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कांग्रेस को १९४७ में मानव निर्मित त्रासदी के लिए देश से माफ़ी मांगनी चाहिए

[नई दिल्ली] कांग्रेस को १९४७ में कराये गए कत्लेआम+लूटमार के लिए देश से माफ़ी मांगनी चाहिएअब समय आ गया है जब कांग्रेस को माफ़ी मांग लेनी चाहिए |ब्रिटैन के ८० संसद जब भारत में १०० वर्ष पूर्व जलियांवाला बाग़ में किये गए कत्ले आम के लिए अपनी ही सरकार से माफ़ी की मांग कर सकते हैं और वहां की प्रधान मंत्री खेद व्यक्त कर सकती हैं तो भारत में १९४७ के घृणित अपराध पर विभाजन के लिए जिम्मेदार और उसके नतीजों को झेलने में असफल रहे कांग्रेस को माफ़ी मांग कर उस के लिए प्रायश्चित करलेनी चाहिए |
1947 में कराए कत्लेआम की अब #कांग्रेस को माफी मांग कर प्रायश्चित कर लेना चाहिए
देश विभाजित करा कर दोनों तरफ ना केवल
कत्लेआम कराया गया वरन
लूटमार मचाई गई
छोड़ी गई जमीनों को हथियाया गया
रिहैबिलिटेशन के नाम पर फ्रॉड किये गए
अब समय आ गया है जब इसके लिए उत्तरदायी दल को सार्वजनिक रूप से माफी मांग कर प्रायश्चित कर लेना चाहिएक्योंकि विभाजन से अपराधों की ज्वाला उठी उसे समेटने में तत्कालीन सरकार अक्षम रही |इसे विश्व की सबसे बढ़ी मानव निर्मित त्रासदी बताया गया है|

महात्मा गाँधी को श्रद्धांजलि देने के लिए १९४७ के बंटवारे में हुई गलती को सुधारो

महात्मा गाँधी को श्रद्धांजलि देने के लिए १९४७ के बंटवारे में हुई गलती को सुधारो

महात्मा गाँधी को श्रद्धांजलि देने के लिए १९४७ के बंटवारे में हुई गलती को सुधारो

[नई दिल्ली ] महात्मा गाँधी को श्रद्धांजलि देने के लिए १९४७ के बंटवारे में हुई गलती को सुधारो
महात्मा गांधी बने मोहन दास की आज जयंती है सो सबको बधाई| प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी+विपक्ष के श्रीमती सोनिया गाँधी और कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी इनकी समाधि पर श्रद्धा सुमन अर्पण कर स्वयं को धन्य कर रहे हैं |
विलायत पास मोहन दास ने आधी धोती और एक कमजोर सी लाठी लेकर अपने मुल्क में शक्तिशाली अंग्रेजों के खिलाफ आजादी की मुहीम छेड़ी |
लेकिन इसके साथ ही 1947 में एक गलत निर्णय लेकर बिना किसी तैयारी के देश का बंटवारा स्वीकार कर लिया
यह विभाजन सबसे बढ़ी त्रासदी के रूप में सामने आया| बंटवारे से दोनों तरफ के लाखों भारत वासियों के जान माल को हानि पहंची | दोनों तरफ के दबंगों ने संपत्ति की लूट मचाई लेकिन इसके पश्चात् भारत में पुनर्वास के लिए तैनात अधिकारीयों ने भी कोई कसर नहीं छोड़ी |दोनों तरफ के विस्थापितों द्वारा अपनी चल अचल सम्पत्ति को त्याग कर दूसरे अनजान देश में असहाय जाना पढ़ा
इनको अचल सम्प्पति को एक दुसरे की संपत्ति से एडजस्ट किया गया |मसलन पाकिस्तान में छोड़ कर आये हिन्दुओं की सम्पत्ति को भारत में छोड़ी गई मुस्लिमों की सम्पत्ति से एडजस्ट किया गया |यह सब सरकारी स्तर पर हुआ |लुटे पिटे आये हिन्दुओं ने अपनी रोजी रोटी के जुगाड़ में जुट गए ऐसे अधिकांश लोगों को केवल कागजों में ही संपत्ति दी गई और कुछ समय पश्चात् उसे भी कागजों में ही निरस्त कर दिया गया |पकिस्तान में छोड़ी गई सम्पत्ति की एवज में भारत में मुआवजा लेने के पश्चात् भी पीड़ितों को नहीं दिया जाना किसी भी सामाजिक आर्थिक और कानूनी अपराध से कम नहीं आंका जा सकता मगर दुर्भाग्य से इस अपराध पर पर्दा डालने के लिए २००५ में काला एक्ट ला कर इस व्यवस्था को ही समाप्त कर दिया गया| प्रधान मंत्री और हरियाणा +पंजाब के मुख्य मंत्रियों द्वार संचालित ग्रीवांस सेल्ल भी कोई न्याय नहीं दिला पा रहे हैं |इसी के नतीजतन शिकायतें केवल कम्प्यूटरों में रखे हैं और आज भी बढ़ी संख्या में पीड़ित अदालतों और ओल्ड लैंड रिकॉर्ड कार्यालय में चक्कर लगा रहे हैं |
गलती पर पर्दा डालने को आज भी हजारों पीड़ितों को उनके हक के रिहैबिलिटेशनक्लेम से वंचित रखा जा रहा है
इसी एक महा गलती को सच्चे मन से सुधार कर बापू को सच्ची श्रद्धांजलि देनी होगी |
फाइल फोटो

बादलों की पोल खोल रैली में पूर्व सीएम ने १९४७ के पीड़ितों से अन्याय को स्वीकारा

[फरीदकोट,पंजाब] बादलों की पोल खोल उर्फ़ जबर रैली में पूर्व सीएम ने भी स्वीकारा के १९४७ के पीड़ितों को न्याय नहीं मिला| सत्तारूढ़ कांग्रेस की सरकार की तरफ से तमाम रुकावटों के बावजूद हाई कोर्ट के आदेश पर आयोजित इस रैली में हमहुंआ के संगत पहुंची |जिससे सत्ता से बाहर हुए अकालियों में विशेष उत्साह देखने को मिला |विशाल एकट्ठ को सम्बोधित करते हुए पांच बार मुख्य मंत्री रहे साबका मुख्य मंत्री प्रकाश सिंह बादल ने जम कर कांग्रेस पर हमला बोला |उन्होंने कांग्रेस के धरम और पंजाबी विरोधी गतिविधियों को भी गिनाया|
वरिष्ठतम नेता ने यह भी बताया के १९४७ में एक गलत आत्मघाती निर्णय से जो कत्लेआम हुआ वोह उन्होंने स्वयं देखा है
पांच लाख पंजाबी प्रभावित हुए जिन्हें अपनी जमीन जायदाद भी खोनी पड़ी |भारत में इन्हें न्याय नहीं दिया गया | जो जमीने वोह छोड़ कर आये थे उनके आग्रह के बावजूद वोह भी नहीं दी गई |
गौरतलब हे के पाकिस्तान में छोड़ी गई भूमि के बदले भारत सरकार ने पाकिस्तान सरकार मुआवजा वसूल लिया था जिसे भारत में छोड़ी गई भूमि से एडजस्ट किया गया लेकिन दुर्भाग्य से पीड़ितों की पीढ़ियां गुजरें के बावजूद अभी भी हजारों उत्तराधिकारियों को उनके हक के रिहैबिलिटेशन क्लेम नहीं दियगए| अनेक लोग हाई कोर्ट और पंजाब ओल्ड लैंड रिकॉर्ड कार्यालय के चक्कर काट रहे हैं
इनके हक मारने के लिए तत्कालीन पंजाब सरकार द्वारा २००५ में काला एक्ट लाया गया| आश्चर्यजनक रूप से प्रधान मंत्री और मुख्य मंत्री कार्यालय से फॉरवर्ड ग्रिएवान्सेस भी इधर उधर भटकाई जा रही है |