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Tag: Ministry Of Culture

पीएम के”मेक इन इंडिया” के शंखनाद को सफल बनाने के लिए केंद्रीय मंत्रियों ने झाङू चला कर सफाई बिगुल बजाया

The Minister of State (Independent Charge) for Culture and Tourism, Shri Shripad Yesso Naik initiating Swachh Bharat campaign, in Delhi .

The Minister of State (Independent Charge) for Culture and Tourism, Shri Shripad Yesso Naik initiating Swachh Bharat campaign, in Delhi
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[नई दिल्ली]पी एम के “मेक इन इंडिया” के शंखनाद को सफल बनाने के लिए मंत्रियों ने झाङू चला कर सफाई बिगुल बजाया |
नरेंद्र मोदी के मेक इन इंडिया के शंखनाद को सफल बनाने के लिए भारत को स्वच्छ बनाने की मुहीम शुरू हो गई है |
क्लीन इंडिया के लिए आज अनेकों मंत्रालयों में सफाई अभियान चलाया गया| केंद्रीय गृह मंत्री राज नाथ सिंह+सूक्ष्‍म, लघु एवं मझौले उद्योगमंत्री श्री कलराज मिश्र+संस्‍कृति और पर्यटन मंत्रीश्री श्रीपद नाइक+स्मृति ज़ुबिन ईरानी आदि ने अपने अपने मंत्रालयों में सफाई बिगुल बजाया |
श्रीमती स्मृति ज़ुबिन ईरानी ने दिल्ली आर के पुरम में केंद्रीय विद्यालय में झाङू चलाया और गमलों को पेंट किया
श्री राजनाथ सिंह ने गृह मंत्रालय के तीव्र सफाई अभियान के शुभारंभ के अवसर पर कर्मचारियों को विशेष रूप से प्रेरित किया
केंद्रीय सूक्ष्‍म,लघु एवं मझौले उद्योगमंत्री श्री कलराज मिश्र ने नई दिल्‍ली में स्‍वच्‍छ भारत अभियान की शुरूआत की उनके साथ सचिव श्री माधव लाल आदि भी थे |
संस्‍कृति और पर्यटन मंत्री ने ऐतिहासिक लाल किले से स्‍वच्‍छ भारत अभियान की शुरूआत की
संस्‍कृति और पर्यटन्‍ मंत्री श्री श्रीपद नाइक ने पर्यटन, संस्‍कृति मंत्रालयऔर भारतीय पुरातत्‍व सर्वेक्षण के वरिष्‍ठ अधिकारियों की मौजूदगी में आज ऐतिहासिक लाल किले से स्‍वच्‍छ भारत अभियान की शुरूआत की। इस अवसर पर एएसआई, ओएनजीसी और पर्यटन मंत्रालय के बीच एक सहमति पत्र पर भी हस्‍ताक्षर किए गए।
The Union Minister for Human Resource Development, Smt. Smriti Irani initiating Swachh Bharat-Swachh Vidyalaya Campaign, at Kendriya Vidyalaya, R.K.Puram, in New Delhi

The Union Minister for Human Resource Development, Smt. Smriti Irani initiating Swachh Bharat-Swachh Vidyalaya Campaign, at Kendriya Vidyalaya, R.K.Puram, in New Delhi


इस अवसर पर श्री नाइक ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने भारत के नागरिकों की सक्रिय भागीदारी और सहयोग से देश में स्‍वच्‍छता और स्‍वच्‍छता संबंधी आदतों को बढ़ावा देने के लिए स्‍वच्‍छ भारत अभियान को एक मिशन के रूप में लिया है।
श्री नाइक ने बताया कि भारतीय पुरातत्‍व सर्वेक्षण ने अपने सभी स्‍मारकों और स्‍थलों को साफ-सुथरा रखने और स्‍वच्‍छ शौचालय की सुविधा प्रदान करने की योजना बनाई है। पर्यटन मंत्रालय एएसआई संरक्षित स्‍मारकों में नये शौचालयों का निर्माण करने और वर्तमान में सुधार करने के उद्देश्‍य से सहायता करने के लिए आगे आया है। उन्‍होंने बताया कि ओएनजीसी का अमूल्‍य ध्‍रोहर अभियान-ताज पहल ताजमहल, आगरा से शुरू होगी और धीरे-धीरे अन्‍य स्‍मारकों तक बढ़ेगी।
फोटो कैप्शन
The Union Minister for Human Resource Development, Smt. Smriti Irani initiating Swachh Bharat-Swachh Vidyalaya Campaign, at Kendriya Vidyalaya, R.K.Puram, in New Delhi on September 25, 2014.

उत्तर प्रदेश में केवल २६० कल्चरल एक्टिविस्ट को आर्टिस्ट्स पेंशन स्कीम एंड वेलफेयर फण्ड का लाभ

उत्तर प्रदेश के केवल २६० कल्चरल एक्टिविस्ट को आर्टिस्ट्स पेंशन स्कीम एंड वेलफेयर फण्ड का लाभ
भारत सरकार ने स्वीकार किया कि देश में कल्चरल एक्टिविस्ट+ लेखक+एक्टर की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं है इसीलिए आर्थिक दृष्टि से पिछड़े लेखक+एक्टर+कल्चरल एक्टिविस्ट और उनके आश्रितों के लिए पेंशन वितरित की जाती हैं | २७ राज्यों के ३६९८ इस स्कीम के लाभार्थी हैं |इनमे से केवल आठ राज्यों में लाभार्थियों की संख्या तीन डिजिट्स [सैंकड़ा]में हैं| सबसे बढे उत्तर प्रदेश इस मामले में सातवें नंबर पर है|उत्तर प्रदेश में २६० लाभार्थी हैं |यह जानकरी सांस्कृतिक मंत्री श्रीपद येस्सो ने राज्य सभा में बुधवार को दी |
कल्चर & टूरिज्म मिनिस्टर श्रीपद येस्सो नाइक ने बताया की केंद्र सरकार द्वारा आर्थिक रूप से पिछड़े लेखक+ एक्टर+कल्चरल एक्टिविस्ट और उनके आश्रितों के जीवन यापन के लिए” आर्टिस्ट्स पेंशन स्कीम एंड वेलफेयर फण्ड” से ३५०० रुपये प्रति माह उपलब्ध कराया जाता है|
२०१४ -१५ के लिए यह राशि १९ करोड़ रुपये बताई गई है यह लाभ केवल उन आर्टिस्ट को मिलता है जिनकी पारिवारिक आय 4,000/- से ज्यादा नहीं हो और आयु ५८ वर्ष से कम नहीं हो|जनसंख्या के हिसाब से बढे उत्तर प्रदेश में केवल २६० लाभार्थियों को ही यह पेंशन दी जारी हैं
भारत सरकार द्वारा जारी आंकड़े निम्न है :
Sl. No.========States======================================No. of Beneficiaries
1. Andhra Pradesh=====================================================457
2. Assam=======================================================49
3. Bihar========================================================46
4. Delhi========================================================49
5. Goa=========================================================10
6. Gujarat========================================================6
7. Haryana======================================================31
8. Himachal Pradesh================================================6
9. Jammu & Kashmir=================================================2
10. Jharkhand=======================================================10
11. Karnataka============================================================713
12. Kerala===============================================================341
13. Madhya Pradesh==================================================55
14. Maharashtra==========================================================866
15. Manipur====================================================================142
16. Meghalaya=========================================================1
17. Mizoram===========================================================5
18. Nagaland==========================================================3
19. Odisha===============================================================274
20. Puducherry=========================================================6
21. Punjab=============================================================3
22. Rajasthan==========================================================10
23. Tamil Nadu=============================================================251
24. Tripura==============================================================1
25. Uttar Pradesh===========================================================260
26. Uttarakhand=========================================================14
27. West Bengal=========================================================87
Total 3698

Logo For Festival of India in China Is Launched In Both Countries :Year of Friendly Exchanges

The Secretary, Ministry of Culture, Shri Ravindra Singh launched the Logo for the Festival of India in China This Festival will be celebrated from May 2014 to March 2015,
Shri Ravindra Singh here today launched the logo+posters + webpage for the Festival of India in China which will be celebrated from May 2014 The same were simultaneously launched in Beijing by Shri Ashok K. Kantha Ambassador of India to Beijing.
The colorful logo designed for the Glimpses of India Festival consists of a Kathakali and a Beijing Opera mask side by side. It has been chosen to depict the Indian and Chinese cultures that are shown to be seamlessly blending into one another, thus mirroring the long tradition of friendship and cooperation between the two countries. The left side of the logo is a Kathakali mask from the classical Indian dance tradition that originated in Kerala. The right part of the mask derives from world famous Beijing Opera – a vivid embodiment of Chinese performing art. While the Kathakali dance involves delicate use of hand and eye gestures to communicate, masks in Beijing Opera symbolize different characters and emotions. This convergence of elements from great art forms of the two countries reflects the centuries-old civilizational contacts between India and China. Encompassed within a circle, a symbol of perfection, and with Indian and Chinese colors and motifs symbolizing happiness and celebration, the logo represents the spirit of cooperation and harmony underlying the ‘Glimpses of India Festival’.
Two posters for Circuit 1 and Circuit 2 have been released indicating the Festival’s events.
The Ministry of Culture has created a dedicated webpage Which covers event schedule and the updates as also photographs and video links.
Speaking on the occasion, Shri Ravindra Singh said that pursuant to the mutual understanding reached during the visit of the Chinese Premier Mr. Li Keqiang to India in May 2013 and that of Prime Minister Dr. Manmohan Singh to China in October 2013, the year 2014 was designated as the India-China Year of Friendly Exchanges. As part of the Year of Friendly Exchanges, Ministry of Culture in collaboration with the Ministry of External Affairs and the Embassy of India in Beijing, along with the Consulates in Shanghai, Guangzhou and Hong Kong, are organizing the Festival of India in 12 cities in China.
This Festival in China will be celebrated in 4 circuits,

आगरा और दिल्ली के लाल किला के ऐतिहासिक आकर्षण को लौटा लाने के लिए बगीचों का जीर्णोधार जरूरी है

आगरा की तरह ही दिल्‍ली का लाल किला भी एक महत्‍वपूर्ण राष्‍ट्रीय धरोहर है इनके पुराने आकर्षण को दोबारा लाने के लिए इनमे बने ऐतिहासिक बगीचों का जीर्णोधार जरूरी है |यह विचार आज केंद्रीय संस्‍कृति मंत्री श्रीमती चंद्रेश कुमारी कटोच ने व्यक्त किये |
भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय द्वारा लाल किला परिसर के संरक्षण और प्रबंधन पर कार्यशाला का आयोजन किया गया है इस कार्यशाला के उद्घाटन सत्र में केंद्रीय संस्‍कृति मंत्री श्रीमती चंद्रेश कुमारी कटोच द्वारा कार्यशाला को संबोधित किया।
उन्‍होंने इस कार्यशाला में भाग लेने वालों का स्‍वागत किया और विभिन्‍न ऐतिहासिक स्‍मारकों के संरक्षण में इसे उपयोगी बताया। उन्‍होंने कहा कि आगरा का ताज महल और दिल्‍ली का लाल किला इस परिवेश का हिस्‍सा है और उन्‍हें खुशी है कि विश्‍व की इन दोनों धरोहरों पर विशेष ध्‍यान दिया गया है।
उन्‍होंने कहा कि केंद्र व राज्‍य सरकार के सहयोग से पुरातत्‍व विभाग और आगरा विकास प्राधिकरण (एडीए) का यह सहयोगपूर्ण प्रयास एक ऐतिहासिक उपलब्धि होगा और इस दो दिवसीय आगरा कार्यशाला की सिफारिशें महत्‍वपूर्ण होंगी। आगरा की तरह ही नई दिल्‍ली का लाल किला भी एक महत्‍वपूर्ण राष्‍ट्रीय धरोहर है और अद्भुत भवन निर्माण कला व राष्‍ट्र के इतिहास, दोनों पहलुओं से इसके महत्‍व को देखते हुए यह विशेष सुरक्षा व संरक्षण का हकदार है। पुरातत्‍व विभाग इस संबंध में काफी कुछ कर चुका है पर जब तक हम किले के भीतर खुबसूरती से बने ऐतिहासिक बगीचों का जीर्णोधार नहीं करते, यह अपना पुराना आकर्षण दोबारा प्राप्‍त नहीं कर पायेगा।
उन्‍होंने खुशी जाहिर की कि विशेषज्ञ आज यहां एक ऐसे विचार-विमर्श के लिए एकत्र हुए है जिसमें लाल कि‍ले के भीतर एति‍हासि‍क बगीचों पर भी ध्‍यान दि‍या जाएगा। वैज्ञानि‍क जांच पड़ताल के ज़रि‍‍‍ए पुरातत्‍व वि‍भाग इन बगीचों के वास्‍तवि‍क स्‍तरों और इसके जल वि‍ज्ञान का भी अध्‍ययन करेगा।
उन्‍होंने आशा जताई कि‍ इस कार्यशाला से न केवल ढ़ाचों और बगीचों के लि‍ए वि‍स्‍तार सहि‍त संरक्षण प्रस्‍ताव तैयार करने के लि‍ए एक समय सीमा पर पहुंचा जा सकेगा बल्‍कि‍ इसे वैज्ञानि‍क व समयबद्ध रूप से लागू भी किया जा सकेगा। उन्‍होंने कहा कि वह स्‍वयं और उनका मंत्रालय इस कार्य के लि‍ए पूरी तरह वचनबद्ध हैं और उन्‍होंने इस पहलकदमी को पूरा करने के लिए आवश्‍यक सभी तरह के सहयोग का आश्‍वासन दिया।
अंत में उन्‍होंने इस कार्यशाला के सभी सदस्‍यों को सफल होने की शुभकामनाएं दी और आशा व्‍यक्‍त की कि उन्‍हें सौंपी गई जिम्‍मेदारी को वो पूरा करें

भारत और हंगरी के सांस्कृतिक और व्यापारिक सम्बन्ध और प्रगाड़ हुए

भारत और हंगरी के सांस्कृतिक सम्बन्ध और प्रगाड़ हुए
हंगरी के प्रधानमंत्री डॉ विक्टर ओरबन आज कल अपने सहयोगियों के साथ भारत में आये है| उन्होंने आज 17 अक्तूबर, २०१३ राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से मुलाकात की

The Prime Minister, Dr. Manmohan Singh and the Prime Minister of the Republic of Hungary, Mr. Viktor Orban, at the delegation level talks, in New Delhi on October 17, 2013.

The Prime Minister, Dr. Manmohan Singh and the Prime Minister of the Republic of Hungary, Mr. Viktor Orban, at the delegation level talks, in New Delhi on October 17, 2013.


इस अवसर पर भारतीय राष्ट्रपति ने डॉ अरबन का स्वागत करते हुए कहा कि भारत हंगरी के साथ संबंधों और राजनयिक संबंधों से काफी पहले से सांस्कृतिक संबंधों को खास महत्व देता है। उन्होंने खास तौर पर बताया कि संस्कृत को ईएलटीआई[ ELTI ] विश्वविद्यालय में 1873 में ही एक नियमित विषय के रुप में अध्ययन के लिए शामिल किया गया। उन्होंने उस कमरे के संरक्षण के लिए जहां इलाज के दौरान रबींद्रनाथ ठाकुर ठहरे थे और बालटनफर्ड शहर में टैगोर के नाम पर एक खूबसूरत घास के खुले मैदान को बनाने के लिए हंगरी सरकार के प्रति आभार व्यक्त किया।
राष्ट्रपति ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों से लगातार हो रही द्विपक्षीय यात्राओं से दोनों देश हमारे द्विपक्षीय सहयोग को और मजबूत करने में सक्षम हुए हैं।
यह जानना संतोषजनक है कि हंगरी में कई क्षेत्रों में भारत का निवेश 1.5 अरब डॉलर के करीब है जिससे 8 हजार से अधिक हंगरी निवासियों को रोजगार मिला हुआ है।
The Prime Minister of the Republic of Hungary, Mr. Viktor Orban inspecting the Guard of Honour, at the Ceremonial Reception, at Rashtrapati Bhavan, in New Delhi on October 17, 2013.

The Prime Minister of the Republic of Hungary, Mr. Viktor Orban inspecting the Guard of Honour, at the Ceremonial Reception, at Rashtrapati Bhavan, in New Delhi on October 17, 2013.


द्वपक्षीय व्यापार भी 2007 में 398 मिलियन डॉलर से बढ़कर 2011 में 840 मिलियन डॉलर तक बढ़ गया है। हालांकि, यह संभावनाओं से काफी कम है। राष्ट्रपति ने कहा कि जैव-प्रौद्योगिकी+ स्‍वच्‍छ ऊर्जा+ कृषि + जल संसाधन प्रबंधन जैसे नए क्षेत्रों में भी विस्तार की संभावनाएं हैं।
राष्ट्रपति ने हंगरी के प्रधानमंत्री के साथ आए व्यापार प्रतिनिधिमंडलपर खुशी जाहिर कीऔर ये उम्मीद जताई कि भारतीय व्यापारियों से उनकी बातचीत में दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों को और मजबूती प्रदानकरने वाले नए क्षेत्रों का उभार होगा।
राष्ट्रपति की बातों पर प्रतिक्रिया जाहिर करते हुए हंगरी के प्रधानमंत्री ने कहा कि हंगरी में भारत के महान संस्कृति और सभ्यता की काफी सराहना होती है। उन्होंने कहा कि हंगरी ही नहीं पूरे मध्य यूरोप में भारत के लिए सहयोग बढ़ाने की अपार संभावनाएं हैं जिससे भारत को पूरे यूरोप में अहम भूमिका निभाने में काफी मदद मिल सकती है। उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता की भारत की मांग काफी उचित है और इससे वैश्विक शांति और सहयोग बढ़ाने में काफी मदद मिलेगी।
संस्‍कृति सचिव श्री रवींद्र सिंह तथा हंगरी के मानव संसाधन मंत्री जोलतन बालोग ने आज नई दिल्‍ली में ‘फ्रॉम आरगेनिक फार्मस टू लाइट आर्ट’ नामक समकालीन हंगरी कला प्रदर्शनी का उद्घाटन किया।
The Secretary, Ministry of Culture, Shri Ravindra Singh with the Minister of Human Resources, Govt. of Hungary, Mr. Zoltan Balog going round an exhibition “From Organic Forms to Light Art: Selection from the Contemporary Hungarian Art”, in New Delhi on October 17, 2013.

The Secretary, Ministry of Culture, Shri Ravindra Singh with the Minister of Human Resources, Govt. of Hungary, Mr. Zoltan Balog going round an exhibition “From Organic Forms to Light Art: Selection from the Contemporary Hungarian Art”, in New Delhi on October 17, 2013.


इस मौके पर श्री रवींद्र सिंह ने कहा कि भारत और हंगरी के संस्‍कृति संबंध पिछले कई मौकों पर विभिन्‍न आयामों के तहत दिखे हैं। उन्‍होंने कहा कि उन्‍हें यह देख प्रसन्‍नता हुई कि प्रदर्शनी को नेशनल गैलरी ऑफ मार्डन आर्ट ने साकार किया है और इसमें हंगरी की सांस्‍कृतिक विरासत के मूल को दिखाया गया है और इसका असर विश्‍व की संस्‍कृति पर पड़ा है। हंगरी के मानव संसाधन मंत्री ने कहा कि इस प्रदर्शनी के दो हिस्‍से हैं। पहले में आर्गेनिक हिस्‍से को दिखाया गया है और दूसरे में विज्ञान, तकनीक और कला के संबंधों पर आधारित लाइट आर्ट को दिखाया गया है।
यह प्रदर्शनी जनता के लिए 31 अक्‍तूबर 2013 तक खुली है।
फोटो कैप्शन
[१] प्रधान मंत्री डॉ मन मोहन सिंह हंगरी से आये अपने समकक्ष विक्टर ओर्बन के साथ

ताज महल,खजुराहो जैसे 100 अति-महत्वपूर्ण ऐतिहासिक धरोहरों को अब इंटरनेट के जरिए घर बैठे देखा जा सकेगा

[नई दिल्ली ] अजन्ता ,एलोरा की गुफाओं, खजुराहो या ताजमहल आदि भारतीय एतिहासिक धरोहरों को अब घर बैठे आन लाइन देखा जा सकेगा| इसके लिए भारतीय धरोहर ऑनलाइन परियोजना को शुरू किया गया है|केन्द्रीय संस्कृति मंत्री श्रीमती चन्द्रेश कुमारी कटोच द्वारा यह शुभारंभ किया गया है|
श्रीमती चन्द्रेश कुमारी कटोच ने आज भारतीय धरोहर ऑनलाइन परियोजना का शुभारंभ किया। परियोजना के तहत भारतीय पुरात्तव सर्वेक्षण गुगल कंपनी के साथ मिलकर अजन्ता और एलोरा की गुफाओं, खजुराहो और ताजमहल समेत भारत के 100 अति-महत्वपूर्ण ऐतिहासिक धरोहरों की 360 डिग्री की तस्वीरें ऑनलाइऩ उपलब्ध कराएगा। इस अवसर पर श्रीमती कटोच ने कहा कि ऐतिहासिक धरोहरों की ये तस्वीरें आम लोगों के लिए इंटरनेट पर उपलब्ध कराई जाएंगी। उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य देश की इन धरोहरों को बचाए रखने के प्रति लोगों खासकर युवाओं के बीच जागरूकता और रूचि पैदा करना है। उन्होंने कहा कि इंटरनेट पर उपलब्ध कराई गई जानकारियों से आम लोगों को ऐतिहासिक इमारतों के साथ जोड़ा जा सकेगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि ऑनलाइन परियोजना से देश-विदेश में अरबों लोग भारत के विविधता भरे ऐतिहासिक धरोहरों को इंटरनेट के जरिए आसानी से देख सकेंगे, यह एक सुखद अनुभव होगा।
संस्कृति मंत्री ने कहा कि उन्हें इस बात की खुशी है कि भारतीय पुरात्तव सर्वेक्षण बदलते समय के साथ खुद को ढालता आया है और भारत के समृद्ध ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण और प्रचार के लिए साझेदारी के अपने अभियान को पूरी शिद्दत के साथ आगे बढ़ा रहा है। उन्होंने कहा कि पुरात्तव सर्वेक्षण देश के 3678 ऐतिहासिक इमारतों के संरक्षण और रखरखाव की बड़ी भूमिका निभा रहा है।
संस्कृति मंत्रालय में अपर सचिव के के मित्तल ने कहा कि सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण और अनुसंधान के क्षेत्र में भारतीय पुरात्तव सर्वेक्षण देश की अग्रणी संस्था है। ऐतिहासिक इमारतों, पुरातात्विक स्थलों और इनके भग्नावशेषों को संरक्षित करना इसकी प्रमुख जिम्मेदारी है। विभाग ने देश में 3678 ऐतिहासिक इमारतों को संरक्षित इमारत घोषित कर रखा है। इनमें से 20 विश्व धरोहर की श्रेणी में हैं। हाल ही में यूनेस्को ने राजस्थान के 6 किलों को विश्व धरोहर की श्रेणी में डाला है।