीज़ किये गए खातों में बेलेंस केवल ६०० करोड़ ही बताये जा रहे हैं|बैंकों ने इस कम्पनी को बैल आउट पैकेज देने में कोई रूचि नहीं दिखाई गई यहाँ तक कि ऍफ़ डी आई का लाभ भी मिलता नहीं दिख रहा |इस सब के बावजूद कंपनी के प्रति मंत्रालय की नरमी और पीड़ित कर्मिओं के प्रति उदासीनता के चलते आज प्रमुख विपक्षी दल भाजपा ने भी नाराजगी दिखाई है| प्रवक्ता मुख़्तार अब्बास नकवी ने सरकार से तत्काल इस समस्या का समाधान करने को कहा है|

मोदी ने आकाश टेबलेट की घूस मानव संसाधन विकास मंत्रालय को लौटाई

आकाश को लेकर

मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल और गुजरात के मुख्य मंत्री नरेन्द्र मोदी के जबानी जंग जारी है जिसे देखकर तो यही लगता है कि दिल्ली के आकाश से आकाश २ को गुजरात[पाताल] की जमीन पर उतरने में अभी वक्त लग सकता

बताते चलें कि राईट टू एजुकेशन के बाद टेबलेट वितरण कपिल सिब्बल का ड्रीम प्रोजेक्ट है संभवत इसीलिए मोदी ने गाँधी परिवार के नज़दीक कपिल के ड्रीम पर एटैक किया है|
गांधी परिवार पर लगातार हमले करने वाले गुजरात के मुख्य मंत्री नरेन्द्र मोदी ने अब केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल पर आरोप मंडा है कि सिब्बल उन्हें रिश्वत दे रहे हैं और इस रिश्वतखोरी के खिलाफ वे चुप नहीं बैठेंगे| गौरतलब है कि श्री मोदी ने शिक्षक दिवस के अवसर पर कहा था कि आकाश टैबलेट को लेकर कुछ ज्यादा ही चर्चा चल रही है जबकि यह अभी तक जमीन पर नहीं आ सका है. 11 महीने बीत चुके हैं और मुझे अब पता चला कि आखिर इसका नाम ‘आकाश’ क्यों है?उनके इस बयान के बाद कपिल सिब्बल ने नरेंद्र मोदी को ‘आकाश-2’ के दो उन्नत सैट भेजे थे| पता चला है कि नरेंद्र मोदी ने सिब्बल के इस आकाश को लेने से इंकार कर दिया है|अब नरेंद्र मोदी ने कपिल सिब्बल के इसी ट्रांजेक्शन को लेकर टिप्पणी की है कि कपिल सिब्बल उन्हें रिश्वत दे रहे हैं| मोदी ने कहा कि कपिल सिब्बल जनता के पैसों का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं. वह उन्हें टेबलेट के तौर पर घूस देना चाहते हैं | छात्र-छात्राओं को आकाश टेबलेट देने का किया गया वायदा अभी तक पूरा नहीं किया गया है| यह छात्रों के साथ धोखा है|

नरेन्द्र विरोधी

आकाश की वापसी के बाद श्री सिब्बल ने श्री मोदी पर कटाक्ष करते हुए कहा था कि इससे मोदी की शिक्षा विरोधी मानसिकता का पता चलता है और मोदी को अपना नाम बदलकर नरेंद्र विरोधी कर लेना चाहिए। ।
टैबलेट के वापस आने पर सिब्बल ने कहा था कि नरेंद्र मोदी को अपना नाम बदलकर नरेंद्र विरोधी रख लेना चाहिए। इससे पता चलता है कि गुजरात के मुख्यमंत्री की मानसिकता कैसी है। आकाश का मतलब है शिक्षा

टेबलेट में खामियां

खबर यह भी आ रही है कि मोदी के गुजरात में न होने के कारण वह इस पार्सल को नहीं ले पाए। गौरतलब है कि आकाश के पहले संस्करण में कई खामियों के कारण उस पर रोक लगा दी गई थी। जिसके कारण बुकिंग होने के बावजूद आकाश बहुत से लोगों को नहीं मिला पाया था। अब उसके दूसरे संस्करण को उन्नत बताया जा रहा है। लेकिन वह भी अभी तक छात्रों के हाथ नहीं आया है।
मानव संसाधन कपिल सिब्बल आकाश को हमेशा से ही अपनी एक कामयाबी के रूप में देखते रहे हैं। कपिल सिब्बल ने मोदी को आकाश गिफ्ट कर यह दिखाने की कोशिश की थी कि आकाश कहीं नहीं गया है वह तैयार है बस बांटने की देरी है। लेकिन मोदी ने इसे घूस करार देकर नई राजनीतिक बहस की शुरूआत कर दी है। वैसे भी गुजरात चुनाव की तारीख की घोषणा हो चुकी है| इसीलिए मोदी केंद्र पर निशाना साधने का कोई भी मौका चूकना नहीं चाहते।
मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने अपने महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट आकाश-2 टैबलेट पर देश के तमाम महत्वपूर्ण नेताओं की फीडबैक लेने की योजना बनाई है। इसके तहत उसने एक ओर जहां सभी कैबिनेट मंत्रियों को आकाश-2 टैबलेट भेजे हैं वहीं अब सभी मुख्यमंत्रियों को टैबलेट भेजने की तैयारी है।आकाश टैबलेट एक छोटा कंप्यूटर है जिसे देश भर में सस्ती दर पर छात्रों को मुहैया कराने की योजना है. मंत्रालय से जुड़े एक अहम सूत्र के मुताबिक, देश के सभी मुख्यमंत्रियों के नाम लेटर तैयार हो चुके हैं। अगले एक-दो दिनों के भीतर मुख्यमंत्रियों के पास आकाश-2 भेजने का काम शुरू हो जाएगा। मंत्रालय कैबिनेट मंत्रियों की ओर से मिले पॉजिटिव फीडबैक से काफी उत्साहित है। उसे उम्मीद है कि अगर मुख्यमंत्रियों के पास यह टैबलेट भेजा जाता है तो कई राज्य अपने यहां इसे बांटने का फैसला कर सकते हैं।गुजरात की नरेंद्र मोदी सरकार ने मानव संसाधन विकास मंत्रालय के भेजे हुए आकाश टैबलेट पीसी लेने से इनकार कर दिया. मंत्रालय अब इसे कूरियर से मोदी के पास भेजने की योजना बना रहा है.
आकाश टैबलेट को नरेंद्र मोदी ने लेने से इंकार कर दिया है. इस टैबलेट पीसी को मानव संसाधन मंत्री कपिल सिब्बल ने फीडबैक के लिए गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को भेजा था, लेकिन मोदी के लौटा देने के बाद मानव संसाधन मंत्रालय इसे कूरियर से उन्हें भेजेगा.
मोदी के इस बयान से भन्नाए सिब्बल ने मोदी को दो टैबलेट पीसी भिजवाए थे. टैबलेट के साथ ही भेजे गए पत्र में सिब्बल ने मोदी से कहा, आपके बयान ने मुझे निराश किया है, शिक्षा को राजनीति से दूर रखने की जरूरत है, देश के हित में हमें एक साथ मिलकर काम करने की जरूरत है.
सिब्बल की इस नसीहत पर मोदी ने ट्वीट किया कि सस्ते हथकंडों के बजाए सिब्बल देश के छात्रों को वर्ष 2011 में आकाश टैबलेट मुहैया कराने के अपने वादे के बारे में बताएं.

मोदी तो पाताल में रहते हैं

श्री सिब्बल का कहना है कि उन्होंने इस तरह का कोई वादा नहीं किया.अब सिब्बल के भिजवाए हुए टैबलेट को मोदी ने लेने से इंकार कर दिया है तो सिब्बल का कहना है कि मोदी तो पाताल में रहते हैं.
आकाश को लेकर सिब्बल और मोदी के बीच जारी इस जंग को देखकर तो यही लगता है कि आकाश को गुजरात की जमीन पर उतरने में अभी वक्त लग सकता है.

ऍफ़ डी आई के लिए पेंशन ,बीमा और कम्पनी बिलों को केबिनेट की हरी झंडी:ममता संसद में विरोध करेंगी

केबिनेट ने आज गुरूवार को दूसरे दौर के आर्थिक सुधारों को मंजूरी दे दी | आलोचनाओं+ विरोध और विद्रोहों से बेपरवाह प्रधान मंत्री डॉ. मनमोहन सिंह की अगुवाई में यूपीए सरकार की आर्थिक सुधार की रेल बेधड़क दौड़ रही है। गुरुवार को केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में खुदरा कारोबार में विदेश निवेश को मंजूरी और डीजल के दाम बढ़ाने और एलपीजी पर दी जा रही सब्सिडी को सीमित करने के करीब 20 दिनों बाद दूसरे दौर के आर्थिक सुधारों को मंजूरी दे दी गई। आज पेंशन में एफडीआई को हरी झंडी दिखा दी गई और बीमा क्षेत्र में एफडीआई के दायरे को बढ़ाने जैसे अहम फैसले ले लिए गए हैं अब इंश्योरेंस, पेंशन और कंपनी बिल को संसद से मंजूरी दिलानी होगी।
प्रधानमंत्री डाक्टर मनमोहन सिंह की अध्यक्षता में गुरुवार को हुई कैबिनेट बैठक में पेंशन कोष नियमन व विकास प्राधिकरण (पीएफआरडीए) बिल पर विचार करते हुए पेंशन क्षेत्र में 26 % के बजाय ४९% एफडीआई की अनुमति दे दी गई। इसी तरह बीमा कानून संशोधन विधेयक में बीमा क्षेत्र में एफडीआई सीमा को बढ़ाकर 49 % करने का निर्णय लिया गया। इससे पहले यूपीए सरकार ने 14 सितंबर को मल्टी ब्रांड रिटेल में 51 प्रतिशत एफडीआई की मंजूरी दी थी। साथी ही नागरिक उड्डयन क्षेत्र में एफडीआई नियमों में और ढील देने का फैसला किया था। प्रसारण क्षेत्र में भी एफडीआई को उदार बनाया जा चुका है| दूसरे दौर के फैसले से पहले ही मुख्य विपक्षी पार्टी बीजेपी+ तृणमूल कांग्रेस+ समाजवादी पार्टी+बहुजन समाज पार्टी+ बीजू जनता दल +डी एम् के और लेफ्ट बीमा और पेंशन में एफडीआई को मंजूरी का विरोध कर रहे हैं इसके उपरान्त भी पेंशन और बीमा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) को मंजूरी दे दी गई है । आर्थिक मामलों पर कैबिनेट समिति की बैठक आज देर शाम हुई, जिसके बाद इन फैसलों की घोषणा की गई।
इन फैसलों के बाद पश्चिम बंगाल की मुख्‍यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि हम संसद में इन फैसलों का विरोध करेंगे।

ऍफ़ डी आई के लिए पेंशन ,बीमा और कम्पनी बिलों को केबिनेट की हरी झंडी:ममता संसद में विरोध करेंगी

किंग फिशर एयर लाईन्स में हड़ताल और तालाबंदी का असर विदेशी निवेश पर पड़ सकता है

अस्थाई संचालन स्थगित कर चुकी भारी कर्ज संकट में फंसी विमानन कंपनी किंगफिशर एयरलाइंस ने मंगलवार को उड्डयन नियामक से कहा कि वह अगले कुछ दिनों में कर्मचारियों के बकाए का भुगतान कर देगी और उसके बाद संचालन दोबारा शुरू किया जा सकता है।
।डीजीसीए ने किंगफिशर एयरलाइन को गुरुवार[४ अक्टूबर] तक का अल्टीमेटम दिया है। डीजीसीए ने किंगफिशर एयरलाइंस के सीईओ संजय अग्रवाल को कल तलब किया था। एविएशन रेगुलेटर ने कहा है कि किंगफिशर एयरलाइंस गुरुवार तक सेफ्टी प्लान सौंपे और दोबारा ऑपरेशन शुरू करने से पहले उसे डीजीसीए की मंजूरी लेनी होगी। हालांकि संजय अग्रवाल ने भरोसा जताया है कि शुक्रवार तक उसके ऑपरेशन चालू हो सकते हैं। और कुछ हफ्तों में कर्मचारियों को बकाया सैलरी का भुगतान शुरू कर दिया जाएगा।
गौरतलब है कि सोमवार को कंपनी के अभियंताओं का एक गुट सात माह से बकाए वेतन को पांच अक्टूबर तक जारी करने की मांग के साथ अचानक हड़ताल पर चला गया| जिसके कारण कंपनी को अपने सात यानों की सभी 50 उड़ानों का संचालन बंद करना पड़ा। अभियंताओं की मंजूरी

किंग फिशर एयर लाईन्स में हड़ताल और तालाबंदी का असर विदेशी निवेश पर पड़ सकता है

किसी भी विमान के उड़ान पर जाने के लिए आवश्यक होती है।
कर्मचारियों के हड़ताल पर जाने के बाद नागरिक उड्डयन मंत्री चौधरी अजित सिंह ने घोषणा की थी कि वो मान्यता प्राप्त इंजीनियर से कंपनी की जांच कर पता लगाएंगे कि वह महानिदेशालय की सुरक्षा मानकों का पालन करती है या नहीं। विमानन मंत्री ने कहा है कि अगर किंगफिशर ने यात्रियों की सुरक्षा के साथ समझौता किया तो उसे बंद कर दिया जाएगा।
किंगफिशर एयरलाइन ने कहा कि उसने सभी 2000 कर्मचारियों को मार्च तक की सैलरी दे दी है।जबकि मार्च से ओनवर्ड पीरियड के लिए वेतन के लिए यह हड़ताल है|
डीजीसीए के मुताबिक किंगफिशर एयरलाइन के हालात चिंताजनक हैं। दोबारा उड़ान शुरू करने के लिए किंगफिशर एयरलाइन को डीजीसीए के पास आना होगा| किंगफिशर को उड़ानें जारी रखने पर रोजाना 8 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है। वहीं उड़ानें नहीं भरने पर कंपनी को रोजाना 4 करोड़ रुपये का घाटा है |
किंगफिशर के पास इस वक्त 10 विमान [लेकिन परिचालन में ७] हैं । किंगफिशर एयरलाइंस के मुताबिक यूबी ग्रुप लगातार पैसा दे रहा है। गौर तलब है की कम्पनी पर मार्केट वेल्यु से सात गुना अधिक कर्ज़ है|
किंग फिशर के मालिक विजया माल्या २००६-२००७ से ही विदेशे निवेश कि मांग कर रहे हैं और अपनी कम्पनी को उसी आस में नुक्सान उठा कर भी होल्ड किये हुए हैं अब चूंकि विदेशी निवेश को मंजूरी मिल गई है तो इनसे आये दिन की हड़तालें संभाले नहीं संभल रही उलटे डी जी सी ऐ भी नाराज़ बैठा है| इस प्रकार की हड़तालों से किंगफिशर का भविष्य अंधेरे में दिखाई दे रहा है| इस ताला बंदी का असर निवेश पर भी स्वाभाविक रूप से पडेगा| एविएशन सेक्टर में एफडीआई खुलने का फायदा भी शायद ही मिले क्योंकि कंपनी का कर्ज उसके मार्केट कैप से सात गुना है।

पी एम् साहब पैसा पेड़ों पर ही उगता है: एल के आडवानी के ब्लॉग से:

यूं पी ऐ के वयोवृद्ध शीर्ष नेता एल के आडवानी ने अपने एक ब्लाग के टेलपीस में रोचकता के साथ खुदरा व्यापार में ऍफ़ डी आई की वकील पी एम् की टिपण्णी पर कटाक्ष किया है| प्रस्तुत है ब्लाग का टेल पीस : ***खुदरा में विदेशी प्रत्यक्ष निवेश सम्बन्धी अपने फैसले के बचाव में प्रधानमंत्री द्वारा राष्ट्र को सम्बोधित करने सम्बन्धी भाषण में इस टिप्पणी कि ”पैसा पेड़ों पर नहीं उगता” पर बहुत सी दिलचस्प टिप्पणियां की जा रही हैं।मेरे सहयोगी जसवंत सिंह जो एक सेवानिवृत सैन्य अधिकारी हैं, द्वारा ‘दि हिन्दू‘ (28 सितम्बर, 2012) में एक लेख लिखा गया है, जिसमें उनके अपने टैंक-चालक से हुई बातचीत का उल्लेख है। जसवंत सिंह जी का लेख मुझे काफी ज्ञानप्रद लगा। उनके चालक के साथ हुई बातचीत वाला पैराग्राफ मुझे आज के ब्लॉग के टेलपीस के लिए उपयुक्त लगा।
इस आश्चर्य जनक, अनावश्यक फटकार के एक दिन बाद ही अब सेवानिवृत सैनिक मेरे टैंक-चालक का फोन आया जो मेरे साथ कई वर्षों तक टैंक के साथ झुके हुए स्थान पर रातें काट चुका है। मैंने उसका नाम शायद इसलिए छुपा रखा है कि कोई अकुशल इंटेलीजेंस ब्यूरो उसे तंग न करे। अपनी ठेठ शेखावटी बोली और लहजे में बोला ”साहिब” कृपया प्रधानमंत्री को बताओ कि पैसा वास्तव में पेड़ो और पौधों पर ही उगता है; हमें सभी फल, सब्जियां और पशुओं का चारा तथा ईंधन भी एक ‘पेड़‘ से मिलता है। इसलिए उन्हें बताइए कि वह किसानों के बारे में सोचें, न कि उन ‘विदेशियों‘ के बारे में जो दो शताब्दी पूर्व एक कम्पनी के रुप में आए और हमारी जमीन ले ली। एक ‘बिस्वा‘ भी हमारे लिए नहीं छोड़ा।” मैंने उससे वायदा किया कि मैं ऐसा ही करुंगा लेकिन उसको सलाह दी कि वह ऐसे निराशाजनक विचारों से अपने सेवानिवृत जीवन को बिगाड़े नहीं और जैसे हमारे ‘ढाबों‘ ने अमेरिका के मगरुर केटंचुरी के कर्नल को परास्त किया वैसे ही भारत इसे भी परास्त कर देगा। और इस किस्से का एक शब्द भी बनावटी नहीं है।

एल के आडवानी के ब्लॉग से: पैसा पेड़ों पर ही उगता है

एल के आडवाणी के ब्लॉग से:ऍफ़ डी आई पर डाक्टर मन मोहन सिंह भी पलटे हैं

यूं पी ऐ के सर्वोच्च नेता एल के आडवाणी ने अपने ब्लाग में प्रियारंजन दास मुंशी के बाद प्रधानमंत्री डाक्टर मन मोहन सिंह द्वारा अपनी बात से पलटते हुए ऍफ़ डी आई का समर्थन करने का आरोप लगाया है|
प्रस्तुत है श्री आडवाणी के ब्लाग से उद्धत उनका आरोप :
अपने पिछले ब्लॉग में मैंने स्मरण कराया था कि एनडीए सरकार के समय कांग्रेस पार्टी के तत्कालीन मुख्य सचेतक श्री प्रियरंजन दासमुंशी ने खुदरा में विदेशी प्रत्यक्ष निवेश सम्बन्धी योजना आयोग की सिफारिश का संदर्भ देते हुए वाजपेयी सरकार द्वारा ऐसा ‘राष्ट्र-विरोधी‘ काम करने की दिशा में बढ़ने की निंदा की थी।
वाणिज्य मंत्री के रूप में श्री अरूण शौरी ने संसद में तुरंत खड़े होकर यह दोहराया था कि सरकार ऐसे किसी भी प्रस्ताव के पक्ष में नहीं है।
पिछले दिनों सूरजकुंड में सम्पन्न भाजपा की राष्ट्रीय परिषद में आर्थिक प्रस्ताव पर बोलते हुए मेरे सहयोगी श्री वैंकय्या नायडू ने डा0 मनमोहन सिंह द्वारा राज्य सभा में विपक्ष के नेता की हैसियत से लिखे गये एक पत्र को उदृत किया जिसमें इस तथ्य की पुष्टि की गई थी। फेडरेशन ऑफ महाराष्ट्र ट्रेडर्स ने इस संबंध में अपनी चिन्ता से उनको अवगत कराया था। 21 दिसम्बर, 2002 के अपने पत्र में डा0 मनमोहन सिंह ने कहा कि दो दिन पूर्व ही यह मामला राज्यसभा में उठा था। डा0 मनमोहन सिंह लिखते हैं कि ”वित्त मंत्री ने आश्वासन दिया कि सरकार के पास खुदरा व्यापार में विदेशी प्रत्यक्ष निवेश को आमंत्रित करने का कोई प्रस्ताव नहीं है”।डा0 मनमोहन सिंह को सम्बोधित फेडरेशन ऑफ महाराष्ट्र ट्रेडर्स का पत्र खुदरा में विदेशी निवेश पर और ज्यादा आलोचनात्मक है। फेडरेशन की विदेश व्यापार समिति के चेयरमैन सी.टी. संघवी द्वारा लिखे गये पत्र में कहा गया है कि:”श्रीमन् आपको स्मरण होगा कि 2002-03 में देश में खुदरा व्यापार के महत्वपूर्ण विषय के सिलसिले में मुझे फेडरेशन ऑफ एसोसिएशन ऑफ महाराष्ट्र के एक प्रतिनिधिमण्डल के साथ राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष के रुप में आप से मिलने का अवसर मिला था।
हमारे विस्तृत वर्णन से पहले ही आपने साफ तौर पर कहा था कि ‘हम खुदरा व्यापार में विदेशी प्रत्यक्ष निवेश की अनुमति नहीं देने देंगे।‘ आपने आगे उल्लेख किया कि ”भारत को ऐसे किस्म के सुधार की कोई जरुरत नहीं है जो रोजगार पैदा करने के बजाय रोजगार को नष्ट करें।”इसी पत्र में सिंघवी लिखते हैं :
श्रीमन् जैसाकि हमने आपको इन बहुराष्ट्रीय रिटेल श्रृंखला स्टोर संगठनों द्वारा छोटे दुकानदारों (रिटेलों) को प्रतियोगिता में समाप्त करने हेतु (प्रेडटोरी प्राइसिंग) जैसे गलत व्यापारिक हथकण्डे अपनाने के बारे में बताया था। हमारे प्रतिनिधिमण्डल ने आपका ध्यान सूदूर पूर्वी देशों-थाईलैण्ड, मलेशिया, इण्डोनेशिया-जैसे देशों के खुदरा व्यापार पर इस विदेशी प्रत्यक्ष निवेश के पड़ने वाले विपरीत प्रभाव की ओर दिलाया था जिन्होंने 1990 के दशक के अन्त में इसकी अनुमति दी थी।
बाद में, हमारा प्रतिनिधिमण्डल आपसे अनेक अवसरों पर मिला और इस विषय पर विभिन्न सम्बन्धित अधिकारियों को सौंपे गए हमारे विस्तृत ज्ञापनों को भी आपको सौंपा । कुल मिलाकर राष्ट्रीय दृष्टिकोण से इस विषय की गंभीरता के संदर्भ में आपने 18 और 19 दिसम्बर, 2002 को राज्यसभा में यह मुद्दा उठाया और तब के वित्त मंत्री से यह आश्वासन भी लिया कि खुदरा व्यापार मेें विदेशी प्रत्यक्ष निवेश की अनुमति देने सम्बन्धी कोई प्रस्ताव सरकार के पास नहीं है। फेडरेशन को सम्बोधित आपका पत्र संदर्भ के लिए संलग्न है।
यह लेख मेल से प्राप्त हुआ है |

एल के आडवाणी के ब्लॉग से:ऍफ़ डी आई पर डाक्टर मन मोहन सिंह भी पलटे हैं