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Tag: Adjournment of parliament

भाजपा [३८]को विपक्ष ने जन्मदिन की गिफ्ट नहीं दी,अब देश में अनशन

[नई दिल्ली] ३८ वर्षीय भाजपा को विपक्ष ने जन्म दिन की भी सौगात नहीं दी|संसद के सदनों को बिना कार्यवाही के ही स्थगित करवा दिया |अब होगा देश भर में अनशन |भाजपा ने अपनी स्थापना के ३८ वर्ष पूरे कर लिए हैं और इस जन्म दिन पर संसद के बजट सेशन २ का अंतिम दिन भी था ,लेकिन इस दिन भी कार्यवाही नहीं चलने दी गई ||पूरे सेशन में सदनों की कार्यवाही विपक्षी अड़ियल रव्वैय्ये के चलते ठप्प रही है |इसके चलते देश के सालाना २४ लाख करोड़ रु के बजट के अलावा एंटी करप्शन +तीन तलाक+दलित उत्पीड़न +चुनाव विसंगतियां आदि अनेकों महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा नहीं हो सकी|
इसे लेकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने विपक्ष पर विभाजनकारी राजनीति करने का आरोप लगाया है और संसद में गतिरोध के लिये कांग्रेस को जिम्मेदार ठहराया।
P M Modi Before Parliament budget sessionमोदी ने घोषणा की कि भाजपा सांसद इसके विरोध में 12 अप्रैल को देशभर में अनशन करेंगे।
भाजपा संसदीय दल की बैठक के बाद संसदीय कार्य मंत्री अनंत कुमार ने संवाददाताओं को बताया कि बैठक में प्रधानमंत्री ने कहा कि भाजपा समावेशी राजनीति कर रही है जबकि विपक्ष विभाजनकारी एवं नकारात्मक राजनीति कर रहा है क्योंकि वह हमारी पार्टी के उत्थान से हताश हो गया है ।
दलितों के विरोध प्रदर्शन के मुद्दे पर विपक्षी दलों द्वारा सरकार को घेरने के प्रयासों के बीच मोदी ने कहा कि भाजपा सांसद एवं अन्य नेता 14 अप्रैल से 5 मई के बीच 20,844 ऐसे गांवों में रात गुजारेंगे जहां अनुसूचित जाति और जनजाति समुदाय की आबादी 50 प्रतिशत से अधिक है और उन्हें केंद्र की विभिन्न जनकल्याण योजनाओं के बारे में जानकारी देंगे ।
कुमार ने कहा कि भाजपा ‘‘सबका साथ, सबका विकास यात्रा’’ का भी आयोजन करेगी।’’ भाजपा का 38वां स्थापना दिवस होने के बीच मोदी ने कहा कि पार्टी कार्यकर्ताओं के अथक परिश्रम एवं लोगों के आशीर्वाद से भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनी है। उन्होंने सभी दिवंगत नेताओं एवं कार्यकर्ताओं को भी नमन किया ।
उन्होंने कहा कि पार्टी का स्थापना दिवस कार्यकर्ताओं को समर्पित है जिन्होंने भाजपा को मजबूत बनाने के लिये बलिदान दिया

नेशनल हेराल्ड मुद्दे के लिए हाईकोर्ट को धन्यवाद,असहिषुणता+दलितउत्पीड़न ड्रामों से तो छुटकारा मिला

झल्ले दी झल्लियां गल्लां

आम जागरूक नागरिक

ओये झल्लेया ये संसद में क्या हो रहा है?ओये नेशनल हेराल्ड फ्रॉड का केस चल रहा है अदालत में और कांग्रेस के न्रेतत्व वाली विपक्ष ने लोक सभा और राज्य सभा की कार्यवाही को दो बजे तीसरी बार ठप्प करवा दिया और केंद्र सरकार इसे गैर जिम्मेदाराना+अनैतिक+अलोकतांत्रिक बता कर अपना पल्ला झाड़ रही है
सरकार कह रही है के मुख्य विपक्षी पार्टी दुर्भावनापूर्ण हथकंडा अपना कर संसद के कामकाज और देश के विकास के मार्ग को बाधित नहीं करे, अन्यथा इसका उलटा प्रभाव पड़ेगा अरे भाई और कितना उल्टा होगा संसद चल नहीं रही+बिल पास हो नहीं रहे+विकास हो नहीं रहा

झल्ला

ओ मेरे भोले बादशाहो ! भला हो हाई कोर्ट जेडा उन्होंने कांग्रेस को ऐ वाला नवा मुद्दा फड़ा दिया वरना असहिषुणता+दलित उत्पीड़न की पटकथा वाले ड्रामों को संसद और संसद के बाहर रोजाना झेलना पड़ रहा था |

राहुलगांधी कहीं भाजपा को ये कहना तो नही चाह रहे के”वंड खाओ खंड खाओ,नहीं ते ठंड खाओ”

झल्ले दी झल्लियां गल्लाँ

कांग्रेसी चीयर लीडर

ओये झल्लेया देख ली न हसाडे डबल फोर [४४] की पावर ?ओये संसद में मोदी के मोदकों की मिठास, छु मंतर कर दी |ओये पूर्ण बहुमत की सरकार मानसूनके पूरे सेशन में कोई काम नही करा पाई |ओये हसाडे सोणे राहुल गांधी जी ने भी फरमा दिया है के जब तक विदेश मंत्री श्रीमती सुषमा स्वराज,आईपीएल के दागी मुग़ल ,ललित मोदी से मिली रिश्वत का हिसाब नही देती तब तक संसद नहीं चलने देंगे

झल्ला

ओ मेरे चतुर सुजान जी सयाने कह गए हैं के वंड खाओ खंड खाओ नहीं ते ठंड खाओ

#GodBlessRahulGandhi

#GodBlessRahulGandhi
@OfficeOfRG
From Getting Cold
Because After Getting AirConditioned @ParliamentOfIndia
Adjourned The #CongressVicePresident
Kicksoff @Padyatra in Hot @AP

संसद में कोयले की कालिख में सरकार के महत्वकांक्षी फ़ूड सिक्यूरिटी बिल भी सफेदी नही पा सके

[नई दिल्ली] संसद में आज कोयले की कालिख में सरकार के महत्वकांक्षी फ़ूड सिक्यूरिटी बिल भी सफेदी नही पा सके | : कोयला ब्लाक आवंटन से जुड़ी फाइलों के गुम होने पर कांग्रेस नीत संप्रग सरकार को कटघरे में खड़ा करने का प्रयास करते हुए भाजपा ने आज प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से पूरे घटनाक्रम पर जवाब देने की मांग की।
सरकार की ओर से हालांकि आश्वासन दिया गया कि गायब दस्तावेजों का पता लगाने में कोई कसर नहीं छोड़ी जाएगी लेकिन कोयला घोटाले से जुडी महत्वपूर्ण [१५७]फाइलें कोयला मंत्रालय से गुम हो जाने के मुद्दे पर भाजपा सहित विभिन्न दलों के सदस्यों ने आज सरकार पर हमला जारी रखा और प्रधानमंत्री से जवाब मांगा।
भारी हंगामे के कारण राज्यसभा की बैठक चार बार के स्थगन के बाद अंतत: दिन भर के लिए स्थगित कर दी गयी।
कोलगेट के इस मुद्दे पर विपक्ष के हंगामे के कारण लोक सभा में भी कार्यवाही बाधित रही | सरकार का हालांकि कहना था कि वह दस्तावेजों का पता लगाने में कोई कोर कसर नहीं बाकी रखेगी।
जनता दल [यूनाइटेड] आज खाद्य सुरक्षा विधेयक के समर्थन में आया तो दूसरी ओर सपा अपनी कुछ शर्तों के अनुसार इसमें संशोधन पर अड़े हैं| गौरतलब है कि पिछले कुछ दिनों कोयला मंत्री श्री प्रकाश जायसवाल ने मीडिया में ब्यान दिया था कि कोयला घोटाले से जुडी अनेको महत्वपूर्ण फाईले मंत्रालय से गुम है जिसे लेकर विपक्ष ने प्रधान मंत्री और कोयला मंत्री की घेरा बंदी तेज कर दी |इसका असर संसद में भी दिखाई दिया|विपक्ष ने इसे लेकर संसद की कार्यवाही ठप्प रखी|गौरतलब है कि स्वर्गीय राजीव गाँधी के जन्म दिवस पर यूं पी ऐ सरकार फ़ूड सिक्यूरिटी जैसे महत्वपूर्ण बिल को पास करना चाहती थी लेकिन यह महत्वकांक्षा फ़िलहाल कोयले की कालिख में गुम ही रही |

पाकिस्तान के आक्रमण पर बदल बदल कर दिए गए रक्षा मंत्री के बयानों से देश और सरकार की प्रतिष्ठा को अपूरणीय क्षति पहुंची है : लाल कृषण अडवाणी

भारतीय जनता पार्टी[भाजपा] के पी एम् इन वेटिंग और वरिष्ठ पत्रकार लाल कृषण अडवाणी ने संसद सत्र को व्यर्थ करने के लिए केंद्र सरकार की जमकर आलोचना की | अडवाणी ने अपने ब्लाग में बताया है कि संसद के मानसून सत्र में तेलंगाना के गठन को लेकर सरकार की ढुल मुल नीति + सीमा पर हुए पाकिस्तान के आक्रमण पर बदल बदल कर दिए गए रक्षा मंत्री के बयानों से देश और सरकार की प्रतिष्ठा को अपूरणीय क्षति पहुंची है प्रस्तुत है सीधे एल के अडवाणी के ब्लाग से
इन इकतालीस वर्षों के अपने संसदीय जीवन में मैंने पहले कभी भी नहीं देखा कि किसी सरकार ने संसद सत्र को इतनी बुरी तरह से व्यर्थ कर दिया हो जैसाकि यूपीए सरकार ने संसद के वर्तमान मानसून सत्र को किया है।
तीन सप्ताह का सत्र घोषित किया गया था। पहला सप्ताह समाप्त हो गया है। एक दिन भी न तो प्रश्नकाल हो सका या न ही कोई अन्य कामकाज। समूचे सप्ताह में रोज हंगामा होता रहा। और यह हंगामा मुख्य रुप से आंध्र से जुड़े कांग्रेसजनों ने किया-जो तेलंगाना का विरोध और आंधा प्रदेश को संयुक्त रखने की मांग कर रहे थे।
पहले सप्ताह के व्यर्थ जाने में मुख्य कारण तेलंगाना के बारे में घोषणा करना रहा। भाजपा सदस्य सरकार से बार-बार अनुरोध करते रहे कि वह अपनी पार्टी के सदस्यों को संयम में रखें परन्तु इस दिशा में कोई कोशिश होती भी नहीं दिखाई दी! इससे आश्चर्य होता है कि आने वाले दो सप्ताहों के सत्र की सत्तारुढ़ दल कैसे योजना बनाएगा!
तेलंगाना आंदोलन के दशकों पुराने इतिहास में जाए बगैर मुझे स्मरण आता है कि 9 दिसम्बर, 2009 का, जब यूपीए सरकार ने अपनी दूसरी पारी की शुरुआत की थी, तब केंद्रीय गृह मंत्री श्री पी. चिदम्बरम ने घोषणा की कि भारत सरकार एक पृथक राज्य तेलंगाना बनाने की रुकी हुई प्रक्रिया को राज्य विधानसभा में विधेयक पारित कराकर शुरु करेगी। सभी को लगा था कि इस हेतु आवश्यक विचार-विमर्श कांग्रेस पार्टी के भीतर हो गया होगा। लेकिन इस घोषणा से आंध्र और रायलसीमा में विरोध शुरु हो गया। 23 दिसम्बर, 2009 को भारत सरकार ने दूसरी घोषणा की कि जब तक सभी दलों से एक आम सहमति नहीं बन जाती तब तक तेलंगाना पर कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी।
इसका अर्थ हुआ गृह मंत्रालय की घोषणा का उलट होना। अब जो हो रहा है उससे तेलंगाना के लोग महसूस कर रहे हैं कि यह घोषणा आगामी चुनावों में फायदा उठाने के उद्देश से की गई है और सत्तारुढ़ दल ने एक बार फिर से उन्हें वेबकूफ बनाया है।
मुझे याद है कि एनडीए शासन के दौरान तीन नए राज्यों-उत्तराखण्ड, छत्तीसगढ़ और झारखण्ड-का निर्माण कितनी सहजता से हुआ। उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश और बिहार-इन तीन राज्यों जिनमें से उपरोक्त तीनों राज्यों का जन्म हुआ, की विधानसभाओं ने इनके पक्ष में प्रस्ताव पारित किए और संसद के दोनों सदनों में लगभग सर्वसम्मति से आवश्यक विधेयक पारित किए। यह सब इसलिए हासिल हो सका क्योंकि भाजपा इन नए राज्यों के बारे में इच्छुक थी और इस सम्बन्ध में आवश्यक आधार कार्य कर लिया गया था।
तब भी भाजपा तेलंगाना के पक्ष में थी लेकिन चूंकि उस समय हमारी सरकार को समर्थन दे रही सहयोगी पार्टी तेलुगूदेसम इसके पक्ष में नहीं थी, अत: हमारी सरकार इसके बारे में बात तक नहीं कर सकी।
तेलंगाना मुद्दे को गलत ढंग से ‘हैंडल‘ करने के चलते अब तक का संसद सत्र एकदम व्यर्थ गया है। परन्तु पिछले सप्ताह नियंत्रण रेखा (एलओसी) पर एक गंभीर त्रासदी घटी, जिसने इस सरकार की प्रतिष्ठा को अपूरणीय क्षति पहुंचाई है-विशेष रुप से रक्षा मंत्री ए.के. एंटोनी द्वारा त्रासदी के दिन गड़बड़ करने से।
मैं कहना चाहूंगा कि यदि पाकिस्तानी सेना ने नियंत्रण रेखा पर घात लगाकर हमारे पांच जवानों को मार गिराया, तो एंटोनी के वक्तव्य से व्यथित भारतीय संसद ने रक्षा मंत्री पर हमलाकर उन्हें अपने पहले दिन के अस्पष्ट वक्तव्य को वापस लेने पर बाध्य किया और उसके स्थान पर दूसरा वक्तव्य आया जो पाकिस्तान के विरुध्द राष्ट्रीय आक्रोश को पूरी तरह से प्रकट करता है।
संसद में रक्षा मंत्री के वक्तव्य के बारे में चौंका देने वाली यह बात कि उन्होंने इस घटना के बारे में सेना द्वारा जारी किए अधिकारिक बयान में जानबूझर बदलाव किए-बदलाव पाक सरकार और पाक सेना को इस हमले जिम्मेदारी से बचाने के लिए किए गए।
सेना के बयान में बदले गए अंश का उदाहरण:
पीआईबी (रक्षा विभाग) का प्रेस वक्तव्य कहता है: ”हमला पाक सेना के जवानों के साथ लगभग 20 भारी हथियारबंद आतंकवादियों द्वारा किया गया।” रक्षा मंत्री एंटोनी ने कहा: ”हमला 20 भारी हथियारबंद आतंकवादियों ने पाकिस्तानी सेना की वर्दी पहले लोगों से साथ मिलकर किया।”
संसद का वर्तमान सत्र शुरु होने से पूर्व ही प्रधानमंत्री कार्यालय के सूत्रों के हवाले से मीडिया में प्रकाशित हुआ था कि प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के साथ वार्ता करने वाले हैं और वह भी 26/11 के मुंबई के आतंकवादी हमलों के अपराधियों को भारत को सौंप जाने की शर्त को भुलाकर। इसलिए संसद को एंटोनी के 8 अगस्त के संशोधित वक्तव्य में यह देखकर प्रसन्नता हुई कि ”पाकिस्तान की आतंकवादियों के नेटवर्क संगठन और ढांचे को नेस्तानबूद करने में निर्णायक कार्रवाई करनी चाहिए और नवम्बर, 2008 में मुंबई पर आतंकी हमले के जिम्मेदार लोगों को सजा दिलाने में संतोषजनक कदम उठाने चाहिए ताकि शीघ्र न्याय हो सके।
घटनास्थल पर सेनाध्यक्ष के दौरे और रक्षा मंत्री को पूरे तथ्यों की जानकारी देने के बाद संसद में मंत्री के संशोधित संस्करण में पाकिस्तान को निम्न शब्दों में चेतावनी दी गई:
”निश्चित तौर पर इस घटना का पाकिस्तान के साथ हमारे सम्बन्धों और नियंत्रण रेखा पर हमारे व्यवहार पर असर पड़ेगा। हमारे संयम को कमजोरी नहीं समझना चाहिए और हमारी सशस्त्र सेना की क्षमता को तथा हमारे इस दृढ़ निश्चय को कि हम नियंत्रण रेखा का उल्लंघन नहीं होने देंगे, कम करके नहीं आंका जाना चाहिए था।”

विश्व में सबसे बड़े लोक तंत्र की प्रहरी भारतीय संसद अनिश्चितकाल के लिए स्थगित

विश्व के सबसे बड़े लोक तंत्र भारत की संसद के दोनों सदन राजनितिक दलों के अहम् के चलते निश्चित अवधि से दो दिन पूर्व बुधवार को अनिश्चितकालीन अवधि के लिए स्थगित कर दिए गए| |गरीबों के हितों के लिए कार्य करने का दावा करने वाली कांग्रेस और भाजपा दोनों प्रमुख दल देश की ६५% गरीब जनता की भलाई के लिए लाया जा रहा फ़ूड सिक्यूरिटी बिल तक पास नही करा पाए |
राज्य सभा को सुचारू रूप से चला पाने में असमर्थ चेयर मैन हामिद मोहम्मद अंसारी ने तल्ख टिपण्णी करते हुए कहा है के सदन की उपलब्धि या हानि का विवरण सभी कुछ जनता के सामने है इसीलिए इस पर कमेंटरी करने की कोई आवश्यकता नही है| इसके साथ ही उन्होंने यह भी सवाल उठाया है के संसदीय प्रणाली के लिए आवश्यक तीन नियमो [१]व्यवस्था [२]+विचार विमर्श+[३]जवाब देही की अब कोई प्रासंगिकता नहीं रह गई है?[Regulation+Deliberation+Accountability]
लोक सभा में भी कोई कार्यवाही नही होने से क्षुब्ध स्पीकर मीरा कुमार ने बजट सत्र के दूसरे चरण की गैर परम्परागत स्थगन पर कोई विदाई भाषण नही दिया |सदन का कार्यकाल १० मई तक था| बुधवार को भी दोनों सदनों में कोल गेट और रेल गेट को लेकर हंगामा रहा जिसके चलते दो बार स्थगन का चाबुक चलाया गया |

विश्व के सबसे बड़े लोक तंत्र की संसद आज भी नहीं चली:Parliament Adjourned

विश्व के सबसे बड़े लोक तंत्र भारत की संसद आज भी नहीं चली |आज का दिन भी हंगामे की भेंट चढ़ गया| विपक्ष ने वेल में कोल गेट और रेलगेट को लेकर सम्बंधित मंत्रियों के इस्तीफे की मांग उठाई| चेयर पर आसीन स्पीकर मीरा कुमार +फ्रांसिस्को सर्दिन्हा लोक सभा में और पी जे कुरियन राज्य सभा में शोर शाराबे के सामने असहाय नज़र आये| भक्त चरण दास फ़ूड सिक्यूरिटी बिल पर अपना भाषण नही दे पाए|
भाजपा ने अपनी घोषणा के अनुसार संसद को चलने नहीं दिया| कोल गेट पर कानून मंत्री अश्विनी कुमार और रेलगेट पर रेल मंत्री पवन बंसल के इस्तीफे के बगैर संसद की कार्यवाही में कोई सहयोग देने को तैयार नही हुई| अब एन डी ऐ भ्रष्टाचार के मुद्दे को छोड़ने को तैयार नही है और यूं पी ऐ सत्ता में वापिसी के लिए पास पोर्ट के रूप में फ़ूड सिक्यूरिटी बिल को पास कराना चाह रही है| सत्ता पक्ष को इस महत्पूर्ण बिल के भरोसे देश के ६५% लोगों तक पहुँचने की आशा है|इसीलिए कांग्रेस ने अपने सांसदों को संसद में हाज़िर रहने के लिए व्हिप जारी कर दिया है इसीलिए बुधवार का दिन भारतीय संसद के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है|

भाजपा के पूर्व मुखिया के एक दामाद के भ्रष्टाचार के बदले कांग्रेस के एक दामाद के साथ एक भांजे की मांग करना उचित नही है

झल्ले दी झल्लियाँ गल्लां

एक बौखलाया कांग्रेसी

ओये झल्लेया ये डेमोक्रेसी के साथ क्या मजाक हो रहा है ?ओये हमने भाजपाई अटल बिहारी वाजपाई के दामाद के भ्रष्टाचार को कभी मुद्दा नहीं बनाया और ये नाशुक्रे आये दिन हमारे मंत्रियों के बच्चों पर अटैक करने लग गए हैं|और तो और कोलगेट और रेलगेट को लेकर संसद भी चलने नहीं दे रहे|और कोई नही मिला तो हसाड़े बेचारे रेल मिनिस्टर पवन बंसल के भांजे को लेकर गरीबों के लिए फ़ूड सिक्यूरिटी बिल को भी पास नही होने दे रहे|ओये ऐसे संसद चलती है कभी?

झल्ला

अरे मेरे चतुर सुजाण जी हिसाब क़िताब बराबरी पर होना चाहिए |आपने भाजपा केपूर्व मुखिया के दामाद को छोड़ाइन भाजपाइयों ने आपजी के राबर्ट वढेरा को छोड़ कर हिसाब बराबर कर दिया अब एक के बदले एक दामाद के साथ भांजे की भी मांग करना तो ज्यादती ही होगी|

भारतीय संसद की सोमवार की कार्यवाही भी कोयला घोटाले की कालिख से बाहर नही निकल पाई :संसद की कार्यवाही ठप्प

भारतीय संसद के दोनों सदन सोमवार को भी हंगामे की भेंट चड गए|यानि आज भी लोक तंत्र को १.९७ करोड़ का चूना लगा ही दिया गया| प्रतिदिन की कार्यवाही पर १.९७ करोड़ का खर्च आता है| उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार पहली और वर्तमान संसद की कार्यवाही लगभग १/३ रह गई है|यह अपने आप में चौंकाने वाला तथ्य है|संसदीय कार्यमंत्री कमल नाथ ने विपक्ष से संवाद स्थापित करते हुए मंगलवार को संसद के सुचारू रूप से चलने की उम्मीद व्यक्त की है लेकिन आज की कार्यवाही या तेवर देख कर कहा जा सकता है कि प्रमुख विपक्षी भाजपा इस विषय में कोई रियायत देती नज़र नही आ रही|
प्रमुख विपक्षी दल भाजपा ने वेल को कब्जा कर कोयला घोटाले और उसमे सी बी आई की कार्यप्रणाली में दखल को लेकर में प्रधान मंत्री डाक्टर मन मोहन सिंह के इस्तीफे की मांग जारी रखी| लोक सभा की स्पीकर मीरा कुमार और राज्य सभा में हामिद अंसारी सोमवार को भी हंगामे के सामने असहाय नज़र आये |इसीलिए पहले १२ बजे + २ बजे और फिर मंगल वार तक के लिए सदस स्थगित किये गए|लोक सभा में भाजपा का सोमवार का नारा रहा कोयला की दलाली है पूरी कांग्रेस ही काली है|
लेकिन समाजवादी पार्टी ने हमेशा की तरह केंद्र सरकार की ढाल बनते हुए चीन द्वारा १९ किलोमीटर अतिक्रमण का मुद्दा उठाया| सपा सुप्रीमो और पूर्व रक्षा मंत्री मुलायम सिंह यादव ने केंद्र सरकार की कार्यवाही को डरपोक +अक्षम बताया | उन्होंने कहा कि भारतीय फौज चीन को जवाब देने में सक्षम है लेकिन सरकार का कायरता पूर्ण व्यवहार रुकावट पैदा कर रहा है| सपा सांसदों ने भी वेल में आकर चीन की घुसपैंठ की तरफ ध्यान खीचने का प्रयास किया|
समाजवादी पार्टी प्रमुख ने तो विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद के आगामी माह में चीन दौरे पर ही सवाल उठा दिए.उन्होंने चीन को सबसे बड़ा दुश्मन बताते हुए कहा कि हम कब से चेतावनी दे रहे हैं कि चीन ने हमारे क्षेत्र पर कब्जा करना शुरू कर दिया है. लेकिन सरकार है कि सुनने को तैयार नहीं है|
पूर्व रक्षा मंत्री ने दावा किया कि चीन भारत के एक लाख वर्ग किलोमीटर भूभाग पर कब्जा कर चुका है और भारत सरकार कुछ नहीं कर रही है.|
कोयला घोटाले जैसे मुद्दे पर सरकार की प्रतिष्ठा दावं पर हो सकती है इसीलिए इस विषय पर बहस को टाला जाना समझ में आता है लेकिन चीन जैसे राष्ट्रवादी मुद्दे पर भी बहस से बचा जा रहा है इस गंभीर राष्ट्रवादी मुद्दे को मात्र अपनी सुरक्षा के लिए इस्तेमाल किया जाना अपने आप में चिंताजनक है|