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Naidu Refuses To Oblige Cong,Rejects Impeachment Notice

[New Delhi]Naidu Refuses To Oblige Cong,Rejects Impeachment Notice
Rajya Sabha Chairman and Vice President Of India M Venkaiah Naidu today rejected the notice given by opposition parties led by the Congress for impeachment of CJI Dipak Misra citing lack of substantial merit in it,
Naidu held extensive consultations with top legal and constitutional experts before taking the decision
The rejection of the notice comes a day after he held the consultations with such experts to determine the maintainability of the motion.
The sources said Vice President Naidu met several experts after he re-scheduled his travel plans considering the seriousness of the matter.
Seven opposition parties led by the Congress had last week moved a notice before him for impeachment of the Chief Justice of India (CJI) on five grounds of “misbehaviour”.
This is the first time ever that an impeachment notice has been filed against a sitting CJI.

भाजपाई कौन से निप्पलों से दूध पीते हैं,लेलेंगे नंगों से पंगा

भाजपाई कौन से निप्पलों से दूध पीते हैं,लेलेंगे नंगों से पंगा

भाजपाई कौन से निप्पलों से दूध पीते हैं,लेलेंगे नंगों से पंगा


झल्ले दी झल्लियाँ गल्लां

भाजपाई चिंतक

औए झल्लेया ये कांग्रेस तो एकदम नंगई पर उतर आई | देख तो हसाड़े डाइनामिक अध्यक्ष अमित शाह और प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधने के लिए सी जे आई दीपक मिश्रा के खिलाफ महाभियोग लेकर आ रहे हैं| पार्लियामेंट में इनके पास पर्याप्त समर्थन नहीं होने के बावजूद ये लोग पुरानी कहावत को चरितार्थ करने पर तुले हुए हैं
“सूत ना कपास,जुलाहों में लट्ठम लट्ठ”

झल्ला

ओ मेरे चतुर सेठ जी ! आप लोग कौन सा निप्पलों से दूध पी रहे हो |लेलो नंगों से पन्गा

कांग्रेस सीजेआई पर कीचड उछाल कर भागने के फ़िराक में तो नहीं

[नई दिल्ली]कांग्रेस सीजेआई पर कीचड उछाल कर भागने के फ़िराक में तो नहीं
कांग्रेस आज कल आप पार्टी के सिद्धांत पर चलते हुए कीचड उछाल कर भाग रही है
अच्छा होता कांग्रेस आप के डाउन फाल के कारणों को समझ लेती और श्रीमती इंदिरा गाँधी
की सत्ता में वापिसी के इतिहास को भी पढ़ लेती |पुरानी कहावत हे के काठ की हांडी एक बार ही अंगीठी पर चढ़ती है
लेकिन सियासतदां आज कल एक ही टूटी फूटी हांडी कोबार बार प्रयोग कर रहे हैं|इससे कुछ समय के लिए शोर तो मच जाता है मगर
थाली खाली ही रह जाती है | कांग्रेस कीचड उछालने के दुष्परिणामों को आत्मसात करने के बजाय जस्टिस लोया केस में मुंह की खाये खिसियानी बिल्ली की तरह सी जे आई को ही नौंचने के लिए महाभियोग लेकर आ गई है | संसद में बहुमत नहीं है +आरोपों में दम नहीं है +जनता सहयोग नहीं है फिर भी यह महाभियोग का कीचड उछाला जा रहा है | मालूम हो के कांग्रेस की इस मायने में गुरु “आप” पार्टीने महाभियोग प्रस्ताव से किनारा कर लिया है |
देश के प्रधान न्यायाधीश को पद से हटाने के लिये उनके खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव का यह भले ही पहला मामला हो, लेकिन इसके पहले उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों के खिलाफ इस तरह की कार्यवाही चलायी जा चुकी है। सभी मामलों में महाभियोग को अंतिम चरण तक पहुँचाने में असफलता ही हाथ लगी है |
प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा के खिलाफ दुर्व्यवहार और पद के दुरुपयोग के आरोप में कांग्रेस सहित अन्य विपक्षी दलों की ओर से आज राज्यसभा के सभापति एम वेंकैया नायडू को महाभियोग प्रस्ताव का नोटिस सौंपा है।
आजाद भारत में पहली बार किसी न्यायाधीश को पद से हटाने की कार्यवाही
मई 1993 में प्रधानमंत्री पी वी नरसिंह राव के कार्यकाल में हुयी थी। उस समय उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश वी रामास्वामी के खिलाफ लोकसभा में महाभियोग प्रस्ताव पेश किया गया था। उनके खिलाफ 1990 में पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के पद पर रहते हुये भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों के आधार पर पद से हटाने के लिये महाभियोग प्रस्ताव पेश किया गया था। हालांकि यह प्रस्ताव लोकसभा में ही पारित नहीं हो सका था।
साल 2011 में कलकत्ता उच्च न्यायालय के न्यायाधीश सौमित्र सेन के खिलाफ ऐसा ही प्रस्ताव राज्यसभा सदस्यों ने पेश किया था। इस मामले में उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति बी सुधाकर रेड्डी की अध्यक्षता वाली जांच समिति ने उन्हें अमानत में खयानत का दोषी पाया था। जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर ही उन्हें कदाचार के आरोप में पद से हटाने के लिये पेश प्रस्ताव को राज्यसभा ने 18 अगस्त, 2011 को पारित कर किया। इस प्रस्ताव पर लोकसभा में बहस शुरू होने से पहले ही न्यायमूर्ति सेन ने एक सितंबर, 2011 को अपने पद इस्तीफा दे दिया। हालांकि उन्होंने राष्ट्रपति को भेजे त्यागपत्र में कहा था, ‘‘मैं किसी भी तरह के भ्रष्टाचार का दोषी नहीं हूं।’’
कर्नाटक उच्च न्यायालय के मुख्य न्यााधीश पी डी दिनाकरण पर भी पद का दुरूपयोग करके जमीन हथियाने और बेशुमार संपत्ति अर्जित करने जैसे कदाचार के आरोप लगे थे। इस मामले में भी राज्यसभा के ही सदस्यों ने उन्हें पद से हटाने के लिये कार्यवाही हेतु याचिका दी थी। इस मामले में काफी दांव पेंच अपनाये गये।
न्यायमूर्ति दिनाकरण ने जनवरी, 2010 में गठित जांच समिति के एक आदेश को उच्चतम न्यायालय में चुनौती भी दी। बाद में अगस्त 2010 में सिक्किम उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किये गये न्यायमूर्ति दिनाकरण ने इसमें सफलता नहीं मिलने पर 29 जुलाई, 2011 को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। इस तरह उन्हें महाभियोग की प्रक्रिया के जरिये पद से हटाने का मामला वहीं खत्म हो गया।
तेलंगाना और आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय के न्यायाधीश सी वी नागार्जुन रेड्डी और गुजरात उच्च न्यायालय के न्यायाधीश जे बी पार्दीवाला के खिलाफ भी महाभियोग की कार्यवाही के लिये राज्यसभा में प्रतिवेदन दिये गये। न्यायमूर्ति पार्दीवाला के खिलाफ तो उनके 18 दिसंबर, 2015 के एक फैसले में आरक्षण के संदर्भ में की गयी टिप्पणियों को लेकर यह प्रस्ताव दिया गया था। लेकिन मामले के तूल पकड़ते ही न्यायमूर्ति पार्दीवाला ने 19 दिसंबर को इन टिप्पणियों को फैसले से निकाल दिया था।
मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के न्यायाधीश एस के गंगले के खिलाफ वर्ष 2015 में एक महिला न्यायाधीश के यौन उत्पीडन के आरोप में राज्यसभा के सदस्यों ने महाभियोग प्रस्ताव का नोटिस सभापति को दिया था। इस प्रतिवेदन के आधार पर न्यायाधीश जांच कानून के प्रावधान के अनुरूप समिति गठित होने के बावजूद न्यायमूर्ति गंगले ने इस्तीफा देने की बजाय जांच का सामना करना उचित समझा। दो साल तक चली जांच में यौन उत्पीडन का एक भी आरोप साबित नहीं हो सकने के कारण महाभियोग प्रस्ताव सदन में पेश नहीं हो सका