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Category: Religion

प्रभु नाम के अंकुश से मन की चंचलता शांत होती है

श्री रामशरणम् आश्रम, गुरुकुल डोरली , मेरठ के परमाध्यक्ष

पूज्यश्री भगत नीरज मणि ऋषि जी के प्रवचन का एक अंश.

लाखों जन्मों से हमारा मन जगत के रसों का चाटूकार बना हुआ है. जैसे ही हम परमात्मा को
याद करने के लिए बैठते हैं हमारा मन जगत के रस की तरफ भागता है और हम प्रभु के नाम में लीनता लाभ नहीं कर पाते. इस मन को रोकने के लिए अंकुश की आवश्यकता होती है.
जैसे एक विशालकाय एवं मस्त हाथी महावत के अंकुश से काबू में आ जाता है, इसी प्रकार
प्रभु के नाम के अंकुश से हमारे मन की चंचलता शांत हो जाती है.

भोंरा तब तक गुंजार करता रहता है जब तक उसे फूलों का रस नहीं मिलता, जैसे ही वह फूल पर बैठता है उसकी गुंजार बंद हो जाती है. इसी प्रकार जैसे ही हमारा मन परमात्मा के पावन नाम का पान करता है तो इसकी चंचलता शांत हो जाती है.

पी एम् की पत्नी ने तेहरानी गुरूद्वारे और स्कूल देखे

प्रधानमंत्री डाक्टर मनमोहन सिंह की पत्नी श्रीमति गुरशरण कौर तेहरान में एक गुरुद्वारे और केन्द्रीय विद्यालय को देखने गईं.
केन्द्रीय विद्यालय में उनका स्वागत बॉलीवुड गीतों, आइटम नंबर और लोक संगीत से किया गया.

गुरुद्वारे और केन्द्रीय विद्यालय को भारत सरकार की ओर से दो करोड़ रूपये की मदद प्रदान की गयी.

पारंपरिक लाल पंजाबी परिधान पहने एक छोटी-सी बच्ची अपनी सुंदर मुखाकृति और अपने वस्त्रों के कारण सभी के आकषर्ण का केन्द्र बनी हुई थी.
इस दौरान करीब एक घंटे तक प्रधानमंत्री की पत्नी अपने पैर थपथपाती और धीमे धीमे ताली बजाती हुई देखी गयी.
बच्चों ने जब ‘‘गुन गुना रे ’’ गाया तो दर्शक पूरी तरह से शांत हो गये. जब उन्होंने पंजाबी गाने ‘‘साडी गली भूल के भी आया करो’’ और ‘‘बरसी बरसी’’ गाया तो दर्शकों में मौजूद 190 छात्र एवं उनके अभिभावक झूमने लगे और कई तो गानों की धुन के साथ तालियां बजा रहे थे.
स्कूल गरुद्वारा की शुरूआत लाला माखन सिंह ने की थी और उन्होंने घर घर जाकर लोगों से चंदा इकट्ठा किया था.
१९६० में निर्मित इस स्कूल के निर्माण के लिए हिंदुजा बंधुओं ने बड़ी धनराशि दान की थी.

आसाराम बापू हेलीकॉप्टर दुर्घटना में बाल बाल बचे

गुजरात के गोधरा में सत्संग सम्राट आसाराम बापू का हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हो गया है। इस क्रैश में आसराम बापू बाल-बाल बच गए हैं।पायलेट को कुछ चोटें आई है\
चापर में आसाराम बापू समेत 5 लोग सवार थे। ये हादसा उस समय हुआ जब बापू का हैलीकॉप्टर लैंड होने वाला था।
इस घटना में हेलीकॉप्टर के 3 टुकड़े होने की खबर भी आ रही है।
बापू अपने हेलीकॉप्टर से गोधरा के साइंस ग्राउंड कालेज जा रहे थे। वहां पहले से ही उनका सत्संग का कार्यक्रम तय था। ग्राउंड के पास बने हैलीपैड पर हेलीकॉप्टर के लैंड करने से ठीक पहले हुए इस हादसे में हेलीकॉप्टर का पंखा डैमेज हुआ है।

ओणम की सबको वधाईयां Happy Colorful Onam

ओणम की सबको वधाईयां
इडली +डोसा+साम्भर+रसम+उत्प्म ++++ सापड सापड & सापड
Happy Colorful  Onam To Allllllllllllllllllllllll

ब्रिटिश एलेक्जेंड्रा बनी पंजाबी उत्तरंग कौर खालसा

ब्रिटेन के पूर्व मंत्री जॉनथन एकिन की बेटी पंजाब में सिख धर्म अपनाकर रह रही हैं।
लंदन की रहने वालीं 32 वर्षीय एने अपना नाइट क्लब और पार्टीज की रंगीन दुनिया+ देश+ पहनावा+ धर्म+ और नाम तक बदल लिया है।
कभी फैशनेबल रहीं और एक मैगज़ीन के लिए न्यूड पोज तक दे चुकीं एलेक्जेंड्रा अब बेहद साधारण जीवन जी रही हैं।
वेस्ट की अपनी जगमग छोड़कर ईस्ट के इस जीवन को चुनने का फैसला उन्होंने अपने प्यार के लिए किया है|

मीरा ने कान्हा प्रेम बेल को विरह आंसुओं से सींचा

अंसुवन जल सींच-सींच प्रेम बेलि बोई
अब तो बेल फ़ैल गई, आनंद फल होई.

संत मीराबाई ने प्रभु के प्रति अपनी विरह वेदना प्रकट करते हुए कहा है
कि मैंने अपने विरह आंसुओं से प्रेम की बेल को सींचकर विकसित किया है
वह बेल तन, मन और प्राणों पर छा गई है अब उसपर आनंद के फल लगने
लगे हैं . मेरे स्नेही प्रभु ने मुझे ह्रदय से लगा लिया है अर्थात मैंने प्रभु के प्रेम
का आनंद प्राप्त कर लिया है.
उल्लेखनीय है कि मीरा की विरह व्यथा कवि की मात्र कल्पना उड़ान के समान नहीं
है. संत मीराबाई के पद उनके अनुभवों की अभिव्यक्ति हैं. वास्तव में उनके पद उस प्रेम
दीवानी के सुख-दुखों का वृतांत है.
संत मीरा वाणी

संत कृपाल सिंह जी महाराज की स्मृति में समाज सेवा के कार्य कराये

रूहानी सत्संग सावन आश्रम में आज
रक्त दान शिविर में सरकारी डाक्टरों की टीम ने २६ श्रधालुओं से रक्त दान स्वीकार किया और दन्त रोग चिकित्सकों ने बड़ी संख्या में दांतों की जाँच की और दवाएं भी बांटीं|
मिशन के मेरठ शाखा के अध्यक्ष सुरेन्द्र कपूर ने बताया की दिल्ली मुख्यालय से आये दुर्गेश जी ने सत्संग करके सगत को निहाल किया|
उन्होंने कहा की अंतर्मुख होकर ही ईश्वर को पाया जा सकता है\और इसके लिए दिन में कम से कम ढाई घंटे का समय ध्यान+ पूजा के लिए देना आवश्यक है|
श्री कपूर ने बताया की कृपाल सिंह जी महाराज ने 21 अगस्त को मनुष्य के शरीर रूपी चोला त्यागा था उनकी ३६वी पुन्य तिथि की स्मृति में आज यह कार्यक्रम आयोजित किया गया है|
गौरतलब है की कृपाल सिंह जी महाराज रक्षा लेखा विभाग में उपनियंत्रक के पद से सेवानिवर्त हुए थे१९५० में उन्होंने रूहानी सत्संग की स्थापना की और

एक अगस्त १९७४ को पार्लिअमेंट को संबोधित करने वाले पहले अध्यात्मिक गुरु बने|

उन्होंने अनेकों विश्व धर्म सम्मेलनों की अध्यक्षता भी की|
पी एल शर्मा अस्पताल के डाक्टर आर के तोमर की अध्यक्षता में ललित+पुष्पेन्द्र+धर्मेन्द्र+आँचल ने ब्लड डोनेशन केम्प का आयोजन किया जबकि डाक्टर रोहित अरोरा+ चारू +पुष्प शर्मा ने डेंटल केम्प का संचालन किया|विनीत पुजारा+मीरा बहन+ सुरेंद्रा कपूर+किशन+हरभगवान+शाम लाल+प्रदीप चावला+विनीत+राज कुमार अरोरा+अरुण शर्मा+और अश्चरज लाल आनंद ने भी पुत्र और पोत्रों के साथ सेवा की

जिला अस्पताल की ब्लड बैंक काउंसलर आँचल ने बताया की आज के ये २६ यूनिट रक्त को मिला कर जनवरी माह से अब तक १५ केम्पों में ५९३ यूनिट रक्त प्राप्त किया जा चूका है|

इच्छा के बगैर किसी को सुधारा नहीं जा सकता

इच्छा के बगैर किसी को सुधारा नहीं जा सकता
अनकीन्हीं बातें करै, सोवत जागे जोय,
ताहि सिखाये जगायेबो, रहिमन उचित न होय.

संत कवि रहीम जी कहते हैं कि जो व्यक्ति अकथनीय वार्तालाप करे और जागा हुआ होने
पर भी सोता रहे, ऐसे मनुष्य को जाग्रत होने की शिक्षा देना उचित नहीं है.
भाव: भाव यह है कि जिस व्यक्क्ति ने अपने जीवन में कुछ न करने या न सुधरने
की कसम खाई हुई हो उसे कोई भी सुधार नहीं सकता. अर्थात सही मार्ग पर नहीं ला
सकता. ऐसे व्यक्ति को शिक्षा देना रेत में पानी कि कुछ बूँदें डालना अथवा चिकने घड़े
पर पानी डालने जैसा होता है.
संत कवि रहीम वाणी

जयपुर की बेटी ने पिता की पगड़ी धारण की

आज कल बेटियां भी यह साबित कर रहीं है कि वोह बेटों से किसी भी सूरत में कम नहीं हैं|
सांस्कृतिक रस्म है कि पिता के अवसान के बाद बड़ा बेटा ही परिवार का दाईत्व संभालता है बड़ों की पगड़ी धारण करता है मगर जयपुर की ज्योति माथुर ने पिता के निधन के बाद पगड़ी की रस्म ऐसे सम्पन्न की जैसे कोई बेटा करता है.|ज्योति ने पिता की पगड़ी अपने सिर बाँध बदलाव की नई इबारत लिखी है|ज्योति कहती हैं वो चाहती है बेटियों को बराबरी का हक़ मिले.
बी बी सी हिंदी के अनुसार नाते रिश्तेदारों की भीड़ जमा हुई और जब पगड़ी की रस्म का अवसर आया, ज्योति ने प्रचलित रस्म का प्रतिकार किया और परिवर्तन की प्रतिमा बन कर खड़ी हो गई. पुरोहित ने मंत्रोचारण किया और ज्योति के माथे पिता की पगड़ी बंधी तो उसके चेहरा बदलाव की रोशनी से दमक उठा.
पगड़ी को इंसान के रुतबे और इज्जत का प्रतीक माना जाता है, पर जब भी पगड़ी सम्मान के लिए आगे बढ़ी, उसने दस्तार के लिए बेटो के माथे का ही वरण किया.
मगर अब समय बदला है. इसीलिए ज्योति ने दस्तारबंदी[पगड़ी] की तो रस्मो रिवाज खुद ब खुद झुक गए|
इससे पूर्व पिता कि चिता को पुत्री द्वारा मुखाग्नि देने के कुछ समाचार छापे गए हैं मगर पुत्री कि दस्तार बंदी का शायद यह पहला केस है|

बरसे-बरसे आनंद तेरा, मस्त मगन हो मनवा मेरा

बरसे-बरसे आनंद तेरा, मस्त मगन हो मनवा मेरा
श्री शक्तिधाम मंदिर, लाल कुर्ती में प्रवचनों की अमृतमयी वर्षा करते हुए पूज्य श्री भगत
नीरज मणि ऋषि जी ने कहा कि हम सब परमात्मा की कृपा को पाना तो चाहते हैं परन्तु
लाखों जन्मो की पाप कर्मों की धूल ने हमारी बुद्धि को आच्छादित किया हुआ है. हमारे
अंदर ईर्ष्या, द्वेष तथा अहंकार भरे हुए हैं. इसीलिए हम प्रभु की कृपा के पात्र नहीं बनते.
भक्तजन प्रभु से प्रार्थना करते हैं कि हे देव! हम पर अप्रनी कृपा रुपी बरसात कीजिये
जिससे हमारे अंतःकरण की लाखों जन्मों की धूल और ऊष्णता धुल जाए. हमारा मन
परमात्मा के भजन में लीनता लाभ करे.
” बरसे-बरसे आनंद तेरा, मस्त मगन हो मनवा मेरा”
भक्तजनों ने परमात्मा से माँगा कि हे प्रभु आपके आनंद के बादल उमड़ -उमड़ कर
हमारे अंतःकरण में बरसें जिससे हमारा मन निर्मल हो जाए, हमारे मन में किसी के
प्रति ईर्ष्या न रहे, हमारे अन्दर दूसरों को क्षमा करने की भावना पैदा हो जाये जिससे हम
परमात्मा की कृपा के पात्र बन सकें.|

उल्लेखनीय है कि पूज्य श्री भगत नीरज मणि ऋषि ने
छेत्र में धार्मिक और सामजिक सेवा की मान्यताओं को पुनः स्थापित करने में क्रान्ति कारी
पहल की है|

File Photo